८. बीज
रामेश्वरदयाल दुबे — कविता का भावार्थ, वाक्यों का सही क्रम (क्रमबद्ध करो) और संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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कविता का परिचय : यह कविता रामेश्वरदयाल दुबे जी द्वारा रचित है। इसमें एक छोटे-से बीज के विशाल पेड़ बनने तक की यात्रा और उसके परोपकारी स्वभाव का सुंदर वर्णन किया गया है। पेड़ हमें फल, फूल और छाया देता है, इस प्रकार वह सबके काम आता है।
कविता का भावार्थ (सार)
किसी नदी के किनारे एक छोटा-सा बीज पड़ा था। जब एक चिड़िया उसे खाने आई, तो बीज ने कहा कि अभी उसे जमीन में गड़ने और डाल-पत्ते आने दो। चिड़िया चीं-चीं करती उड़ गई ।
पानी और धूप पाकर बीज से अंकुर निकला। जब बकरी उसकी कोंपलें खाने आई, तो उसने कहा कि अभी जड़ों को गहराई तक जाने दो और मुझे पानी व खाद खाने दो। बकरी भी में-में करती चली गई ।
धीरे-धीरे वह एक पौधा बन गया। एक दिन गाय उसे खाने आई, तो पौधे ने उसे भी डाल-पत्ते बड़े होने तक रुकने के लिए कहा। बहुत दिनों बाद वह एक विशाल पेड़ बन गया। जब चिड़िया, बकरी और गाय वापस वहाँ आईं, तो पेड़ ने गर्व से कहा, "मैं ही बीज हूँ, मैं ही अंकुर हूँ, मैं ही पौधा हूँ और मैं ही पेड़ हूँ। अब मैं तुम सबके काम आ सकता हूँ।" यह सुनकर सब खुश हो गए ।
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स्वाध्याय : प्रश्न-उत्तर
(क) पानी और धूप पाकर बीज में अंकुर फूटा ।
(ख) किसी नदी किनारे एक बीज पड़ा था ।
(ग) अब मैं तुम सबके काम आ सकता हूँ ।
(घ) उसकी डालें बड़ी-बड़ी हो गईं ।
वाक्यों का सही क्रम :
प्रायोगिक कृति (Practical Activity) :
यह एक प्रायोगिक कृति है। विद्यार्थी एक छोटे गमले या कुल्हड़ में गीली मिट्टी लें और उसमें चने के कुछ दाने बोएँ। रोज़ उसे थोड़ा-थोड़ा पानी दें और धूप में रखें।
निरीक्षण : आप देखेंगे कि २-३ दिनों में चने से सफ़ेद रंग का छोटा अंकुर निकलता है। लगभग एक सप्ताह में वह मिट्टी से बाहर आ जाता है और उसमें हरी पत्तियाँ आने लगती हैं। धीरे-धीरे वह एक हरे पौधे का रूप ले लेता है। इस प्रकार बीज से पौधा बनने की प्रक्रिया पूरी होती है।
अतिरिक्त अभ्यास (Extra Questions)
- १. बीज को खाने सबसे पहले कौन आया?
बीज को खाने सबसे पहले चिड़िया आई । - २. कोंपल देखकर किसके मुँह में पानी भर आया?
कोंपल देखकर बकरी के मुँह में पानी भर आया । - ३. गाय क्या करती हुई चली गई?
गाय रँभाती हुई चली गई । - ४. अंत में पेड़ ने सब से क्या कहा?
अंत में पेड़ ने कहा, "अब मैं तुम सबके काम आ सकता हूँ ।"