10. परीक्षा
प्रेमचंद की कहानी ‘परीक्षा’ के सभी अभ्यास — दीवान की खोज, दया और साहस की परख, कहावतें, विज्ञापन और चित्रों में अंतर। सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT मल्हार, कक्षा 6.
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इस पृष्ठ पर कहानी ‘परीक्षा’ के सभी प्रश्नों के उत्तर, विपरीतार्थक शब्द, कहावतें, परिधानों का मिलान और चित्रों में अंतर वाली पहेली के उत्तर दिए गए हैं। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।
कहानी का सार : यह कहानी प्रेमचंद की है। देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हो गए थे। उन्होंने महाराज से नौकरी छोड़ने की विनती की। महाराज ने शर्त रखी कि नया दीवान वे ही खोजेंगे। अखबारों में विज्ञापन निकला और सैकड़ों उम्मीदवार देवगढ़ आ पहुँचे। सब एक महीने तक अच्छे होने का दिखावा करने लगे। एक शाम हॉकी के बाद एक किसान की अनाज-भरी गाड़ी नाले के कीचड़ में फँस गई। सब खिलाड़ी उसे देखकर आगे निकल गए। केवल पंडित जानकीनाथ ने पैर में चोट होते हुए भी गाड़ी निकाल दी। वह किसान स्वयं सुजानसिंह थे। अंत में दया और साहस वाले जानकीनाथ को ही दीवान चुना गया।
पाठ से — मेरी समझ से
(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा? — नीतिकुशलता ★
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था? — राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना ★
- कहानी में लिखा है कि राजा साहब अपने अनुभवशील और नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे। इसलिए उन्होंने नया दीवान खोजने का काम उन्हीं को सौंपा।
- दीवान साहब ने स्वयं कहा कि अब उनकी अवस्था ढल गई है। उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही। इसी कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निश्चय किया।
शीर्षक
पूरी कहानी एक परीक्षा पर आधारित है। दीवान के पद के लिए उम्मीदवारों की एक महीने तक परख की गई। उनके रहन-सहन और आचार-विचार को देखा गया। असली परीक्षा तब हुई, जब किसान की गाड़ी नाले में फँसी। इसमें उम्मीदवारों की दया और साहस की परख हुई। इसलिए यह नाम उचित है।
मैं इस कहानी का नाम ‘सच्चा दीवान’ रखूँगा/रखूँगी। जानकीनाथ ने दिखावा नहीं किया। उसने सच्चे मन से किसान की मदद की। इसलिए वही सच्चा दीवान बनने योग्य था।
पंक्तियों पर चर्चा
दीवान के पद के लिए ऐसा व्यक्ति चाहिए था, जिसके मन में दया हो और जो साहसी भी हो। उसका हृदय उदार हो। वह कठिनाई का सामना वीरता से करे। ऐसे गुणों वाले लोग संसार में बहुत कम होते हैं। जो होते हैं, वे पहले ही बहुत प्रसिद्ध और सम्मानित होते हैं। उन तक पहुँचना कठिन होता है।
सोच-विचार के लिए
- मिस्टर ‘अ’ नौ बजे तक सोते थे। अब वे सुबह जल्दी उठकर बगीचे में टहलने लगे।
- मिस्टर ‘द’, ‘स’ और ‘ज’ घर पर नौकरों को तंग करते थे। अब वे ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर बात करने लगे।
- मिस्टर ‘ल’ को किताबों से घृणा थी। अब वे बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने लगे।
- हर कोई नम्रता और सदाचार का देवता बन गया।
- कुछ लोगों ने हॉकी खेलकर अपनी कुशलता दिखाने का प्रयत्न किया।
- किसान की अनाज से भरी गाड़ी नाले के कीचड़ में फँसी है।
- बोझ अधिक है और बैल कमज़ोर हैं।
- किसान बहुत देर से वहाँ अकेला फँसा है।
- वह थक गया है और निराश है।
- उसे किसी से मदद माँगने का साहस नहीं हो रहा।
- सत्कार — रियासत के कर्मचारियों और रईसों की आँखों में सत्कार था। उन्हें एक योग्य और गुणी दीवान मिला था।
- ईर्ष्या — दीवानी के उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी। उन्हें दीवानी नहीं मिली थी, जानकीनाथ को मिल गई थी।
खोजबीन
“उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।”
“लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?”
कहानी की रचना
- चित्रात्मक भाषा है, जैसे — गेंद को लेकर दौड़ते खिलाड़ी ‘लहर’ जैसे और रोकने वाले ‘लोहे की दीवार’ जैसे लगते हैं।
- सुंदर उपमाएँ हैं, जैसे — ‘गेंद किसी दफ्तर के अप्रेंटिस की तरह ठोकरें खाने लगी।’
- उर्दू और हिंदी के मिले-जुले शब्द हैं, जैसे — मुल्क, नसीब, सनद, जनाब, हुजूर।
- मुहावरों और कहावतों का प्रयोग है, जैसे — नाक में दम होना, दिन काटना पहाड़ होना, गहरे पानी पैठने से ही मोती मिलना।
- उम्मीदवारों के नाम ‘अ’, ‘द’, ‘स’, ‘ज’, ‘ल’ रखकर हल्का-सा व्यंग्य किया गया है।
- सुजानसिंह को ‘मनुष्यों का बूढ़ा जौहरी’ और उम्मीदवारों को ‘बगुले’ तथा योग्य व्यक्ति को ‘हंस’ कहा गया है।
- संवाद छोटे और स्वाभाविक हैं।
- अंत में रहस्य खुलता है कि किसान स्वयं सुजानसिंह थे।
समस्या और समाधान
समस्या — उनके अनुभवी दीवान नौकरी छोड़ना चाहते थे। रियासत को नया योग्य दीवान चाहिए था।
समाधान — महाराज ने दीवान की प्रार्थना मान ली। पर शर्त रखी कि नया दीवान वे स्वयं ही खोजेंगे।
समस्या — उन्हें रियासत के लिए दया और साहस वाला योग्य दीवान खोजना था।
समाधान — उन्होंने अखबारों में विज्ञापन दिया। एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन की परख की। फिर किसान का वेश धरकर उनकी असली परीक्षा ली।
समस्या — एक महीने तक उनके आचार-विचार की परख होनी थी। उन्हें अपनी बुरी आदतें छिपानी थीं।
समाधान — उन्होंने अच्छा होने का दिखावा किया। कोई सुबह जल्दी उठने लगा, कोई नम्रता से बोलने लगा, कोई ग्रंथ पढ़ने लगा।
मन के भाव
‘स्वार्थ’, ‘मद’, ‘उदारता’ और ‘वात्सल्य’ प्रश्न में पहले ही दिए गए हैं।
अभिनय : युवक और किसान की बातचीत को समूह में तैयार करके कक्षा में अभिनय के साथ प्रस्तुत कीजिए। (कक्षा गतिविधि)
विपरीतार्थक शब्द
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. आना | जाना |
| 2. गुण | अवगुण |
| 3. आदर | अनादर |
| 4. स्वस्थ | अस्वस्थ |
| 5. कम | अधिक |
| 6. दयालु | निर्दयी |
| 7. योग्य | अयोग्य |
| 8. हार | जीत |
| 9. आशा | निराशा |
कहावत
- अधजल गगरी छलकत जाए — मिस्टर ‘ल’ को किताबों से घृणा थी। फिर भी वे बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने का दिखावा करते थे।
- अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत — जिन उम्मीदवारों ने किसान की मदद नहीं की, वे दीवानी न मिलने पर पछताए होंगे। पर तब पछताना व्यर्थ था।
- एक अनार सौ बीमार — विज्ञापन में एक ही नौकरी थी, पर उम्मीदवार सैकड़ों आ गए।
- जो गरजते हैं वे बरसते नहीं — उम्मीदवार नम्रता और सदाचार का बड़ा दिखावा करते थे। पर किसान की मदद का समय आया तो कोई आगे नहीं आया।
- जहाँ चाह, वहाँ राह — जानकीनाथ के मन में मदद करने की इच्छा थी। पैर में चोट होने पर भी उसने गाड़ी नाले से निकाल दी।
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पाठ से आगे — अनुमान या कल्पना से
यह विज्ञापन सरदार सुजानसिंह ने निकलवाया होगा। महाराज ने नया दीवान खोजने का काम उन्हीं को सौंपा था। विज्ञापन में भी लिखा था कि उम्मीदवार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थित हों।
- दीवान का पद बहुत ऊँचा था।
- इसके लिए ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं था।
- किसी प्रकार की कड़ी शर्त नहीं थी।
- लोगों को लगा कि यह केवल भाग्य का खेल है। इसलिए हर कोई अपना भाग्य आज़माना चाहता था।
विज्ञापन
आवश्यकता है — देवगढ़ रियासत के लिए एक सुयोग्य दीवान की
योग्यता — व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट हो। ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं। विद्या से अधिक कर्तव्य पर ध्यान दिया जाएगा।
चुनाव — एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार की परख होगी।
संपर्क — सरदार सुजानसिंह, दीवान, रियासत देवगढ़।
विज्ञापन चौकोर कागज़ पर हाशिया बनाकर, सुंदर लिखाई और चित्रों के साथ बनाइए।
मुझे दूरदर्शन पर आने वाला ‘पानी बचाओ’ का विज्ञापन अच्छा लगता है। इसमें एक बच्चा नल खुला छोड़ने वाले लोगों को टोकता है। इसकी भाषा सरल है और संदेश अच्छा है। यह हमें पानी बचाना सिखाता है।
विज्ञापनों से लाभ और हानि दोनों होते हैं।
- लाभ — नई वस्तुओं, नौकरियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है। अच्छे संदेश भी मिलते हैं।
- हानि — कई विज्ञापन बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैं। इससे लोग बेकार की चीज़ें खरीद लेते हैं। बच्चे भी जंक फ़ूड जैसी चीज़ों की ज़िद करने लगते हैं।
आगे की कहानी
अगले दिन जानकीनाथ ने दीवान का पद सँभाल लिया। सुजानसिंह ने उसे राज-काज के सारे काम समझाए। जानकीनाथ ने सबसे पहले उस नाले पर पुल बनवाया, ताकि किसी किसान की गाड़ी फिर न फँसे।
वह गरीबों की बात ध्यान से सुनता था और सबके साथ न्याय करता था। कुछ ही वर्षों में देवगढ़ की प्रजा सुखी हो गई। सुजानसिंह को संतोष हुआ कि उन्होंने सही व्यक्ति चुना है।
आपकी बात
मैं भी उम्मीदवारों को कुछ दिन अपने पास रखता/रखती। मैं देखता/देखती कि कौन बड़ों का आदर करता है और कौन दूसरों की मदद करता है। मैं किसी ज़रूरतमंद की मदद का अवसर बनाकर उनकी परख करता/करती। जो बिना दिखावे के सच्चे मन से मदद करता, उसे ही चुनता/चुनती।
गुण — ईमानदारी, अनुशासन, समय की पाबंदी, सबकी मदद करना, सबसे मीठा बोलना और ज़िम्मेदारी निभाना।
परख के लिए —
- कुछ दिन देखूँगा/देखूँगी कि कौन समय पर आता है और कक्षा में शांति रखता है।
- छोटे-छोटे काम सौंपकर देखूँगा/देखूँगी कि कौन उन्हें ठीक से पूरा करता है।
- देखूँगा/देखूँगी कि कौन कमज़ोर साथियों की मदद करता है।
- सहपाठियों की राय भी लूँगा/लूँगी।
नया-पुराना
| मेरे लिए नई वस्तुएँ | मेरे लिए पुरानी वस्तुएँ | परिवार के बड़ों के लिए नई वस्तुएँ | परिवार के बड़ों के लिए पुरानी वस्तुएँ |
|---|---|---|---|
| स्मार्टफ़ोन | रेडियो | टी.वी. | लालटेन |
| टैबलेट | टेलीफ़ोन (तार वाला) | मिक्सर | सिल-बट्टा |
| स्मार्ट घड़ी | चिट्ठी | गैस का चूल्हा | मिट्टी का चूल्हा |
| इलेक्ट्रिक स्कूटर | टेप रिकॉर्डर | कंप्यूटर | टाइपराइटर |
यह नमूना उत्तर है। अपने परिवार से पूछकर उत्तर लिखिए।
वाद-विवाद
- पक्ष में — खेल भी सीखना पड़ता है। इसमें नियम, अभ्यास और कौशल होता है। खेल से अनुशासन, टीम-भावना और धैर्य सीखते हैं। खेलों में भी पढ़ाई और प्रशिक्षण होता है।
- विपक्ष में — विद्या का अर्थ पढ़ाई और ज्ञान है। खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने और मनोरंजन के लिए है। इससे पुस्तकों जैसा ज्ञान नहीं मिलता।
वाद-विवाद कक्षा में समूह बनाकर कीजिए। हर समूह को 5-5 मिनट बोलने का समय मिलेगा।
अच्छाई और दिखावा
- मेहनत करते हैं और कसरत करते हैं।
- साफ़-सुथरे रहते हैं और अच्छे कपड़े पहनते हैं।
- मीठा और नम्रता से बोलते हैं।
- बड़ों का आदर करते हैं।
- कुछ लोग केवल दूसरों के सामने अच्छे काम करते हैं।
हाँ, दोनों में बड़ा अंतर है। अच्छा दिखाना केवल दिखावा है। यह कुछ समय के लिए होता है, जैसे उम्मीदवारों का एक महीने का अच्छा व्यवहार। अच्छा होना मन का सच्चा गुण है। अच्छा व्यक्ति हर समय, बिना किसी लालच के, अच्छा व्यवहार करता है। जैसे जानकीनाथ ने बिना दिखावे के किसान की मदद की।
परिधान तरह-तरह के
| चित्र | नाम | और क्या कहते हैं |
|---|---|---|
| 1. घेरदार रंगीन वस्त्र | लहँगा | घाघरा, चनिया |
| 2. पुरुष के कंधे पर कपड़ा | गमछा | अँगोछा, उपरणे |
| 3. स्त्री के कंधे पर ओढ़नी | दुपट्टा | चुन्नी, ओढ़नी |
| 4. कमर से नीचे पहनने का वस्त्र | धोती | धोतर, पंचा |
| 5. लंबा ढीला गुलाबी पहनावा | फिरन | कश्मीरी चोगा |
| 6. सिर पर बँधा वस्त्र | पगड़ी | साफ़ा, फेटा, पाग |
| 7. लंबा बटनदार कोट | अचकन | शेरवानी |
पुस्तक में नाम चित्रों के सामने क्रम से नहीं दिए गए हैं। ऊपर सही जोड़े दिए गए हैं। ‘और क्या कहते हैं’ वाला स्तंभ अपने घर की बोली के अनुसार भरिए।
आपकी परीक्षाएँ
- साइकिल की परीक्षा — पिछली छुट्टियों में पिताजी ने मुझसे गली में साइकिल चलवाकर देखी। वे जानना चाहते थे कि मैं अकेले विद्यालय जा सकता/सकती हूँ या नहीं।
- विद्यालय की परीक्षा — हर सत्र के अंत में शिक्षक लिखित परीक्षा लेते हैं। इससे पता चलता है कि हमने कितना सीखा।
- रसोई की परीक्षा — माँ ने मुझसे चाय बनवाई। वे देखना चाहती थीं कि मैं गैस सावधानी से जला सकता/सकती हूँ या नहीं।
- दौड़ की चुनौती — मेरे मित्र ने मुझे मैदान के दो चक्कर लगाने की चुनौती दी। मैंने उसे पूरा करके दिखाया।
आज की पहेली
- ट्रैफ़िक बत्ती — पहले चित्र में केवल हरी बत्ती जल रही है। दूसरे में लाल बत्ती भी जल रही है।
- पेड़ — दूसरे चित्र में लाल कमीज़ वाले आदमी के पास एक पेड़ अधिक है।
- नारंगी मकान — पहले चित्र में मकान पर एक लंबी खिड़की है। दूसरे में वह नहीं है।
- कुत्ता — पहले चित्र में कुत्ते का मुँह दाईं ओर है। दूसरे में बाईं ओर है।
- गुलाबी मकान — पहले चित्र में गुलाबी मकान के आगे एक पेड़ है। दूसरे में पेड़ नहीं है, मकान की खिड़की दिखती है।
- दादी की चूड़ियाँ — पहले चित्र में चूड़ियाँ लाल हैं। दूसरे में नीली हैं।
- दादी का हार — दूसरे चित्र में दादी के गले में लाल माला है।
- लड़की का रिबन — दूसरे चित्र में लड़की के बालों में लाल रिबन है।
ध्यान से देखने पर कुछ और छोटे अंतर भी मिल सकते हैं।
झरोखे से : पुस्तक के क्यू.आर. कोड से जयशंकर प्रसाद की वह कहानी पढ़िए, जिसमें गुरु चाणक्य एक होनहार बालक की परीक्षा लेते हैं।
खोजबीन के लिए : क्यू.आर. कोड की सहायता से प्रेमचंद के बारे में जानिए और उनकी कहानियाँ ‘ईदगाह’, ‘नादान दोस्त’ और ‘दो बैलों की कथा’ पढ़िए।