1. माँ, कह एक कहानी
मैथिलीशरण गुप्त — कविता का भावार्थ और पाठ के सभी प्रश्नों के सरल उत्तर. NCERT मल्हार (CBSE).
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पाठ का परिचय : यह कविता मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति ‘यशोधरा’ से ली गई है। इसमें माँ यशोधरा और पुत्र राहुल के बीच संवाद है। माँ, राहुल को उसके पिता सिद्धार्थ की कहानी सुनाती है। सिद्धार्थ ने एक घायल हंस की जान बचाई थी। अंत में माँ, राहुल से ही न्याय करने को कहती है।
कविता का भावार्थ
बेटा माँ से कहानी सुनाने की जिद करता है। माँ हँसकर कहती है — क्या तूने मुझे अपनी नानी समझ लिया है? बेटा कहता है कि सेविका तो कहती है कि तू मेरी नानी की बेटी है। इसलिए लेटे-लेटे ही कहानी सुना दो।
माँ कहानी शुरू करती है। सुबह-सुबह तेरे पिता उपवन में घूम रहे थे। वहाँ मनमोहक सुगंध फैली थी। रंग-बिरंगे फूल खिले थे। ओस की बूँदें चमक रही थीं। हल्की हवा चल रही थी और पानी लहरा रहा था।
पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। अचानक एक हंस तीखे तीर से घायल होकर नीचे गिरा। तेरे पिता ने उसे उठा लिया। उसे मानो नया जीवन मिल गया। तभी अपने निशाने पर गर्व करने वाला शिकारी आ गया। उसने घायल पक्षी माँगा। पिता उसकी रक्षा कर रहे थे, इसलिए उन्होंने पक्षी नहीं दिया। शिकारी भी जिद पर अड़ गया।
दयालु और निर्दयी, दोनों अपनी बात पर अड़े रहे। बात न्यायालय तक गई। माँ ने राहुल से पूछा — तू बता, न्याय किसका पक्ष लेगा? राहुल ने कहा — यदि कोई निर्दोष को मारे, तो दूसरा उसे क्यों न बचाए? न्याय मारने वाले के बजाय बचाने वाले का पक्ष लेता है। न्याय दया का दानी है। माँ प्रसन्न हुई कि बेटे ने कहानी का अर्थ समझ लिया।
मेरी समझ से
सही उत्तर :
उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
सही उत्तर :
निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।
करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
सही उत्तर :
न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
(ख) भाग की चर्चा कक्षा में अपने साथियों के साथ कीजिए।
मिलकर करें मिलान
| पात्र | ये शब्द किनके लिए आए हैं |
|---|---|
| बेटा | सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल |
| माँ | यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| तात (पिता) | सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
पंक्तियों पर चर्चा
यदि कोई किसी निर्दोष को मारे, तो दूसरे व्यक्ति को उसे बचाना चाहिए। न्याय मारने वाले का नहीं, बचाने वाले का साथ देता है। न्याय में दया छिपी होती है।
दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी में झगड़ा हुआ। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे। तब मामला न्यायालय में गया। वहाँ सभी ने यह बात सुनी और जानी।
सोच-विचार के लिए
“कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?” — यह पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें कविता का मुख्य संदेश है। यह हमें निर्दोष की रक्षा करना सिखाती है।
आखेटक ने हंस को तीर से घायल किया था। बच्चे के पिता ने हंस को उठाकर बचा लिया। आखेटक ने अपना शिकार वापस माँगा। पिता रक्षक थे, इसलिए उन्होंने हंस नहीं दिया। इसी कारण दोनों में तर्क-वितर्क हुआ।
माँ जानना चाहती थी कि राहुल ने कहानी कितनी समझी है। वह राहुल में न्याय और दया की समझ जगाना चाहती थी। इसलिए उसने निर्णय राहुल पर छोड़ दिया।
मैं हंस को धीरे से उठाता। उसका घाव साफ करके पानी पिलाता। फिर उसे पशु-चिकित्सक के पास ले जाता। न्याय यही होता कि हंस बचाने वाले को मिले। शिकारी को समझाया जाता कि निर्दोष जीव को मारना गलत है।
- माँ और बेटे में बहुत प्रेम है।
- बेटा कहानी सुनने का शौकीन और थोड़ा हठी है।
- माँ बुद्धिमान है। वह कहानी के माध्यम से अच्छी सीख देती है।
- बेटा समझदार है। उसने सही और दया भरा निर्णय दिया।
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अनुमान और कल्पना से
न्यायाधीश ने दोनों की बात ध्यान से सुनी। उन्होंने कहा — “जीवन लेने वाले से जीवन बचाने वाला बड़ा होता है।” हंस सिद्धार्थ को सौंप दिया गया। सिद्धार्थ ने उसकी सेवा की। कुछ दिनों बाद हंस स्वस्थ होकर आकाश में उड़ गया। शिकारी को भी अपनी भूल समझ में आ गई।
हंस — “मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? तुमने मुझे तीर क्यों मारा?”
शिकारी — “मैं शिकारी हूँ। शिकार करना मेरा काम है।”
हंस — “मुझे भी तुम्हारी तरह जीने का अधिकार है। मेरा दर्द भी तुम्हारे दर्द जैसा ही है।”
शिकारी — “मैंने तो कभी इस तरह सोचा ही नहीं।”
मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति बनना चाहूँगा। निर्दोष जीव की रक्षा करना सबसे अच्छा काम है। इससे मन को सच्चा सुख मिलता है।
संवाद
कविता में कौन-सा कथन किसने कहा है, यह पहचानकर लिखा गया है। हर कथन की पहली पंक्ति दी गई है।
| पुत्र द्वारा कहे गए कथन | माँ द्वारा कहे गए कथन |
|---|---|
| “माँ, कह एक कहानी।” | “बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?” |
| “कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी!...” | “तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे...” |
| “जहाँ सुरभि मनमानी? हाँ, माँ, यही कहानी।” | “वर्ण वर्ण के फूल खिले थे...” |
| “लहराता था पानी? हाँ, हाँ, यही कहानी।” | “गाते थे खग कल कल स्वर से...” |
| “हुई पक्ष की हानी? करुणा-भरी कहानी!” | “चौंक उन्होंने उसे उठाया...” |
| “लक्ष्य-सिद्धि का मानी? कोमल-कठिन कहानी।” | “माँगा उसने आहत पक्षी...” |
| “हठ करने की ठानी? अब बढ़ चली कहानी।” | “हुआ विवाद सदय-निर्दय में...” |
| “सुनी सभी ने जानी? व्यापक हुई कहानी।” | “राहुल, तू निर्णय कर इसका...” |
| “माँ, मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी। कोई निरपराध को मारे...” | “न्याय दया का दानी? तूने गुनी कहानी।” |
शब्द से जुड़े शब्द
प्रकृति से जुड़े शब्द :
पंक्ति से पंक्ति
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. कहती है मुझ से यह चेटी | 7. यह सेविका मुझ से यह कहती है। |
| 2. तू है हठी मानधन मेरे | 9. हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 3. झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे | 5. हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | 8. तेज धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 5. हुआ विवाद सदय-निर्दय में | 3. दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसका | 2. तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 7. तूने गुनी कहानी | 6. तूने कहानी को समझ लिया है। |
| 8. उभय आग्रही थे स्वविषय में | 1. दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी | 10. तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी! | 4. न्याय में दया सम्मिलित होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
कविता की रचना
- पूरी कविता माँ-बेटे के संवाद के रूप में है।
- कई पंक्तियाँ दो बार आई हैं, जैसे — “राजा था या रानी?”
- पंक्तियों के अंतिम शब्द तुकांत हैं, जैसे — खिले थे, झिले थे, हिले-मिले थे।
- प्रकृति का सुंदर वर्णन है।
- विपरीत अर्थ वाले शब्द साथ आए हैं, जैसे — सदय-निर्दय, कोमल-कठिन।
- विराम चिह्नों का सुंदर प्रयोग हुआ है।
| कविता की विशेषता | कविता की पंक्ति (क्रमांक) |
|---|---|
| 1. संवाद दिए गए हैं। | 3, 4 |
| 2. पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि मिलती-जुलती है। | 3 (चेटी-बेटी), 6 (खिले थे, झिले थे) |
| 3. कुछ शब्द दो बार और साथ-साथ आए हैं। | 6 (वर्ण वर्ण) |
| 4. कुछ विपरीतार्थक शब्द साथ-साथ आए हैं। | 1 (सदय-निर्दय), 5 (कोमल-कठिन) |
| 5. प्रकृति का वर्णन किया गया है। | 6 |
| 6. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले शब्द एक पंक्ति में आए हैं। | 2 (हुई, हानी), 4 (मानधन मेरे) |
| 7. प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं। | 3 |
| 8. शब्द की वर्तनी बदलकर उपयोग किया गया है। | 2 (हानि → हानी) |
रूप बदलकर
पक्षी मधुर स्वर में कल-कल गा रहे थे। तभी अचानक ऊपर से एक हंस नीचे गिरा। वह एक तेज धार वाले तीर से घायल हो गया था। उसके पंखों को बहुत हानि पहुँची थी। यह सचमुच करुणा से भरी कहानी थी।
कविता में विराम चिह्न
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
(ख) विराम चिह्नों का ध्यान रखते हुए कविता को अपने समूह में सुनाइए।
पाठ से आगे — आपकी बात
हम सुबह पास के बगीचे में और छुट्टियों में गाँव या किसी पर्यटन स्थल पर जाते हैं। सुबह घूमने से शरीर स्वस्थ रहता है। नई जगहें देखने से मन प्रसन्न होता है और नई जानकारी मिलती है।
मैं दादी-नानी और माँ से कहानियाँ सुनता हूँ। मैं अपने छोटे भाई-बहन को पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाता हूँ, जैसे — ‘प्यासा कौआ’।
हाँ, सही है। इससे सुनने वाले का ध्यान कहानी में बना रहता है। वह कहानी पर सोचने लगता है। सुनाने वाले को भी पता चलता है कि कहानी कितनी समझ में आई।
हाँ। मुझे ‘खरगोश और कछुआ’ की कहानी बार-बार सुनना अच्छा लगता है। यह रोचक है और सिखाती है कि लगातार प्रयास करने वाला ही जीतता है।
निर्णय करें
मैं उसे शांति से नियम याद दिलाऊँगा। उसका मजाक नहीं उड़ाऊँगा।
मैं चिढ़ाने वालों को रोकूँगा और सहपाठी का साथ दूँगा। आवश्यकता होने पर शिक्षक को बताऊँगा।
मैं उससे कारण पूछूँगा। यदि कठिनाई है तो उसकी मदद करूँगा, ताकि वह अपना भाग पूरा कर सके।
मैं दोनों की बात सुनूँगा। उन्हें शांत करके आपस में समझौता करवाऊँगा।
मैं विनम्रता से शिक्षक को सच्चाई बताऊँगा, ताकि निर्दोष को दंड न मिले।
मैं उसका हौसला बढ़ाऊँगा। उसे समझाऊँगा कि हार से सीखकर अगली बार और अच्छा किया जा सकता है।
मैं उसे बोलने के लिए प्रोत्साहित करूँगा और उसे भी अवसर देने को कहूँगा।
मैं खुशी से उसे वह विषय सरल ढंग से समझाऊँगा।
सुनी कहानी
अपने घर या आस-पास सुनी किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए। सभी समूहों की लोककथाओं से एक पुस्तिका बनाकर कक्षा के पुस्तकालय में रखिए।
आज की पहेली
सही उत्तर :
माँ
सही उत्तर :
पक्षी (खग)
सही उत्तर :
सुरभि