4. पानी रे पानी
अनुपम मिश्र — पाठ का सार, सभी प्रश्नों के सरल उत्तर और ‘विश्वेश्वरैया’ (पढ़ने के लिए). NCERT मल्हार (CBSE).
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पाठ का सार : लेखक बताते हैं कि किताबों में जल-चक्र पढ़ाया जाता है, पर आज पानी का एक अजीब चक्कर सामने है। गर्मी में नल सूख जाते हैं और अकाल जैसी हालत हो जाती है। बरसात में बाढ़ आ जाती है। लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। धरती एक बड़ी गुल्लक है। तालाब और झीलें वर्षा का पानी धरती में भरते हैं। हमने लालच में तालाबों को पाटकर उन पर मकान बना दिए। इसलिए हमें तालाबों और जलस्रोतों की रक्षा करनी चाहिए, ताकि भूजल भंडार भरा रहे।
मेरी समझ से
सही उत्तर :
पानी बरसने से।
तालाब और झीलों से।
सही उत्तर :
समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
सही उत्तर :
तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
(ख) भाग की चर्चा कक्षा में अपने साथियों के साथ कीजिए।
मिलकर करें मिलान
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. वर्षा जल संग्रहण | 2. वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से धरती में संग्रह करना। |
| 2. जल संकट | 3. जल की अत्यधिक कमी होना। |
| 3. जल-चक्र | 4. समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना। |
| 4. भूजल | 1. जमीन के नीचे छिपा जल भंडार। |
पंक्तियों पर चर्चा
नलों में पानी तय समय पर नहीं आता। कभी आधी रात को आता है, तो कभी बहुत सुबह। लोगों को नींद छोड़कर पानी भरना पड़ता है।
गर्मियों में पानी की इतनी कमी हो जाती है कि लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिलता। खेती और पशु भी प्रभावित होते हैं।
बाढ़ आने पर घर, सड़कें और रेल की पटरियाँ डूब जाती हैं। स्कूल, कार्यालय और यातायात बंद हो जाते हैं।
अकाल में पानी बहुत कम होता है और बाढ़ में बहुत अधिक। दोनों का कारण एक ही है — वर्षा के पानी को ठीक से न सँभालना।
सोच-विचार के लिए
जैसे गुल्लक में पैसे जमा होते हैं, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होता है। जरूरत के समय हम यह पानी निकालकर उपयोग करते हैं।
सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी भाप बनता है। भाप ऊपर जाकर बादल बनती है। बादल बरसते हैं। वर्षा का पानी नदियों में बहकर फिर समुद्र में मिल जाता है। इस प्रकार जल-चक्र पूरा होता है।
पीने और खेती के लिए पानी नहीं मिलेगा। भूजल भंडार खाली हो जाएगा। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य — सबका जीवन संकट में पड़ जाएगा।
पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। रुपयों से पानी नहीं बनाया जा सकता। इसलिए पानी रुपयों से कहीं अधिक कीमती है।
शीर्षक
पूरा पाठ पानी की समस्या पर है — कभी पानी की कमी, कभी बाढ़। ‘पानी रे पानी’ शीर्षक पानी के लिए चिंता और पुकार को दिखाता है। इसलिए यह शीर्षक उचित है।
‘धरती की गुल्लक’ — क्योंकि पाठ में धरती को पानी की गुल्लक बताया गया है और उसे भरते रहने का संदेश दिया गया है।
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शब्दों की बात — बात पर बल देना
दूसरे वाक्य में ‘भी’ शब्द हटाया गया है। ‘भी’ से पता चलता है कि हमारी गुल्लक की तरह धरती भी एक गुल्लक है। इससे तुलना पर बल पड़ता है। ‘भी’ हटाने पर यह बल समाप्त हो जाता है।
- सोचा तो नहीं होगा शायद, पर इस बारे में पढ़ा जरूर है।
- पानी आता भी है तो बेवक्त।
- यह कमी गाँव-शहरों में ही नहीं बल्कि बड़े शहरों में भी लोगों को कष्ट में डाल देती है।
- लो, सब तरफ पानी ही बहने लगता है।
- देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसी हालत बन जाती है।
समानार्थी शब्द
| रेखांकित शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| (क) सूरज | सूर्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर |
| (ख) भाप | वाष्प |
| (ग) बादल | मेघ, जलद, वारिद, नीरद |
| (घ) हवा | पवन, वायु, समीर |
उपसर्ग
- सु + पात्र = सुपात्र — दान सदा सुपात्र को देना चाहिए।
- अ + पात्र = अपात्र — अपात्र व्यक्ति को जिम्मेदारी नहीं देनी चाहिए।
- अ + ज्ञान = अज्ञान — अज्ञान के कारण लोग पानी बर्बाद करते हैं।
- वि + ज्ञान = विज्ञान — विज्ञान ने जीवन को आसान बनाया है।
पाठ से आगे — आपकी बात
- नल खुला नहीं छोड़ेंगे। टपकते नल ठीक करवाएँगे।
- छत के वर्षा जल का संग्रह करेंगे।
- तालाबों और कुओं में कचरा नहीं डालेंगे।
- अधिक से अधिक पेड़ लगाएँगे।
- बाल्टी-मग से नहाएँगे, शावर या पाइप से नहीं।
पाठ के पहले अनुच्छेद में जल-चक्र दिया गया है — “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें... जल-चक्र पूरा हो जाता है।”
मेरे चित्र में ऊपर सूरज है। नीचे समुद्र से भाप उठ रही है। भाप ऊपर जाकर बादल बन रही है। पहाड़ों पर वर्षा हो रही है। वर्षा का पानी नदी बनकर गाँव के पास से बहता हुआ फिर समुद्र में मिल रहा है। तीरों से जल की यात्रा दिखाई गई है।
सृजन
- पहले आओ, पहले पाओ — कतार में बारी-बारी से पानी पाओ।
- थोड़ा धीरज, थोड़ा प्यार — पानी भरना हो आसान।
- पानी सबका, हक सबका।
- झगड़ा छोड़ो, बूँद-बूँद बचाओ।
- मिलकर भरें, मिलकर रहें।
(ख) पाठ के वाक्य को पढ़कर मन में उभरा चित्र बनाइए और उसमें रंग भरिए।
पानी रे पानी (चित्र पर बातचीत)
पानी बचाने वाले कार्य :
- बाल्टी और मग से नहाना।
- झारी से पौधों को सीमित पानी देना।
- पानी को साफ करके (फिल्टर) ढककर रखना।
- गड्ढे खोदकर वर्षा जल रोकने का काम करना।
- पौधे लगाना।
पानी बर्बाद करने वाले कार्य :
- ब्रश करते समय नल खुला छोड़ देना।
- मोटर चलाकर टंकी भरना और पानी बहने देना।
- पाइप से स्कूटर धोना।
- खाली कक्षा में पंखे-बत्तियाँ चालू छोड़ना (बिजली की बर्बादी)।
सबका पानी
कक्षा में ‘सबको पर्याप्त पानी’ विषय पर परिचर्चा हुई। विद्यार्थियों ने कहा कि पानी का बँटवारा समान होना चाहिए। मोटर लगाकर दूसरों का पानी खींचना गलत है। सबने तय किया कि वर्षा जल संग्रह किया जाए, तालाबों की सफाई हो और नलों की टूट-फूट तुरंत ठीक हो। अंत में सबने पानी बचाने की शपथ ली।
दैनिक कार्यों में पानी
| कार्य | लगभग पानी (बाल्टी में) |
|---|---|
| पीना और खाना बनाना | 2 |
| नहाना | 5 |
| कपड़े धोना | 4 |
| बर्तन धोना | 3 |
| सफाई और पौधे | 2 |
| कुल | लगभग 16 बाल्टी |
घर के सदस्य नल बंद रखकर बर्तन धोते हैं। कपड़े धोने का पानी फर्श धोने में उपयोग करते हैं। सब्जी धोने का पानी पौधों में डालते हैं।
हाँ। हमारे घर नगरपालिका का नल आता है। हम पानी टंकी में भरकर रखते हैं, इसलिए पूरे दिन पानी मिल जाता है।
हम पानी छत की टंकी, ड्रम, बाल्टियों और घड़े में भरकर रखते हैं। पीने का पानी घड़े और बोतलों में ढककर रखते हैं।
जन-सुविधा के रूप में जल
चित्रों में पानी की भारी कमी दिखाई गई है। लोग नल पर बर्तनों की लंबी कतार लगाए खड़े हैं। कहीं पानी का टैंकर आया है और लोग भीड़ लगाकर पानी भर रहे हैं। महिलाएँ गड्ढे के गंदे पानी से घड़े भर रही हैं। लोग दूर से सिर पर घड़े और कंधे पर काँवड़ में पानी ढो रहे हैं। एक चित्र में रेल द्वारा पानी पहुँचाया जा रहा है। इससे पता चलता है कि कई जगह पीने का पानी पाना बहुत कठिन है।
बिन पानी सब सून
- बोरवेल से आवश्यकता से अधिक पानी निकालना।
- पेड़ों की कटाई।
- जमीन का पक्का (सीमेंट-डामर) होना, जिससे पानी धरती में नहीं जा पाता।
- वर्षा जल का संग्रह न करना।
- तालाबों और कुओं का सूख जाना या भर दिया जाना।
कुएँ और बोरवेल सूख जाते हैं। पीने के पानी की कमी होती है। खेती के लिए पानी नहीं मिलता। पानी खरीदना पड़ता है और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नए भवनों में वर्षा जल संग्रहण अनिवार्य किया गया है। तालाबों का गहरीकरण और सफाई की जा रही है। सोखता गड्ढे बनाए जा रहे हैं और वृक्षारोपण किया जा रहा है।
यह भी जानें — वर्षा जल संग्रहण
सेवा में, संपादक महोदय, दैनिक समाचार, नगर।
विषय — मोहल्ले में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था हेतु।
महोदय, मैं आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से अधिकारियों का ध्यान अपने मोहल्ले की पानी की समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ। हमारे क्षेत्र में गर्मी में पानी की भारी कमी हो जाती है। वर्षा का पानी नालियों में बह जाता है। यदि घरों और विद्यालय की छतों पर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था हो जाए तो भूजल स्तर बढ़ेगा। कृपया इस विषय को प्रकाशित करें।
भवदीय, क. ख. ग., कक्षा 7, दिनांक —
आज की पहेली
झरोखे से — पाल के किनारे रखा इतिहास
- दोनों पाठ अनुपम मिश्र के लिखे हैं।
- दोनों में तालाबों के महत्व की बात है।
- दोनों बताते हैं कि तालाब बनाना और बचाना समाज का अच्छा काम है।
- दोनों का संदेश है — जल स्रोतों की रक्षा करो।
पढ़ने के लिए — विश्वेश्वरैया (सार)
छह वर्ष का विश्वेश्वरैया बरामदे में खड़ा तेज वर्षा देख रहा था। उसने देखा कि नाली का पानी एक बड़े पत्थर को बहा ले जा रहा है। उसने सोचा — प्रकृति में बहुत शक्ति है, मुझे प्रकृति के बारे में सब कुछ जानना चाहिए।
घर में काम करने वाली गरीब महिला को देखकर उसके मन में प्रश्न उठा — लोग इतने गरीब क्यों हैं? वह अपने बड़ों और अध्यापकों से ऊर्जा के स्रोतों और गरीबी के कारणों के बारे में पूछता रहता था। उसने निश्चय किया कि वह जीवनभर विद्यार्थी बना रहेगा।
मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के मुद्देनाहल्ली में हुआ। चौदह वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु हो गई। फिर भी वे ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए बंगलौर चले गए। उनका संदेश था — पहले जानो, फिर करो। बड़े होकर वे एक महान इंजीनियर बने।