कक्षा 8 हिंदी · मल्हार · कविता

1. स्वदेश

गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की देश-प्रेम की कविता — सार, मेरी समझ से, मिलान, सोच-विचार, भाषा की बात और पाठ से आगे के सभी प्रश्नों के सरल उत्तर।

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पाठ का परिचय : ‘स्वदेश’ कविता गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ ने लिखी है। यह एक आह्वान गीत है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, वह हृदय नहीं, पत्थर है।

कविता का सार

★कविता का भावार्थ अपने शब्दों में

कवि कहते हैं कि जिस मनुष्य के मन में देश-प्रेम नहीं है, उसका हृदय पत्थर के समान है। जो जीवन दूसरों में जोश नहीं जगा सकता, वह बेकार है। जो संसार के साथ नहीं चलता और जो साहस छोड़ देता है, वह कभी सफल नहीं होता।

हम इसी देश की मिट्टी में पले-बढ़े हैं। यहीं हमें दाना-पानी मिला। यहीं हमारे माता-पिता और भाई-बंधु हैं। इस देश ने हमें अनमोल रत्न दिए हैं। सारी दुनिया इस पर मोहित है। ऐसे देश के प्रति जिसका मन नहीं पिघलता, वह धरती पर बोझ है।

मृत्यु तो एक दिन निश्चित है। इसलिए मृत्यु से डरना नहीं चाहिए। हमारे पास सब साधन हैं। बस मन में देश के लिए प्यार होना चाहिए।

मेरी समझ से

1“वह हृदय नहीं है पत्थर है” — इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—

उत्तर : संवेदनहीनता सेकठोरता से

2निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

उत्तर : देश के प्रति प्रेम

3“हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

उत्तर : देश के समस्त नागरिकों के लिए

4कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

उत्तर : जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 (पंक्तियाँ)स्तंभ 2 (भाव / संदर्भ)
1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।जो स्वयं के साथ दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।जैसे युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, वैसे ही प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

पंक्तियों पर चर्चा

क“निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”

मृत्यु निश्चित है। एक दिन सबको जाना है। समय (काल) एक दीपक की तरह हमेशा जलता रहता है। जैसे पतंगे दीपक पर जल जाते हैं, वैसे ही हर प्राणी को एक दिन मरना है। इसलिए मृत्यु से डरे बिना देश के लिए जीना चाहिए।

ख“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

हमारे पास देश की रक्षा के सारे साधन हैं — तोप भी है और तलवार भी। सब कुछ हमारे अपने हाथ में है। फिर भी यदि मन में देश के लिए प्यार न हो, तो वह हृदय पत्थर के समान है।

ग“जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

जिस हृदय में कोमल भावनाएँ नहीं हैं, जिसमें प्रेम की धारा नहीं बहती, वह हृदय कठोर पत्थर के समान है। सच्चा हृदय वही है जिसमें अपने देश के लिए प्रेम हो।

सोच-विचार के लिए

क“हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?

देश के सभी नागरिकों को राजा-रानी कहा गया है। देश की धरती, नदियाँ, संपत्ति सब हमारी है। हम इस देश में सम्मान और स्वतंत्रता से रहते हैं। इसलिए हम ही इस देश के राजा-रानी हैं।

ख‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?

‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है — समय और समाज के साथ मिलकर आगे बढ़ना। जो व्यक्ति सबके साथ नहीं चलता, वह पीछे और अकेला रह जाता है। लोग उसे नहीं अपनाते। इसलिए संसार उसका नहीं हो पाता।

ग“उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

जिस देश ने हमें सब कुछ दिया, उसके प्रति भी जिसका मन प्रेम से नहीं पिघलता, वह व्यक्ति धरती पर बोझ के समान है। उसका जीवन किसी काम का नहीं।

घआप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं?

अपने देश की धरती, लोगों, भाषा और संस्कृति से प्रेम करना देश-प्रेम है। देश के नियमों का पालन करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और देश की उन्नति के लिए ईमानदारी से काम करना भी देश-प्रेम है। आवश्यकता पड़ने पर देश के लिए त्याग करना सच्चा देश-प्रेम है।

ङइस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
  • कविता की भाषा सरल खड़ी बोली है।
  • ‘वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’ — यह पंक्ति बार-बार आती है (टेक)।
  • पंक्तियों के अंत में तुक मिलती है, जैसे — प्यार-सार-पार, पानी-रानी-लासानी।
  • ‘क्या है वह भू का भार नहीं’ जैसी प्रश्न शैली का प्रयोग है।
  • ‘काल-दीप’, ‘रस-धार’ जैसे सुंदर शब्द-चित्र हैं।
  • कविता में लय है, इसलिए इसे गाया जा सकता है।

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अनुमान और कल्पना से

क“जिसने कि खजाने खोले हैं” — इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?

यहाँ प्राकृतिक संपदा के खजाने की बात है — उपजाऊ मिट्टी, नदियाँ, वन, खनिज आदि। साथ ही ज्ञान, विज्ञान, कला और संस्कृति के खजाने की भी बात है।

ख“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” — पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?

‘उगे-बढ़े’ देश के नागरिकों के लिए कहा गया है। जैसे पौधा मिट्टी में उगता और बढ़ता है, वैसे ही हम इस देश की मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े हैं।

ग“वह हृदय नहीं है पत्थर है” — ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?

पत्थर कठोर होता है। उसमें कोई भावना नहीं होती। जिस हृदय में देश के लिए प्रेम नहीं, वह भी पत्थर जैसा कठोर और भावहीन है। इसलिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

घकल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वह आपसे क्या-क्या बातें करेगा?

पत्थर — जब मैं नदी में था, तो नदी की धारा मुझे बदलती थी। मैं घिस-घिसकर चिकना और गोल हो गया।

मैं — फिर तुम यहाँ कैसे आए?

पत्थर — एक दिन लोग मुझे निकालकर ले आए। अब मैं एक पुल की नींव में लगा हूँ। लोग मुझ पर से रोज आते-जाते हैं।

मैं — तुम्हें बुरा नहीं लगता?

पत्थर — नहीं, मुझे खुशी है कि मैं देश के काम आ रहा हूँ। बस मुझे कठोर हृदय वाला मत कहना!

ङदेश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
  • जल, नदियाँ और वन — ये सीमित हैं और जीवन के लिए आवश्यक हैं।
  • वन्य जीव — कई जीव लुप्त होने की कगार पर हैं।
  • उपजाऊ मिट्टी — इसी से हमें अन्न मिलता है।
  • ऐतिहासिक धरोहर और स्मारक — ये हमारे इतिहास की पहचान हैं।
  • भाषाएँ, लोककलाएँ और सार्वजनिक संपत्ति — ये आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचानी हैं।

कविता की रचना

कशब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?

तुक मिलाने से कविता में लय और संगीत आ गया है। कविता पढ़ने और गाने में मधुर लगती है। इसे याद करना भी आसान हो जाता है।

खकविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
  • एक ही पंक्ति (टेक) को बार-बार दोहराया गया है।
  • ‘क्या तोप नहीं तलवार नहीं’ जैसे प्रश्न पूछे गए हैं।
  • ‘दाना-पानी’, ‘राजा-रानी’, ‘माता-पिता’ जैसे जोड़े वाले शब्द हैं।
  • ‘है’ शब्द को पंक्ति के आरंभ में रखकर लय बनाई गई है।
  • ‘काल-दीप’, ‘रस-धार’ जैसे शब्दों से चित्र बनाए गए हैं।

आपकी कविता

★देश-प्रेम से जुड़े विचारों से कविता को आगे बढ़ाइए।

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो माटी का कर्ज चुका न सका,
उस जीवन का आधार नहीं।
जो देश के काम न आ पाए,
वह सच्चा पहरेदार नहीं।

(यह नमूना है। आप अपनी पंक्तियाँ स्वयं बनाइए।)

भाषा की बात

क‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।
मातृभूमिदेश-प्रेमतिरंगाराष्ट्रगानस्वतंत्रतास्वदेशीनागरिकसैनिकसंस्कृतिएकता
खयोजक चिह्न के स्थान पर का, की, के, में आदि शब्द जोड़कर लिखिए।
  • जो चल न सका संसार-संग → जो चल न सका संसार के संग
  • बहती जिसमें रस-धार नहीं → बहती जिसमें रस की धार नहीं
  • पाया जिसमें दाना-पानी → पाया जिसमें दाना और पानी
  • हैं माता-पिता बंधु जिसमें → हैं माता और पिता बंधु जिसमें
  • हम हैं जिसके राजा-रानी → हम हैं जिसके राजा और रानी
  • जिससे न जाति-उद्धार हुआ → जिससे न जाति का उद्धार हुआ

(दाना-पानी, माता-पिता, राजा-रानी में ‘और’ का भाव है।)

गकविता में से ऐसी पंक्तियाँ चुनिए जिनमें ‘है/हैं’ पहले आया है। उनमें शब्दों के स्थान बदलकर लिखिए।
  • हैं माता-पिता बंधु जिसमें → जिसमें माता-पिता बंधु हैं।
  • उस पर है नहीं पसीजा जो → जो उस पर नहीं पसीजा है।
  • है जान एक दिन जाने को → जान एक दिन जाने को है।
  • है काल-दीप जलता हरदम → काल-दीप हरदम जलता है।

‘है’ पहले लगाकर — “हैं ज्ञानी भी जिस पर मरते, है दुनिया जिस पर दीवानी॥”

इससे पंक्ति में लय और गेयता बढ़ जाती है।

घसमानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका पूरी कीजिए।
शब्दसमानार्थी शब्द
भूधरा, पृथ्वी
दीपदीपक, प्रदीप
हृदयदिल, जी
तलवारअसि, कृपाण
दुनियाजग, संसार
पत्थरपाहन, पाषाण

कविता का शीर्षक

★कविता की किसी एक पंक्ति को नया शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

मैं ‘स्वदेश का प्यार’ शीर्षक चुनूँगा। पूरी कविता इसी भाव पर टिकी है। कवि बार-बार कहते हैं कि जिस हृदय में स्वदेश का प्यार नहीं, वह पत्थर है।

पाठ से आगे

ककिन चित्रों को आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

रेलगाड़ी के डिब्बे में कचरा फैलाते लोगों वाले चित्र को छोड़कर सभी चित्र स्वदेश प्रेम की श्रेणी में आते हैं — पौधों को पानी देती लड़की, देश के लिए कुश्ती खेलते खिलाड़ी, मिलकर सार्वजनिक स्थान ठीक करते लोग, सैनिक का सम्मान करती बच्ची, पार्क की सफाई करते बच्चे और खेत जोतता किसान।

खअपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।

पेड़-पौधे लगाना, सफाई करना, खेलों में देश का नाम रोशन करना, सैनिकों का सम्मान करना और खेती करके अन्न उगाना — ये सब देश की सेवा है। रेल में कचरा फैलाना सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करना है। यह देश-प्रेम नहीं है।

★हमारे अस्त्र-शस्त्र — निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
स्वदेश प्रेमीअस्त्र-शस्त्र
विद्यार्थीपुस्तक, कलम और ज्ञान
अध्यापकज्ञान और शिक्षा
कृषकहल, बीज और परिश्रम
चिकित्सकदवाइयाँ, उपकरण और सेवा-भाव
वैज्ञानिकप्रयोग, खोज और अनुसंधान
श्रमिकऔजार और कड़ी मेहनत
पत्रकारकलम, कैमरा और सच्ची खबर
★तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास?

तिरंगा प्रसन्न होगा जब — मैंने कचरा कूड़ेदान में डाला, नल बंद किया, बड़ों का आदर किया, मन लगाकर पढ़ाई की।

तिरंगा उदास होगा जब — मैंने बिजली व्यर्थ जलाई, किसी से झगड़ा किया, सड़क पर कागज फेंका।

झरोखे से — साझी समझ

★दोनों कविताओं (‘स्वदेश’ और ‘खादी गीत’) में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है?

‘स्वदेश’ कविता कहती है कि देश-प्रेम के बिना हृदय पत्थर है। यह कविता लोगों में देश के लिए जोश जगाती है।

‘खादी गीत’ में स्वदेशी कपड़े खादी के प्रति प्रेम है। खादी के हर धागे में अपनापन, माँ का मान और भाई का प्यार है। खादी पहनना अन्यायी अंग्रेजी शासन का विरोध था। इस तरह दोनों कविताएँ देश-प्रेम और स्वदेशी की भावना जगाती हैं।