८. वीरभूमि पर कुछ दिन
रुक्मणी संगल — यात्रा वर्णन का संजाल, संधिविच्छेद (व्याकरण), निबंध लेखन, मौलिक सृजन और पाठ के आँगन में (स्वाध्याय) के सभी प्रश्नों के उत्तर।
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पाठ का परिचय : प्रस्तुत पाठ 'वीरभूमि पर कुछ दिन' एक रोचक यात्रा वर्णन है। इसमें लेखिका रुक्मणी संगल ने वीरभूमि राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक शहरों— जोधपुर, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़— की अपनी यात्रा, वहाँ की कला-संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व का सजीव चित्रण किया है ।
पाठ के आँगन में (स्वाध्याय)
(क) संजाल : भारत के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल
अन्य उत्तर : आप पाठ में आए स्थलों के नाम (जैसे— उम्मेद भवन, मेहरानगढ़ किला, पटवा की हवेलियाँ, चित्तौड़गढ़ दुर्ग) भी लिख सकते हैं।
(ख) संजाल पूर्ण कीजिए : चित्तौड़गढ़ में स्थित स्थान
शब्द : लौहपथगामिनी
- १. 'मेरी तिब्बत यात्रा' (लेखक : राहुल सांकृत्यायन)
- २. 'अरे यायावर रहेगा याद' (लेखक : अज्ञेय)
- (त) वीर जवानों का वह देश जो धरती का गहना है — भारत
- (थ) महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम — चेतक
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पठित परिच्छेद पर आधारित (पृष्ठ २८)
(१) उत्तर लिखिए :
- (क) ऊँट की सवारी करने के बाद लेखिका की स्थिति : लेखिका को डर भी लग रहा था, प्रसन्नता भी हो रही थी और उत्सुकता भी थी।
- (ख) ऊँट की सवारी का अनुभव रोमांचकारी और मनोरंजक था, यह दर्शाने वाला वाक्य : "शायद सभी की हृदयगति वैसे ही धड़क रही थी, जैसी हमारी। फिर भी रोमांचकारी और मनोरंजक।"
(२) जोड़ियाँ मिलाइए :
| समूह 'अ' | समूह 'आ' (सही उत्तर) |
|---|---|
| (क) रेगिस्तान का जहाज | ऊँट |
| (ख) मखमली गद्दे | रेत |
| (ग) रंग-बिरंगी पोशाक | पर्यटक |
| (घ) पर्यटकों की मंजिल | सूर्यास्त |
(३) परिच्छेद में प्रयुक्त विलोम शब्द की जोड़ी लिखिए।
विलोम जोड़ी : नर – नारी (तथा बाल – वृद्ध)।
(४) 'मेरा यात्रानुभव' पर आपके विचार लिखिए।
यात्रा करना हमेशा एक नया अनुभव और आनंद देता है। पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ महाबलेश्वर घूमने गया था। वहाँ की घुमावदार पहाड़ी सड़कें और दोनों ओर बिछी हरियाली मन को बहुत सुकून दे रही थी। हमने वहाँ कई पॉइंट देखे जहाँ से घाटियों का दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहा था। वेन्ना लेक (Venna Lake) में बोटिंग करने का अनुभव बहुत रोमांचक था। यात्रा से हमें नए स्थानों की संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिलता है, जो किताबी ज्ञान से कहीं अधिक प्रभावी होता है।
अभिव्यक्ति (स्वमत, निबंध, लेखनीय, मौलिक सृजन)
उस युवक की ऐसी लापरवाही देखकर मेरे मन में सबसे पहला विचार यह आया कि वह न केवल अपनी जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य निर्दोष लोगों की जान भी खतरे में डाल रहा है। सड़क कोई स्टंट दिखाने या कलाबाजी करने की जगह नहीं है। जोर-जोर से हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण होता है, जिससे बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों को बहुत परेशानी होती है।
मुझे लगा कि ऐसे युवाओं को यातायात के नियमों का कोई ज्ञान या सम्मान नहीं है। शौक पूरा करने के लिए अपनी और दूसरों की जिंदगी दाँव पर लगाना बहुत बड़ी मूर्खता है। यदि दुर्घटना हो जाए, तो उसके माता-पिता पर क्या बीतेगी, यह उसने शायद सोचा ही नहीं होगा। समाज और पुलिस प्रशासन को ऐसे लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
हमारी सैर
पर्यटन या सैर करना हर इंसान को पसंद होता है। रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर जाकर कुछ दिन प्रकृति के करीब बिताना मन को अपार शांति देता है। पिछले महीने हमारी पाठशाला की ओर से औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) और एलोरा (वेरूल) की दो दिवसीय ऐतिहासिक सैर का आयोजन किया गया था। हम सभी मित्र इस सैर को लेकर बहुत उत्साहित थे।
हमने अपनी यात्रा बस से शुरू की। बस में हमने खूब गीत गाए और अंताक्षरी खेली। औरंगाबाद पहुँचकर हमने सबसे पहले 'बीबी का मकबरा' देखा, जिसे दक्कन का ताजमहल भी कहा जाता है। उसके बाद हम दौलताबाद का प्राचीन किला देखने गए, जहाँ की भूलभुलैया और सुरक्षा व्यवस्था देखकर हम हैरान रह गए। अगले दिन हम एलोरा की गुफाओं (Ellora Caves) की ओर निकल पड़े। वहाँ का प्रसिद्ध 'कैलाश मंदिर', जिसे एक ही विशाल चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर काटकर बनाया गया है, भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला का एक अद्भुत चमत्कार है।
इस सैर से हमने न केवल खूब आनंद उठाया, बल्कि हमें अपने देश के समृद्ध इतिहास और गौरवशाली कला-संस्कृति के बारे में बहुत कुछ नया सीखने को मिला। यह सैर हमारे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई।
यदि चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक दुर्ग स्वयं बोलने लगे, तो वह कहेगा— "मैं भारत के इतिहास का वह गौरवशाली पन्ना हूँ, जिसने वीरता, त्याग और बलिदान की सबसे महान कहानियाँ गढ़ी हैं। मैंने महाराणा प्रताप जैसे शूरवीर को जन्म दिया है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए महलों का सुख त्याग कर जंगलों में घास की रोटियाँ खाना स्वीकार किया, पर कभी दुश्मनों के सामने सिर नहीं झुकाया।"
"मैंने रानी पद्मिनी और अन्य हजारों वीरांगनाओं का वह पवित्र जौहर देखा है, जब उन्होंने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए हँसते-हँसते धधकती आग में छलांग लगा दी थी। इसी भूमि पर मीराबाई ने श्रीकृष्ण की भक्ति के ऐसे गीत गाए जो आज भी हवाओं में गूँजते हैं। भामाशाह का वह अद्वितीय त्याग भी मैंने देखा है, जिसने अपनी सारी संपत्ति देश की रक्षा के लिए दान कर दी। मैं केवल पत्थरों का एक किला नहीं हूँ, बल्कि भारतीय वीरों के स्वाभिमान और बलिदान का एक जीता-जागता स्मारक हूँ।"
सूचना फलक
ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा एवं संवर्धन हमारा कर्तव्य है!
१. कूड़ा, कचरा: कृपया कूड़ा-कचरा इधर-उधर न फेंकें। इसके लिए केवल कूड़ेदान (Dustbin) का ही उपयोग करें।
२. प्लास्टिक: इस ऐतिहासिक परिसर में प्लास्टिक की थैलियों और बोतलों का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
३. वास्तु की सुरक्षा: किले और महलों की दीवारों पर अपना नाम लिखकर या खरोंचकर उन्हें खराब न करें। यह हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है।
४. विरासत के प्रति आस्था: यह धरोहर हमारे पूर्वजों के गौरव का प्रतीक है। इसका सम्मान करें और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।
— भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (ASI)
भाषा बिंदु (व्याकरण - संधि)
| क्र. | शब्द | विग्रह | संधि (मेल) | प्रकार |
|---|---|---|---|---|
| १. | रेखांकित | रेखा + अंकित | आ + अ | स्वर संधि |
| २. | स्वागत | सु + आगत | उ + आ | स्वर संधि |
| ३. | सूर्यास्त | सूर्य + अस्त | अ + अ | स्वर संधि |
| ४. | मनोहर | मनः + हर | विसर्ग (ः) + ह | विसर्ग संधि |
| ५. | लोकोक्ति | लोक + उक्ति | अ + उ | स्वर संधि |
| ६. | दुष्कर | दुः + कर | विसर्ग (ः) + क | विसर्ग संधि |
| ७. | सम्मान | सम् + मान | म् + म | व्यंजन संधि |