9. न्याय
विष्णु प्रभाकर के एकांकी ‘न्याय’ के सभी अभ्यास — चित्रों से मुहावरे, प्रवाह चार्ट और पक्षी संरक्षण — सरल भाषा में। NCERT वीणा, कक्षा 5.
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एकांकी का सार : यह विष्णु प्रभाकर का लिखा एकांकी (नाटक) है। कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ अपने सखा के साथ राज-उद्यान में संध्या का सुंदर दृश्य देख रहे थे। तभी राजहंसों के झुंड में से एक हंस तीर लगने से घायल होकर सिद्धार्थ की गोद में आ गिरा। सिद्धार्थ ने तीर निकाला और उसे प्यार से सहलाया। देवदत्त ने आकर कहा कि हंस मेरा है, क्योंकि मैंने इसे तीर मारा है। सिद्धार्थ ने कहा कि मैंने इसे बचाया है और बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है। झगड़ा महाराज शुद्धोदन के दरबार में पहुँचा। मंत्री ने हंस को आसन पर बिठाकर दोनों से उसे बुलाने को कहा। हंस देवदत्त से डरकर चीखा, पर सिद्धार्थ के बुलाते ही उड़कर उनकी गोद में आ गया। इस तरह हंस सिद्धार्थ को मिला।
बातचीत के लिए
शाम को आकाश लाल-नारंगी हो जाता है। सूरज पश्चिम में छिप जाता है। पक्षी चहचहाते हुए अपने घोंसलों में लौटते हैं। गायें चरकर घर लौटती हैं। धीरे-धीरे अँधेरा होने लगता है और हवा ठंडी हो जाती है।
हाँ, एक बार गरमी में एक कबूतर हमारी छत पर बेहोश-सा पड़ा था। मैंने उसे छाँव में रखा और कटोरी में पानी दिया। थोड़ी देर बाद वह पानी पीकर उड़ गया। मुझे बहुत खुशी हुई।
मैं भी हंस से ही पूछता/पूछती। मैं कहता/कहती कि हंस को बीच में बिठाओ और दोनों उसे बुलाओ। हंस जिसके पास जाए, वही उसका सच्चा मित्र है। मैं यह भी कहता/कहती कि पक्षी ठीक होने पर उसे आकाश में छोड़ दिया जाए।
मैं सखा को सखी के रूप में और मंत्री को महिला मंत्री के रूप में प्रस्तुत करना चाहूँगा/चाहूँगी। सखा की तरह सखी भी सिद्धार्थ के साथ बातें कर सकती है और मरहम ला सकती है। महिला मंत्री भी बुद्धिमानी से न्याय कर सकती है।
सोचिए और लिखिए
सिद्धार्थ ने करुणा से हंस को सँभाला। उन्होंने उसके शरीर से तीर निकाला और प्यार से उस पर हाथ फेरा। उन्होंने सखा को राजवैद्य से मरहम लाने भेजा।
मंत्री ने हंस को आसन पर बिठाकर दोनों से उसे बुलाने को कहा। देवदत्त के बुलाने पर हंस डरकर चीखा। सिद्धार्थ के बुलाते ही वह उड़कर उनकी गोद में आ गया। हंस ने स्वयं सिद्धार्थ को चुना, इसलिए हंस सिद्धार्थ को मिला।
- सिद्धार्थ व उसके सखा का प्रकृति को निहारना।
- आकाश में उड़ते राजहंसों को देखना।
- तीर लगे पक्षी का घायल होकर गिरना।
- सिद्धार्थ का हंस का तीर निकालना और मरहम लगवाना।
- देवदत्त का आकर हंस पर अधिकार जताना।
- झगड़ा सुलझाने के लिए महाराज के दरबार में जाना।
- मंत्री का हंस को आसन पर बिठाकर दोनों से बुलवाना।
- हंस का उड़कर सिद्धार्थ की गोद में आना और महाराज का निर्णय।
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अनुमान और कल्पना
“अरे! हमारे साथी को तीर लग गया। किसी निर्दयी ने उसे मारा है। जल्दी भागो, नहीं तो हमें भी तीर लग जाएगा। हे भगवान, हमारे साथी को बचा लेना!”
देवदत्त ने ही हंस को तीर मारा था। हंस उससे डरता था। वह जानता था कि देवदत्त उसे फिर चोट पहुँचा सकता है। इसलिए वह देवदत्त के पास नहीं गया।
“सिद्धार्थ, मुझे तुम पर गर्व है। तुमने एक निर्दोष पक्षी की रक्षा की। सदा ऐसे ही दयालु बने रहना। इस हंस की अच्छी देखभाल करना।”
हंस : राजकुमार, उस दिन मैं अपने साथियों के साथ उड़ रहा था। अचानक एक तीर मेरे पंख में लगा। मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं नीचे गिरने लगा।
सिद्धार्थ : तब तुम मेरी गोद में आ गिरे।
हंस : हाँ, आपने मेरा तीर निकाला और मरहम लगवाया। आपके स्पर्श से मेरा डर चला गया।
सिद्धार्थ : और दरबार में तुम्हें कैसा लगा?
हंस : देवदत्त को देखकर मैं काँप गया। पर आपकी आवाज़ सुनते ही मैं उड़कर आपकी गोद में आ गया। आपने मेरी जान बचाई। मैं आपका यह उपकार कभी नहीं भूलूँगा।
भाषा की बात
- अनुस्वार (ं) वाले शब्द — हंस, रंगमंच, संध्याकाल, मंत्री, शांति, कंठ
- चंद्रबिंदु (ँ) वाले शब्द — हँसकर, आँखें, माँ, ऊँचा, दूँगा, हूँ
वाक्य —
- तालाब में सफ़ेद हंस तैर रहा है।
- मंत्री जी ने सही न्याय किया।
- पुस्तकालय में शांति रखनी चाहिए।
- बच्चे चुटकुला सुनकर खूब हँसे।
- माँ ने मुझे कहानी सुनाई।
- दादाजी की आँखें कमज़ोर हो गई हैं।
(क) सूर्य का उदय पूर्व दिशा में और अस्त पश्चिम दिशा में होता है।
(ख) उसने मारा है परंतु मैंने बचाया है।
(ग) इस निर्दोष पक्षी को मारने वाला दोषी है।
(घ) इस जटिल समस्या का हल बहुत सरल है।
(क) मगरमच्छ के आँसू बहाना
(ख) आँख-मिचौनी खेलना
(ग) एक और एक ग्यारह
(घ) अक्ल बड़ी या भैंस
(ङ) बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद!
(च) नौ दो ग्यारह होना
(छ) लाल-पीला होना
(ज) दाँतों तले उँगली दबाना
(झ) पेट में चूहे कूदना
(ञ) सूरज को दीपक दिखाना
पाँच मुहावरों/लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग —
- नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना) — पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
- लाल-पीला होना (बहुत गुस्सा होना) — खिड़की का काँच टूटा देखकर पिताजी लाल-पीले हो गए।
- दाँतों तले उँगली दबाना (बहुत हैरान होना) — जादूगर का खेल देखकर सबने दाँतों तले उँगली दबा ली।
- पेट में चूहे कूदना (बहुत भूख लगना) — खेलकर लौटे तो मेरे पेट में चूहे कूद रहे थे।
- एक और एक ग्यारह (मिलकर काम करने से शक्ति बढ़ती है) — हम दोनों ने मिलकर काम जल्दी पूरा कर लिया, सच है एक और एक ग्यारह होते हैं।
पाठ से आगे
प्रिय भाई देवदत्त,
मुझे पता है कि तुम हंस के कारण मुझसे नाराज़ हो। मैं तुमसे झगड़ना नहीं चाहता था। तुम एक अच्छे धनुर्धर हो। पर अपना निशाना निर्दोष पक्षियों पर मत साधना। पक्षियों को भी हमारी तरह दर्द होता है। आओ, हम दोनों मिलकर हंस की देखभाल करें। जब वह ठीक हो जाएगा, तब हम उसे आकाश में उड़ा देंगे।
आपका भाई,
सिद्धार्थ
मैं करुणा की तरह फूलों की देखभाल करूँगा/करूँगी। मैं पौधों को खाद-पानी दूँगा/दूँगी और फूल नहीं तोड़ूँगा/तोड़ूँगी। पौधे पर लगे फूल सबको सुंदरता और सुगंध देते हैं। तोड़ने पर वे जल्दी मुरझा जाते हैं।
कारण —
- पतंग के माँझे से पक्षी घायल हो जाते हैं।
- पेड़ों की कटाई से उनके घोंसले उजड़ जाते हैं।
- कारखानों के धुएँ, गंदे पानी और कचरे से प्रदूषण होता है।
- मोबाइल टावर की तरंगों से भी पक्षियों को परेशानी होती है।
बचाव के उपाय —
- हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएँगे।
- छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखेंगे।
- चीनी या काँच लगे माँझे का प्रयोग नहीं करेंगे।
- पक्षियों के लिए लकड़ी के छोटे घर (घोंसले) लगाएँगे।
- कचरा और प्लास्टिक इधर-उधर नहीं फेंकेंगे।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
हमारे गाँव के सरपंच जी और हमारे पड़ोसी दादाजी के पास लोग अपनी समस्याएँ लेकर जाते हैं। वे अनुभवी, ईमानदार और शांत स्वभाव के हैं। वे सबकी बात ध्यान से सुनकर सही सलाह देते हैं।
पुस्तकालय से गौतम बुद्ध की जातक कथाएँ और राजा विक्रमादित्य के न्याय की कथाएँ ढूँढ़कर पढ़िए और साथियों से उन पर बातचीत कीजिए।
मैं भी सिद्धार्थ
चित्रों में दिखाया गया है — पक्षियों के लिए पानी रखना, बुज़ुर्ग को सड़क पार कराना, प्यासे बच्चे को पानी पिलाना और गायों को चारा खिलाना।
बुज़ुर्ग को सड़क पार कराना — एक बूढ़े दादाजी लाठी लेकर सड़क पार करना चाहते थे। सड़क पर बहुत गाड़ियाँ थीं। दो बच्चों ने उनका हाथ पकड़ा। हरी बत्ती होने तक वे रुके रहे। फिर ज़ेब्रा क्रॉसिंग से उन्हें सावधानी से सड़क पार कराई। दादाजी ने बच्चों को ढेर सारा आशीर्वाद दिया।
सिद्धार्थ उसे फूलों को छूकर और सूँघकर उनकी कोमलता और सुगंध का अनुभव करवाते। ठंडी हवा और धूप का स्पर्श महसूस करवाते। उसे पेड़ की छाल, पत्तों और पानी को छूने देते। वे हाथ के इशारों और स्पर्श से उससे बातें करते।
मेरा पक्षी
पुस्तक में दिए चित्रों के क्रम के अनुसार कागज़ को मोड़कर अपने लिए कागज़ का एक पक्षी बनाइए। इसमें अभिभावक और शिक्षक की सहायता लीजिए। (कलाकारी की गतिविधि)