10. मीरा के पद
मीरा — दोनों पदों का भावार्थ, सभी प्रश्नों के सरल उत्तर और ‘पढ़ने के लिए’ पाठों का सार. NCERT मल्हार (CBSE).
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कवयित्री परिचय : मीरा लगभग 500 वर्ष पहले हुईं। वे श्रीकृष्ण की महान भक्त और संत कवयित्री थीं। राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने महलों का सुख छोड़कर संतों का जीवन चुना। उनके भजन आज भी श्रद्धा से गाए जाते हैं।
पदों का भावार्थ
मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल ॥
अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल ॥
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल ॥
मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल ॥
भावार्थ : मीरा कहती हैं — हे नंदलाल श्रीकृष्ण! तुम मेरी आँखों में बस जाओ। तुम्हारी मूर्ति मन को मोहने वाली है, रंग साँवला है और आँखें बड़ी-बड़ी हैं। होंठों पर अमृत जैसा मधुर रस बरसाती बाँसुरी शोभा दे रही है। सीने पर वैजयंती माला है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं और पैरों के घुँघरू मधुर ध्वनि कर रहे हैं। मीरा के प्रभु संतों को सुख देने वाले और भक्तों से प्रेम करने वाले गोपाल हैं।
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की ॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की ।
नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की ॥
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, आनंद मंगल गावन की ॥
भावार्थ : मन को अच्छा लगने वाले सावन के बादल बरस रहे हैं। सावन में मेरा मन उमंग से भर गया है, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनी है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आ गए हैं। बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरस रही हैं और सुहावनी ठंडी हवा चल रही है। मीरा कहती हैं — मेरे प्रभु गिरधरनागर के आने की खुशी में आनंद-मंगल के गीत गाने का समय है।
मेरी समझ से
सही उत्तर :
श्रीकृष्ण से
सही उत्तर :
प्रेम और भक्ति
सही उत्तर :
वर्षा
सही उत्तर :
प्रसन्न हैं।
(ख) भाग की चर्चा कक्षा में अपने साथियों के साथ कीजिए।
मिलकर करें मिलान
| शब्द | अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| 1. नंदलाल | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| 2. वैजंती माल | वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| 3. सावन | श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले का महीना |
| 4. गिरधर | पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
पंक्तियों पर चर्चा
छोटी-छोटी बूँदों में वर्षा हो रही है। ठंडी और सुहावनी हवा चल रही है। यह मौसम मन को बहुत आनंद दे रहा है।
मीरा के प्रभु श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले हैं। वे अपने भक्तों से बहुत स्नेह करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं।
सोच-विचार के लिए
- वे नंद के पुत्र हैं और उनकी मूर्ति मन मोहने वाली है।
- उनका रंग साँवला है और आँखें बड़ी-बड़ी हैं।
- उनके होंठों पर बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला है।
- कमर पर छोटी घंटियाँ और पैरों में मधुर ध्वनि वाले नूपुर हैं।
- वे संतों को सुख देने वाले और भक्तों से प्रेम करने वाले हैं।
सावन मन को भाने वाला महीना है। चारों ओर से बादल उमड़-घुमड़ कर आते हैं। बिजली चमकती है और झड़ी लग जाती है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और ठंडी सुहावनी हवा चलती है। मन उमंग से भर जाता है।
कविता की रचना
- पदों के अंत में कवयित्री ने अपने नाम का उल्लेख किया है।
- श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नाम आए हैं — नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधरनागर।
- पंक्तियाँ छोटी, लयबद्ध और गाने योग्य हैं।
- पंक्तियों के अंतिम शब्द तुकांत हैं — नंदलाल, विशाल, माल, रसाल, गोपाल।
- ब्रज और राजस्थानी भाषा के शब्दों का प्रयोग है, जैसे — नैनन, मेरो, बदरिया।
- एक ही वर्ण की आवृत्ति से सुंदरता बढ़ी है, जैसे — बरसे बदरिया।
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अनुमान और कल्पना से
बादलों ने गरजकर और रिमझिम बरसकर कहा होगा — “मीरा, खुश हो जाओ! तुम्हारे गिरधर आ रहे हैं। देखो, हम उनके स्वागत के लिए धरती को धो रहे हैं और ठंडी हवा उनकी राह सजा रही है।”
मैं कहूँगा — “आपके भजन मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।” मैं पूछूँगा — “आपने महलों का सुख क्यों छोड़ा? आपको कृष्ण-भक्ति की प्रेरणा कहाँ से मिली? क्या आपको कभी डर नहीं लगा?”
शब्दों के रूप
| पद में आया रूप | हम जैसे लिखते-बोलते हैं |
|---|---|
| नैनन | नयनों में, आँखों में |
| सोभित | शोभित |
| भक्त वछल | भक्तवत्सल |
| बदरिया | बादल |
| मेरो मनवा | मेरा मन |
| आवन | आना, आगमन |
| दिश | दिशा |
| मेहा | मेघ, वर्षा |
शब्द से जुड़े शब्द
श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द :
पंक्ति से पंक्ति
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी है। |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं और पैरों के नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले हो। |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | 3. सावन में मेरे मन में उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। |
| 5. उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। |
कविता का सौंदर्य
रूप बदलकर
सावन के बादल बरस रहे हैं। यह सावन मन को बहुत भा रहा है। मेरे मन में उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने सुना है कि मेरे हरि आने वाले हैं। चारों ओर से बादल उमड़-घुमड़ कर आ गए हैं। बिजली चमक रही है और झमाझम वर्षा हो रही है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिर रही हैं और ठंडी सुहावनी हवा चल रही है। मेरे प्रभु गिरधरनागर के स्वागत में आनंद और मंगल के गीत गाने का समय आ गया है।
मुहावरे
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| 1. आँखों का तारा | बहुत प्यारा | छोटा बेटा माँ की आँखों का तारा है। |
| 2. आँखों पर पर्दा पड़ना | सच्चाई दिखाई न देना | लालच में उसकी आँखों पर पर्दा पड़ गया। |
| 3. आँखों के आगे अँधेरा छाना | घबरा जाना, कुछ न सूझना | बुरी खबर सुनकर उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। |
| 4. आँख दिखाना | गुस्से से डराना | शिक्षक ने शरारती बच्चे को आँख दिखाई। |
| 5. आँख का काँटा | बहुत बुरा लगने वाला | ईमानदार अधिकारी चोरों की आँख का काँटा बन गया। |
| 6. आँखें फेरना | उपेक्षा करना, साथ छोड़ देना | मुसीबत में उसके मित्रों ने आँखें फेर लीं। |
| 7. आँख भर आना | आँसू आ जाना | विदाई के समय सबकी आँखें भर आईं। |
| 8. आँखें चुराना | सामने आने से बचना | गलती करने पर वह मुझसे आँखें चुराने लगा। |
| 9. आँखों से उतारना | सम्मान कम हो जाना | झूठ बोलने से वह सबकी आँखों से उतर गया। |
| 10. आँखों में खटकना | बुरा लगना | उसकी सफलता कुछ लोगों की आँखों में खटकती है। |
सबकी प्रस्तुति
किसी एक पद को चुनकर समूह में गायन, भाव-नृत्य या कविता-पाठ के रूप में कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
पाठ से आगे — आपकी बात
आकाश में बादल छाए रहते हैं और बार-बार वर्षा होती है। गर्मी कम हो जाती है। चारों ओर हरियाली छा जाती है। नदी-नाले और तालाब भर जाते हैं।
बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, छत पर बूँदों की टप-टप, मेंढकों की टर्र-टर्र और मोर की पीहू-पीहू सुनाई देती है। बूँदों की आवाज से मन शांत और प्रसन्न होता है, पर बिजली की कड़क से थोड़ा डर भी लगता है।
बारिश में भीगना, कागज की नाव चलाना, झूला झूलना और गरम पकौड़े खाना।
सावन में नाग पंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन मनाए जाते हैं। रक्षाबंधन पर मेरी बहन मुझे राखी बाँधती है और मिठाई खिलाती है। मैं उसकी रक्षा का वचन देकर उसे उपहार देता हूँ।
हाँ, मेरी माँ। वे हर कठिनाई में मेरा साथ देती हैं, पढ़ाई में मदद करती हैं और मेरी हर छोटी खुशी में खुश होती हैं।
मेरी दादी की चश्मे की डोरी हमेशा गले में लटकी रहती है। उनके माथे पर छोटी लाल बिंदी है। हाथ में चाँदी का पतला कंगन है। जब वे हँसती हैं तो आँखों के कोने में सिलवटें पड़ जाती हैं।
विशेषताएँ
उनकी मन मोहने वाली साँवली सूरत, बड़ी-बड़ी आँखें और होंठों पर मधुर बाँसुरी ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया।
मेरे शिक्षक का धैर्य मुझे सबसे अधिक आकर्षित करता है। वे हर बच्चे की बात ध्यान से सुनते हैं और बिना गुस्सा किए बार-बार समझाते हैं।
- बाह्य विशेषताएँ — मेरे बाल घुँघराले हैं। मैं लंबा हूँ।
- आंतरिक विशेषताएँ — मैं ईमानदार हूँ। मैं दूसरों की मदद करता हूँ।
मधुर ध्वनियाँ
| पहेली | उत्तर |
|---|---|
| हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है... | बाँसुरी |
| दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता... | तबला |
| शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती... | शहनाई |
| तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना... | वीणा |
| दो हाथों से बजती है ये... लटक गले ये करती सैर | ढोलक |
| नागिन-सी लहराती है जो... | बीन |
| सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए... | संतूर |
| छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए... | मंजीरा |
चित्र करते हैं बातें
चित्र में मीरा केसरिया वस्त्र पहने बैठी हैं। उनके लंबे काले बाल खुले हैं। कंधे पर तानपूरे जैसा वाद्य है, जिसे वे प्रेम से बजा रही हैं। उनकी आँखें झुकी हुई हैं, मानो वे श्रीकृष्ण के ध्यान में खोई हों। चेहरे पर शांति और भक्ति का भाव है। चित्र देखकर लगता है कि मीरा ने सब कुछ छोड़कर अपना जीवन कृष्ण-भक्ति और भजन गाने में लगा दिया था।
सावन से जुड़े गीत
परिजनों, शिक्षकों या पुस्तकालय की सहायता से सावन के गीत (जैसे — झूला गीत, कजरी) ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा की पुस्तिका में सम्मिलित कीजिए।
खोजबीन
सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त कवि थे। उनकी रचनाएँ, जैसे — “मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो”, ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए।
आज की पहेली
| शब्द | समान ध्वनि वाला शब्द |
|---|---|
| 1. मूरति | सूरति |
| 2. सावन | आवन |
| 3. उमड़ | घुमड़ |
| 4. नागर | नगर |
| 5. नंदलाल | गोपाल |
पढ़ने के लिए — स्वामिभक्त सुमुख (सार)
चित्रकूट पर्वत की एक गुफा में हंसों का बड़ा झुंड रहता था। उनके राजा मरालदेव और मंत्री सुमुख थे। एक दिन हंसों ने नगर के पास ‘मानुसिय’ नामक सुंदर कमल-सरोवर देखा। राजा और सुमुख को वहाँ जाना सुरक्षित नहीं लगा, पर साथियों के आग्रह पर सब वहाँ गए।
सरोवर पर उतरते ही राजा मरालदेव का पैर शिकारी के जाल में फँस गया। साथी भूखे न रह जाएँ, इसलिए राजा चुप रहे। बाद में खतरे का संकेत देते ही सब हंस उड़ गए, पर सुमुख अपने राजा को छोड़कर नहीं गया।
शिकारी आया तो सुमुख ने कहा — “महाराज को छोड़ दो, बदले में मुझे पकड़ लो।” सुमुख की स्वामिभक्ति देखकर शिकारी का हृदय बदल गया। उसने राजा को मुक्त कर दिया और उनके घाव धोए।
हंस शिकारी को राजा सकुल के पास ले गए और उसके लिए पुरस्कार माँगा। राजा ने शिकारी को घर, रथ, सोना और एक लाख की आय दी। मरालदेव ने कहा कि यह सब सुमुख की समझदारी और निष्ठा से संभव हुआ। सीख : सच्चा मित्र और सेवक संकट में साथ नहीं छोड़ता।
पढ़ने के लिए — विजयी विश्व तिरंगा प्यारा (भावार्थ)
यह प्रसिद्ध झंडा-गीत श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने लिखा है। इसमें कवि कहते हैं कि हमारा प्यारा तिरंगा सारे विश्व में विजयी हो और सदा ऊँचा रहे।
तिरंगा हमें शक्ति देता है, प्रेम का अमृत बरसाता है और वीरों में उत्साह भरता है। स्वतंत्रता की लड़ाई में इसे देखकर देशभक्तों का जोश बढ़ता था और शत्रु काँप उठते थे।
कवि सभी वीरों को एक साथ मिलकर देश के लिए समर्पित होने और ‘भारत माता की जय’ बोलने का आह्वान करते हैं। तिरंगे की शान कभी कम न हो, चाहे इसके लिए प्राण ही क्यों न देने पड़ें — यही हमारा प्रण है।
पहेलियों के उत्तर (पाठ 1 से 10)
| पाठ | आज की पहेली के उत्तर |
|---|---|
| 1. माँ, कह एक कहानी | माँ, पक्षी, सुरभि |
| 2. तीन बुद्धिमान | गिरगिट, नीला डिब्बा |
| 4. पानी रे पानी | मेह, जलाशय, नीर, अंबु, सर, सरोवर, सलिल, ताल, तटिनी, बारिश, प्रवाहिनी, तरंगिणी |
| 5. नहीं होना बीमार | आलू का पराठा, मसाला डोसा, वड़ा पाव, ढोकला, पानी पूरी, मक्के की रोटी, बाटी, रसगुल्ला |
| 7. वर्षा-बहार | ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, वसंत ऋतु, शीत ऋतु, पतझड़ |
| 8. बिरजू महाराज से साक्षात्कार | रूपक, लक्ष्मी, तिलवाड़ा, कहरवा, झूमरा, दीपचंदी, दादरा |
| 9. चिड़िया | तोता, कौआ, खंजन, कोयल, कबूतर, चातक, हंस |
| 10. मीरा के पद | मधुर ध्वनियाँ — बाँसुरी, तबला, शहनाई, वीणा, ढोलक, बीन, संतूर, मंजीरा; आज की पहेली — आवन, घुमड़, नगर, गोपाल |