8. सत्रिया और बिहू नृत्य
जया मेहता के निबंध ‘सत्रिया और बिहू नृत्य’ के सभी अभ्यास — असम के नृत्य, तीन बिहू, अनु को पत्र और असमिया पहेलियाँ। NCERT मल्हार, कक्षा 6.
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इस पृष्ठ पर पाठ ‘सत्रिया और बिहू नृत्य’ के सभी प्रश्नों के उत्तर, तीन बिहू, नमूना पत्र, डाक-टिकट के प्रश्न, असमिया पहेलियों के उत्तर और ‘मूँगा सिल्क’ का सार दिया गया है। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।
पाठ का सार : यह पाठ जया मेहता का लिखा है। लंदन में रहने वाली एंजेला की माँ एलेसेंड्रा डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाती थीं। उन्हें असम की नृत्य परंपरा पर फ़िल्म बनानी थी। इसलिए एंजेला अपने माता-पिता के साथ अप्रैल में असम आई। उस समय असम में नए साल का त्योहार ‘बिहू’ मनाया जा रहा था। मलंग गाँव में बरगद के पेड़ के नीचे उसने बिहू नृत्य देखा। फिर वे उत्तरी असम के दक्षिणापथ सत्र पहुँचे। वहाँ एंजेला की दोस्ती अनु से हुई। दोनों ने युवा साधुओं और महिला कलाकारों का सत्रिया नृत्य देखा। लंदन लौटकर एंजेला ने अपनी कक्षा में असमी नृत्य का प्रदर्शन किया।
पाठ से — मेरी समझ से
(1) माँ एलेसेंड्रा के बारे में कौन-सा कथन सत्य है? — वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं। ★
(2) “अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ़ देखा।” क्यों? — दोनों की आयु एक समान थी। ★
- माँ ने यात्रा में एंजेला को असम की सुंदरता, रेशम, चाय के बागानों और बिहू के बारे में बताया। इससे पता चलता है कि वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं।
- पाठ में लिखा है कि दोनों की उम्र दस साल थी। एक ही उम्र की लड़की को देखकर दोनों ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ़ देखा।
मिलकर करें मिलान
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. सत्र | 6. ये असम के मठ हैं। ये पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के स्थान हैं। सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति इन्हीं सत्रों में हुई है। |
| 2. बोहाग बिहू | 4. असम में मनाया जाने वाला एक त्योहार। यह असम में नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। |
| 3. लंदन | 2. ‘यूनाइटेड किंगडम’ और ‘इंग्लैंड’ की राजधानी। |
| 4. गुवाहाटी | 5. भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा नगर है। |
| 5. ब्रिटिश अकादमी | 3. ‘यूनाइटेड किंगडम’ देश की एक सरकारी संस्था। |
| 6. बीसवीं शताब्दी | 1. ग्रेगरी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से 31 दिसंबर 2000 तक का समय। |
पंक्तियों पर चर्चा
असम भारत के उत्तर-पूर्व में है। वहाँ घने जंगल और अनेक वन्य जीव हैं। असम का रेशम और चाय पूरे संसार में प्रसिद्ध हैं। असम की पहचान केवल इन्हीं चीज़ों से नहीं है। वहाँ बिहू और सत्रिया जैसे सुंदर नृत्यों की बहुत पुरानी और समृद्ध परंपरा भी है।
दुनिया के हर देश में लोग नाच-गाकर अपने मन की बात प्रकट करते हैं। खुशी, उत्सव, प्रेम या भक्ति — हर भाव के लिए गीत और नृत्य होते हैं। इसलिए नृत्य और संगीत हर संस्कृति का अटूट हिस्सा हैं। भारत में ऐसा बहुत अधिक होता है।
सोच-विचार के लिए
- इस उत्सव और नृत्य, दोनों का नाम ‘बिहू’ क्यों है?
- क्या संगीत और नृत्य सिर्फ़ त्योहारों पर ही होते हैं?
- एक पेड़ के नीचे इतने सारे लोग एक साथ कैसे इकट्ठा हो गए?
- काश, मैं भी अपने घर पर बसंत के आगमन पर ऐसा ही नृत्य कर पाती!
- यहाँ का जीवन लंदन के जीवन से कितना अलग है!
बिहू का संबंध खेती से है। असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है। पहला, जब किसान बीज बोते हैं। दूसरा, जब वे धान रोपते हैं। तीसरा, जब खेतों में अनाज तैयार हो जाता है। इस तरह बिहू खेती के हर चरण से जुड़ा है। इसलिए यह कृषि आधारित त्योहार है।
- लंदन लौटकर भी वह माँ की बनाई सारी रिकॉर्डिंग्स देखती रही।
- वह पूरे उत्साह के साथ असम की समृद्ध नृत्य परंपरा को याद करती रही।
- उसने लंदन में अपनी कक्षा में असमी नृत्य का प्रदर्शन किया। साथ में अपने नृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग भी दिखाई।
- अब बिहू और सत्रिया नृत्य उसका अपना मनोरंजन बन गए थे।
पहले सत्रिया नृत्य केवल सत्रों (मठों) में साधु ही करते थे। बीसवीं शताब्दी के मध्य में कुछ साधु मठों से बाहर आए। वे पुरुषों और महिलाओं को सत्रिया नृत्य सिखाने लगे। शुरू में ऐसे साधुओं को मठों से निकाल दिया गया। पर आज महिला सत्रिया कलाकारों का मंच पर नृत्य करना आम बात हो गई है।
निबंध की रचना
- इसमें लंदन से यात्रा शुरू करने से लेकर वापस लंदन पहुँचने तक के अनुभवों का वर्णन है।
- घटनाएँ एक क्रम में आती हैं — लंदन, गुवाहाटी, मलंग गाँव, उत्तरी असम का सत्र और फिर लंदन।
- जो कुछ आँखों से देखा गया, उसी का वर्णन है। जैसे — बिहू उत्सव, सत्रिया नृत्य, अनु के खिलौने।
- निबंध कहानी की तरह रोचक और सरस है।
- भाषा सरल है। इसमें डॉक्यूमेंट्री, टाइम-मशीन, रिकॉर्डिंग जैसे अंग्रेज़ी शब्द भी हैं।
- इसमें असम की संस्कृति — नृत्य, त्योहार, खेती, खिलौने और पकवानों की जानकारी मिलती है।
- बीच में जय-विजय की कथा भी आई है।
अनुमान या कल्पना से
उन्होंने ऐसा उत्सव पहले कभी नहीं देखा था। एक ही पेड़ के नीचे बहुत सारे लोग इकट्ठा थे। लड़कियों की लाल-बादामी पोशाकें बहुत सुंदर थीं। लड़के वाद्ययंत्र बजा रहे थे। सब मौज-मस्ती के नृत्य में खोए हुए थे। यह सब लंदन के जीवन से बिल्कुल अलग था। इसलिए वे अचंभित हो गए।
- एंजेला के स्कूल से छुट्टी एक हफ़्ता बढ़ाने की अनुमति ली।
- पासपोर्ट, वीज़ा और हवाई जहाज़ के टिकट तैयार किए होंगे।
- कपड़े और ज़रूरी सामान बाँधा होगा।
- फ़िल्म बनाने के लिए कैमरा और रिकॉर्डिंग का सामान रखा होगा।
- असम, बिहू और सत्रिया नृत्य के बारे में जानकारी इकट्ठी की होगी।
- गुवाहाटी में होटल और रहने की व्यवस्था की होगी।
बरगद का पेड़ बहुत बड़ा और घना होता है। उसके नीचे बहुत सारे लोग एक साथ बैठ सकते हैं। उसकी छाया ठंडी होती है। गाँव में बरगद का पेड़ अक्सर सबके मिलने-जुलने की जगह होता है। इसलिए वहाँ मंच बनाया गया होगा।
शब्दों की बात — असम से जुड़े शब्द
- नृत्य — बिहू, सत्रिया
- त्योहार — बिहू, बोहाग (रोंगाली) बिहू
- भाषा — असमिया
- स्थान — गुवाहाटी, मलंग, माजुली, दक्षिणापथ सत्र
- अन्य — सत्र (मठ), रेशम, चाय के बागान
तीन बिहू
वे अप्रैल के महीने में आए थे। इसलिए वे रोंगाली या बोहाग बिहू के अवसर पर भारत आए थे। यह असम में नए साल और बसंत के आगमन का त्योहार है।
- रोंगाली या बोहाग बिहू (अप्रैल) — किसान खेत तैयार करके बीज बोते हैं।
- कोंगाली या काटी बिहू (अक्तूबर) — धान रोपा जा चुका होता है। खेतों में फसल बढ़ रही होती है। किसान फसल की देखभाल करते हैं।
- भोगाली या माघ बिहू (जनवरी) — फसल पककर तैयार हो जाती है। किसान अनाज काटकर घर लाते हैं।
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पाठ से आगे — आपकी बात
मुझे घर में प्यार से ‘छोटू’, ‘बबलू’ और ‘राजा’ कहकर पुकारा जाता है। दादी मुझे ‘लाडला/लाडली’ कहती हैं।
मेरा नाम ‘आदित्य’ है। इसका अर्थ है — सूर्य। मेरा नाम मेरे दादाजी ने रखा था।
मैं अपने मित्रों के साथ खो-खो, कबड्डी, लंगड़ी, छुपन-छुपाई और क्रिकेट खेलता/खेलती हूँ। बारिश के दिनों में हम कैरम और लूडो खेलते हैं।
मैं महाराष्ट्र में रहता/रहती हूँ। यहाँ लावणी, लेझीम, कोली नृत्य, गोंधळ और धनगरी गजा नृत्य प्रसिद्ध हैं। मुझे लेझीम करना बहुत पसंद है। इसमें ढोल की ताल पर सब मिलकर नाचते हैं।
पूर्वोत्तर की यात्रा : पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्य हैं — अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर और असम। भारत के मानचित्र में इन्हें खोजिए। अवसर मिले तो इनमें से किसी राज्य की यात्रा कीजिए।
टाइम मशीन
मैं सन 1674 में रायगढ़ किले पर जाना चाहूँगा/चाहूँगी। उस समय वहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। मैं वह भव्य समारोह अपनी आँखों से देखना चाहता/चाहती हूँ। मैं शिवाजी महाराज के दर्शन भी करना चाहता/चाहती हूँ।
मैं एक ऐसी मशीन बनाऊँगा/बनाऊँगी जो प्लास्टिक के कचरे को बेंच, खिलौने और गमले जैसी उपयोगी चीज़ों में बदल दे। इससे धरती पर प्लास्टिक का कचरा नहीं रहेगा। नदियाँ, समुद्र और पशु-पक्षी सुरक्षित रहेंगे।
(ग) अवसर मिलने पर किसी संग्रहालय की यात्रा कीजिए और वहाँ देखी प्राचीन वस्तुओं के बारे में कक्षा में बताइए। (कक्षा गतिविधि)
खिलौने विभिन्न प्रकार के
- अनु के खिलौने — अनु के खिलौने हाथ से बने और थोड़े अलग तरह के थे। उसके पास गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर थे। उसका पसंदीदा खिलौना लकड़ी का तीर-कमान था।
- एंजेला के खिलौने — एंजेला के खिलौने शायद दुकानों से ख़रीदे हुए होंगे। जैसे — प्लास्टिक की गुड़िया, टेडी बियर, बैटरी या रिमोट से चलने वाली कार और वीडियो गेम।
मैं घर पर लट्टू, गुड़िया, रिमोट वाली कार, गेंद, बल्ला, पतंग, ब्लॉक्स (जोड़ने वाले खिलौने) और रसोई-सेट से खेलता/खेलती रहा/रही हूँ।
हमारे यहाँ सावंतवाड़ी के रंग-बिरंगे लकड़ी के खिलौने मिलते हैं। पोला त्योहार पर मिट्टी के बैल मिलते हैं। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन-सेट, कपड़े की गुड़िया, बाँस की बाँसुरी और लकड़ी के लट्टू भी मिलते हैं।
खिलौना — कागज़ की नाव
- एक आयताकार कागज़ लीजिए और उसे बीच से आधा मोड़िए।
- ऊपर के दोनों कोनों को बीच की ओर मोड़कर त्रिकोण बनाइए।
- नीचे की दोनों पट्टियों को ऊपर की ओर मोड़िए।
- इसे खोलकर चौकोर बनाइए और फिर दबाकर त्रिकोण बनाइए।
- दोनों नीचे के कोनों को ऊपर मोड़िए और फिर चौकोर बनाइए।
- ऊपर के दोनों सिरों को धीरे से बाहर की ओर खींचिए। नाव तैयार है।
खिलौना स्वयं बनाकर कक्षा में दिखाइए और सबको सिखाइए।
पत्र
केंज़िंग्टन, लंदन
दिनांक : 10 मई
प्रिय सखी अनु,
सप्रेम नमस्ते।
मैं यहाँ कुशल से हूँ। आशा है तुम भी कुशल होगी। लंदन लौटकर मुझे भारत की बहुत याद आ रही है। मुझे तुम्हारे साथ खेले राम-रावण के खेल की याद आती है। तुम्हारे लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा के घर भी याद आते हैं।
मैं रोज़ माँ की बनाई बिहू और सत्रिया नृत्य की रिकॉर्डिंग देखती हूँ। कल मैंने अपनी कक्षा में असमी नृत्य करके दिखाया। मेरे सहपाठियों और शिक्षकों को वह बहुत पसंद आया। तुम्हारे सिखाए असमिया शब्द भी मुझे याद हैं।
रीना आंटी को मेरा प्रणाम कहना। जल्दी पत्र लिखना।
तुम्हारी सखी,
एंजेला
(ख) अपने घर के पास के डाकघर से एक पोस्टकार्ड ख़रीदिए और उस पर किसी को पत्र लिखिए। (कक्षा से बाहर की गतिविधि)
मुझे सुमित्रानंदन पंत का डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा। इसमें पीछे बर्फ़ से ढके हिमालय के पहाड़ दिखाए गए हैं। पंत जी प्रकृति के कवि थे। इसलिए यह चित्र उनकी कविताओं से मेल खाता है। टिकट के रंग भी बहुत सुंदर हैं।
- लेखक का चित्र।
- लेखक का नाम, हिंदी और अंग्रेज़ी में।
- कुछ टिकटों पर लेखक का जन्म और मृत्यु का वर्ष। जैसे — प्रेमचंद 1880–1936, तुलसीदास 1533–1624।
- कुछ टिकटों पर लेखक के हस्ताक्षर।
- लेखक के काम से जुड़े चित्र। जैसे — पुस्तकें, पहाड़ या यात्रा के दृश्य।
- टिकट का मूल्य, ‘भारत INDIA’ और जारी होने का वर्ष।
आज की पहेली
- 1. हाथी के दाँत-सी, कदंब के पात-सी — मूली। मूली हाथी-दाँत जैसी सफ़ेद होती है और उसके पत्ते कदंब के पत्तों जैसे होते हैं।
- 2. पानी है पर मछली नहीं, जंगल है पर बाघ नहीं — नारियल। इसके अंदर पानी होता है और बाहर जटा का ‘जंगल’ होता है।
- 3. लग-लग कहे तो ना लगे, बेलग कहे लग जाए — होंठ। ‘लग-लग’ बोलने पर होंठ नहीं मिलते, पर ‘बेलग’ बोलने पर ‘ब’ पर होंठ मिल जाते हैं।
- 4. काला तन और छह हैं चरण, पेट कटे पर भी न मरण — चींटी। चींटी काली होती है और उसके छह पैर होते हैं। उसकी कमर इतनी पतली होती है कि पेट कटा-सा लगता है।
झरोखे से — असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क
लेख का सार : यह लेख बिमल श्रीवास्तव का है। गुवाहाटी में लेखक ने महिलाओं को भूरी-सुनहरी चमकीली साड़ियाँ पहने देखा। उनके असमी मित्र ने बताया कि यह असम का प्रसिद्ध मूँगा सिल्क है। असमिया में ‘मूँगा’ का अर्थ है पीला या गहरा भूरा। यह सबसे महँगा रेशम है। पूरे विश्व में यह केवल असम और पूर्वोत्तर राज्यों में बनता है। इसे घर पर धोया जा सकता है और हर धुलाई के बाद इसका निखार बढ़ता है। एक साड़ी लगभग 50 वर्ष तक चलती है। इसे किसी भी मौसम में पहना जा सकता है।
साझी समझ
मुझे यह जानकारी सबसे अच्छी लगी कि मूँगा सिल्क पूरे विश्व में केवल असम और पूर्वोत्तर राज्यों में ही बनता है। यह असम को प्रकृति का अनमोल उपहार है। मुझे यह बात भी अनोखी लगी कि हर धुलाई के बाद इसकी चमक बढ़ती है। आमतौर पर कपड़े धोने से पुराने हो जाते हैं।
खोजबीन के लिए : असम-बिहू लोकगीत, सत्रिया नृत्य, मणिपुरी नृत्य, भारत के लोक नृत्य, पूर्वोत्तर राज्यों के लोक नृत्य, भाषा संगम असमिया और मुकोली बिहू के बारे में पुस्तक के क्यू.आर. कोड और इंटरनेट की सहायता से पढ़िए, देखिए और समझिए।