कक्षा 6 हिंदी · मल्हार · CBSE

6. मेरी माँ

रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा के अंश ‘मेरी माँ’ के सभी अभ्यास, वर्ग पहेली और कविता ‘ऐ मातृभूमि!’ — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT मल्हार, कक्षा 6.

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इस पृष्ठ पर आत्मकथा-अंश ‘मेरी माँ’ के सभी प्रश्नों के उत्तर, वर्ग पहेली के उत्तर और कविता ‘ऐ मातृभूमि!’ का भाव दिया गया है। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।

पाठ का सार : यह पाठ क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ का अंश है। बिस्मिल बताते हैं कि उनकी माँ ने हर काम में उनका साथ दिया। दादीजी और पिताजी के विरोध के बावजूद माँ ने उन्हें लखनऊ कांग्रेस जाने के लिए खर्च दिया। माँ ग्यारह वर्ष की आयु में ब्याहकर आई थीं और अनपढ़ थीं। उन्होंने अपनी लगन से हिंदी पढ़ना-लिखना सीखा। उनका सबसे बड़ा आदेश था कि किसी के प्राण न लेना। बिस्मिल कहते हैं कि वे अनेक जन्मों में भी माँ का ऋण नहीं उतार सकते। फाँसी से पहले वे माँ से वर माँगते हैं कि अंतिम समय में भी उनका हृदय विचलित न हो।

पाठ से — मेरी समझ से

1(क) सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए —

(1) बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी? — अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की ★

(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था? — कभी किसी के प्राण न लेना ★

2(ख) आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
  • बिस्मिल ने लिखा है कि उनकी केवल एक इच्छा है — श्रद्धा से माँ के चरणों की सेवा करना। पर उन्हें फाँसी होने वाली थी, इसलिए यह इच्छा पूरी होती नहीं दिख रही थी।
  • पाठ में लिखा है — “माताजी का सबसे बड़ा आदेश मेरे लिए यही था कि किसी की प्राणहानि न हो।”

पंक्तियों पर चर्चा

1(क) “यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।”

बिस्मिल कहते हैं कि उनकी माँ ने ही उन्हें साहस, शिक्षा और देश-सेवा की प्रेरणा दी। यदि ऐसी माँ न होतीं तो वे भी आम लोगों की तरह केवल घर-गृहस्थी में उलझकर जीवन बिताते। वे देश के लिए कुछ बड़ा नहीं कर पाते।

2(ख) “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मजबूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”

माँ का आदेश था कि किसी के प्राण न लेना। क्रांतिकारी कामों में कभी-कभी बिस्मिल ने कोई कठोर प्रतिज्ञा की होगी। पर माँ की आज्ञा मानने के लिए उन्हें वह प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी। इससे पता चलता है कि वे माँ की बात को सबसे ऊपर रखते थे।

मिलकर करें मिलान

1शब्दों को उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए —
शब्दअर्थ या संदर्भ
1. देवनागरीभारत की एक भाषा-लिपि जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।
2. आर्यसमाजमहर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था।
3. मेजिनीइटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति; इटली का मसीहा जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा।
4. गोबिंद सिंहसिखों के दसवें और अंतिम गुरु। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

सोच-विचार के लिए

11. (क) कम आयु में ब्याहकर आने पर भी माताजी ने स्वयं को परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?

माताजी ग्यारह वर्ष की आयु में ब्याहकर आई थीं। दादीजी की छोटी बहन ने उन्हें घर के काम सिखाए। थोड़े ही दिनों में माताजी ने घर का सब काम-काज समझ लिया। वे भोजन आदि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं।

21. (ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?

पढ़ने का शौक उनके मन में स्वयं जागा। मोहल्ले की पढ़ी-लिखी सहेलियों से वे अक्षर सीखती थीं। घर का काम पूरा करके जो समय बचता, उसमें पढ़ती-लिखती थीं। अपनी मेहनत से वे थोड़े ही दिनों में देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं।

32. बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माताजी ने कैसे सहयोग दिया?
  • दादीजी और पिताजी के विरोध के बाद भी माँ ने उन्हें लखनऊ कांग्रेस जाने का खर्च दिया।
  • सेवा-समिति के काम में माँ ने उनका उत्साह कभी भंग नहीं होने दिया। इसके लिए उन्होंने पिताजी की डाँट भी सही।
  • संकट के समय माँ प्रेम भरी वाणी से उन्हें सांत्वना देती थीं और अधीर नहीं होने देती थीं।
  • क्रांतिकारी जीवन में भी माँ ने उनकी पूरी सहायता की।
43. कई दशक पहले भी बिस्मिल की माँ शिक्षा का महत्त्व समझती थीं, कैसे?
  • उन्होंने स्वयं मेहनत करके पढ़ना-लिखना सीखा।
  • उन्होंने अपनी बेटियों को छोटी आयु में स्वयं पढ़ाया।
  • दादीजी और पिताजी बिस्मिल के विवाह पर ज़ोर देते थे, पर माँ कहती थीं कि शिक्षा पूरी होने के बाद ही विवाह करना उचित है।
54. हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?
  • उन्होंने परिवार के विरोध के बाद भी बेटे को देश-सेवा के काम करने दिए।
  • वे लड़कियों की शिक्षा को भी ज़रूरी मानती थीं।
  • वे कम आयु में विवाह के विरुद्ध थीं।
  • वे शत्रु को भी प्राणदंड न देने की बात कहती थीं।
  • बेटा कभी उलटा उत्तर देता, तब भी वे डाँटने के बजाय प्यार से समझाती थीं।

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आत्मकथा की रचना

1(क) ऐसी पंक्तियों की सूची बनाइए जिनसे पता लगे कि लेखक अपने बारे में कह रहा है।
  • “लखनऊ कांग्रेस में जाने के लिए मेरी बड़ी इच्छा थी।”
  • “मैं बड़े उत्साह के साथ सेवा समिति में सहयोग देता था।”
  • “मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है।”
  • “मैंने तुरंत उत्तर दिया कि यह तो धर्म विरुद्ध होगा।”
  • “अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था।”
  • “इस संसार में मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं।”

शब्द-प्रयोग तरह-तरह के

1पाठ से ‘अक्षर-बोध’ और ‘पढ़ना-लिखना’ जैसे मिलाकर छोटे किए गए शब्द खोजकर सूची बनाइए।
  • डाँट-फटकार — डाँट और फटकार
  • गृहकार्य — गृह (घर) का कार्य
  • काम-काज — काम और काज
  • भोजनादि — भोजन आदि
  • सखी-सहेली — सखी और सहेली
  • शिक्षादि — शिक्षा आदि
  • संसार-चक्र — संसार का चक्र
  • प्राणहानि — प्राणों की हानि
  • प्राणदंड — प्राण लेने का दंड
  • देश-सेवा — देश की सेवा
  • पालन-पोषण — पालन और पोषण
  • भोग-विलास — भोग और विलास
  • जन्म-जन्मांतर — जन्म और दूसरे जन्म
  • धर्म-रक्षार्थ — धर्म की रक्षा के लिए

पाठ से आगे — आपकी बात

1(क) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के मित्रों के नाम खोजिए और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी पर चर्चा कीजिए।

बिस्मिल के प्रमुख साथी थे — अशफ़ाक उल्ला खाँ, चंद्रशेखर आज़ाद, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, शचींद्रनाथ सान्याल और मन्मथनाथ गुप्त।

  • ये सब ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ नाम के क्रांतिकारी दल से जुड़े थे।
  • 9 अगस्त 1925 को इन्होंने काकोरी के पास रेलगाड़ी से अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना ले लिया। इसे ‘काकोरी कांड’ कहते हैं।
  • इस घटना के लिए बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खाँ, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी दी गई।
  • चंद्रशेखर आज़ाद अंग्रेज़ों के हाथ नहीं आए।
2(ख) अपनी माँ या अभिभावक से बातचीत करके उनके बारे में जानिए।

मैं — माँ, आपका जन्म कहाँ हुआ था?
माँ — मेरा जन्म नाशिक के पास एक छोटे-से गाँव में हुआ था।

मैं — आपका प्रिय रंग और प्रिय भोजन कौन-सा है?
माँ — मुझे हरा रंग पसंद है। खाने में मुझे पूरनपोली बहुत अच्छी लगती है।

मैं — आपकी प्रिय पुस्तक कौन-सी है?
माँ — मुझे साने गुरुजी की ‘श्यामची आई’ बहुत प्रिय है।

मैं — बचपन की कोई याद बताइए।
माँ — हम सब बहनें गर्मी की छुट्टियों में नदी किनारे खेलने जाती थीं। वे दिन बहुत सुहाने थे।

शब्दों की बात

1आप अपनी माँ को क्या कहकर संबोधित करते हैं? अन्य भाषाओं में माँ के लिए शब्द ढूँढ़िए। क्या उनमें कुछ समानता है?

मैं अपनी माँ को ‘आई’ कहकर बुलाता/बुलाती हूँ।

  • हिंदी — माँ, माता, मम्मी
  • मराठी — आई
  • गुजराती — बा, मा
  • बांग्ला — मा
  • पंजाबी — माँ, बेबे
  • तमिल — अम्मा
  • तेलुगु — अम्मा
  • कन्नड़ — अम्मा
  • संस्कृत — माता, अम्बा
  • अंग्रेज़ी — मदर, मॉम

समानता — लगभग सभी भाषाओं में माँ के लिए शब्द ‘म’ या ‘अ’ ध्वनि से बनते हैं। जैसे — माँ, मा, अम्मा, मॉम। ‘म’ बोलना छोटे बच्चे के लिए सबसे आसान होता है।

आज की पहेली

1वर्ग पहेली में से पाठ के बारह विशेषण छाँटिए।
मंगलमयीप्रत्येकछोटीग्यारहखूबसाधारणदुखभरीमहानस्वाधीनधार्मिकमनोहरबड़ा
  • पहली पंक्ति — मंगलमयी
  • दूसरी पंक्ति — प्रत्येक, छोटी
  • तीसरी पंक्ति — ग्यारह, खूब
  • चौथी पंक्ति — साधारण
  • पाँचवीं पंक्ति — दुखभरी
  • छठी पंक्ति — महान, स्वाधीन
  • पहला स्तंभ (ऊपर से नीचे) — धार्मिक
  • चौथा स्तंभ (ऊपर से नीचे) — मनोहर
  • अंतिम स्तंभ (ऊपर से नीचे) — बड़ा

झरोखे से — ऐ मातृभूमि!

कविता का भाव : यह कविता भी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की है। कवि मातृभूमि की सदा जय-विजय की कामना करते हैं। वे चाहते हैं कि मातृभूमि का हर भक्त सुख और शांति से भरा हो। अज्ञान और दुख के अँधेरे में मातृभूमि की ज्योति फैले। कवि भगवान से ऐसी भक्ति माँगते हैं कि वे सुख में भी देश को न भूलें। वे ऐसी शक्ति माँगते हैं कि दुख में भी उनका हृदय कायर न बने।