६. जरा प्यार से बोलना सीख लीजे
कवि — रमेश दत्त शर्मा | संपूर्ण स्वाध्याय, कविता का भावार्थ, भाषा बिंदु, और निबंध लेखन। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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स्वाध्याय (सूचनानुसार कृतियाँ करो)
- (१) मधु = शहद
- (२) कड़वे = कटु
- (३) विचार = खयाल
- (४) आवश्यकता = जरूरत
- ऊर्जा (शक्ति) की बचत होती है।
- व्यर्थ के विवाद या झगड़े (तू-तू मैं-मैं) से बचा जा सकता है।
- हमें सोचने-समझने और दूसरों की बात सुनने का समय मिलता है।
- मन को शांति मिलती है और आपसी रिश्ते मधुर बने रहते हैं।
कविता की पंक्तियाँ :
बात बेबात कोई चुभने लगे तो,
बदलकर उसे मोड़ना सीख लीजे ।
ये किसने कहा होंठ सीकर के बैठो,
जरूरत पे मुँह खोलना सीख लीजे ।
अर्थ : कवि रमेश दत्त शर्मा जी कहते हैं कि बातचीत के दौरान यदि कोई बात बिना किसी वजह (बेबात) के बुरी लगने लगे या चुभने लगे, तो विवाद बढ़ाने के बजाय उस बात को प्यार से मोड़ देना (विषय बदल देना) चाहिए। साथ ही, कवि यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह चुपचाप (होंठ सिलकर) बैठना भी सही नहीं है। जहाँ अन्याय हो रहा हो या जहाँ सच बोलने की आवश्यकता हो, वहाँ हमें अपना मुँह अवश्य खोलना चाहिए और निर्भीकता से अपनी बात रखनी चाहिए।
- काँटे बोने वाले — कटु वचन
- चुभने वाली — बात बेबात
- फटने वाले — पटाखे
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भाषा बिंदु
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| भारतीय | – | भारत | ईय |
| आस्थावान | – | आस्था | वान |
| व्यक्तित्व | – | व्यक्ति | त्व |
| स्नेहिल | – | स्नेह | इल |
| बेबात | बे | बात | – |
| निरादर | निर् | आदर | – |
| प्रत्येक | प्रति | एक | – |
| सुयोग | सु | योग | – |
उपयोजित लेखन व कल्पना पल्लवन
यातायात की समस्याएँ एवं उपाय
आज के समय में जनसंख्या वृद्धि और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण यातायात (ट्रैफिक) की समस्या एक गंभीर रूप धारण कर चुकी है। सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण हर दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है। इससे न केवल लोगों का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि वाहनों से निकलने वाले धुएँ और ध्वनि के कारण वायु व ध्वनि प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। कई बार तो एंबुलेंस जैसे जरूरी वाहन भी जाम में फँस जाते हैं, जिससे लोगों की जान पर बन आती है।
इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कारगर उपाय करने होंगे। सबसे पहले, हमें सार्वजनिक वाहनों (जैसे बस, मेट्रो, लोकल ट्रेन) का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए ताकि सड़कों पर निजी कारों की संख्या कम हो सके। लोगों को 'कार-पूलिंग' की आदत डालनी चाहिए। इसके अलावा, सरकार को सड़कों को चौड़ा करने, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने पर जोर देना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि हर नागरिक को यातायात के नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। तभी हम इस गंभीर समस्या से मुक्ति पा सकते हैं।
यह कथन बिल्कुल सत्य है कि हमारी बोली में एक जादुई शक्ति होती है। जब हम किसी से प्यार और मिठास के साथ बात करते हैं, तो सामने वाले व्यक्ति का क्रोध शांत हो जाता है और वह हमारी बात सुनने के लिए तैयार हो जाता है। मधुर वाणी न केवल बिगड़े हुए काम बना सकती है, बल्कि अजनबियों को भी अपना मित्र बना लेती है।
इसके विपरीत, कठोर और कड़वी बातें तीर की तरह चुभती हैं, जो बने बनाए रिश्तों को भी तोड़ देती हैं। संत कबीर दास जी ने भी कहा है कि हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो दूसरों को शीतलता दे और हमारे मन को भी प्रसन्न करे। इसलिए जीवन में सफलता और सम्मान पाने के लिए हमेशा मीठा और विनम्र बोलना चाहिए।