3. एक आशीर्वाद
दुष्यंत कुमार की कविता — भावार्थ, मेरी समझ से, मिलान, अनुमान और कल्पना, सृजन, भाषा की बात और पाठ से आगे के सरल उत्तर।
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पाठ का परिचय : ‘एक आशीर्वाद’ कविता दुष्यंत कुमार ने लिखी है। इसमें एक बच्चे को आशीर्वाद दिया गया है कि उसके सपने बड़े हों। वह सपने देखे, उनके लिए मेहनत करे और अपने पैरों पर खड़ा हो।
कविता का भावार्थ
कवि बच्चे को आशीर्वाद देते हैं — जा, तेरे सपने बड़े हों। तेरे सपने भावनाओं की गोद से उतरकर जल्दी धरती पर चलना सीखें, यानी सच्चाई का सामना करें। वे चाँद-तारों जैसी कठिन चीजों को पाने के लिए हठ करें।
तेरे सपने हँसें, मुसकराएँ और गाएँ। वे हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ, यानी हर नए ज्ञान को पाना चाहें। इसके लिए चाहे उँगली ही क्यों न जल जाए। अंत में वे अपने पाँवों पर खड़े हों, यानी पूरे हों और आत्मनिर्भर बनें।
मेरी समझ से
उत्तर : बच्चों को
उत्तर : आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखनाबड़े लक्ष्य निर्धारित करना
उत्तर : चुनौतियों को स्वीकार करनाकष्टों से नहीं घबराना
उत्तर : आत्मनिर्भर होना
(ख) अपने उत्तर मित्रों के उत्तरों से मिलाइए और कारणों पर चर्चा कीजिए। (कक्षा-गतिविधि)
मिलकर करें मिलान
| स्तंभ 1 (पंक्तियाँ) | स्तंभ 2 (भाव) |
|---|---|
| 1. भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें | भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना |
| 2. हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ | विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना |
| 3. चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें | असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना |
| 4. ...हँसें / मुसकराएँ / गाएँ | सपनों को आनंद और मुसकराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें। |
पंक्तियों पर चर्चा
कवि बच्चे को आशीर्वाद दे रहे हैं कि वह जीवन में बड़े सपने देखे। उसके लक्ष्य ऊँचे हों। बड़े सपने ही मनुष्य को बड़ा बनाते हैं।
सपने केवल कल्पना में न रहें। वे जल्दी ही धरती पर उतरें, यानी सच्चाई से जुड़ें। सपनों को पूरा करने के लिए ठोस काम करना जरूरी है।
चाँद-तारे पाना कठिन है। जैसे बच्चा चाँद के लिए मचलता है, वैसे ही सपने कठिन लक्ष्यों को पाने के लिए जिद करें। कठिन लक्ष्य देखकर हार न मानें।
अनुमान और कल्पना से
डॉक्टर बनकर गरीबों का मुफ्त इलाज करना, वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना, गाँव में अच्छा विद्यालय खोलना, देश के लिए ओलंपिक पदक जीतना — ये बड़े सपने हैं। इनसे केवल अपना नहीं, समाज और देश का भी भला होता है।
- योजना — ताकि सही दिशा में काम हो।
- लगातार प्रयास और परिश्रम — बिना मेहनत के सपने पूरे नहीं होते।
- धैर्य — सफलता में समय लगता है।
- आत्मविश्वास और साहस — कठिनाइयों से न घबराने के लिए।
- सही मार्गदर्शन — गलतियों से बचने के लिए।
मैं — मित्र सपने, तुम मुझे रोज रात को जगाते क्यों हो?
सपना — ताकि तुम मुझे भूल न जाओ। मुझे पूरा करना है न!
मैं — पर गणित मुझे कठिन लगता है।
सपना — रोज थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करो। मैं तुम्हारे साथ हूँ। एक दिन तुम इंजीनियर जरूर बनोगे।
मैं अपनी छोटी बहन को आशीर्वाद दूँगा — “तू खूब पढ़े, निडर बने और अपने सपने पूरे करे।” वह बहुत होशियार है। मैं चाहता हूँ कि वह जीवन में आगे बढ़े।
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कविता की रचना
- सपने को मनुष्य की तरह चलते, रूठते, मचलते, हँसते, गाते और ललचाते दिखाया गया है (मानवीकरण)।
- ‘जा, तेरे स्वप्न बड़े हों’ पंक्ति आरंभ और अंत में दोहराई गई है।
- पंक्तियाँ बहुत छोटी हैं। ‘हँसें / मुसकराएँ / गाएँ’ जैसे एक-एक शब्द की पंक्तियाँ भी हैं।
- ‘चाँद-तारों-सी’ में तुलना की गई है।
- कविता में एक संज्ञा ‘स्वप्न’ के साथ अनेक क्रियाओं की लड़ी बनाई गई है।
- कविता बिना तुक वाली (मुक्त छंद) है, फिर भी उसमें लय है।
सृजन
बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
प्यासी धरती को
हँसते देखा है।
नदी को
बहते देखा है,
उछलते देखा है,
गाते देखा है,
सागर से मिलकर
मुसकाते देखा है।
कविता का शीर्षक
मैं ‘तेरे स्वप्न बड़े हों’ शीर्षक चुनूँगा। यह पंक्ति कविता के आरंभ और अंत में आई है। पूरी कविता इसी आशीर्वाद पर टिकी है।
भाषा की बात
| शब्द | समान अर्थ न देने वाला शब्द |
|---|---|
| पृथ्वी | सुता |
| चाँद | मधुकर |
| तारे | सोम |
| रोशनी | लालिमा |
| स्वप्न | यथार्थ |
| दीया | दीन |
आना — कल मेरे मामा जी गाँव से आएँगे। बारिश आने से पहले बादल घिर आए।
जाना — हम रविवार को मेला देखने जाएँगे। दादी रोज सुबह मंदिर जाती हैं।
डायरी
15 अगस्त
आज सुबह विद्यालय में झंडा फहराया गया। राष्ट्रगान गाते समय मन गर्व से भर गया। दोस्त के मजेदार चुटकुले पर मैं खूब हँसा। मिठाई मिली तो मैं मुसकराया। शाम को माँ ने टीवी बंद कर दिया तो मैं थोड़ा रूठ गया। फिर आइसक्रीम के लिए मचलने लगा। आज का दिन बहुत अच्छा रहा।
पाठ से आगे
- “खूब पढ़ो, खूब बढ़ो।”
- “सदा खुश रहो।”
- “परीक्षा में अच्छे अंक लाओ।”
- “जीवन में बड़े आदमी बनो।”
- “सदा स्वस्थ रहो।”
- जन्मदिन पर “जन्मदिन मुबारक हो, खूब खुश रहो” कहता हूँ।
- परीक्षा से पहले “ऑल द बेस्ट” कहता हूँ।
- उन्हें प्यार से गले लगाता हूँ और छोटा उपहार देता हूँ।
उदाहरण सपना : डॉक्टर बनना।
- प्रयत्न — विज्ञान विषय मन लगाकर पढ़ना।
- योजना — रोज का समय-सारणी बनाकर पढ़ाई करना।
- सहयोग — शिक्षक, माता-पिता और डॉक्टरों से मार्गदर्शन लेना।
- चुनौतियाँ — कठिन प्रवेश परीक्षा, लंबी पढ़ाई और खर्च।
- आपका नाम क्या है? आप यह काम कब से कर रहे हैं?
- बचपन में आपका क्या सपना था?
- आज आपका सबसे बड़ा सपना क्या है?
- अपने बच्चों के लिए आप क्या सपना देखते हैं?
- सपना पूरा करने में कौन-सी कठिनाइयाँ आती हैं?
- हम आपकी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?
हमारे सपने : घर के सदस्यों से उनके सपनों के बारे में पूछकर तालिका स्वयं भरिए।
झरोखे से — साझी समझ
दोनों रचनाएँ बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती हैं। कविता आशीर्वाद देती है कि सपने बड़े हों और अपने पाँवों पर खड़े हों। डॉ. कलाम कहते हैं — “सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।” वे सपनों को पूरा करने के लिए समय के सही उपयोग और योजना की बात भी करते हैं।
खोजबीन के लिए : कला, विज्ञान, खेल आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यक्तियों की संघर्ष यात्रा के बारे में पुस्तकालय या इंटरनेट से पढ़िए।