९. रीढ़ की हड्डी
लेखक — जगदीशचंद्र माथुर | संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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लेखक परिचय : जगदीशचंद्र माथुर जी द्वारा रचित 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में समाज के दकियानूसी विचारों पर प्रहार करते हुए नारी सम्मान और स्त्री शिक्षा के महत्त्व को दर्शाया गया है।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
संजाल पूर्ण कीजिए : रिश्ते
१. व्यावसायिक शिक्षा के नाम
बी. एस्सी. (B.Sc.), मेडिकल
२. शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त वाद्यों के नाम
हारमोनियम, सितार
- वह खूबसूरत होनी चाहिए (चेहरे पर छवि हो)।
- वह ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो (अधिक-से-अधिक मैट्रिक तक पढ़ी हो)।
- उसे गाना-बजाना (हारमोनियम और सितार) आता हो।
- उसे पेंटिंग-सिलाई आदि में निपुण होना चाहिए और उसने कुछ इनाम भी जीते हों।
१. बाप-बेटे चौंक उठे —
कारण : उमा के चेहरे पर सुनहरी रिमवाला चश्मा देखकर बाप-बेटे चौंक उठे।
२. उमा को चश्मा लगा —
कारण : क्योंकि पिछले महीने उमा की आँखें दुखने लग गई थीं, इसलिए उसे चश्मा लगाना पड़ा था।
३. रामस्वरूप ने हारमोनियम उठाकर लाने को कहा —
कारण : क्योंकि लड़के वाले उमा का गाना-बजाना सुनना चाहते थे, इसलिए उसे गाकर सुनाने के लिए हारमोनियम मँगवाया गया।
४. उमा को गुस्सा आया —
कारण : क्योंकि गोपाल प्रसाद उसे एक बेजान वस्तु की तरह नाप-तौल रहे थे और तरह-तरह के सवाल पूछकर उसकी बेइज्जती कर रहे थे।
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१. कृदंत बनाइए :
पढ़ना — पढ़ाई
समझना — समझ
सीना — सिलाई
चाहना — चाह / चाहत
२. शब्दयुग्म पूर्ण कीजिए :
पढ़े-लिखे
सभा-सोसायटियों
पेंटिंग-वेटिंग
सीधा-सादा
हमारे समाज में कई अंधविश्वास फैले हुए हैं, जिनमें से एक आम अंधविश्वास है "बिल्ली का रास्ता काटना"। अक्सर यह माना जाता है कि अगर बिल्ली रास्ता काट दे, तो काम बिगड़ जाता है या कोई अपशकुन होता है। लोग वहीं रुक जाते हैं या रास्ता बदल लेते हैं।
यदि इस घटना का वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टि से विश्लेषण किया जाए, तो यह पूरी तरह आधारहीन है। बिल्ली एक जानवर है जो अपने भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में इधर-उधर जाती है। उसके सड़क पार करने का हमारे भविष्य या काम की सफलता-असफलता से कोई संबंध नहीं है। सफलता हमारी मेहनत और सही योजना पर निर्भर करती है, न कि किसी जानवर की गतिविधि पर। ऐसे अंधविश्वास केवल अज्ञानता के कारण उत्पन्न होते हैं, इसलिए हमें तर्कपूर्ण सोच अपनाकर ऐसी अवैज्ञानिक बातों को त्याग देना चाहिए।
भाषा बिंदु (व्याकरण - अव्यय)
| वाक्य | अव्यय | भेद |
|---|---|---|
| १. गाय को घर के सामने खूँटे से बाँधा। | के सामने | संबंधबोधक अव्यय |
| २. वह उठा और घर चला गया। | और | समुच्चयबोधक अव्यय |
| ३. अरे ! गऊशाला यहाँ से दो किलोमीटर दूर है। | अरे ! | विस्मयादिबोधक अव्यय |
| ४. वह भारी कदमों से आगे बढ़ने लगा। | आगे | क्रियाविशेषण अव्यय |
| ५. उन्होंने मुझे धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। | धीरे-धीरे | क्रियाविशेषण अव्यय |
| ६. मुझे लगा कि आज फिर कोई दुर्घटना होगी। | कि | समुच्चयबोधक अव्यय |
| ७. वाह-वाह ! खूब सोचा आपने ! | वाह-वाह ! | विस्मयादिबोधक अव्यय |
| ८. चाची, माँ के पास चली गई। | के पास | संबंधबोधक अव्यय |
१. क्रियाविशेषण अव्यय
कल : मैं कल मुंबई जाऊँगा।
आज : आज बहुत तेज़ बारिश हो रही है।
२. संबंधबोधक अव्यय
के लिए : यह पुस्तक तुम्हारे पढ़ने के लिए है।
की ओर : वह तेज़ी से दरवाज़े की ओर बढ़ा।
३. समुच्चयबोधक अव्यय
और : राम और श्याम अच्छे मित्र हैं।
क्योंकि : मैं नहीं आ सका क्योंकि मैं बीमार था।
४. विस्मयादिबोधक अव्यय
ओह ! : ओह ! यह तो बहुत बुरा हुआ।
अरे ! : अरे ! तुम यहाँ कब पहुँचे?
- हाय (विस्मयादिबोधक अव्यय) : हाय ! बेचारे का सब कुछ लुट गया।
- काश ! (विस्मयादिबोधक अव्यय) : काश ! मैं भी तुम्हारे साथ पिकनिक पर जा पाता।
- प्रायः (क्रियाविशेषण अव्यय) : पिताजी प्रायः शाम को टहलने जाते हैं।
- बाद (संबंधबोधक अव्यय) : खाना खाने के बाद मैं खेलने जाऊँगा।
- और (समुच्चयबोधक अव्यय) : मुझे सेब और संतरे बहुत पसंद हैं।
- बल्कि (समुच्चयबोधक अव्यय) : वह न केवल बुद्धिमान है, बल्कि बहुत मेहनती भी है।
- के पास (संबंधबोधक अव्यय) : मेरे घर के पास एक सुंदर बगीचा है।
- यदि ...तो (समुच्चयबोधक अव्यय) : यदि बारिश हुई, तो हम बाहर नहीं जाएँगे।
- इसलिए (समुच्चयबोधक अव्यय) : वह बीमार था, इसलिए स्कूल नहीं गया।
- वाह ! (विस्मयादिबोधक अव्यय) : वाह ! कितना सुंदर चित्र बनाया है।
- के अलावा (संबंधबोधक अव्यय) : इस कमरे में राम के अलावा कोई नहीं था।
- के लिए (संबंधबोधक अव्यय) : यह सुंदर घड़ी मैंने तुम्हारे लिए खरीदी है।
- क्योंकि (समुच्चयबोधक अव्यय) : उसे सज़ा मिली क्योंकि उसने चोरी की थी।
- की तरफ (संबंधबोधक अव्यय) : वह तेज़ी से जंगल की तरफ भागा।
- कारण (संबंधबोधक अव्यय) : तेज़ तूफ़ान के कारण कई पेड़ गिर गए।
- अच्छा (विस्मयादिबोधक अव्यय) : अच्छा ! तो यह बात है।
- नहीं .... तो (समुच्चयबोधक अव्यय) : जल्दी चलो, नहीं तो ट्रेन छूट जाएगी।
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