६. स्वास्थ्य संपदा
महात्मा गांधी — अनौपचारिक पत्र का सारांश, क्रियायुक्त वाक्य, क्रिया के भेद, विशेषण के प्रकार, एक वाक्य में उत्तर तथा सभी कृतियों के उत्तर. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
‘स्वास्थ्य संपदा’ महात्मा गांधी का लिखा एक अनौपचारिक पत्र है। यह पत्र उन्होंने येरवडा मंदिर से जमनालाल जी को लिखा था। इसमें बताया गया है कि खुली हवा, नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन ही स्वस्थ जीवन की पूँजी है। सूचना है — ‘पढ़ो और समझो’।
मुख्य बिंदु
- शरीर एक अमानत है। उसकी रक्षा करना रक्षक का धर्म है।
- भोजन में हरी सब्जियाँ, ताजे फल और चोकर मिला आटा होना चाहिए।
- सुबह का पहला खाना अकेले फल का होना चाहिए।
- चौबीसों घंटे खुली हवा में रहना और प्राणायाम करना आवश्यक है।
- व्याकरण : क्रिया के भेद और विशेषण के प्रकार।
शब्दार्थ
- अमानत – धरोहर
- चोकर – आटा छानने के बाद बचा भाग
- सर्वोत्तम – सर्वश्रेष्ठ
- प्राणायाम – श्वास संबंधी योग-क्रिया
ध्यान दें : पत्र का मूल पाठ यहाँ नहीं दिया गया है — वह प्रकाशित पाठ्यपुस्तक से ही पढ़ें। यहाँ पत्र का सारांश अपने शब्दों में तथा सभी कृतियों के उत्तर दिए गए हैं।
लेखक परिचय
महात्मा गांधी — जन्म : २ अक्तूबर १८६९, पोरबंदर, गुजरात; मृत्यु : ३० जनवरी १९४८.
परिचय : आप ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से जाने जाते हैं। आपने सत्य और अहिंसा के मार्ग से स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया।
पत्र का सारांश
यह पत्र गांधीजी ने येरवडा मंदिर से ८-११-३२ को जमनालाल जी को लिखा। वे लिखते हैं कि शरीर एक अमानत है। उसकी यथासंभव रक्षा करना ही रक्षक का धर्म है।
मौज-मजे के लिए गुड़ की डली भी नहीं माँगनी चाहिए। पर औषधि के रूप में महँगे अंगूर भी लेने में बुराई नहीं। गुड़ छोड़ देना उचित है। उसकी जगह शुद्ध शहद लिया जा सकता है। दूध की मात्रा बढ़ाना अच्छा है।
जैतून के तेल की जगह मक्खन लेना ठीक है, क्योंकि मक्खन में विटामिन होते हैं। साग में हरी सब्जी होनी चाहिए। लौकी, फूलगोभी, पत्तागोभी, बिना बीज की सेम और बैंगन अच्छी हरी सब्जियाँ हैं। गेहूँ का आटा चोकर मिला होना चाहिए।
फलों में अंगूर, मौसंबी, संतरा, अनार, सेब और अनन्नास अच्छे हैं। बहुत-सी चीजें एक साथ नहीं मिलानी चाहिए। फल अकेला खाने से उसके गुण बढ़ते हैं। सुबह का फल सोने के समान होता है। इसलिए पहला खाना अकेले फल का होना चाहिए।
अंत में वे बताते हैं कि चौबीसों घंटे खुली हवा में रहना चाहिए। रोज धीरे-धीरे प्राणायाम करना चाहिए। रात की सर्दी से डरने की जरूरत नहीं। कंबल गले तक ओढ़ लो और सिर-कान पर कपड़ा लपेट लो। फेफड़ों में शुद्ध हवा जाती रहे, यह बहुत आवश्यक है। पत्र के अंत में उन्होंने लिखा — ‘बापू के आशीर्वाद’।
एक वाक्य में उत्तर लिखो
मक्खन में जो विटामिन होते हैं, वे जैतून के तेल में नहीं होते, इसलिए जैतून के तेल की जगह मक्खन लिया जाना चाहिए।
शरीर को एक अमानत समझकर यथासंभव उसकी रक्षा करना ही रक्षक का धर्म है।
लौकी, फूलगोभी, पत्तागोभी, बिना बीज की सेम और बैंगन की गिनती अच्छी, हरी सब्जियों में होती है।
फेफड़ों में चौबीसों घंटे शुद्ध-से-शुद्ध हवा जाती रहे, यह अति आवश्यक है।
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कार्य हमारा — चित्र देखकर क्रियायुक्त शब्दों से वाक्य बनाओ
- लड़की सेब खाती हुई — खाना — बहन ने पूरा सेब खाया ।
- हँसते हुए दो बच्चे — हँसना — दोनों बच्चे खिलखिलाकर हँस रहे हैं ।
- थाली में भोजन करता लड़का — खाना — भाई थाली में भोजन कर रहा है ।
- माँ बच्ची को भोजन देती हुई — खिलाना — माँ ने बच्ची को खाना खिलाया ।
- पिताजी माँ से बच्चे को खाना दिलवाते हुए — खिलवाना — पिताजी ने माँ से बच्चे को खाना खिलवाया ।
- खिलौनों से सजी दुकान — सजना — दुकान में सुंदर खिलौने सजे हुए हैं ।
- माँ बच्चे की देखभाल करती हुई — सुलाना — माँ बच्चे को थपथपाकर सुला रही है ।
टीप : यह चित्र-आधारित कृति है। अन्य वाक्य भी सही माने जाएँगे। ध्यान रखो कि वाक्य में क्रिया अवश्य हो।
आओ, क्रिया के भेद समझें
जिस शब्द से किसी काम के होने या करने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। पाठ में आए क्रिया शब्द — पियो, होते हैं, मिल सकें, थे।
- अकर्मक क्रिया — इसका कोई कर्म नहीं होता। जैसे — बच्चे हँसते हैं।
- सकर्मक क्रिया — इसका कर्म होता है। ‘क्या’ पूछने पर उत्तर मिलता है। जैसे — उसने सेब खाया।
- प्रेरणार्थक क्रिया — कर्ता स्वयं न करके दूसरे से करवाता है। जैसे — माँ ने खिलाया, पिताजी ने खिलवाया।
- संयुक्त क्रिया — दो क्रियाएँ मिलकर एक अर्थ देती हैं। जैसे — बच्चे खेलने लगे।
- सहायक क्रिया — मुख्य क्रिया की सहायता करती है। जैसे — वह पढ़ रहा है।
ध्यान दो : खाया → खिलाया → खिलवाया। ‘खाया’ स्वयं किया। ‘खिलाया’ दूसरे को करवाया। ‘खिलवाया’ किसी तीसरे के द्वारा करवाया।
शब्द वाटिका — नए शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अमानत | धरोहर / थाती |
| निर्दोष | दोष रहित |
| सर्वोत्तम | सर्वश्रेष्ठ |
| चोकर | गेहूँ का आटा छानने के बाद बचा हुआ भाग |
| उद्वेग | प्रबलता |
| इजाजत | अनुमति |
| संतुलित आहार | सभी पोषक तत्त्वों से युक्त भोजन |
| प्राणायाम | श्वास संबंधी योग-क्रिया |
भाषा की ओर
- पाँच — मेरे पास पाँच पुस्तकें हैं। — संख्यावाचक
- यही — यही लड़का मेरा मित्र है। — सार्वनामिक
- कुछ — थाली में कुछ चावल बचे हैं। — परिमाणवाचक
- मीठी — कोयल की मीठी आवाज सबको भाती है। — गुणवाचक
टीप : ‘कुछ बच्चे आए’ — यहाँ ‘कुछ’ गिनती बताता है, इसलिए यह संख्यावाचक होगा। अपने वाक्य स्वयं बनाओ।
अन्य कृतियाँ
- जिस भोजन में सभी पोषक तत्त्व उचित मात्रा में हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं।
- भोजन में हरी सब्जियाँ और मौसमी फल अवश्य होने चाहिए।
- दूध, दालें और अंकुरित अनाज शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
- तला हुआ और अधिक मीठा भोजन कम खाना चाहिए।
- भोजन समय पर और चबा-चबाकर करना चाहिए।
यदि भोजन से नमक गायब हो जाए, तो खाने का स्वाद ही चला जाएगा। दाल, सब्जी और चटनी फीकी लगेंगी।
नमक से शरीर को आयोडीन मिलता है। इसकी कमी से घेंघा रोग होता है। अचार और पापड़ भी नमक से ही सुरक्षित रहते हैं। वे जल्दी खराब होने लगेंगे।
तब समझ में आएगा कि साधारण-सी चीज भी कितनी जरूरी होती है।
टीप : यह कल्पनात्मक प्रश्न है। अपनी कल्पना से अलग उत्तर भी लिखा जा सकता है।
खादी हाथ से काते और हाथ से बुने सूत का कपड़ा है। इसे इस प्रकार बनाते हैं —
विशेषताएँ : खादी गरमी में ठंडी लगती है। यह बिना बिजली के बनती है। इससे गाँवों में रोजगार मिलता है। गांधीजी ने खादी को स्वावलंबन का प्रतीक बनाया था।
- सुबह ६:०० — उठना, नित्यकर्म
- ६:३० – ७:०० — व्यायाम या योगासन
- ७:०० – ७:३० — स्नान और नाश्ता
- ७:३० – ८:०० — पढ़ाई (कठिन विषय)
- ८:३० – २:३० — विद्यालय
- ३:०० – ४:०० — भोजन और विश्राम
- ४:०० – ५:३० — खेल और घर के कामों में सहायता
- ५:३० – ७:०० — गृहकार्य और पाठ की पुनरावृत्ति
- ७:०० – ८:०० — भोजन और परिवार के साथ बातचीत
- ८:०० – ९:०० — वाचन और अगले दिन की तैयारी
- रात ९:३० — सोना
ध्यान दो : यह केवल नमूना है। अपने विद्यालय के समय के अनुसार दिनचर्या बनाओ। पढ़ाई, खेल, नींद और परिवार — चारों के लिए समय रखो।
सोलापुर,
१५ अगस्त २०२५
प्रिय मित्र आदित्य,
सप्रेम नमस्कार ।
कल तुम्हारे पिताजी से पता चला कि तुमने राज्यस्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम क्रमांक पाया है। यह सुनकर मुझे बहुत आनंद हुआ। तुम्हें हार्दिक बधाई !
मुझे याद है, इस प्रतिकृति के लिए तुमने बहुत मेहनत की थी। सचमुच, परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
आगे भी तुम ऐसे ही बढ़ते रहो, यही मेरी शुभकामना है। घर में सबको मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा प्रिय मित्र,
रोहन देशमुख
अनौपचारिक पत्र में ध्यान रखो : स्थान और दिनांक → संबोधन → अभिवादन → विषय-वस्तु → समापन → अपना नाम।
सुनो तो जरा : दूरदर्शन और रेडियो के कार्यक्रम देखो-सुनो। कक्षा में बताओ — कार्यक्रम का नाम, विषय और उससे क्या सीखा।
वाचन जगत से : साने गुरुजी का लिखा कोई पत्र पढ़ो और उस पर चर्चा करो। ‘श्यामची आई’ उनकी प्रसिद्ध कृति है।
स्वयं अध्ययन : डाक टिकटों का संकलन करके प्रदर्शनी लगाओ। टिकटों को विषय के अनुसार बाँटो — महापुरुष, पशु-पक्षी, फूल, खेल।
विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। शरीर रोगी हो, तो किसी काम में मन नहीं लगता। योगासन शरीर को लचीला और मन को शांत बनाते हैं। २१ जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
नवयुवकों की शक्ति देश के हित में लगनी चाहिए — जैसे स्वच्छता अभियान, साक्षरता और वृक्षारोपण।
मैंने समझा
इस पत्र से मैंने समझा कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपदा है। गांधीजी ने कारागृह से भी अपने मित्र को भोजन और व्यायाम की छोटी-छोटी बातें प्रेम से समझाईं।
शरीर एक अमानत है। उसकी रक्षा करना हमारा धर्म है। अब मैं समय पर संतुलित भोजन करूँगा और रोज व्यायाम करूँगा।
टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।