कक्षा 6 हिंदी · मल्हार · CBSE

1. मातृभूमि

सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘मातृभूमि’ के सभी अभ्यास, ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा और पठन-सामग्री ‘पुष्प की अभिलाषा’ — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT मल्हार, कक्षा 6.

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इस पृष्ठ पर कविता ‘मातृभूमि’ के सभी प्रश्नों के उत्तर, ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा और पठन-सामग्री ‘पुष्प की अभिलाषा’ दी गई है। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं। आप अपने शब्दों में भी उत्तर लिख सकते हैं।

कविता का सार : यह कविता सोहनलाल द्विवेदी की है। कवि अपनी मातृभूमि भारत का गुणगान करते हैं। उत्तर में ऊँचा हिमालय आकाश को चूमता है। नीचे सागर उसके चरण धोता है। गंगा-यमुना जैसी नदियाँ लहराती हैं। पहाड़ों से झरने झरते हैं। आम के घने बागों में कोयल कूकती है। मलय पवन तन-मन को सँवारती है। इसी धरती पर राम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध ने जन्म लिया। कवि कहते हैं कि यही मेरी जन्मभूमि, कर्मभूमि और मातृभूमि है।

पाठ से — मेरी समझ से

1(क) सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए —

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है? — सिंधु ★

(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से — भारत की प्रशंसा की गई है। ★

2(ख) आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? कारण बताइए।
  • सिंधु — ‘नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है’ में सिंधु का अर्थ समुद्र है। भारत के दक्षिण में हिंद महासागर है, इसलिए यही उत्तर सही है।
  • भारत की प्रशंसा — कविता में भारत की प्रकृति, नदियों, महापुरुषों और धर्म, सबका वर्णन है। ये सब मिलकर भारत की प्रशंसा करते हैं। इसलिए यह उत्तर सबसे सटीक है।

मिलकर करें मिलान

1शब्दों को उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए —
शब्दअर्थ या संदर्भ
1. हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
2. त्रिवेणीतीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
3. मलय पवनदक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
4. सिंधुसमुद्र, एक नदी का नाम।
5. गंगा-यमुनाभारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
6. रघुपतिश्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
7. श्रीकृष्णवसुदेव के पुत्र वासुदेव।
8. सीताजनक की पुत्री जानकी।
9. गीताएक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’।
10. गौतम बुद्धएक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।

पंक्तियों पर चर्चा

1“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी। वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।” — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।

कवि कहते हैं कि भारत वीरों की युद्ध-भूमि है। यहाँ वीरों ने देश की रक्षा के लिए युद्ध किए। यह गौतम बुद्ध की भूमि भी है, जिन्होंने संसार को शांति और दया का संदेश दिया। यही भूमि मेरी माँ के समान है। मैंने इसी भूमि पर जन्म लिया है। इसलिए मुझे इस पर गर्व है।

सोच-विचार के लिए

1(क) कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए —
  1. कोयल कहाँ रहती है? — कोयल आम के घने बागों (अमराइयों) में रहती है।
  2. तन-मन कौन सँवारती है? — बहती हुई मलय पवन तन-मन सँवारती है।
  3. झरने कहाँ से झरते हैं? — झरने भारत की पहाड़ियों से झरते हैं।
  4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था? — श्रीकृष्ण ने वंशी (बाँसुरी) और पवित्र गीता सुनाई थी।
  5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया? — गौतम बुद्ध ने भारत भूमि का यश बढ़ाया।
2(ख) कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है? किसका पानी लहर रहा है?
  • गंगा, यमुना और त्रिवेणी के तट पर पग-पग पर निराली छटा छहर रही है।
  • गंगा, यमुना और त्रिवेणी (संगम) नदियों का पानी लहर रहा है।

कविता की रचना

1कविता को ध्यान से पढ़कर उसकी विशेष बातें लिखिए।
  • कविता का एक शीर्षक है — ‘मातृभूमि’।
  • हर चार पंक्तियों के बाद ‘वह ... भूमि मेरी’ वाली पंक्तियाँ बार-बार आती हैं।
  • पंक्तियों के अंत के शब्द मिलते-जुलते हैं, जैसे — चूमता है/झूमता है, सीता/गीता, बढ़ाया/दिखाया।
  • लय बनाने के लिए शब्दों को थोड़ा बदला गया है, जैसे — ‘यमुना’ की जगह ‘यमुन’।
  • ‘पग पग’ जैसे शब्द-युग्म का प्रयोग हुआ है।
  • कविता में प्रकृति और महापुरुष, दोनों का वर्णन है।

मिलान

1मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को जोड़िए —
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।
2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

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अनुमान या कल्पना से

1(क) कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?

आम के बागों में बहार आई है, इसलिए कोयल खुश होकर पुकार रही होगी। वह अपने साथियों को पुकार रही होगी। वह मीठी आवाज़ में ‘कुहू-कुहू’ करके पुकार रही होगी।

2(ख) पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?

मलय पवन भारत के लोगों का तन-मन सँवारती है। यह पवन ठंडी और सुगंधित होती है। इसके छूने से शरीर को ठंडक मिलती है और मन प्रसन्न हो जाता है।

शब्दों के रूप

1(क) शब्द-जोड़ों के अर्थ लिखिए —
  • घर-घर — हर घर में
  • बाल-बाल — हर बाल; (बाल-बाल बचना — बड़ी मुश्किल से बचना)
  • साँस-साँस — हर साँस में
  • देश-देश — हर देश में
  • पर्वत-पर्वत — हर पर्वत पर
2(ख) ‘भूमि’ शब्द से नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ लिखिए —
  • तपोभूमि — तपस्या करने का स्थान
  • देवभूमि — देवताओं की भूमि
  • भारतभूमि — भारत देश की धरती
  • जन्मभूमि — जहाँ जन्म हुआ हो
  • कर्मभूमि — जहाँ कोई काम करता हो
  • कर्तव्यभूमि — जहाँ अपना कर्तव्य निभाया जाए
  • मरुभूमि — रेगिस्तान
  • मलयभूमि — मलय पर्वत का क्षेत्र
  • मल्लभूमि — कुश्ती लड़ने का स्थान, अखाड़ा
  • यज्ञभूमि — यज्ञ करने का स्थान
  • रंगभूमि — नाटक खेलने का मंच
  • रणभूमि — युद्ध का मैदान
  • सिद्धभूमि — जहाँ साधना सफल हुई हो

थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

1केवल एक मात्रा के अंतर वाले शब्दों की सूची बनाइए।
दया — दियाघड़ा — घड़ीदिन — दीनकल — कालमल — मालबल — बालपिता — पीतासुत — सूतकुल — कूलमेला — मैलाचल — चालजल — जाल

पाठ से आगे — आपकी बात

1(क) आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उसकी विशेषताएँ बताइए।

मैं महाराष्ट्र के पुणे शहर में रहता/रहती हूँ। मुझे मेरा शहर बहुत अच्छा लगता है। यहाँ की जलवायु सुहावनी है। चारों ओर सह्याद्रि की पहाड़ियाँ हैं।

यहाँ पूरनपोली, मिसल-पाव और भाकरी बड़े चाव से खाए जाते हैं। शनिवारवाड़ा, सिंहगढ़ किला और आगा खान महल यहाँ के प्रसिद्ध स्थान हैं। गणेशोत्सव यहाँ बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

2(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन-सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?

मेरी दादी मुझे सबसे प्रिय हैं। वे सुबह जल्दी उठती हैं और पूजा करती हैं। वे मुझे रोज़ रात को कहानियाँ सुनाती हैं। वे सबसे प्यार से बात करती हैं। वे पड़ोसियों की भी मदद करती हैं। मुझे उनका मीठा स्वभाव और मेहनत सबसे अच्छी लगती है।

वंशी-से

1शब्द-जाल से फूँक कर बजाए जाने वाले वाद्यों के नाम खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।

शब्द-जाल में ये आठ वाद्य मिलते हैं —

अलगोजाबीनबाँसुरीसींगीशहनाईनादस्वरमभंकोराशंख
  • अलगोजा — पहला स्तंभ, ऊपर से नीचे (अ-ल-गो-जा)
  • शहनाई — पहली पंक्ति (श-ह-ना-ई)
  • बाँसुरी — अंतिम स्तंभ (बाँ-सु-री)
  • नादस्वरम — बीच का स्तंभ (ना-द-स्व-र-म)
  • भंकोरा — दूसरा स्तंभ (भं-को-रा)
  • शंख — चौथा स्तंभ (शं-ख)
  • बीन — चौथी पंक्ति (बी-न)
  • सींगी — पाँचवीं पंक्ति (सीं-गी)

आज की पहेली

1अक्षरों को मिलाकर सार्थक शब्द बनाइए —
क्रमअक्षरशब्द
1स म ह ग रमहासागर
2ह म य लहिमालय
3ग गगंगा
4भ त रभारत
5ल क यकलियाँ
6व न पपवन

‘ल क य’ से ‘कोयल’ शब्द भी बन सकता है।

झरोखे से — वंदे मातरम्

‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह हमारा राष्ट्रगीत है। स्वतंत्रता की लड़ाई में यह गीत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। इसमें कवि भारत माता को प्रणाम करते हैं। भारत जल से भरा, फलों से भरा और अन्न के हरे खेतों वाला देश है। मलय की ठंडी पवन यहाँ बहती है। चाँदनी रातें और खिले फूलों वाले पेड़ इसकी शोभा बढ़ाते हैं। भारत माता सुख और वरदान देने वाली है।

साझी समझ

1‘मातृभूमि’ और ‘वंदे मातरम्’ में कौन-सी बातें एक जैसी हैं और कौन-सी अलग हैं?

एक जैसी बातें —

  • दोनों में भारत को माता के रूप में देखा गया है।
  • दोनों में भारत की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन है।
  • दोनों में ‘मलय पवन’ का उल्लेख है।
  • दोनों देशभक्ति की भावना जगाते हैं।

अलग बातें —

  • ‘मातृभूमि’ हिंदी में है, ‘वंदे मातरम्’ संस्कृत में है।
  • ‘मातृभूमि’ में राम, सीता, श्रीकृष्ण और बुद्ध जैसे महापुरुषों का वर्णन है। ‘वंदे मातरम्’ में महापुरुषों का वर्णन नहीं है।
  • ‘वंदे मातरम्’ में भारत माता को प्रणाम किया गया है। ‘मातृभूमि’ में भारत का गुणगान किया गया है।

पढ़ने के लिए : पुष्प की अभिलाषा

कविता का भाव : यह कविता माखनलाल चतुर्वेदी की है। इसमें एक फूल अपनी इच्छा बताता है। फूल कहता है कि मैं देवबालाओं के गहनों में गूँथा जाना नहीं चाहता। मैं प्रेमी की माला में बिंधना भी नहीं चाहता। मैं राजाओं के शव पर चढ़ना या देवताओं के सिर पर चढ़कर इतराना भी नहीं चाहता। फूल माली से कहता है कि मुझे तोड़कर उस रास्ते पर फेंक देना जिस रास्ते से वीर सैनिक मातृभूमि के लिए प्राण देने जाते हैं।

1पुष्प की सबसे बड़ी अभिलाषा क्या है?

पुष्प चाहता है कि उसे उस रास्ते पर फेंका जाए जिस पर वीर सैनिक मातृभूमि पर बलिदान देने जाते हैं। वह उन वीरों के पैरों तले बिछना चाहता है।

2पुष्प किन-किन बातों की चाह नहीं करता?
  • देवबाला (सुरबाला) के गहनों में गूँथे जाने की।
  • प्रेमी की माला में बिंधकर प्रिय को ललचाने की।
  • सम्राटों के शव पर डाले जाने की।
  • देवताओं के सिर पर चढ़कर अपने भाग्य पर इतराने की।
3इस कविता से हमें क्या संदेश मिलता है?

हमें अपने देश से सबसे अधिक प्रेम करना चाहिए। देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सबसे अधिक सम्मान के योग्य हैं।