कक्षा 6 हिंदी · मल्हार · CBSE

5. रहीम के दोहे

रहीम के सात नीति दोहों का सरल भावार्थ और पाठ के सभी अभ्यास — सुई-तलवार, प्रेम का धागा, पानी, सच्चे मित्र। NCERT मल्हार, कक्षा 6.

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इस पृष्ठ पर रहीम के सातों दोहों का भावार्थ और पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।

दोहों का भावार्थ

1रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।

बड़ी चीज़ को देखकर छोटी चीज़ को फेंकना नहीं चाहिए। जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती। हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्त्व है।

2तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।

पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते। तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीते। इसी तरह सज्जन लोग दूसरों की भलाई के लिए ही धन इकट्ठा करते हैं।

3रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।

प्रेम का धागा झटके से नहीं तोड़ना चाहिए। टूटा धागा फिर से नहीं जुड़ता। अगर जुड़ भी जाए तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। यानी टूटे रिश्ते में पहले जैसा प्रेम नहीं रहता।

4रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।

पानी को बचाकर रखना चाहिए। पानी के बिना सब सूना है। मोती की चमक (पानी) चली जाए तो उसका मूल्य नहीं रहता। मनुष्य का सम्मान (पानी) चला जाए तो उसका कोई मूल्य नहीं रहता। आटा (चून) बिना जल के गूँधा नहीं जा सकता।

5रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।

थोड़े दिनों की विपत्ति भी अच्छी होती है। विपत्ति के समय पता चल जाता है कि संसार में कौन हमारा भला चाहता है और कौन बुरा।

6रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।

जीभ पागल होती है। वह उलटी-सीधी बातें कहकर स्वयं मुँह के अंदर चली जाती है। पर उसकी बातों के कारण सिर को जूते खाने पड़ते हैं। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।

7कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।

धन होने पर बहुत-से लोग सगे-संबंधी बन जाते हैं। पर जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरते हैं, वही सच्चे मित्र होते हैं।

पाठ से — मेरी समझ से

1(क) सबसे सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए —

(1) “रहिमन जिह्वा बावरी...” दोहे का भाव है — सोच-समझकर बोलना चाहिए। ★

(2) “रहिमन देखि बड़ेन को...” इस दोहे का भाव क्या है? — हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है। ★

2(ख) आपने यही उत्तर क्यों चुने?
  • जीभ बिना सोचे बोल देती है और सिर को मार खानी पड़ती है। इसलिए दोहे की सीख है कि सोच-समझकर बोलना चाहिए।
  • सुई और तलवार दोनों के अपने-अपने काम हैं। दोहा किसी एक को बड़ा नहीं बताता। वह कहता है कि हर चीज़ का अपना महत्त्व है।

मिलकर करें मिलान

1दोहों का उनके सही भाव से मिलान कीजिए —
स्तंभ 1 (दोहा)स्तंभ 2 (भाव)
1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।
3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

1(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।”

रहीम कहते हैं कि थोड़े दिनों के लिए आई विपत्ति भी अच्छी होती है। विपत्ति में ही पता चलता है कि कौन हमारा सच्चा हितैषी है और कौन नहीं।

2(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।”

जीभ बिना सोचे कुछ भी बोल देती है और फिर मुँह में छिप जाती है। उसकी कड़वी बातों का फल सिर को भुगतना पड़ता है। इसलिए हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए।

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सोच-विचार के लिए

11. (क) दोहों में ‘मिले’ की जगह ‘जुड़े’, ‘डारि’ की जगह ‘डार’, ‘मानुष’ की जगह ‘मानस’ जैसे शब्द भी प्रचलित हैं। ऐसा क्यों होता है?

दोहे सैकड़ों वर्षों से लोग एक-दूसरे को बोलकर सुनाते आए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपनी बोली के अनुसार शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। इसलिए एक ही दोहे के कई रूप प्रचलित हो जाते हैं।

21. (ख) प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझाइए।

धागा बहुत नाज़ुक होता है। एक झटके में टूट जाता है। जोड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है। प्रेम भी ऐसा ही नाज़ुक होता है। इसलिए धागे का उदाहरण दिया गया है।

अन्य उदाहरण — काँच का गिलास। काँच एक बार टूट जाए तो जोड़ने पर भी उसमें दरार दिखती रहती है। रिश्ते भी टूटने के बाद पहले जैसे नहीं रहते।

32. “तरुवर फल नहिं खात हैं...” इस दोहे में किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?

इस दोहे में परोपकार यानी दूसरों की भलाई करने के गुण की बात की गई है।

प्रकृति से हम ये बातें भी सीख सकते हैं —

  • सूरज से — समय पर उठना और सबको समान प्रकाश देना।
  • नदी से — लगातार आगे बढ़ते रहना।
  • धरती से — सहनशील होना।
  • चींटी से — मिल-जुलकर मेहनत करना।
  • फूलों से — सदा मुस्कराते रहना।

शब्दों की बात — शब्द-संपदा

1कविता के शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए।
कविता में आए शब्दहिंदी में अर्थमातृभाषा (मराठी) में
तरुवरपेड़, वृक्षझाड, वृक्ष
बिपतिविपत्ति, संकटसंकट, आपत्ती
छिटकायझटके सेझटकून
सुजानसज्जन, समझदारसज्जन, शहाणा
सरवरसरोवर, तालाबतलाव, सरोवर
साँचेसच्चेखरे
कपालसिर, माथाकपाळ, डोके

यहाँ मातृभाषा के उदाहरण के लिए मराठी ली गई है। आप अपनी मातृभाषा के शब्द लिखिए।

शब्द एक अर्थ अनेक

1इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए —
  • कल — बीता हुआ दिन, आने वाला दिन, मशीन (यंत्र), चैन
  • पत्र — चिट्ठी, पत्ता, समाचार-पत्र
  • कर — हाथ, टैक्स (शुल्क), करना (क्रिया), किरण
  • फल — खाने का फल, परिणाम, हथियार की धार (नोक)

पाठ से आगे — आपकी बात

1अपने मनपसंद दोहे को इसी शैली में अपने शब्दों में लिखिए।

“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।”

इस दोहे का भाव है — प्रेम और रिश्ते बहुत कीमती होते हैं। छोटी-छोटी बातों पर हमें मित्रों या परिवार से झगड़ा नहीं करना चाहिए। गुस्से में कहा गया एक शब्द भी रिश्ता तोड़ सकता है। टूटा रिश्ता फिर जुड़ भी जाए तो मन में कड़वाहट रह जाती है, जैसे धागे में गाँठ। इसलिए हमें सबसे प्रेम से बात करनी चाहिए और रिश्तों को सँभालकर रखना चाहिए।

सरगम

1दोहे एकत्र करके अंत्याक्षरी खेलिए। (कुछ दोहे)
  • कबीर — बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।
  • कबीर — ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
  • तुलसी — तुलसी मीठे बचन तें, सुख उपजत चहुँ ओर। बसीकरन इक मंत्र है, परिहरु बचन कठोर।।
  • वृंद — करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान।।

आज की पहेली

1दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।

चना (उल्टा करने पर ‘नाच’ बनता है।)

2एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।

माचिस