कक्षा 7 हिंदी · मल्हार

5. नहीं होना बीमार

स्वयं प्रकाश — कहानी का सार और सभी प्रश्नों के सरल उत्तर. NCERT मल्हार (CBSE).

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कहानी का सार : बच्चा नानीजी के साथ अस्पताल में बीमार सुधाकर काका को देखने गया। वहाँ का साफ-सुथरा वातावरण और काका को मिली साबूदाने की खीर देखकर उसे लगा कि बीमारों के तो ठाठ हैं। एक दिन उसने गृहकार्य नहीं किया था। स्कूल न जाने के लिए उसने बीमारी का बहाना बना दिया। नानाजी ने उसे कड़वी पुड़िया खिलाई और कहा कि आज इसे कुछ खाने को मत देना। बच्चा दिनभर ऊब और भूख से परेशान रहा। सब लोग दाल-चावल और आम खाते रहे, पर उसे भूखा रहना पड़ा। इसके बाद उसने कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया।

मेरी समझ से

1बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?

सही उत्तर :
उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
उसने गृहकार्य नहीं किया था।

2बच्चे ने फिर कभी बीमारी का बहाना न बनाने का निर्णय क्यों लिया?

सही उत्तर :
इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।

3“लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” — इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?

सही उत्तर :
उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।

4“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात क्यों आई?

सही उत्तर :
बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।

मिलकर करें मिलान

शब्दअर्थ
1. साबूदानासागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, जिसे कूटकर दानों के रूप में सुखाया जाता है।
2. वार्डकिसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।
3. नर्सवह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों की देखभाल करे।
4. रजाईजाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है।
5. थर्मामीटरशरीर का तापमान नापने का एक छोटा यंत्र।
6. काढ़ाजड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर बना पेय।
7. ड्राइक्लीनरनाजुक कपड़ों को बिना पानी और साबुन के मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति।
8. ताजमहलआगरा में स्थित सफेद संगमरमर का विश्व-प्रसिद्ध स्मारक।
9. अरहरएक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

क“मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”

बच्चे ने गृहकार्य नहीं किया था। सजा से बचने के लिए उसने बीमारी का बहाना बनाने की सोची। ऐसा लगता है मानो बीमार पड़ना उसके अपने हाथ में हो। इस बात में हास्य भी है।

ख“देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा... चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”

भूखा बच्चा मन ही मन घरवालों से नाराज है। वह सोचता है कि उसने कोई बड़ी चीज नहीं माँगी थी, बस खीर ही तो चाहिए थी। विकार निकालने के चक्कर में वह स्वयं भूख का शिकार हो रहा है।

सोच-विचार के लिए

कअस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?

उसे साफ-सुथरे पलंग, सफेद चादरें, लाल कंबल, चमकता फर्श और खिड़कियों के बाहर झूमते पेड़ अच्छे लगे। वहाँ न शोर था, न धूल, न मच्छर-मक्खी। चारों ओर शांति थी।

खबच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या उसका निर्णय सही था?

हाँ, उसका निर्णय सही था। झूठा बहाना बनाकर उसे दिनभर अकेले, ऊबते हुए और भूखे रहना पड़ा। स्कूल जाता तो थोड़ी सजा मिलती, पर दिन अच्छा बीतता।

गबिस्तर पर लेटे रहने के दौरान बच्चे के मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?

ऊब, भूख की बेचैनी, पछतावा, घरवालों पर गुस्सा, मुन्नू से जलन और रुआँसापन।

घअसल में बीमार होने और बच्चे की सोच में क्या समानताएँ और अंतर हैं?

समानता — बीमार को आराम और खास भोजन मिलता है। अंतर — असली बीमार को दर्द और कमजोरी होती है। उसे खाना अच्छा नहीं लगता और कड़वी दवा खानी पड़ती है। बीमारी में ठाठ नहीं, कष्ट होता है।

ङनानाजी-नानीजी ने बच्चे को खाना नहीं दिया। क्या उन्होंने सही किया?

उनकी सोच के अनुसार हल्की बीमारी में भूखा रहना अच्छा उपाय है। पर बच्चे को हल्का भोजन, जैसे दूध या खिचड़ी, दिया जा सकता था। मेरे विचार से बीमार को भी हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए।

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अनुमान और कल्पना से

कयदि बच्चा नानाजी-नानीजी को सब कुछ सच-सच बता देता तो क्या होता?

नानाजी उसे थोड़ा डाँटते, पर क्षमा भी कर देते। उसे भूखा नहीं रहना पड़ता। वह खाना खाकर गृहकार्य पूरा करता और अगले दिन खुशी से स्कूल जाता।

खनानीजी के स्थान पर आप बच्चे से सच कैसे उगलवाते?

मैं उसके सामने ही उसकी मनपसंद खीर बनाने की बात करती और कहती — “पर बीमार बच्चे तो खीर नहीं खाते।” फिर कहती — “जो बच्चा सच बोलेगा, उसे दोगुनी खीर मिलेगी।” बच्चा अपने आप सच बता देता।

गघर में अकेले होने पर आप ऊबने से बचने के लिए क्या करेंगे?

कहानी की किताब पढ़ूँगा, चित्र बनाऊँगा, अधूरा गृहकार्य पूरा करूँगा और घर के छोटे कामों में मदद करूँगा।

घअगर बच्चा स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन उसने क्या किया होगा?

स्कूल जाता तो थोड़ी डाँट पड़ती, पर दोस्तों के साथ खेलता और रिसेस में अमरूद खाता। अगले दिन उसने मित्र से कॉपी लेकर छूटा काम और गृहकार्य पूरा किया होगा।

ङनानीजी या नानाजी की जगह होते तो आप क्या करते?

मैं पहले थर्मामीटर से बुखार देखता। बुखार न होने पर प्यार से बात करके कारण पूछता। बीमार होता तो डॉक्टर को दिखाता और हल्का भोजन देता।

कहानी की रचना

कइस कहानी की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
  • कहानी ‘मैं’ शैली में है, बच्चा स्वयं अपनी बात बता रहा है।
  • चित्रात्मक भाषा, जैसे अस्पताल और भोजन का वर्णन।
  • हास्य और व्यंग्य का प्रयोग।
  • बच्चा मन ही मन स्वयं से बातें करता है।
  • खाने की चीजों का स्वादिष्ट वर्णन।
  • अंत में सीख मिलती है।
खदिए गए बिंदुओं के लिए कहानी से उदाहरण लिखिए।
विशेष बिंदुकहानी में से उदाहरण
पिछली बातों को याद करना“एक दिन मुझे साथ लेकर नानीजी हमारे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने गईं।”
हास्य का उपयोग“कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।” / “सारे विकार निकल गए।”
सोचने के तरीके में बदलाव“इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।”
किसी का किसी बात से अनजान होना“मुन्नू... मुझे सोता जान लौट गया होगा।”
स्वयं से बातें करना“क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?”

समस्या और समाधान

कबच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने क्या समाधान निकाला?

बच्चे ने गृहकार्य नहीं किया था और स्कूल में सजा का डर था। उसने बीमारी का बहाना बनाकर स्कूल न जाने का समाधान निकाला।

खनानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने क्या समाधान निकाला?

बच्चा बीमार होने की बात कह रहा था, पर उसे बुखार नहीं था और थर्मामीटर भी नहीं मिला। उन्होंने उसे दवा की पुड़िया और काढ़ा दिया। आराम करने और भूखा रहने को कहा।

शब्द से जुड़े शब्द

‘बीमार’ से जुड़े शब्द :

काढ़ाअस्पतालवार्डनर्सदवापुड़ियाथर्मामीटरबुखारसिरदर्दनब्जसाबूदाने की खीर

खोजबीन

ककहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।

“मैं रजाई से निकला ही नहीं।” / “सब पर एक जैसी सफेद चादर और लाल कंबल।”

खबच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।

“इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।” / “अक्लमंद! और बनो बीमार।”

गबच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।

“गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे।”

घबच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।

“कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।”

शीर्षक

कक्या ‘नहीं होना बीमार’ नाम उपयुक्त है?

हाँ, यह नाम उपयुक्त है। झूठमूठ बीमार बनकर बच्चे को इतनी परेशानी हुई कि उसने तय कर लिया — अब कभी बीमार होने का बहाना नहीं करना। शीर्षक कहानी की सीख को बताता है।

खआप इस कहानी को कोई अन्य नाम क्या देंगे?

‘बहाने का फल’ — क्योंकि बच्चे को अपने बहाने का फल भूख और ऊब के रूप में मिला।

अभिनय

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

ककिन बातों को पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ गई?
  • “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।”
  • “चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
  • “कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।”
  • “उस पूरे दिन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा। सारे विकार निकल गए।”
खकिन वाक्यों को पढ़कर मुँह में पानी आ गया?
  • “गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे।”
  • “अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी।”
  • “नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।”

लेखन के अनोखे तरीके

सामान्य वाक्यकहानी में ऐसे लिखा गया है
1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।“हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।”
2. खिड़कियाँ बड़ी थीं और बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।“बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।”
3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।“सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।”
4. फुसफुसाने के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।“बाकी एकदम शांति।”
5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।”
6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।“चलो बीमार पड़ जाते हैं।”

विराम चिह्न

विराम चिह्नकहाँ प्रयोग किया जाता है
पूर्ण विराम ( । )वाक्य पूरा होने पर।
अल्प विराम ( , )वाक्य में थोड़ा रुकने के लिए और एक जैसे शब्दों को अलग करने के लिए।
प्रश्नवाचक चिह्न ( ? )प्रश्न पूछने वाले वाक्य के अंत में।
विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! )आश्चर्य, खुशी, दुख आदि भाव प्रकट करने वाले शब्द या वाक्य के अंत में।
उद्धरण चिह्न ( “ ” )किसी के कहे हुए शब्दों को ज्यों का त्यों लिखने के लिए।

कैसी होगी गली

पाठ से आगे — आपकी बात

कअपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।

मेरी कक्षा बड़ी और हवादार है। उसमें दो बड़ी खिड़कियाँ हैं, जिनसे धूप आती है। सामने हरा श्यामपट्ट है। दीवारों पर चार्ट और बच्चों के बनाए चित्र लगे हैं। बेंचें कतार में रखी हैं। कोने में एक छोटा पुस्तकालय है।

खक्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? तब कैसा लगा?

हाँ, एक बार माता-पिता बाजार गए थे। पहले थोड़ा डर लगा, फिर मैंने किताब पढ़ी और चित्र बनाए। समय कब बीत गया, पता ही नहीं चला।

गक्या आपको कभी किसी से ईर्ष्या हुई है? तब आपने क्या किया?

हाँ, जब मित्र को मुझसे अधिक अंक मिले। मैंने उससे पढ़ने का तरीका पूछा और खुद मेहनत की। इससे ईर्ष्या की भावना दूर हो गई।

घआपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?

घर में माता-पिता और दादा-दादी मेरे खाने, पढ़ाई और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। विद्यालय में शिक्षक पढ़ाई में मदद करते हैं और मित्र हर काम में साथ देते हैं।

ङआप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं?

मैं घर के कामों में हाथ बँटाता हूँ। बीमार होने पर उनकी सेवा करता हूँ। मित्रों की मदद करता हूँ। मैं ऐसा कोई काम नहीं करता जिससे किसी को परेशानी हो।

बहाने

कक्या आपने कभी बहाना बनाया है? तब आपके मन में कौन-से भाव थे?

हाँ, एक बार खेलने जाने के लिए मैंने कहा कि गृहकार्य हो गया है। उस समय मन में डर और बेचैनी थी कि कहीं पकड़ा न जाऊँ।

खआमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की सूची बनाइए।
पेट में दर्द हैसिर दुख रहा हैकॉपी घर पर भूल गयाबस छूट गईबिजली चली गई थीपता ही नहीं था
गबहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए क्या कर सकते हैं?

काम समय पर न करने या डर के कारण बहाने बनाने पड़ते हैं। अपना काम समय पर करें, सच बोलें और गलती होने पर उसे स्वीकार करें। तब बहानों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अनुमान

1क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति, पशु-पक्षी या स्थान के विषय में अनुमान लगाया है?

हाँ। रात को छत पर खड़खड़ाहट सुनकर मैंने अनुमान लगाया कि बिल्ली होगी। सुबह देखा तो सचमुच बिल्ली के पैरों के निशान थे।

घर का सामान

जो खोजने पर भी नहीं मिलतींजो कोई माँगकर ले जाते हैंजो आप किसी से माँगकर लाते हैं
कैंची, टॉर्च, चाबियाँ, पेचकससीढ़ी, अखबार, बर्तनचीनी, दूध, किताबें, औजार

खान-पान और आप

कघर में किसी के बीमार होने पर क्या खिलाया जाता है?

खिचड़ी, दलिया, दाल का पानी, सूप, साबूदाने की खीर और फल।

खआपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?

पानी पूरी, वड़ा पाव, गाजर का हलवा और आम।

गघर में केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर क्या बनता है?

दिवाली पर करंजी (गुझिया) और लड्डू, होली पर पूरनपोली, संक्रांति पर तिल के लड्डू।

घविद्यालय में आप क्या खाते-पीते हैं? आपका रुचिकर भोजन क्या है?

मैं टिफिन में रोटी-सब्जी लाता हूँ। मध्याह्न भोजन की खिचड़ी मुझे बहुत पसंद है।

ङबचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद बताइए।

बचपन में दादी गरम-गरम रोटी पर घी और गुड़ लगाकर खिलाती थीं। उसका स्वाद आज भी याद है।

चकिस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?

तड़के वाली दाल और ताजे बनते हलवे की सुगंध मुझे सबसे अधिक पसंद है।

आज की पहेली

पहेलीउत्तर
1. रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा...आलू का पराठा
2. दाल-चावल का मेल है यह तो... चटनी-सांभर संग-संग खाओमसाला डोसा
3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास...वड़ा पाव
4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल...ढोकला
5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ...पानी पूरी
6. हरे साग संग मुझको पाओ, मक्खन के संग मुझको खाओ...मक्के की रोटी
7. आग में पकती हूँ... राजस्थान का मैं उपहारबाटी
8. गोल-गोल और श्वेत रंग का, रस से भरा हुआ हूँ खूब...रसगुल्ला