९. मेरे पिता जी
डॉ. हरिवंशराय बच्चन — आत्मकथा का स्वाध्याय, अपठित गद्यांश, संजाल, स्वमत और सभी कृतियों के उत्तर।
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पाठ का परिचय : प्रसिद्ध कवि और लेखक डॉ. हरिवंशराय बच्चन जी द्वारा रचित आत्मकथा अंश 'मेरे पिता जी' में उन्होंने अपने पिता की समय की पाबंदी, सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और स्वाभिमान का सजीव चित्रण किया है।
पाठ के आँगन में (स्वाध्याय)
(क) निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनके लिए पाठ में प्रयुक्त विशेषताएँ लिखिए :
| शब्द | पाठ में प्रयुक्त विशेषताएँ |
|---|---|
| १. जूता | काला (काला जूता) |
| २. पाजामा | ढीला (ढीला पाजामा) |
| ३. अचकन | उनके लंबे-इकहरे शरीर पर खूब फबने वाली |
| ४. टोपी | दुपल्ली टोपी (या विलायती फेल्ट कैप) |
(ख) 'संयुक्त परिवार' संबंधी अपने विचार लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
संयुक्त परिवार वह होता है जिसमें माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची और उनके बच्चे एक साथ रहते हैं। संयुक्त परिवार एक विशाल पेड़ की तरह होता है जो सभी सदस्यों को अपनी छाँव और सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें बच्चों को बचपन से ही बड़ों का प्यार, अच्छे संस्कार और उचित मार्गदर्शन मिलता है।
परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर रहते हैं और एक-दूसरे का सहयोग करना सीखते हैं। सुख-दुख के समय में पूरा परिवार एक साथ खड़ा रहता है, जिससे कोई भी व्यक्ति खुद को अकेला या कमजोर महसूस नहीं करता। आज के आधुनिक और व्यस्त समय में, जहाँ एकाकीपन बढ़ रहा है, संयुक्त परिवार का महत्त्व और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
परिच्छेद पर आधारित कृतियाँ
१) संजाल : परिच्छेद में प्रयुक्त भाषाएँ और बोलियाँ
२) 'अपना व्यक्तित्व समृद्ध करने के लिए अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान उपयुक्त होता है,' इसपर अपने विचार लिखिए।
भाषाएँ विचारों के आदान-प्रदान का सबसे सशक्त माध्यम होती हैं। एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान (बहुभाषी होना) हमारे व्यक्तित्व में निखार लाता है और हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जो व्यक्ति अलग-अलग भाषाएँ जानता है, वह किसी भी नए समाज, राज्य या देश के परिवेश में आसानी से घुल-मिल जाता है और वहाँ की संस्कृति को गहराई से समझ सकता है।
आज के वैश्वीकरण (Globalization) के युग में, करियर और रोजगार के अवसरों के लिए भी विदेशी और प्रांतीय भाषाओं का ज्ञान बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। नए-नए लोगों से जुड़ने, साहित्य को पढ़ने और अपनी सोच का दायरा विस्तृत करने के लिए बहुभाषी होना अत्यंत उपयुक्त और आवश्यक है।
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अपठित गद्यांश पर आधारित कृतियाँ
१) कारण लिखिए :-
- क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना : क्योंकि विमान लेखक को सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा उनके सपनों को पंख लगाते थे।
- ख) लेखक का एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना : क्योंकि वे उड़ान भरने के प्रति आकर्षित थे और वर्षों से उड़ने की अभिलाषा उनके मन में पलती रही थी।
२) स्वमत / 'मेरी अभिलाषा' विषय पर लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
हर मनुष्य के जीवन में कोई-न-कोई अभिलाषा (इच्छा या सपना) अवश्य होती है, जो उसे आगे बढ़ने और जीवन में कुछ सार्थक करने की प्रेरणा देती है। मेरी सबसे बड़ी अभिलाषा है कि मैं पढ़-लिखकर एक अच्छा डॉक्टर बनूँ।
हमारे देश में आज भी कई गरीब और असहाय लोग हैं, जो उचित चिकित्सा और पैसों के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पाते हैं। मैं एक ऐसा डॉक्टर बनना चाहता हूँ जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करे और हर जरूरतमंद मरीज का इलाज करे। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मैं पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई कर रहा हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन मेरी यह अभिलाषा अवश्य पूरी होगी।
भाषा बिंदु (विरामचिह्न)
हिंदी व्याकरण में पाठ्यपुस्तक में दिए गए कुछ विशेष विरामचिह्न और उनका उपयोग निम्नलिखित है :
| विरामचिह्न का नाम | चिह्न | उपयोग और उदाहरण |
|---|---|---|
| अपूर्ण सूचक | ... | किसी लेख या वाक्य में से जब कोई अंश (भाग) छोड़ दिया जाता है, तब इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे: तुम समझते हो कि यह बालक है... |
| स्थान सूचक | XXX | यह चिह्न सूचियों या वाक्यों में खाली स्थान भरने या छुपी हुई जानकारी दर्शाने के काम आता है। जैसे: गाँव के बाजार में वह XXX बेचा करता था। |
| संक्षेप सूचक | . (बिंदु) | किसी संज्ञा या शब्द को संक्षेप (Short form) में लिखने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे: डॉ. (डाक्टर) या पं. (पंडित) |
| संकेत सूचक | कृ.पृ.दे. | यह पढ़ने वाले को किसी दूसरी जगह या पीछे देखने का संकेत देता है। जैसे: कृ.पृ.दे. (कृपया पीछे देखिए)। |
| समाप्ति सूचक | -0- | बहुधा किसी लेख, कहानी, अध्याय या पुस्तक की समाप्ति पर इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे: इस तरह राजा और रानी सुख से रहने लगे। -0- |