रचना विभाग (लेखन कौशल्य)
कहानी लेखन, गद्य आकलन, वृत्तांत लेखन, प्रसंग वर्णन, विज्ञापन और निबंध लेखन के हल किए हुए उदाहरण। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ।
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कहानी लेखन
एक लड़की – विद्यालय में देरी से पहुँचना – शिक्षक द्वारा डाँटना – लड़की का मौन रहना – दूसरे दिन समाचार पढ़ना – लड़की को गौरवान्वित करना।
साहसी रीटा
एक गाँव में रीटा नाम की एक लड़की रहती थी। वह बहुत ही समझदार और दयालु स्वभाव की थी। वह हर दिन समय पर विद्यालय जाती थी। एक दिन, विद्यालय जाते समय उसने देखा कि रास्ते में बहने वाली नदी के किनारे एक छोटा बच्चा फिसलकर पानी में गिर गया है और डूब रहा है। रीटा ने बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत पानी में छलाँग लगा दी और बड़ी मुश्किल से उस बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
इस पूरी घटना में उसे काफी समय लग गया। जब वह भीगे हुए कपड़ों में विद्यालय पहुँची, तो काफी देर हो चुकी थी। कक्षा में प्रवेश करते ही शिक्षक ने उसे देरी से आने और इस तरह भीगे हुए आने के लिए बहुत डाँटा। रीटा ने अपनी सफाई में कुछ नहीं कहा और मौन रहकर चुपचाप अपनी जगह पर बैठ गई।
अगले दिन सुबह के अखबार में एक खबर छपी जिसे पढ़कर सभी हैरान रह गए। खबर थी कि एक बहादुर लड़की ने अपनी जान पर खेलकर एक डूबते हुए बच्चे की जान बचाई। अखबार में रीटा की तस्वीर भी थी। जब विद्यालय में प्रार्थना सभा हुई, तो प्रधानाचार्य ने वह समाचार सबको पढ़कर सुनाया और रीटा को मंच पर बुलाकर गौरवान्वित किया। कल डाँटने वाले शिक्षक को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने रीटा से क्षमा माँगते हुए उसकी पीठ थपथपाई।
सीख : हमें बिना पूरी सच्चाई जाने किसी पर भी क्रोध नहीं करना चाहिए। परोपकार और अच्छे काम का परिणाम हमेशा सम्मानजनक होता है।
मोबाइल – लड़का – गाँव – सफर।
मोबाइल का सदुपयोग
रोहित नाम का एक लड़का शहर में रहकर पढ़ाई करता था। कॉलेज की छुट्टियाँ लगने पर वह बस से अपने गाँव जा रहा था। उसका गाँव शहर से काफी दूर था, इसलिए सफर लंबा था। बस में सफर करते समय उसने देखा कि पास ही की सीट पर बैठे एक बुजुर्ग व्यक्ति बहुत परेशान और बेचैन लग रहे थे।
रोहित ने नम्रता से उनसे परेशानी का कारण पूछा। बुजुर्ग ने बताया कि वे पहली बार इस रास्ते से जा रहे हैं और उनके बेटे ने उन्हें एक विशेष स्टॉप पर उतरने को कहा था, जहाँ वह उन्हें लेने आने वाला था। लेकिन उन्हें पता नहीं चल पा रहा था कि वह स्टॉप कब आएगा और उनके पास संपर्क करने के लिए मोबाइल भी नहीं था।
यह सुनकर रोहित ने तुरंत अपनी जेब से अपना मोबाइल निकाला और बुजुर्ग से उनके बेटे का नंबर माँगा। रोहित ने नंबर डायल किया और उनके बेटे से बात की। बेटे ने बताया कि वह बस स्टॉप पर ही इंतज़ार कर रहा है और बस को पहुँचने में बस पंद्रह मिनट बाकी हैं। रोहित ने बुजुर्ग को यह बात बताई, जिससे उनकी जान में जान आई और उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई। जब बस स्टॉप पर रुकी, तो बेटा उन्हें लेने आ गया। बुजुर्ग ने जाते-जाते रोहित को ढेरों आशीर्वाद दिए। रोहित को समझ में आ गया कि तकनीक का असली उपयोग दूसरों की मदद करने में ही है।
सीख : आधुनिक उपकरणों (जैसे मोबाइल) का सही और सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करना हमारा कर्तव्य है।
गद्य आकलन (प्रश्न तैयार करना)
किसी भी देश की संपत्ति उस देश के आदर्श विद्यार्थी ही होते हैं। विद्यार्थियों का चरित्र ही राष्ट्र की संपत्ति होता है। वह समय का मूल्यांकन करना जानता है... वह विद्यारूपी समुद्र का मंथन करके ऐसे मोती प्राप्त कर सकता है जो आज तक अनबिद्ध रहे हों।
- किसी भी देश की वास्तविक संपत्ति कौन होते हैं?
- एक आदर्श विद्यार्थी किन चीज़ों में आवश्यकता से अधिक लिप्त नहीं होता है?
- विद्यार्थी के लिए कुछ बनने हेतु किस पथ पर चलना आवश्यक है?
- विद्यार्थी अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कब कुछ करने की क्षमता प्राप्त कर सकता है?
- इस गद्यांश को कौन-सा उचित शीर्षक दिया जा सकता है?
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वृत्तांत लेखन
आदर्श विद्यालय में 'हिंदी दिवस' का शानदार आयोजन
पुणे, १५ सितंबर : स्थानीय आदर्श विद्यालय में १४ सितंबर को 'हिंदी दिवस' बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह ९ बजे विद्यालय के सभागृह में हुई। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रमेश शर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ।
विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रेरणादायक भाषण दिए और मनमोहक कविताएँ प्रस्तुत कीं। नौवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की, जिसमें राष्ट्रभाषा हिंदी के संवर्धन की आवश्यकता को दर्शाया गया था। मुख्य अतिथि ने अपने भाषण में हिंदी को दिलों को जोड़ने वाली भाषा बताया और छात्रों को शुद्ध हिंदी बोलने व पढ़ने के लिए प्रेरित किया। अंत में, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने सभी का आभार व्यक्त किया और राष्ट्रगान के साथ दोपहर १२ बजे कार्यक्रम का शानदार समापन हुआ।
प्रसंग वर्णन
कूड़ेदान से कूड़ा-कचरा आसपास फैला हुआ है, उसी में कुछ आवारा कुत्ते तथा अन्य जानवर घूम रहे हैं साथ ही कुछ गाएँ प्लास्टिक की थैलियों को चबा-चबा कर खा रही हैं।
कचरे की समस्या और जानवरों की दुर्दशा
आज सुबह जब मैं बाज़ार के मुख्य चौराहे से गुजर रहा था, तो मैंने एक अत्यंत हृदयविदारक दृश्य देखा। वहाँ रखे सार्वजनिक कूड़ेदान से कूड़ा-कचरा बाहर सड़क पर पूरी तरह फैला हुआ था। गंदगी और बदबू के कारण वहाँ से गुजरना भी मुश्किल हो रहा था। उसी कचरे के ढेर में कुछ आवारा कुत्ते और सुअर भोजन की तलाश में मुँह मार रहे थे।
सबसे दुखद दृश्य यह था कि कुछ गाएँ वहाँ पड़ी प्लास्टिक की थैलियों को चबा-चबा कर खा रही थीं। लोग अपने घरों का बचा हुआ खाना प्लास्टिक की थैलियों में बाँधकर फेंक देते हैं, जिसे ये बेजुबान जानवर थैली सहित निगल जाते हैं। यह प्लास्टिक उनके पेट में जाकर जानलेवा साबित होता है। इस दृश्य ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमारी जरा-सी लापरवाही इन बेजुबान जानवरों के लिए कितनी घातक हो सकती है। हमें कचरे का उचित प्रबंधन करना ही चाहिए।
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🎯 उद्देश्य : विद्यार्थियों की कला और रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना तथा प्राप्त आय से स्थानीय अनाथालय की सहायता करना।
📅 तिथि : २५ नवंबर २०२६ से २७ नवंबर २०२६ तक
⏰ समय : सुबह १०:०० बजे से शाम ५:०० बजे तक
📍 स्थान : विद्यालय का मुख्य सभागृह, नवभारत विद्यालय, एम.जी. मार्ग, मुंबई।
आपकी उपस्थिति हमारे बाल-कलाकारों का उत्साह बढ़ाएगी। सपरिवार अवश्य पधारें!
निबंध लेखन
यदि किताबें न होतीं
किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र और ज्ञान का अथाह सागर हैं। लेकिन ज़रा कल्पना कीजिए, यदि इस दुनिया में किताबें ही न होतीं, तो हमारा जीवन कैसा होता? यह विचार ही मन में एक खालीपन और अंधकार पैदा कर देता है।
यदि किताबें न होतीं, तो हमें अपने गौरवशाली इतिहास, महान हस्तियों और पुरानी सभ्यताओं के बारे में कुछ भी पता नहीं चलता। पीढ़ियों का ज्ञान और अनुभव जो पन्नों में सहेजा गया है, वह हमेशा के लिए लुप्त हो जाता। ज्ञान का आदान-प्रदान केवल मौखिक रूप तक सीमित रह जाता, जो समय के साथ बदलता और धीरे-धीरे नष्ट हो जाता।
बिना किताबों के विद्यालय और विश्वविद्यालय कैसे होते? हमारी शिक्षा प्रणाली का आधार ही खत्म हो जाता। विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में जो तरक्की हमने की है, वह संभव ही नहीं हो पाती, क्योंकि हर नए शोध और आविष्कार की नींव पुरानी किताबों में संचित ज्ञान पर ही टिकी होती है। किताबें नहीं होतीं, तो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक विचारों का पुल नहीं बन पाता।
किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि वे हमारा स्वस्थ मनोरंजन भी करती हैं। कहानियाँ, कविताएँ और नाटक हमारी कल्पना शक्ति को उड़ान देते हैं। यदि किताबें न होतीं, तो मनुष्य का बौद्धिक और मानसिक विकास रुक जाता और हम शायद आज भी अज्ञानता के अंधकार में भटक रहे होते। सचमुच, किताबों के बिना मानव का जीवन अधूरा, नीरस और दिशाहीन होता।