12. घर की याद
भवानीप्रसाद मिश्र की कविता — सार, बहुविकल्पी प्रश्न, प्रश्न-उत्तर, कविता का सौंदर्य व संरचना, पत्र, संवाद, स्थानीय शब्द व शब्द-संपदा. NCERT हिंदी (गंगा).
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पाठ का परिचय : ‘घर की याद’ भवानीप्रसाद मिश्र की कविता है। उन्होंने 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लिया और तीन वर्ष के कारावास में रहते हुए यह कविता लिखी। सावन की बरसात में कवि को घर-परिवार की याद आती है। वे सावन के बादल से कहते हैं कि वह उनके घरवालों को धीरज दे और जेल के कष्टों के बारे में कुछ न बताए।
कविता का सार
रात-भर बहुत पानी गिरता रहा है। कवि का मन भी यादों से घिरा है। जेल में उन्हें एक-एक क्षण सौ बरस जैसा लगता है। उन्हें लगता है कि घर में आज सब इकट्ठे होंगे — चार भाई, चार बहनें, और बहन भी मायके आई होगी।
कवि को अपनी बिना पढ़ी-लिखी माँ याद आती है, जिसकी गोद में सिर रखते ही सारा दुख मिट जाता था। उसे लिखना नहीं आता, इसलिए उसका पत्र भी नहीं आता। फिर पिताजी याद आते हैं — जिनकी भुजाएँ वज्र जैसी कठोर और हृदय मक्खन जैसा कोमल है, जिन्हें बुढ़ापा छू भी नहीं गया। गीता-पाठ और दंड-मुगदर के बाद वे पाँचवें बेटे (कवि) का नाम लेकर रो पड़े होंगे।
माँ ने पिता को समझाया होगा कि भवानी वहाँ अच्छा है, उसने अपनी राह ठीक चुनी है। पिता ने कहा होगा कि मैं कहाँ रोता हूँ, पर फिर उनकी आँखों से पानी बहा होगा। घर के सब लोग चुपचाप भीतर-ही-भीतर छटपटा रहे होंगे।
कवि सावन से प्रार्थना करते हैं — तुम बरस लो, पर मेरे घरवाले आँसू न बहाएँ। उनसे कहना कि मैं मस्त हूँ, पढ़-लिख रहा हूँ, सूत कातता हूँ, खूब खाता और खेलता हूँ। यह मत कहना कि मैं रातों को जागता हूँ या चुप रहता हूँ। उन्हें कोई शक मत होने देना।
मेरे उत्तर मेरे तर्क
उत्तर : (ग) जेल से परिवार के लिए
कारण : 1942 के आंदोलन में कारावास के समय उन्होंने परिवार की याद में यह कविता लिखी।
उत्तर : (घ) चिंता और बेचैनी
कारण : बाहर पानी गिर रहा है और भीतर कवि का मन घर की याद में बेचैन होकर घिर रहा है।
उत्तर : (ख) स्नेहमयी और दृढ़
कारण : माँ की गोद में सारा दुख मिट जाता है, और वही पिता को धीरज देती है कि भवानी ठीक है।
उत्तर : (ग) दृढ़ और संवेदनशील
कारण : भुजाएँ वज्र जैसी कठोर (दृढ़) और हृदय मक्खन जैसा कोमल (संवेदनशील) है।
उत्तर : (ख) पिता की भावुकता
कारण : जरा-सी बात पर भी पिता की आँखों से आँसुओं की धारा फूट पड़ती है।
उत्तर : (ग) घर में दुख का वातावरण
कारण : बेटा जेल में है, इसलिए खुशी का घर इस समय दुख से भरा है।
उत्तर : (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
कारण : कवि नहीं चाहते कि उनका कष्ट जानकर घरवाले दुखी हों।
उत्तर : (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
कारण : पूरी कविता जेल में अकेले कवि की घर-परिवार की यादों पर आधारित है।
मेरी समझ मेरे विचार
- भोले और बहादुर : स्वभाव से सरल, पर वीर।
- दृढ़ और कोमल : वज्र जैसी भुजाएँ, मक्खन जैसा हृदय।
- सदा युवा : बुढ़ापा उन्हें एक क्षण भी नहीं व्यापा; अभी भी दौड़ते और खिलखिलाते हैं।
- निडर : मौत और शेर के आगे भी नहीं हिचकते।
- प्रभावशाली : बोली में बादल-सी गर्जना और काम में आँधी जैसी तेजी।
- नियमित और धार्मिक : रोज गीता-पाठ, दो सौ साठ दंड और मुगदर का व्यायाम।
- भावुक और स्नेही : पाँचवें बेटे को याद करके रो पड़ते हैं; उसे ‘सोने पर सुहागा’ कहते हैं।
कवि देश की आजादी के लिए घर-परिवार का सुख छोड़कर जेल में है — यह उसका त्याग है। अकेलेपन और पीड़ा के बावजूद वह हार नहीं मानता; पढ़ता-लिखता है और सूत कातता है — यह उसका धैर्य है। अपना दुख छिपाकर वह परिवार को धीरज देना चाहता है और कहलवाता है कि ‘मस्त हूँ मैं’ — यह उसका साहस है।
वर्षा कवि के मन की उदासी और यादों की प्रतीक है। जैसे-जैसे पानी गिरता है, कवि का मन घर की यादों से घिरता जाता है — ‘घर नजर में तिर रहा है’। बारिश परिवार के आँसुओं की ओर भी संकेत करती है। अंत में कवि सावन को ही संदेशवाहक बनाकर प्रार्थना करते हैं — ‘तुम बरस लो वे न बरसें’। इस तरह वर्षा भावों को जगाने, बढ़ाने और व्यक्त करने का माध्यम बनती है।
पंक्तियाँ : “वहाँ अच्छा है भवानी”, “गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है”, “इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे”।
भाव : बेटे के जेल में होने का दुख माँ को भी है, फिर भी वह पिता को समझाती है कि बेटे ने सही राह चुनी है। वह पिता को कमजोर न पड़ने को कहती है, ताकि बाकी बच्चे भी दुखी न हों। इससे माँ के धैर्य, समझदारी और भावनात्मक दृढ़ता का पता चलता है।
मुझे वह अंश सबसे भावनात्मक लगता है, जहाँ कवि सावन से कहते हैं कि घरवालों से कहना ‘मस्त हूँ मैं’ और यह न कहना कि मैं जागता हूँ या चुप रहता हूँ। जेल की पीड़ा सहते हुए भी कवि को अपनी नहीं, परिवार की चिंता है। यह निःस्वार्थ प्रेम मन को छू जाता है।
कविता का सौंदर्य
| विशेषता | कविता से पंक्तियाँ |
|---|---|
| स्मृति और दृश्य बिंब | “बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता” |
| लोकभाषा की सहजता | “और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला” |
| पंक्तियों का दोहराव | “बहुत पानी गिर रहा है”; “चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें” |
| आलंकारिक प्रयोग | “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” (उपमा); “देह एक पहाड़ जैसे” (उपमा) |
| प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन | “बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है” |
| संबोधनात्मकता | “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” |
कविता की संरचना
- रात-भर पानी गिरना : कवि का मन यादों से घिरता है; एक-एक क्षण सौ बरस लगता है।
- सबेरा होना : बादलों के अँधेरे में भी कवि को लगता है कि घर में सब इकट्ठे होंगे।
- लगातार वर्षा : माँ, पिता, भाई-बहन एक-एक करके याद आते हैं।
- पानी थमना : मन बहुत नम हो जाता है; बचपन की बरसात और लौकी लगाने की यादें आती हैं।
- पंछी का बोलना : हृदय के घाव फिर खुल जाते हैं।
- सावन से संदेश : कवि सावन को दूत बनाकर परिवार को धीरज देने का आग्रह करते हैं।
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पाठ से आगे
| संयुक्त परिवार | एकल परिवार | |
|---|---|---|
| पसंद | बड़ों का प्यार और मार्गदर्शन; सुख-दुख में साथ; बच्चे संस्कार सीखते हैं | अधिक स्वतंत्रता; खर्च और निर्णय सरल; निजी समय अधिक |
| नापसंद | कभी-कभी मतभेद; निजी स्थान कम | अकेलापन; बच्चों की देखभाल कठिन; बुजुर्गों से दूरी |
मुझे संयुक्त परिवार का अपनापन अधिक पसंद है, क्योंकि कठिन समय में पूरा परिवार साथ खड़ा रहता है, जैसे इस कविता में।
ग्रामीण : खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ना, कच्चे घर गिरना, नदियों में बाढ़, सड़कें कटना, पशुओं के लिए चारे की कमी, बीमारियाँ फैलना।
शहरी : सड़कों पर जलभराव, यातायात जाम, नालियों का उफनना, बिजली कटना, लोकल ट्रेनें बंद होना, मच्छरों से डेंगू-मलेरिया फैलना।
| पुराने माध्यम | नए माध्यम |
|---|---|
| चिट्ठी, तार (टेलीग्राम), संदेशवाहक, कबूतर | मोबाइल फोन, ई-मेल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया |
| संदेश पहुँचने में कई दिन लगते थे | संदेश क्षण-भर में पहुँचता है |
| हाथ से लिखे पत्रों में भावनाएँ झलकती थीं | तेज और सुविधाजनक, पर कभी-कभी औपचारिक |
| खर्च कम, पर पहुँच सीमित | दुनिया के किसी भी कोने से जुड़ना संभव |
भारत का स्वतंत्रता संग्राम लगभग नब्बे वर्षों का लंबा संघर्ष था। 1857 में मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और कुँवर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध पहला बड़ा संग्राम छेड़ा। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई।
बीसवीं सदी में बाल गंगाधर तिलक ने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग से असहयोग आंदोलन (1920), नमक सत्याग्रह (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) चलाए। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाषचंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों ने भी बलिदान दिए। इस कविता के कवि भवानीप्रसाद मिश्र जैसे अनेक लोग जेल गए।
अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। हमें इन वीरों के त्याग को याद रखकर देश की उन्नति में योगदान देना चाहिए।
कल्पना और लेखन
प्रिय भवानी,
ढेर सारा आशीर्वाद।
यहाँ सब कुशल हैं। सावन लगा है और दिन-रात झड़ी लगी है। तुम्हें बरसात बहुत प्यारी थी, इसलिए आज तुम्हारी बहुत याद आ रही है। तुम्हारी लगाई लौकी की बेल खूब फैल गई है।
तुम्हारे पिताजी ऊपर से तो बहुत धीर बनते हैं, पर कल तुम्हारा नाम लेकर रो पड़े। मैंने उन्हें समझाया कि हमारा बेटा देश के लिए गया है, यह गर्व की बात है। तुम अपना ध्यान रखना, समय पर खाना खाना और मन छोटा मत करना। तुम्हारे भाई-बहन तुम्हें बहुत याद करते हैं।
तुम्हारी माँ
पिताजी : (आँखें पोंछते हुए) आज बहुत पानी गिर रहा है... भवानी को बरसात कितनी प्यारी थी।
माँ : आँखों में पानी क्यों? वहाँ भवानी अच्छा है।
पिताजी : मैं कहाँ रोता हूँ? मैं तो धीर नहीं खोता...
माँ : उसने अपना मन समझकर देश के लिए वह राह चुनी है। गया है, सो ठीक ही है। जो पाँव पीछे हटाता, वह मेरी कोख लजाता।
पिताजी : ठीक कहती हो। वह तो मेरे सोने पर सुहागा है।
माँ : तो इस तरह कच्चे मत होइए, वरना बाकी बच्चे भी रो पड़ेंगे।
मैं हवा को चुनूँगा, क्योंकि हवा हर जगह पहुँच जाती है और उसे कोई रोक नहीं सकता। वह चुपके से मेरे दूर रहने वाले दादा-दादी के गाल छूकर कह देगी कि मैं ठीक हूँ और उन्हें बहुत याद करता हूँ। हवा की ठंडक उन्हें मेरे प्यार का एहसास भी कराएगी।
व्याकरण की बात
| शब्द | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| छिन | क्षण, पल | माँ के बिना एक छिन भी नहीं कटता। |
| बेला | एक सुगंधित फूल का पौधा (मोगरा) | आँगन में बेला महक रहा है। |
| फलानी | अमुक, इतने-इतने | उसने बताया कि फलानी जगह मेला लगा है। |
| भौजी | भाभी | भौजी ने त्योहार पर पूरनपोली बनाई। |
| तरला | तरल, चंचल, बहती हुई | नदी की तरला धारा मन को भाती है। |
| बड़ | बरगद का पेड़ | गाँव के बड़ के नीचे पंचायत बैठती है। |
| चुआ | टपका, रिसा (मन चुआ — मन भर आया) | बेटी की विदाई पर सबका मन चुआ। |
| पंक्ति | शब्द | व्याकरणिक पहचान |
|---|---|---|
| (ख) पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा | बुढ़ापा / व्यापा / जिनको | संज्ञा (भाववाचक) / क्रिया / सर्वनाम (संबंधवाचक) |
| (ग) खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह | खुले / वह / बदन / फिरता | विशेषण / सर्वनाम / संज्ञा / क्रिया |
| (घ) एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए | एक / फूट जाए / पत्ता | विशेषण (संख्यावाचक) / क्रिया / संज्ञा |
| (ङ) हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन | सजीले / मेरे / सावन | विशेषण / सर्वनाम (संबंध रूप) / संज्ञा |
गतिविधियाँ
1. अपना परिवार-वृक्ष बनाकर प्रत्येक सदस्य के बारे में दो-दो पंक्तियाँ लिखें। 2. ‘झरा-झर, हरा-हर, सर-सर, थर-थर’ जैसे ध्वनि शब्दों वाली पंक्तियों का सस्वर पाठ रिकॉर्ड करें — ये शब्द बरसात, हवा और काँपते मन का जीवंत वातावरण बनाते हैं।
- मेघदूत (कालिदास) — यक्ष ने मेघ (बादल) को दूत बनाकर अपनी प्रिया को संदेश भेजा।
- पवनदूत (कवि धोयी) — इसमें पवन (हवा) को दूत बनाया गया है।
- हंस-संदेश (वेदांत देशिक) — इसमें हंस संदेशवाहक है; लोकगीतों में भी कौआ, तोता, कबूतर जैसे पक्षी संदेश ले जाते हैं।
- ‘घर की याद’ (भवानीप्रसाद मिश्र) — सावन का बादल संदेशवाहक है।
भाषा संगम : ‘घर’ को मराठी, गुजराती और कोंकणी में भी ‘घर’, तमिल-मलयालम में ‘वीडु’ और कन्नड़ में ‘मने’ कहते हैं। “घर कि घर में सब जुड़े हैं” — इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखें।
साथ-साथ पढ़ें : पाठ के अंत में रामनरेश त्रिपाठी की कविता ‘तब याद तुम्हारी आती है’ दी गई है। इसमें कवि कहते हैं कि सुबह चिड़ियों के गीत, कलियों की मुसकान, ठंडी हवा, तारों की महफिल और उगते चाँद को देखकर उन्हें जग के सिरजनहार प्रभु की याद आती है।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| घनेरा | घना, गाढ़ा |
| तिरना | तैरना |
| परिताप | अत्यधिक दुख, शोक |
| चतुर्दिक् | चारों ओर |
| वज्र | बहुत कठोर |
| नवनीत | ताजा मक्खन |
| उर | हृदय |
| झंझा | तेज हवा, आँधी |
| लरजना | काँपना, दहल जाना |
| मूठ | मुट्ठी, मुगदर की पकड़ |
| अभागा | भाग्यहीन |
| धीर | धैर्यवान, दृढ़ |
| झारी | टोंटीदार बर्तन; झड़ी |
| बेला | एक सुगंधित फूल, मोगरा |
| फलानी | अमुक |
| निहायत | बहुत अधिक |
| लुनाई | सुंदरता, सलोनापन |
| तृषा | प्यास, तीव्र इच्छा |
| अश्रु | आँसू |
| हास | हँसी, प्रसन्नता |
| क्लेश | दुख, पीड़ा |
| बड़ | बरगद |
| उमग | उल्लास, जोश |
| ख़म | झुका हुआ, टेढ़ापन |
| विरस | नीरस, अप्रिय |
| कातना | चरखे पर रुई से धागा निकालना |
| अस्त | डूबा हुआ, समाप्त |