7. मेरा बचपन
प्रेमचंद के संस्मरण ‘मेरा बचपन’ के सभी अभ्यास — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT वीणा, कक्षा 5.
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पाठ का सार : इस पाठ में प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद अपने बचपन को याद करते हैं। उन्हें अपना कच्चा टूटा घर, पयाल का बिछौना, नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना याद आता है। वे चचेरे भाई हलधर के साथ मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे और मटर-जौ का चबेना खाते थे। रामलीला की तैयारी देखने में उन्हें बहुत आनंद आता था। उन्हें गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा लगता है, क्योंकि इसमें कोई खर्च नहीं होता। उसमें अमीर-गरीब का भेद नहीं होता था। खेल की धुन में उन्हें नहाने-खाने की भी सुध नहीं रहती थी।
बातचीत के लिए
लेखक को पात्रों का रूप-रंग भरना, उनकी सजावट देखना, मुकुट और धनुष-बाण सजाना तथा पात्रों के लिए छोटे-मोटे काम दौड़कर करना सबसे अधिक उत्साहित करता होगा।
मुझे आम के पेड़ों पर चढ़ना, रामलीला देखना और गुल्ली-डंडा खेलना सबसे अच्छा लगा। इन बातों में बहुत आनंद और आज़ादी थी। इनमें कोई खर्च नहीं होता था और सब मिल-जुलकर रहते थे।
- खुले और समतल मैदान में खेलें।
- खेल के नियमों का पालन करें और धक्का-मुक्की न करें।
- ज़रूरत हो तो हेलमेट, पैड और ठीक जूते पहनें।
- खेल से पहले थोड़ा व्यायाम करें।
वे कहते होंगे — “यह लड़का सुबह से गायब है। न नहाने की सुध है, न खाने की। दिन भर गुल्ली-डंडा खेलता रहता है। पढ़ाई में कब मन लगाएगा? आज आने दो, इसकी खबर लेते हैं।”
पाठ से
लेखक की आयु आठ साल थी। हलधर उनसे दो साल बड़े थे। इसलिए हलधर की आयु दस साल थी।
लेखक सुबह से गुल्ली-डंडा खेलने निकल जाते थे। उन्हें न नहाने की सुध रहती थी, न खाने की। इसलिए घरवाले उन पर क्रोध करते थे।
गुल्ली-डंडा के लिए न लॉन चाहिए, न कोर्ट, न थापी। किसी पेड़ की टहनी काटकर गुल्ली-डंडा बन जाता है। दो लोग मिलते ही खेल शुरू हो जाता है। विलायती खेलों का सामान महँगा होता है और उनके लिए फीस भी देनी पड़ती है।
- कच्चा टूटा घर और पयाल का बिछौना।
- नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना।
- हलधर के साथ मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाना और चबेना खाना।
- रामलीला के पात्रों की सजावट देखना और उनके काम करना।
- गुल्ली-डंडा खेलना और घरवालों का क्रोध।
समझ और अनुभव
मैंने भी पेड़ों पर चढ़ना, नंगे पाँव खेतों में घूमना, रामलीला देखना और गुल्ली-डंडा खेलना जैसे काम किए हैं।
मैं कागज़ की नाव, कागज़ का हवाई जहाज़, फिरकी, पतंग और मिट्टी के खिलौने स्वयं बना लेता/लेती हूँ।
इनमें से कोई एक खिलौना बनाकर कक्षा में लाइए और समूह के साथ खेलिए। (कक्षा गतिविधि)
हम लकड़ी की पट्टी को बल्ले की तरह, पुराने टायर को चलाने के लिए, खाली डिब्बों को घर बनाने के लिए, चूड़ियों के टुकड़ों को खेलने के लिए और पत्थरों को गिट्टी (पिट्ठू) के खेल में उपयोग करते हैं।
मैं खेलना, चित्र बनाना, बगीचे में पौधों को पानी देना, मेले में जाना और जन्मदिन की तैयारी करना बहुत उत्साह से करता/करती हूँ।
मिलान कीजिए
| चित्र | विवरण |
|---|---|
| घूमता हुआ परिवार (घूमना) | भ्रमण करना अथवा इधर-उधर चलना |
| कटोरे में भुने दाने (चबेना) | चबाकर खाने के लिए भुना हुआ अनाज |
| लकड़ी की थापी | काठ का चपटे और चौड़े सिरे का डंडा |
| कौड़ियाँ | एक समुद्री कीड़े का खोल जिसे पुराने समय में मुद्रा की तरह उपयोग करते थे। |
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खान-पान
चना-चबेना वह खाद्य-सामग्री है जो चबाकर खाई जाती है, जैसे — भुने चने, मटर, मकई, चिउड़ा, मुरमुरे और मूँगफली। घर के बने चबेने बाज़ार के कुरकुरे और नमकीन से अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।
- सुबह — दूध, पोहा या उपमा
- विद्यालय के टिफ़िन में — रोटी-सब्ज़ी और एक फल
- दोपहर — दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी और सलाद
- शाम — भुने चने, मूँगफली या मौसमी फल
- रात — रोटी, सब्ज़ी, दाल और एक गिलास दूध
- दिन भर — पर्याप्त पानी
आइए जानें
एक पहर तीन घंटे का होता है। दिन और रात में 24 घंटे होते हैं। इसलिए एक दिन और एक रात में कुल आठ पहर होते हैं।
- प्रातः 6 से 9 बजे — उठकर नहाना, नाश्ता करना और विद्यालय जाना।
- 9 से 12 बजे — विद्यालय में पढ़ाई करना।
- 12 से 3 बजे — भोजन करना, विद्यालय से घर लौटना और आराम करना।
- 3 से 6 बजे — गृहकार्य करना और मित्रों के साथ खेलना।
तमाशा
मैंने कठपुतली का खेल, नाटक और करतब देखे हैं। बाइस्कोप मैंने नहीं देखा।
जो तमाशे आपने देखे हों, केवल उन्हीं पर घेरा बनाइए।
रामलीला
कक्षा या विद्यालय में रामलीला का मंचन कीजिए। आप विद्यालय की वर्दी में भी मंचन कर सकते हैं। हर समूह रामकथा का अलग दृश्य प्रस्तुत कर सकता है। संवाद स्वयं बनाइए। (कक्षा गतिविधि)
भाषा की बात
| विशेषण | संज्ञा |
|---|---|
| विलायती | खेल |
| कच्चा, टूटा | घर |
| नंगे | पाँव |
| चचेरे | भाई |
| दूसरे | गाँव |
| आठ | साल |
| छोटे-मोटे | काम |
| सरल | स्वभाव |
प्राथमिक चिकित्सा पेटी
अभिभावकों की सहायता से अपने लिए एक प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार कीजिए। कोई भी दवा बड़ों की सलाह से ही लें।
आपके खेल
| खेल का चित्र | खेल का नाम |
|---|---|
| ज़मीन पर बने खानों में कूदते बच्चे | इकड़ी-दुकड़ी |
| ज़मीन पर घूमता खिलौना चलाते बच्चे | लट्टू |
| आसमान में उड़ती रंगीन पतंगें | पतंग |
| एक-दूसरे को पकड़ने की मुद्रा में बच्चे | कबड्डी |
मराठी में इकड़ी-दुकड़ी को ‘लंगडी’ या ‘ठिकरी’ और लट्टू को ‘भोवरा’ कहते हैं। अपने क्षेत्र में इन्हें क्या कहते हैं, यह भी पता कीजिए।
पुस्तकालय से
पुस्तकालय से प्रेमचंद की कहानियाँ पढ़िए, जैसे — ईदगाह, दो बैलों की कथा, पंच परमेश्वर, गुल्ली-डंडा। कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
इन्हें भी जानिए
मुरलीकांत राजाराम पेटकर का जन्म सन् 1944 में महाराष्ट्र में हुआ। वे भारतीय सेना के जवान थे। सन् 1965 के युद्ध में गोलियाँ लगने से वे लकवाग्रस्त हो गए। चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने तैराकी शुरू की। सन् 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में वे भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले खिलाड़ी बने। सन् 2018 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
पता लगाइए
चित्र में पैरों से धनुष चलाती खिलाड़ी शीतल देवी हैं।
- वे जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले की रहने वाली तीरंदाज़ हैं।
- जन्म से उनके दोनों हाथ नहीं हैं। वे पैरों से धनुष पकड़कर तीर चलाती हैं।
- सन् 2023 के एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते।
- सन् 2024 के पेरिस पैरालंपिक खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता।
- उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।