कक्षा 7 हिंदी · मल्हार

9. चिड़िया

आरसी प्रसाद सिंह — कविता का भावार्थ और सभी प्रश्नों के सरल उत्तर. NCERT मल्हार (CBSE).

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कविता का भावार्थ : पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है। वह अपनी बोली में मनुष्य को प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश सुनाती है। वन के सभी पक्षी — खंजन, कबूतर, चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता — आपस में मिल-जुलकर रहते और खाते हैं। आकाश ही उनका घर है। वे दिनभर मेहनत करते हैं और रात को पेड़ों पर सो जाते हैं। उनके मन में लालच नहीं है। वे जरूरत भर ही लेते हैं और बचा हुआ दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। वे दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते। पक्षी मनुष्य से कहते हैं — हमसे जीना सीखो। लालच की सोने की बेड़ियाँ तोड़ो और मानवता से बैर छोड़ो।

मेरी समझ से

1कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?

सही उत्तर :
लोभ और पाप

2“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” — यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?

सही उत्तर :
समानता और एकता

3पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?

सही उत्तर :
स्वच्छंद रहना

मिलकर करें मिलान

संदर्भभाव
1. चिड़िया की बोली5. प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश
2. सोने की कड़ियाँ1. बंधन और लालच
3. निर्भय विचरण4. स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन
4. मुक्ति-मंत्र3. बंधन से मुक्ति
5. दिनभर काम2. श्रम और संतोष

पंक्तियों पर चर्चा

क“चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!”

चिड़िया अपने गीत और व्यवहार से हमें प्रेम से रहने का तरीका सिखाती है। पक्षी आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। हमें भी सबसे प्रेम करना चाहिए।

ख“उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं।”

पक्षियों के मन में लालच नहीं होता। वे किसी का बुरा नहीं करते। उन्हें कल की चिंता भी नहीं होती। इसलिए वे सुखी रहते हैं।

ग“सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं।”

पक्षियों के लिए आकाश की कोई सीमा नहीं है। वे बिना डर के जहाँ चाहें उड़ते-फिरते हैं। उनका जीवन पूरी तरह स्वतंत्र है।

सोच-विचार के लिए

कपक्षियों के आपसी सहयोग की भावना हमारे लिए कैसे उपयोगी है?

मिल-जुलकर रहने से झगड़े नहीं होते। कठिन काम भी आसानी से हो जाते हैं। सब एक-दूसरे की मदद करते हैं, जिससे समाज सुखी और मजबूत बनता है।

खपक्षी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?

पक्षी जितनी जरूरत हो, उतना ही लेते हैं और बाकी दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। मनुष्य लालच के कारण जरूरत से अधिक धन और चीजें जमा करता है। वह दूसरों का हक भी छीन लेता है।

गपक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?

पक्षी लालच, चिंता और बंधनों से मुक्त हैं, इसलिए स्वच्छंद हैं। मनुष्य ने लालच, धन और स्वार्थ की बेड़ियाँ खुद अपने पैरों में डाल ली हैं, इसलिए वह बंधन में है।

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अनुमान और कल्पना से

1मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किनकी नहीं?

मनुष्य को पढ़ने, अपनी बात कहने, धर्म मानने, घूमने-फिरने और काम चुनने की स्वतंत्रता है। पर उसे दूसरों को हानि पहुँचाने, नियम-कानून तोड़ने, सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने और प्रकृति को नुकसान पहुँचाने की स्वतंत्रता नहीं है।

2चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?

चिड़िया सादा और स्वतंत्र जीवन जीती है। वह संग्रह नहीं करती और सबके साथ मिलकर रहती है। मनुष्य सुविधाओं, धन और नियमों से बँधा है। वह भविष्य के लिए संग्रह करता है।

3यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप घर कहाँ बनाना चाहेंगे?

मैं पहाड़ों पर किसी झरने के पास घने पेड़ पर घर बनाना चाहूँगा। वहाँ शुद्ध हवा, शांति और सुंदर प्रकृति होगी।

4यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो चिड़िया से क्या बातें करते?

मैं पूछता कि वह इतनी दूर-दूर कैसे उड़ लेती है। उसे शहर में क्या परेशानियाँ होती हैं। मैं उससे वादा करता कि उसके लिए दाना-पानी रखूँगा और पेड़ लगाऊँगा।

कविता की रचना

1“सब मिल-जुलकर...” शैली में कविता आगे बढ़ाइए।
सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे,
सब मिल-जुलकर गाते हैं;
सब मिल-जुलकर उड़ते हैं वे,
सब मिल-जुलकर आते हैं।
सब मिल-जुलकर नीड़ बनाते,
सब मिल-जुलकर सोते हैं।

भाषा की बात

1कविता से क्रिया शब्द ढूँढ़कर नए वाक्य बनाइए।
गातीसुनातीसिखलातीबतलातीरहतेखातेजातेबसातेकरतेसो जातेले लेतेदेतेउड़तेभरतेसीखोतोड़ोछोड़ो
  • गाती — मेरी बहन मधुर गीत गाती है।
  • सिखलाती — माँ हमें अच्छी बातें सिखलाती है।
  • उड़ते — आकाश में पतंग उड़ते हैं।
  • सो जाते — हम रात को दस बजे सो जाते हैं।
  • तोड़ो — कभी किसी का विश्वास मत तोड़ो।

पाठ से आगे — भावों की बात

कइन दृश्यों को देखकर आपको कैसा महसूस होता है?
दृश्यभाव
1. कहीं से पक्षी के चहचहाने की आवाजआनंद, शांति
2. शाम को पेड़ पर अनगिनत पक्षी चहचहा रहे हैंआनंद, आश्चर्य
3. गाय अपने बच्चे को दूध पिला रही हैममता, प्रेम
4. कोई वाहन की खिड़की से कूड़ा फेंक देता हैक्रोध, घृणा
5. बच्चा व्यर्थ कागज कूड़ेदान में डाल देता हैगर्व, सुख
6. बिना हेलमेट बहुत तेज बाइक चलानाडर, चिंता
7. दो प्राणी लड़ रहे हैंडर, दुख
8. बिना पैर वाला व्यक्ति तिपहिया गाड़ी पर यात्रा कर रहा हैसहानुभूति, आत्मविश्वास
9. नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि में सूचना-बोर्डआभार, सुख
10. कोई किसी को अपशब्द कह रहा हैक्रोध, दुख
11. कोई भूखे को भोजन दे रहा हैदया, करुणा, आभार
12. भाई स्वादिष्ट भोजन बनाकर बहन को खिला रहा हैप्रेम, आनंद
खआप कौन-से भाव कब अनुभव करते हैं?
  • आत्मविश्वास — जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से सामान ले आता हूँ।
  • गर्व — जब मुझे कक्षा में पुरस्कार मिलता है।
  • डर — जब रात को बिजली चली जाती है।
  • करुणा — जब मैं किसी घायल पिल्ले को देखता हूँ।
  • उत्साह — जब छुट्टियों में घूमने जाने की तैयारी होती है।

आज की पहेली

पहेलीपक्षी
दिखने में हूँ हरा-हरा... कहते सब मुझे मिट्ठूलालतोता
रहता है घर के आस-पास, रंग है उसका काला खास...कौआ
सुंदर काले मेरे नैन, श्वेत श्याम हैं मेरे डैन...खंजन
कूहू कूहू मधुर आवाज सुनाती... काली हूँ पर काक नहींकोयल
संदेश पहुँचाना मेरा काम... करता हूँ मैं गुटर-गूँकबूतर
पीता हूँ बारिश की बूँदें... देखो चकोर है मेरी साथीचातक
तन मेरा सफेद, गर्दन मेरी लंबी... कहलाता हूँ मैं जलपक्षीहंस

चित्र की बात

1आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों?

तीन चित्र हैं — ऊँची इमारतों वाला शहर, पिंजरा और हरा-भरा जंगल। मैं पक्षियों को हरे-भरे जंगल में देखना पसंद करूँगा। वहाँ वे स्वतंत्र रहकर उड़ सकते हैं। उन्हें भोजन, पानी और घोंसले के लिए पेड़ मिलते हैं। पिंजरे में वे बंदी हैं और शहर में उनके लिए पेड़ नहीं हैं।

निर्भय विचरण

1चित्रों को देखकर आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं?

पहले चित्र में जंगल सफारी है। मनुष्य जाली वाली बस में बंद है और शेर-भालू खुले घूम रहे हैं। दूसरे चित्र में चिड़ियाघर है, जहाँ जानवर पिंजरों में बंद हैं और मनुष्य खुले घूम रहे हैं। मुझे लगता है कि जानवरों को भी अपने प्राकृतिक घर में निर्भय होकर घूमने का अधिकार है। जंगल में जानवर निर्भय विचरण कर रहे हैं।

साथ-साथ

1हमारे परिवेश में पशु-पक्षियों का रहना क्यों आवश्यक है?

पशु-पक्षी प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं। पक्षी कीड़े खाकर फसलों की रक्षा करते हैं और बीज फैलाते हैं। मधुमक्खियाँ और तितलियाँ परागण करती हैं। पशु हमें दूध देते हैं और खेती में मदद करते हैं।

2हम आस-पास के पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
  • गर्मियों में छत पर पानी और दाना रखें।
  • पेड़ लगाएँ और पेड़ों को न काटें।
  • घायल पशु-पक्षी को पशु-चिकित्सक के पास ले जाएँ।
  • पक्षियों को पिंजरे में बंद न करें।
  • प्लास्टिक इधर-उधर न फेंकें।

शब्द एक अर्थ अनेक

शब्दपहला अर्थ और वाक्यदूसरा अर्थ और वाक्य
करहाथ — उसने कर जोड़कर प्रणाम किया।टैक्स — हमें समय पर कर चुकाना चाहिए।
जलपानी — जल ही जीवन है।जलना — चूल्हे में आग जल रही है।
अर्थमतलब — इस शब्द का अर्थ बताओ।धन — अर्थ के बिना व्यापार नहीं चलता।
फलखाने का फल — आम मेरा प्रिय फल है।परिणाम — मेहनत का फल मीठा होता है।
आमएक फल — आम बहुत मीठा है।साधारण — वह एक आम आदमी है।

रचनात्मकता

हमारा पर्यावरण

1पशु-पक्षियों के लिए संकट पैदा करने वाले मनुष्य के कार्यों की सूची और उपाय लिखिए।

संकट पैदा करने वाले कार्य :

  • जंगलों की कटाई
  • ऊँचे भवनों और सड़कों का निर्माण
  • नदियों और तालाबों में कचरा डालना
  • प्लास्टिक का अधिक उपयोग
  • शिकार और पक्षियों को पिंजरे में रखना
  • मोबाइल टावर और प्रदूषण

उपाय :

  • अधिक पेड़ लगाना और जंगलों की रक्षा करना
  • जल स्रोतों को साफ रखना
  • प्लास्टिक का उपयोग बंद करना
  • शिकार पर रोक लगाना
  • पक्षियों के लिए घोंसले, दाना और पानी की व्यवस्था करना

परियोजना कार्य

कप्लास्टिक के थैले कहाँ उपयोग होते हैं और उनके विकल्प क्या हैं?
प्लास्टिक थैले का उपयोगविकल्प
सब्जी और किराना लानाकपड़े या जूट का थैला
दूध और खाने का सामान लानास्टील का डिब्बा या बर्तन
दुकान से सामान बाँधनाकागज का थैला
टिफिन और पानी की बोतल रखनाकपड़े का थैला, स्टील की बोतल

झरोखे से — पक्षियों की प्रवास यात्राएँ

1साझी समझ — प्रवासी पक्षियों पर लेख

हर वर्ष सर्दियों में अनेक पक्षी ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर उड़कर भारत आते हैं। इन्हें प्रवासी पक्षी कहते हैं। साइबेरियन सारस, राजहंस (फ्लेमिंगो), पट्टीदार सिर वाला हंस (बार-हेडेड गूज़) और कई प्रकार की बत्तखें इनमें प्रमुख हैं। ये पक्षी प्रायः दल बनाकर ‘V’ आकार में उड़ते हैं। राजस्थान का केवलादेव (भरतपुर) पक्षी विहार और गुजरात का नल सरोवर इन पक्षियों के प्रसिद्ध ठिकाने हैं। गर्मी आते ही ये फिर अपने देश लौट जाते हैं। हमें इनके ठिकानों को साफ और सुरक्षित रखना चाहिए।