कक्षा 6 हिंदी · मल्हार · CBSE

4. हार की जीत

सुदर्शन की कहानी ‘हार की जीत’ के सभी अभ्यास — बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT मल्हार, कक्षा 6.

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इस पृष्ठ पर कहानी ‘हार की जीत’ के सभी प्रश्नों के उत्तर और कविता ‘वह चली हवा’ पर चर्चा दी गई है। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।

कहानी का सार : यह कहानी सुदर्शन की है। बाबा भारती के पास ‘सुलतान’ नाम का एक सुंदर और बलवान घोड़ा था। वे उससे बहुत प्रेम करते थे। डाकू खड्गसिंह ने घोड़ा देखा और उसे पाने की ठान ली। एक दिन वह अपाहिज बनकर रास्ते में बैठ गया। बाबा भारती ने दया करके उसे घोड़े पर बिठा लिया। मौका पाकर खड्गसिंह घोड़ा लेकर भागने लगा। बाबा भारती ने उससे केवल यह वचन माँगा कि इस घटना के बारे में किसी को न बताए, नहीं तो लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। यह बात सुनकर डाकू का मन बदल गया। रात में वह चुपचाप घोड़ा अस्तबल में बाँध गया। बाबा की हार, जीत में बदल गई।

पाठ से — मेरी समझ से

1(क) सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए —

(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ? — बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। ★

(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है? — बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। ★

2(ख) आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
  • घोड़ा छिन जाने के बाद बाबा के पास चोरी होने लायक कुछ नहीं बचा था। इसलिए अस्तबल का फाटक खुला पड़ा था। कहानी में लिखा है — “आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।”
  • लेखक ने लिखा है कि अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया। यह एक साधारण मनुष्य का स्वभाव है।

शीर्षक

1(क) लेखक ने इस कहानी का नाम ‘हार की जीत’ क्यों रखा होगा?

बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा हार गए थे। पर उनके ऊँचे विचारों ने डाकू का मन बदल दिया। डाकू ने स्वयं घोड़ा लौटा दिया। इस प्रकार बाबा की हार ही उनकी जीत बन गई। इसलिए यह नाम रखा गया।

2(ख) इस कहानी को आप कोई अन्य नाम दें तो क्या देंगे? क्यों?

मैं इस कहानी का नाम ‘विश्वास की जीत’ रखूँगा/रखूँगी। बाबा भारती चाहते थे कि लोगों का गरीबों पर विश्वास बना रहे। अंत में यही विश्वास जीत गया।

विश्वास की जीतबाबा भारती और सुलतानडाकू का हृदय-परिवर्तन
3(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?

बाबा भारती ने खड्गसिंह से वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा।

पंक्तियों पर चर्चा

1“भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”

बाबा भारती भगवान का भजन करते थे। भजन के बाद जो भी समय बचता, वह सारा समय वे घोड़े की सेवा में लगा देते थे। इससे घोड़े के प्रति उनका गहरा प्रेम पता चलता है।

2“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”

बाबा भारती को अपने घोड़े पर बहुत गर्व था, इसलिए उन्होंने उसे घमंड से दिखाया। खड्गसिंह ने इतना सुंदर घोड़ा पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए वह उसे आश्चर्य से देखता रह गया।

3“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”

खड्गसिंह डाकू था। उसे जो चीज़ पसंद आती, वह उसे अपनी मान लेता था। वह उसे ज़बरदस्ती छीन लेता था। इसीलिए उसने घोड़ा लेने की ठान ली।

4“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है...”

बकरा कसाई के सामने बेबस होता है। उसी तरह बाबा भारती भी डाकू के सामने बेबस और दुखी थे। उन्होंने हार मान ली और कहा कि यह घोड़ा अब तुम्हारा हो चुका है।

5“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”

बाबा भारती रोज़ की आदत से अस्तबल की ओर चल पड़े। फाटक पर पहुँचकर उन्हें याद आया कि सुलतान तो अब उनके पास नहीं है। उन्हें लगा कि यहाँ आना उनकी भूल है।

सोच-विचार के लिए

1(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?

बाबा भारती और डाकू खड्गसिंह के आँसुओं का मेल हो गया था।

2(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
  • खड्गसिंह के आँसू — पश्चाताप के आँसू थे। उसे अपने बुरे काम पर दुख था।
  • बाबा भारती के आँसू — खुशी के आँसू थे। उन्हें अपना घोड़ा वापस मिल गया था और लोगों का विश्वास भी बच गया था।

दिनचर्या

1(क) कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए।
  1. बाबा भारती भोर में चौथे पहर उठते थे और ठंडे पानी से स्नान करते थे।
  2. फिर मंदिर में भगवान का भजन-पूजन करते थे।
  3. इसके बाद अस्तबल जाकर सुलतान का खरहरा करते और उसे अपने हाथ से दाना खिलाते थे।
  4. दोपहर में भोजन करके थोड़ा विश्राम करते और फिर भजन करते थे।
  5. बचा हुआ समय वे घोड़े की देखभाल में लगाते थे।
  6. शाम को सुलतान पर सवार होकर आठ-दस मील का चक्कर लगाते थे।
  7. रात को संध्या-पूजा करके सो जाते थे।
2(ख) अब अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
  1. मैं सुबह 6 बजे उठता/उठती हूँ और दाँत साफ़ करके नहाता/नहाती हूँ।
  2. फिर थोड़ा व्यायाम करता/करती हूँ और नाश्ता करता/करती हूँ।
  3. 7:30 बजे विद्यालय जाता/जाती हूँ।
  4. दोपहर 2 बजे घर लौटकर भोजन करता/करती हूँ और थोड़ा आराम करता/करती हूँ।
  5. शाम को 5 बजे तक गृहकार्य पूरा करता/करती हूँ।
  6. फिर एक घंटा मैदान में मित्रों के साथ खेलता/खेलती हूँ।
  7. रात को परिवार के साथ भोजन करके 9:30 बजे सो जाता/जाती हूँ।

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कहानी की रचना

1(क) इस कहानी की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद आईं?
  • बाबा भारती का घोड़े के प्रति प्रेम।
  • बाबा भारती का अपाहिज पर दया करना।
  • घोड़ा छिन जाने पर भी गरीबों की चिंता करना।
  • डाकू का हृदय-परिवर्तन और घोड़ा लौटाना।
  • अंत में दोनों के आँसुओं का मिल जाना।
2(ख) इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखिए।

कहानी के संवाद छोटे और सरल हैं। इनसे पात्रों का स्वभाव पता चलता है। “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।” — इससे डाकू की कठोरता पता चलती है। “लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे।” — इससे बाबा के ऊँचे विचार पता चलते हैं। संवादों से कहानी रोचक और जीवंत बन गई है।

मुहावरे कहानी से

1(क) कहानी में इन मुहावरों का प्रयोग समझिए —
  • लट्टू होना — मोहित होना। (बाबा भारती घोड़े की चाल पर लट्टू थे।)
  • हृदय पर साँप लोटना — ईर्ष्या होना। (घोड़े की चाल देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।)
  • फूले न समाना — बहुत खुश होना। (बाबा भारती घोड़े को देखकर मन में फूले न समाते थे।)
  • मुँह मोड़ लेना — संबंध तोड़ लेना, उपेक्षा करना। (बाबा ने सुलतान की ओर से मुँह मोड़ लिया।)
  • मुख खिल जाना — प्रसन्न होना। (घोड़े को देखकर बाबा का मुख फूल की तरह खिल जाता था।)
  • न्योछावर कर देना — पूरी तरह अर्पण कर देना, सब कुछ दे देना।
2(ख) इन मुहावरों से अपने मन से नए वाक्य बनाइए —
  • लट्टू होना — बच्चे नए खिलौने पर लट्टू हो गए।
  • हृदय पर साँप लोटना — मेरे अच्छे अंक देखकर रमेश के हृदय पर साँप लोट गया।
  • फूले न समाना — पुरस्कार पाकर सीमा फूली न समाई।
  • मुँह मोड़ लेना — मुसीबत में हमें मित्रों से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।
  • मुख खिल जाना — दादी को देखकर मुन्ने का मुख खिल गया।
  • न्योछावर कर देना — सैनिक देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं।

कैसे-कैसे पात्र

1पात्रों के गुण बताने वाले शब्दों से शब्द-चित्र पूरे कीजिए —

बाबा भारती —

दयालुपशु-प्रेमीभक्तत्यागीउदारऊँचे विचारों वालेपरोपकारी

डाकू खड्गसिंह —

बाहुबलीक्रूरनिर्दयीछलीलालचीपश्चाताप करने वाला

सुलतान घोड़ा —

सुंदरबलवानतेज़बाँकास्वामिभक्तसमझदार

ये सब शब्द किसी की विशेषता, गुण या प्रकृति बताते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।

पाठ से आगे — सुलतान की कहानी

1मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए।

मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ। मेरे स्वामी बाबा भारती मुझसे बहुत प्रेम करते हैं। वे अपने हाथों से मेरा खरहरा करते हैं और मुझे दाना खिलाते हैं। हर शाम वे मुझ पर बैठकर घूमने जाते हैं। उस समय मैं हवा से बातें करता हूँ।

एक दिन खड्गसिंह नाम का डाकू मुझे देखने आया। उसकी आँखों में लालच था। कुछ महीनों बाद वह अपाहिज बनकर रास्ते में बैठ गया। बाबा ने दया करके उसे मुझ पर बिठा लिया। अचानक उसने लगाम खींची और मुझे भगा ले गया। मुझे बहुत दुख हुआ।

बाबा की बातें सुनकर डाकू बहुत सोच में पड़ गया। उसी रात वह मुझे चुपचाप अस्तबल में बाँध गया। सुबह मैंने अपने स्वामी के पैरों की आहट पहचान ली और ज़ोर से हिनहिनाया। बाबा दौड़कर आए और मेरे गले से लिपटकर रोने लगे। उस दिन मैं संसार का सबसे सुखी घोड़ा था।

मन के भाव

1(क) कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था?
  • चकित — खड्गसिंह, जब उसने पहली बार सुलतान को देखा। बाबा भारती भी चकित हुए, जब अपाहिज घोड़ा भगा ले गया।
  • प्रसन्नता — बाबा भारती, जब वे शाम को सुलतान पर घूमने जाते थे और जब घोड़ा वापस मिला।
  • अधीर — खड्गसिंह, जब वह घोड़े की चाल देखना चाहता था। बाबा भारती, जब वे घोड़े की प्रशंसा सुनना चाहते थे।
  • करुणा — बाबा भारती, जब उन्होंने पेड़ की छाया में कराहते अपाहिज को देखा।
  • डर — बाबा भारती, जब खड्गसिंह ने कहा कि मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।
  • निराशा — बाबा भारती, जब घोड़ा छिन गया और जब वे सुबह खाली अस्तबल के फाटक पर पहुँचे।
2(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं?
  • चकित — जब मैंने पहली बार समुद्र देखा।
  • प्रसन्नता — जब परीक्षा में मुझे अच्छे अंक मिले।
  • अधीर — जब मैं जन्मदिन के उपहार खोलने का इंतज़ार करता/करती हूँ।
  • करुणा — जब मैं सड़क पर किसी भूखे पिल्ले को देखता/देखती हूँ।
  • डर — जब रात में बादल ज़ोर से गरजते हैं।
  • निराशा — जब बारिश के कारण हमारा खेल रद्द हो गया।

झरोखे से — वह चली हवा

‘वह चली हवा’ कविता भी सुदर्शन की है। कवि कहते हैं कि हवा चल रही है। न तुम उसे देख सकते हो, न मैं। पर पत्तों ने उसे देख लिया है। इसीलिए तो वे हिल-हिलकर खुशी मना रहे हैं।

साझी समझ

1आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा?

मुझे यह बात अच्छी लगी कि हवा दिखाई नहीं देती, फिर भी पत्तों के हिलने से पता चल जाता है कि हवा चल रही है। कवि ने पत्तों के हिलने को ‘खुशी मनाना’ कहा है। यह कल्पना बहुत सुंदर है। कविता छोटी, सरल और गाने में मज़ेदार है।