कक्षा 5 हिंदी · वीणा · CBSE

3. चाँद का कुरता

कविता ‘चाँद का कुरता’ के सभी अभ्यास और पठन-सामग्री ‘जागो प्यारे’ — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT वीणा, कक्षा 5.

Advertisement

इस पृष्ठ पर कविता ‘चाँद का कुरता’ के सभी प्रश्नों के उत्तर और पठन-सामग्री ‘जागो प्यारे’ दी गई है।

कविता का सार : यह कविता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की है। एक दिन चाँद ने माँ से हठ किया कि मुझे ऊन का मोटा झिंगोला सिलवा दो। रात भर सन-सन ठंडी हवा चलती है। मैं ठिठुर-ठिठुरकर आसमान की यात्रा पूरी करता हूँ। कुछ न हो तो भाड़े का कुरता ही ला दो। माँ ने कहा कि जाड़े की बात ठीक है, पर तू कभी एक नाप में नहीं रहता। कभी अंगुल भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा हो जाता है। किसी दिन दिखाई ही नहीं देता। अब बता, तेरा नाप किस दिन लिवाएँ?

बातचीत के लिए

1आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों?

सुबह सूरज उगते समय और शाम को सूरज डूबते समय आकाश लाल-नारंगी रंग का हो जाता है। वर्षा के बाद इंद्रधनुष निकलता है। पूर्णिमा की रात चाँद और तारे चमकते हैं। इन समयों पर आकाश बहुत सुंदर दिखता है।

2चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?

सूरज कहेगा — “माँ, मैं दिन भर तपता रहता हूँ। मुझे बहुत गरमी लगती है। मेरे लिए पतले, सूती और हल्के रंग के कपड़े सिलवा दो। साथ में एक बड़ी टोपी भी ला दो।”

3आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?
  • दिन में आकाश नीला और रात में काला दिखता है।
  • सुबह-शाम आकाश लाल-नारंगी हो जाता है।
  • वर्षा ऋतु में आकाश में काले बादल छा जाते हैं और बिजली चमकती है।
  • चाँद का आकार रोज़ घटता-बढ़ता है।
4जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?

हम कपड़े का नाप, रंग और कपड़े की किस्म देखते हैं। मौसम के अनुसार कपड़े लेते हैं। कपड़ा पहनकर देखते हैं कि ठीक आता है या नहीं। कीमत भी देखते हैं।

कविता से

1चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है?

(ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।

2कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
(क) एक अंगुल-भर चौड़ा(ख) एक फुट मोटा(ग) किसी दिन बड़ा(घ) किसी दिन छोटा

चारों विकल्प सही हैं।

3कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
(क) ऊन का मोटा झिंगोला(ख) सन-सन चलती हवा(ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा

सोचिए और लिखिए

1कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है?

घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।

2सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?

चाँद माँ से स्वेटर, शॉल, मफलर, ऊनी टोपी, दस्ताने, ऊनी मोज़े और कंबल माँग सकता है।

3जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?

जाड़े में रात भर सन-सन ठंडी हवा चलती है। चाँद को बहुत ठंड लगती है। उसे ठिठुर-ठिठुरकर अपनी आसमान की यात्रा पूरी करनी पड़ती है।

4चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?

चाँद आसमान के सफ़र की बात कर रहा है। वह रात भर आकाश में एक छोर से दूसरे छोर तक चलता है।

अभिभावक और आप

•नीचे दी गई बातें होने पर आपके अभिभावक क्या कहते या करते हैं?
  • रात में कंबल उतार फेंकने पर — माँ उठकर फिर से कंबल ओढ़ा देती हैं और कहती हैं, “ठंड लग जाएगी।”
  • ठंड में आइसक्रीम का हठ करने पर — वे मना करते हैं और कहते हैं, “गला खराब हो जाएगा।”
  • दूध, हरी सब्जियाँ और फल न खाने पर — वे समझाते हैं कि इनसे शरीर मज़बूत होता है।
  • देर तक सोने पर — वे जगाते हैं और कहते हैं, “जल्दी उठो, विद्यालय को देर हो जाएगी।”
  • कोई शिकायत करने आए तो — वे पहले पूरी बात सुनते हैं, फिर मुझे प्यार से समझाते हैं।
  • अच्छे काम पर प्रशंसा या पुरस्कार मिलने पर — वे बहुत खुश होते हैं और मुझे शाबाशी देते हैं।

Advertisement

अनुमान और कल्पना

1आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?

“माँ, बेचारा चाँद रात भर ठंडी हवा में आसमान की यात्रा करता है। वह ठिठुरता रहता है। उसका आकार रोज़ बदलता है, इसलिए उसकी माँ उसका झिंगोला भी नहीं सिलवा पाती।”

2गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है?
  • गरमी में — “माँ, बहुत गरमी है। मुझे पतले सूती कपड़े, टोपी और धूप का चश्मा ला दो।”
  • वर्षा में — “माँ, मैं भीग जाता हूँ। मुझे रेनकोट, छाता और बरसाती जूते ला दो।”
3चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा?

चाँद का आकार रोज़ बदलता है। नया कुरता कुछ दिन बाद छोटा या बड़ा हो जाएगा। भाड़े का कुरता लौटाकर दूसरे नाप का लाया जा सकता है। इसलिए उसने भाड़े का कुरता लाने को कहा होगा।

4यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता?

कुरता केवल एक दिन ठीक आता। अगले दिन चाँद के घटने या बढ़ने से वह ढीला या तंग हो जाता। माँ को रोज़ नया कुरता सिलवाना पड़ता।

भाषा की बात

1‘भर’ की सहायता से पाँच वाक्य लिखिए।
  1. माँ ने कटोरी भर खीर दी।
  2. बच्चे रात भर जागते रहे।
  3. मेरी जेब में मुट्ठी भर चने हैं।
  4. किसान साल भर मेहनत करता है।
  5. पूरे गाँव भर में मेले की चर्चा थी।
2अपनी बात पर बल देने के लिए शब्दों को दो बार प्रयोग करके पाँच वाक्य लिखिए।
  1. बच्चे धीरे-धीरे चल रहे थे।
  2. बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले हैं।
  3. माँ ने गरम-गरम रोटियाँ परोसीं।
  4. बच्चा रो-रोकर सो गया।
  5. हमने मेले में घूम-घूमकर खिलौने देखे।
3कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर लिखिए —
पंक्तिसंज्ञासर्वनामविशेषणक्रिया
हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।हठ, चाँद, दिन, मातायहएककर बैठा, बोला
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का।आसमान, सफर, मौसम, जाड़ा—यह (मौसम)है
सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।माँ, ऊन, झिंगोलामुझेमोटा, एकसिलवा दो
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।यात्रा(मैं — छिपा हुआ)किसी (तरह)ठिठुर-ठिठुरकर, पूरी करता हूँ

वाक्यों में प्रयोग —

  • संज्ञा : चाँद रात में चमकता है।
  • सर्वनाम : मुझे कहानी सुनना अच्छा लगता है।
  • विशेषण : दादी ने मोटा कंबल ओढ़ा।
  • क्रिया : माँ ने मेरे लिए कुरता सिलवा दिया।

चाँद का झिंगोला

1चाँद और माँ के संवाद को आगे बढ़ाइए।

माँ : एक उपाय है। मैं तेरे लिए एक बड़ी-सी ऊनी चादर बुन देती हूँ।
चाँद : चादर? उससे क्या होगा, माँ?
माँ : तू छोटा हो या बड़ा, चादर तुझे पूरा ढक लेगी।
चाँद : वाह माँ! आप कितनी समझदार हैं। अब मुझे ठंड नहीं लगेगी।

•चाँद और कपड़े के दुकानदार का संवाद आगे बढ़ाइए।

चाँद : तो आप मुझे सबसे बड़े नाप जितना कपड़ा दे दीजिए।
दुकानदार : पर जब आप छोटे हो जाओगे, तब कपड़ा बहुत ढीला हो जाएगा।
चाँद : फिर कोई ऐसा कपड़ा दिखाइए जो खिंचकर बड़ा-छोटा हो सके।
दुकानदार : हाँ, यह ऊनी खिंचने वाला कपड़ा ले जाओ। यह हर नाप में आ जाएगा।
चाँद : धन्यवाद दुकानदार जी! यही ठीक रहेगा।

•चाँद और दर्ज़ी का संवाद आगे बढ़ाइए।

दर्ज़ी : तो फिर ऐसा कुरता सिल देता हूँ जिसमें डोरी लगी हो।
चाँद : डोरी से क्या होगा?
दर्ज़ी : डोरी खींचकर तुम कुरता छोटा और ढीला करके बड़ा कर सकोगे।
चाँद : यह तो बहुत अच्छा उपाय है! अब माँ भी मान जाएँगी।

कविता से आगे

1क्या चाँद की तरह आप भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करते हैं? आप अपनी माँ को इसके लिए कैसे मनाते हैं?

हाँ, मैं कभी-कभी नई साइकिल या खिलौने के लिए हठ करता/करती हूँ। मैं माँ से प्यार से बात करता/करती हूँ। मैं वादा करता/करती हूँ कि मन लगाकर पढ़ूँगा/पढ़ूँगी और घर के कामों में मदद करूँगा/करूँगी।

2आपकी माँ आपको किसी काम के लिए कैसे मनाती हैं?

माँ प्यार से समझाती हैं। कभी कहती हैं कि काम पूरा करोगे तो शाम को पार्क ले चलूँगी। कभी कहानी सुनाने का वादा करती हैं।

3गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए आपकी माँ आपको क्या कहती अथवा क्या-क्या करती हैं?
  • गरमी में — माँ धूप में बाहर जाने से मना करती हैं। खूब पानी पीने को कहती हैं और सूती कपड़े पहनाती हैं।
  • सर्दी में — माँ स्वेटर, टोपी और मोज़े पहनाती हैं। गरम दूध पिलाती हैं।
  • वर्षा में — माँ रेनकोट और छाता देती हैं। भीगने पर तुरंत कपड़े बदलवाती हैं।

सोचिए, समझिए और बताइए

1मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा?

चाँद इशारों से बताएगा। वह हाथ बाँधकर काँपेगा, ताकि माँ समझ जाएँ कि उसे ठंड लगती है। फिर वह किसी के कुरते की ओर इशारा करेगा। वह चित्र बनाकर भी अपनी बात बता सकता है।

2मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा?

चाँद मित्र के हाथ में एक पूरी गोल रोटी देगा और कहेगा कि पूर्णिमा को मैं ऐसा होता हूँ। फिर आधी रोटी देकर आधे चाँद के बारे में बताएगा। फिर रोटी का पतला टुकड़ा देकर बताएगा कि मैं ऐसा पतला भी हो जाता हूँ। अमावस्या को खाली हाथ रखकर बताएगा कि उस दिन मैं दिखाई नहीं देता।

पढ़िए और समझिए

2अब एक रोचक विज्ञापन तैयार कीजिए जिसमें आप अपने लिए कोई वस्तु मँगवा रहे हों।

विज्ञापन — चाहिए एक जादुई बस्ता!
क्या आप बना सकते हैं ऐसा बस्ता जो कभी भारी न लगे?
आवश्यकता : बस्ते में सब किताबें आ जाएँ। उसमें पानी की बोतल और टिफ़िन के लिए अलग जेब हो। वर्षा में किताबें न भीगें।
पुरस्कार : बस्ता बनाने वाले को मिलेगा मेरा सबसे सुंदर चित्र!
संपर्क करें : कक्षा 5, मेरा विद्यालय।
जल्दी कीजिए, क्योंकि मेरा पुराना बस्ता फट गया है!

पहले भाग में दिया गया ‘चाँद की माँ की विशेष घोषणा’ विज्ञापन पढ़कर समझने के लिए है।

आपकी कलाकारी

पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत

•चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं?
  • चंद्रग्रहण — जब पृथ्वी, सूर्य और चाँद के बीच आ जाती है, तब पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। यह पूर्णिमा के दिन होता है।
  • सूर्यग्रहण — जब चाँद, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। यह अमावस्या के दिन होता है।

बूझो तो जानें

•पहेलियों के उत्तर
  1. तन है मेरा हरा-भरा, रस से रहता सदा भरा… — तरबूज
  2. हम दोनों हैं पक्के मित्र, करते रहते काम विचित्र… — हाथ का पंजा

जागो प्यारे

यह पठन-सामग्री है। इस कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं।

•कविता का भाव

माँ अपने बच्चे को प्यार से जगा रही है। वह कहती है कि आँखें खोलो, मैं पानी लाई हूँ, मुँह धो लो। रात बीत गई है। कमल खिल गए हैं और उन पर भौंरे झूल रहे हैं। चिड़ियाँ पेड़ों पर चहक रही हैं। सुंदर हवा चल रही है। आकाश में लाली छा गई है। सूरज उग आया है और पानी में उसकी सुनहरी छाया पड़ रही है। ऐसा सुंदर समय सोकर मत गँवाओ।

1माँ बच्चे को क्यों जगा रही है?

सुबह हो गई है और सूरज उग आया है। माँ नहीं चाहती कि बच्चा सोकर सुंदर सुबह गँवाए।

2सुबह होने पर प्रकृति में क्या-क्या होता है?

कमल खिल जाते हैं। भौंरे उन पर झूलते हैं। चिड़ियाँ चहकती हैं। सुंदर हवा चलती है। आकाश में लाली छा जाती है।