8. बड़े भाई साहब
प्रेमचंद की कहानी — सार, प्रश्न-उत्तर, आशय स्पष्टीकरण और भाषा अध्ययन. NCERT हिंदी स्पर्श (भाग 2).
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पाठ का परिचय : ‘बड़े भाई साहब’ प्रेमचंद की कहानी है। बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े हैं और हर समय पढ़ाई में लगे रहते हैं, फिर भी बार-बार फेल हो जाते हैं। छोटा भाई खेलता-कूदता है, पर हर साल अव्वल आता है। कहानी में रटंत शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य है और बड़े भाई के त्याग व जिम्मेदारी का चित्रण है।
पाठ का सार
लेखक (छोटा भाई) नौ साल का था और बड़े भाई साहब चौदह साल के। दोनों होस्टल में रहते थे। भाई साहब बहुत अध्ययनशील थे और हर समय किताब खोले बैठे रहते थे। छोटे भाई का मन खेल-कूद में लगता था। भाई साहब उसे खेलने पर खूब डाँटते और लंबे-लंबे उपदेश देते।
वार्षिक परीक्षा में भाई साहब फेल हो गए और छोटा भाई अव्वल आ गया। अगले साल भी यही हुआ। इससे छोटे भाई के मन में घमंड आ गया और वह भाई साहब की परवाह कम करने लगा। भाई साहब ने उसे समझाया कि परीक्षा में अव्वल आना ही सब कुछ नहीं है; जीवन का अनुभव किताबी ज्ञान से बड़ा है।
भाई साहब ने बताया कि बड़ा होने के कारण वे अपनी इच्छाएँ दबाते हैं, ताकि छोटे भाई के सामने बुरा उदाहरण न बने। एक दिन एक कटी पतंग आई तो भाई साहब ने उछलकर उसकी डोर पकड़ ली और होस्टल की ओर दौड़ पड़े। छोटे भाई ने समझ लिया कि भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है। उसके मन में उनके प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।
मौखिक — एक-दो पंक्तियों में उत्तर
कथा नायक की रुचि खेल-कूद में थी — मैदान में घूमना, फुटबॉल, गुल्ली-डंडा, कंकरियाँ उछालना और पतंग (कनकौए) उड़ाना।
वे हर समय पहला सवाल पूछते थे — ‘कहाँ थे?’
वह स्वच्छंद और घमंडी हो गया। वह भाई साहब की परवाह कम करने लगा और अधिक समय खेल-कूद व पतंगबाजी में बिताने लगा।
बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे। कहानी के आरंभ में वे नौवीं कक्षा में पढ़ते थे (छोटा भाई पाँचवीं में था)।
वे कॉपी और किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तसवीरें बनाते थे। कभी एक ही शब्द या वाक्य दस-बीस बार लिख डालते थे।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर
उसने सोचा कि अब खूब मन लगाकर पढ़ेगा। टाइम-टेबिल में सुबह छह बजे से रात ग्यारह बजे तक हर विषय का समय था, पर खेल-कूद का कोई स्थान नहीं था। खेल के मैदान, हरियाली और फुटबॉल उसे अपनी ओर खींच लेते थे, इसलिए वह उसका पालन नहीं कर पाया।
भाई साहब बहुत गुस्से में आ गए। उन्होंने कहा कि अव्वल आने से तुम्हें घमंड हो गया है। उन्होंने रावण, शैतान और शाहे-रूम का उदाहरण देकर समझाया कि घमंड किसी का नहीं रहा। उन्होंने बड़ी कक्षाओं की कठिन पढ़ाई का डर भी दिखाया।
वे बड़े थे और छोटे भाई के लिए आदर्श बनना चाहते थे। यदि वे खेल-कूद या पतंगबाजी करते, तो छोटा भाई भी वैसा ही करता और पढ़ाई से भटक जाता। अपने कर्तव्य के कारण उन्हें अपनी इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।
वे सलाह देते थे कि खेल-कूद में समय नष्ट न करो और मन लगाकर पढ़ो। वे अंग्रेजी, अलजबरा और इतिहास की कठिनाई बताते थे। वे चाहते थे कि छोटा भाई परिश्रम करे, पिताजी की गाढ़ी कमाई व्यर्थ न जाए और वह जीवन में सफल हो।
भाई साहब का व्यवहार नरम होते ही छोटा भाई स्वच्छंद हो गया। वह पढ़ाई कम और खेल-कूद अधिक करने लगा। उसे पतंगबाजी का नया शौक लग गया और सारा समय उसी में बीतने लगा।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर
मेरे विचार से नहीं। छोटे भाई का मन खेल में ही लगा रहता था। भाई साहब के डर से ही वह थोड़ा-बहुत पढ़ लेता था। उनकी डाँट-फटकार से वह समय पर पढ़ाई करता था और उसका टास्क पूरा हो जाता था। यदि यह अंकुश न होता, तो वह पूरा समय खेल में गँवा देता और अव्वल नहीं आता।
लेखक ने रटंत विद्या पर व्यंग्य किया है। परीक्षा में केवल याद की हुई बातें लिखनी पड़ती थीं। बादशाहों के नाम, अलजबरा के कठिन सवाल और ‘समय की पाबंदी’ जैसे विषय पर चार पन्नों का निबंध लिखना पड़ता था। परीक्षक भी समझ की जगह किताबी बातें देखते थे।
हाँ, मैं सहमत हूँ। शिक्षा का उद्देश्य बुद्धि का विकास होना चाहिए, केवल रटना नहीं।
भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबें पढ़ने से नहीं आती। वह दुनिया देखने और अनुभव से आती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अम्माँ और दादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, फिर भी घर की हर समस्या को कुशलता से सुलझा लेते हैं, क्योंकि उनके पास जीवन का अनुभव है।
भाई साहब ने बताया कि वे उसकी भलाई के लिए ही अपनी इच्छाएँ दबाते हैं। उनके मन में भी खेलने की इच्छा होती है, पर वे उसके सामने गलत उदाहरण नहीं बनना चाहते। यह सुनकर छोटे भाई को उनके त्याग और प्रेम का अहसास हुआ और उसके मन में उनके प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।
- वे बहुत अध्ययनशील और परिश्रमी थे।
- वे उपदेश देने की कला में निपुण थे।
- वे अनुशासनप्रिय थे और छोटे भाई पर कड़ी नजर रखते थे।
- वे कर्तव्यपरायण थे और छोटे भाई के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते थे।
- वे छोटे भाई का भला चाहते थे और उससे स्नेह करते थे।
- उनके भीतर भी एक बच्चा छिपा था।
भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव को अधिक महत्त्वपूर्ण कहा है। किताबी ज्ञान से परीक्षा पास की जा सकती है, पर जीवन की समस्याएँ अनुभव से ही सुलझती हैं। अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण से उन्होंने बताया कि अनुभवी लोग कम पढ़े होकर भी घर का प्रबंध अच्छी तरह कर लेते हैं।
(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।
वह भाई साहब की डाँट चुपचाप सुन लेता था। अव्वल आने पर भी उसने उन्हें ताना नहीं दिया। वह उनकी नजर बचाकर ही पतंग उड़ाता था, ताकि उन्हें बुरा न लगे।
(ख) भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।
उन्होंने अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण देकर समझाया कि अनुभव से ही घर और जीवन का प्रबंध अच्छी तरह होता है।
(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।
कटी पतंग देखते ही भाई साहब ने उछलकर उसकी डोर पकड़ ली और बेतहाशा होस्टल की ओर दौड़ पड़े।
(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
वे कहते हैं कि वे अपनी इच्छाएँ इसलिए दबाते हैं ताकि छोटा भाई बिगड़ न जाए। वे उसे पढ़ाई के लिए डाँटते और समझाते रहते हैं।
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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
परीक्षा पास करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। असली बात है कि पढ़ाई से हमारी समझ और बुद्धि का विकास हो, ताकि हम जीवन की समस्याओं को सही ढंग से सुलझा सकें।
जैसे मृत्यु और संकट के बीच भी मनुष्य मोह-माया नहीं छोड़ पाता, वैसे ही भाई साहब की डाँट-फटकार सुनकर भी छोटा भाई खेल-कूद का मोह नहीं छोड़ पाता था।
जैसे मजबूत नींव के बिना मकान टिकाऊ नहीं बनता, वैसे ही शिक्षा की नींव मजबूत होनी चाहिए। भाई साहब इसी बहाने अपने एक कक्षा में दो-तीन साल लगाने को उचित ठहराते हैं। इसमें हल्का व्यंग्य भी है।
लेखक कटी पतंग लूटने दौड़ रहा था। उसकी आँखें आकाश में थीं और मन धीरे-धीरे नीचे आती पतंग में लगा था। पतंग ऐसी लग रही थी मानो कोई आत्मा स्वर्ग से उदास मन से नया जन्म लेने धरती की ओर आ रही हो।
भाषा अध्ययन
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| नसीहत | सलाह, उपदेश |
| रोष | क्रोध, गुस्सा |
| आज़ादी | स्वतंत्रता, स्वाधीनता |
| राजा | नृप, भूपति |
| ताज्जुब | आश्चर्य, अचंभा |
| मुहावरा | वाक्य |
|---|---|
| सिर पर नंगी तलवार लटकना | परीक्षा पास आते ही विद्यार्थियों के सिर पर नंगी तलवार लटकने लगती है। |
| आड़े हाथों लेना | देर से आने पर शिक्षक ने राहुल को आड़े हाथों लिया। |
| अंधे के हाथ बटेर लगना | बिना पढ़े पास होना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है। |
| लोहे के चने चबाना | पहाड़ पर सड़क बनाना लोहे के चने चबाने जैसा कठिन काम है। |
| दाँतों पसीना आना | भारी संदूक उठाने में मजदूर को दाँतों पसीना आ गया। |
| ऐरा-गैरा नत्थू खैरा | इस सभा में ऐरे-गैरे नत्थू खैरे को प्रवेश नहीं मिलेगा। |
| प्रकार | शब्द |
|---|---|
| तत्सम | चेष्टा, सूक्तिबाण, आधिपत्य, प्रातःकाल, विद्वान, निपुण, अवहेलना |
| तद्भव | जानलेवा, आँखफोड़, पन्ना, भाई साहब |
| देशज | घुड़कियाँ, मेला-तमाशा, फटकार |
| आगत (अंग्रेजी) | स्पेशल, स्कीम, टाइम-टेबिल |
| आगत (उर्दू/अरबी-फ़ारसी) | तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, जमात, हर्फ़, मसलन |
| वाक्य | क्रिया का प्रकार |
|---|---|
| (क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया। | सकर्मक |
| (ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा। | अकर्मक |
| (ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा। | सकर्मक |
| (घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। | सकर्मक |
| (ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो। | सकर्मक |
| (च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था। | अकर्मक |
विचार — वैचारिकइतिहास — ऐतिहासिकसंसार — सांसारिकदिन — दैनिकनीति — नैतिकप्रयोग — प्रायोगिकअधिकार — आधिकारिक
योग्यता विस्तार और परियोजना कार्य
परीक्षा भवन,
दिनांक : ............
प्रिय अनुज रोहन,
शुभाशीर्वाद।
तुम्हारा पत्र मिला। यह जानकर खुशी हुई कि तुम छात्रावास में अच्छी तरह रह रहे हो। पढ़ाई के लिए रोज का समय तय करो और उसका पालन करो। खेल-कूद भी जरूरी है, पर पढ़ाई के समय पूरा ध्यान पढ़ाई पर रखो। जो पाठ समझ न आए, उसे शिक्षक से पूछने में संकोच मत करना। रटने के बजाय समझकर पढ़ो।
समय पर भोजन करना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना। माँ-पिताजी तुम्हें बहुत याद करते हैं।
तुम्हारा बड़ा भाई,
अमित
‘शिक्षा रटंत विद्या नहीं है’, ‘पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ’ और ‘क्या परीक्षा पास करना ही योग्यता का आधार है’ — इन विषयों पर कक्षा में चर्चा करें। प्रेमचंद की ‘मानसरोवर’ से अन्य कहानियाँ पढ़ें।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तालीम | शिक्षा |
| पुख्ता | मजबूत |
| तम्बीह | डाँट-डपट |
| सामंजस्य | तालमेल |
| मसलन | उदाहरणतः |
| चेष्टा | कोशिश |
| जमात | कक्षा |
| हर्फ़ | अक्षर |
| लताड़ | डाँट-डपट |
| सूक्ति-बाण | तीखी बातें |
| अवहेलना | तिरस्कार |
| नसीहत | सलाह |
| फ़जीहत | अपमान |
| अव्वल | प्रथम |
| आधिपत्य | प्रभुत्व |
| महीप | राजा |
| मुमतहिन | परीक्षक |
| हिमाकत | बेवकूफ़ी |
| किफ़ायत | बचत |
| जलील | अपमानित |
| प्राणांतक | प्राण लेने वाला |
| स्वच्छंदता | आज़ादी |
| कनकौआ | पतंग |
| अदब | इज़्ज़त |
| ज़हीन | प्रतिभावान |
| तजुरबा | अनुभव |
| बदहवास | बेहाल |
| मुहताज | दूसरे पर आश्रित |