कक्षा 5 हिंदी · वीणा · CBSE

7. मेरा बचपन

प्रेमचंद के संस्मरण ‘मेरा बचपन’ के सभी अभ्यास — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT वीणा, कक्षा 5.

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पाठ का सार : इस पाठ में प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद अपने बचपन को याद करते हैं। उन्हें अपना कच्चा टूटा घर, पयाल का बिछौना, नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना याद आता है। वे चचेरे भाई हलधर के साथ मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे और मटर-जौ का चबेना खाते थे। रामलीला की तैयारी देखने में उन्हें बहुत आनंद आता था। उन्हें गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा लगता है, क्योंकि इसमें कोई खर्च नहीं होता। उसमें अमीर-गरीब का भेद नहीं होता था। खेल की धुन में उन्हें नहाने-खाने की भी सुध नहीं रहती थी।

बातचीत के लिए

1लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे?

लेखक को पात्रों का रूप-रंग भरना, उनकी सजावट देखना, मुकुट और धनुष-बाण सजाना तथा पात्रों के लिए छोटे-मोटे काम दौड़कर करना सबसे अधिक उत्साहित करता होगा।

2आपको लेखक के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?

मुझे आम के पेड़ों पर चढ़ना, रामलीला देखना और गुल्ली-डंडा खेलना सबसे अच्छा लगा। इन बातों में बहुत आनंद और आज़ादी थी। इनमें कोई खर्च नहीं होता था और सब मिल-जुलकर रहते थे।

3खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
  • खुले और समतल मैदान में खेलें।
  • खेल के नियमों का पालन करें और धक्का-मुक्की न करें।
  • ज़रूरत हो तो हेलमेट, पैड और ठीक जूते पहनें।
  • खेल से पहले थोड़ा व्यायाम करें।
4लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?

वे कहते होंगे — “यह लड़का सुबह से गायब है। न नहाने की सुध है, न खाने की। दिन भर गुल्ली-डंडा खेलता रहता है। पढ़ाई में कब मन लगाएगा? आज आने दो, इसकी खबर लेते हैं।”

पाठ से

1लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु कितनी थी?

लेखक की आयु आठ साल थी। हलधर उनसे दो साल बड़े थे। इसलिए हलधर की आयु दस साल थी।

2लेखक ने अपने घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है?

लेखक सुबह से गुल्ली-डंडा खेलने निकल जाते थे। उन्हें न नहाने की सुध रहती थी, न खाने की। इसलिए घरवाले उन पर क्रोध करते थे।

3लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में क्या अंतर है?

गुल्ली-डंडा के लिए न लॉन चाहिए, न कोर्ट, न थापी। किसी पेड़ की टहनी काटकर गुल्ली-डंडा बन जाता है। दो लोग मिलते ही खेल शुरू हो जाता है। विलायती खेलों का सामान महँगा होता है और उनके लिए फीस भी देनी पड़ती है।

4इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?
  • कच्चा टूटा घर और पयाल का बिछौना।
  • नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना।
  • हलधर के साथ मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाना और चबेना खाना।
  • रामलीला के पात्रों की सजावट देखना और उनके काम करना।
  • गुल्ली-डंडा खेलना और घरवालों का क्रोध।

समझ और अनुभव

1लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं?

मैंने भी पेड़ों पर चढ़ना, नंगे पाँव खेतों में घूमना, रामलीला देखना और गुल्ली-डंडा खेलना जैसे काम किए हैं।

2आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं?

मैं कागज़ की नाव, कागज़ का हवाई जहाज़, फिरकी, पतंग और मिट्टी के खिलौने स्वयं बना लेता/लेती हूँ।

3आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं?

हम लकड़ी की पट्टी को बल्ले की तरह, पुराने टायर को चलाने के लिए, खाली डिब्बों को घर बनाने के लिए, चूड़ियों के टुकड़ों को खेलने के लिए और पत्थरों को गिट्टी (पिट्ठू) के खेल में उपयोग करते हैं।

4आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं?

मैं खेलना, चित्र बनाना, बगीचे में पौधों को पानी देना, मेले में जाना और जन्मदिन की तैयारी करना बहुत उत्साह से करता/करती हूँ।

मिलान कीजिए

•चित्रों का उनके उपयुक्त विवरण से मिलान कीजिए —
चित्रविवरण
घूमता हुआ परिवार (घूमना)भ्रमण करना अथवा इधर-उधर चलना
कटोरे में भुने दाने (चबेना)चबाकर खाने के लिए भुना हुआ अनाज
लकड़ी की थापीकाठ का चपटे और चौड़े सिरे का डंडा
कौड़ियाँएक समुद्री कीड़े का खोल जिसे पुराने समय में मुद्रा की तरह उपयोग करते थे।

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खान-पान

चना-चबेना वह खाद्य-सामग्री है जो चबाकर खाई जाती है, जैसे — भुने चने, मटर, मकई, चिउड़ा, मुरमुरे और मूँगफली। घर के बने चबेने बाज़ार के कुरकुरे और नमकीन से अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।

2आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए।
  • सुबह — दूध, पोहा या उपमा
  • विद्यालय के टिफ़िन में — रोटी-सब्ज़ी और एक फल
  • दोपहर — दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी और सलाद
  • शाम — भुने चने, मूँगफली या मौसमी फल
  • रात — रोटी, सब्ज़ी, दाल और एक गिलास दूध
  • दिन भर — पर्याप्त पानी

आइए जानें

1एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर कितने पहर होते हैं?

एक पहर तीन घंटे का होता है। दिन और रात में 24 घंटे होते हैं। इसलिए एक दिन और एक रात में कुल आठ पहर होते हैं।

2दिन के चार पहरों में आप क्या-क्या करते हैं?
  • प्रातः 6 से 9 बजे — उठकर नहाना, नाश्ता करना और विद्यालय जाना।
  • 9 से 12 बजे — विद्यालय में पढ़ाई करना।
  • 12 से 3 बजे — भोजन करना, विद्यालय से घर लौटना और आराम करना।
  • 3 से 6 बजे — गृहकार्य करना और मित्रों के साथ खेलना।

तमाशा

•इनमें से कौन-कौन से तमाशे आपने देखे हुए हैं? (कठपुतली का खेल, नाटक, बाइस्कोप, करतब)

मैंने कठपुतली का खेल, नाटक और करतब देखे हैं। बाइस्कोप मैंने नहीं देखा।

जो तमाशे आपने देखे हों, केवल उन्हीं पर घेरा बनाइए।

रामलीला

भाषा की बात

•पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा शब्द चुनकर लिखिए —
विशेषणसंज्ञा
विलायतीखेल
कच्चा, टूटाघर
नंगेपाँव
चचेरेभाई
दूसरेगाँव
आठसाल
छोटे-मोटेकाम
सरलस्वभाव

प्राथमिक चिकित्सा पेटी

•प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली वस्तुओं व दवाइयों की सूची बनाइए।
रुईपट्टी (बैंडेज)चिपकने वाली पट्टी (बैंड-एड)एंटीसेप्टिक घोलएंटीसेप्टिक क्रीमकैंचीचिमटीथर्मामीटरओ.आर.एस. के पैकेटदस्तानेमोच की क्रीमबर्फ़ की थैली

आपके खेल

1खेलों के चित्रों को उनके सही नामों से मिलाइए —
खेल का चित्रखेल का नाम
ज़मीन पर बने खानों में कूदते बच्चेइकड़ी-दुकड़ी
ज़मीन पर घूमता खिलौना चलाते बच्चेलट्टू
आसमान में उड़ती रंगीन पतंगेंपतंग
एक-दूसरे को पकड़ने की मुद्रा में बच्चेकबड्डी

मराठी में इकड़ी-दुकड़ी को ‘लंगडी’ या ‘ठिकरी’ और लट्टू को ‘भोवरा’ कहते हैं। अपने क्षेत्र में इन्हें क्या कहते हैं, यह भी पता कीजिए।

2उन खेलों की सूची बनाइए जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं।
अंताक्षरीशतरंजकैरमलूडोपहेलियाँ बूझनाइशारों से फ़िल्म का नाम बतानागेंद लुढ़कानाकहानी सुनाना-सुनना

पुस्तकालय से

इन्हें भी जानिए

मुरलीकांत राजाराम पेटकर का जन्म सन् 1944 में महाराष्ट्र में हुआ। वे भारतीय सेना के जवान थे। सन् 1965 के युद्ध में गोलियाँ लगने से वे लकवाग्रस्त हो गए। चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने तैराकी शुरू की। सन् 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में वे भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले खिलाड़ी बने। सन् 2018 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

पता लगाइए

•चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए।

चित्र में पैरों से धनुष चलाती खिलाड़ी शीतल देवी हैं।

  • वे जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले की रहने वाली तीरंदाज़ हैं।
  • जन्म से उनके दोनों हाथ नहीं हैं। वे पैरों से धनुष पकड़कर तीर चलाती हैं।
  • सन् 2023 के एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते।
  • सन् 2024 के पेरिस पैरालंपिक खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता।
  • उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।