7. वर्षा-बहार
मुकुटधर पांडेय — कविता का भावार्थ और सभी प्रश्नों के सरल उत्तर. NCERT मल्हार (CBSE).
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कविता का भावार्थ : कवि वर्षा ऋतु की सुंदरता का वर्णन करते हैं। वर्षा सबके मन को लुभा रही है। आकाश में घने बादल छाए हैं। बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं, पानी बरस रहा है और झरने बह रहे हैं। ठंडी हवा से पेड़ों की डालियाँ हिल रही हैं। बागों में मालिनें गीत गा रही हैं। तालाबों के जलचर प्रसन्न हैं। पपीहे गर्मी की तपन भूल गए हैं। वन में मोर नाच रहे हैं और मेंढक गीत गा रहे हैं। गुलाब खिलकर सुगंध फैला रहा है। हंस कतार में चल रहे हैं और किसान मन को हरने वाले गीत गा रहे हैं। कवि कहते हैं कि सारे संसार की शोभा वर्षा पर ही निर्भर है।
मेरी समझ से
सही उत्तर :
आनंद और प्रसन्नता
सही उत्तर :
बादलों के घिरने का दृश्य
सही उत्तर :
वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
सही उत्तर :
वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
(ख) भाग की चर्चा कक्षा में अपने साथियों के साथ कीजिए।
पंक्तियों पर चर्चा
वर्षा आने पर पपीहे गर्मी की तपन भूलकर खुशी से उड़ रहे हैं। वन में सारे मोर आनंद से नाच रहे हैं। वर्षा ने सब पक्षियों को प्रसन्न कर दिया है।
कहीं हंस सुंदर कतार बनाकर चल रहे हैं। किसान खेतों में काम करते हुए मन को हरने वाले गीत गा रहे हैं। वर्षा से किसान बहुत खुश हैं।
मिलकर करें मिलान
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं | 2. वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। |
| 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | 6. ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं। |
| 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते | 1. वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं। |
| 4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते | 3. वर्षा आने पर पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। |
| 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | 5. वर्षा में खिले गुलाब जैसे फूल सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं। |
| 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | 4. हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। |
सोच-विचार के लिए
बागों में मालिनें, मेंढक और खेतों में किसान गीत गा रहे हैं। वर्षा आने से सब बहुत प्रसन्न हैं। इसी खुशी में वे गीत गा रहे हैं।
पहला दृश्य आकाश का है, जिसमें बिजली और बादलों की हलचल है। दूसरा दृश्य धरती के तालाबों का है, जिसमें जलचर प्रसन्न हैं। संबंध यह है कि आकाश में बादल बरसते हैं, तभी तालाब भरते हैं और जलचर खुश होते हैं।
वर्षा ऋतु बहुत सुंदर और आनंद देने वाली है। वह सभी जीवों, पेड़-पौधों और मनुष्यों को खुशी देती है। सारे संसार की शोभा वर्षा पर ही टिकी है।
इसका अर्थ केवल गुलाब की सुंदरता नहीं है। इससे पता चलता है कि वर्षा से सारी प्रकृति खिल उठती है और चारों ओर खुशी और ताजगी फैल जाती है। जैसे गुलाब सुगंध फैलाता है, वैसे ही हमें भी चारों ओर खुशी फैलानी चाहिए।
- “बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब।”
- “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”
- “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे।”
- “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है।”
- “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
वर्षा में चारों ओर गीत, नृत्य और सुगंध है। वर्षा वसंत की बहार जैसी खुशी लाती है। इसलिए शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ रखा गया है।
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अनुमान और कल्पना से
पीने का पानी नहीं मिलेगा। खेती नहीं होगी और अनाज की कमी हो जाएगी। तालाब और नदियाँ सूख जाएँगी। पेड़-पौधे मुरझा जाएँगे। पशु-पक्षी भूख-प्यास से मरने लगेंगे।
अच्छा प्रभाव — इनसे वर्षा आने का संकेत मिलता है और किसान खुश होते हैं। बुरा प्रभाव — बिजली गिरने से जान-माल का नुकसान हो सकता है। तेज गर्जना से बच्चे और पशु डर जाते हैं।
मोर पंख फैलाकर नाचते हैं। कोयल और पपीहे मीठे स्वर में गाते हैं। मेंढक टर्र-टर्र करते हैं। पक्षी पंख फड़फड़ाकर पानी में नहाते हैं। गाय-बछड़े उछल-कूद करते हैं।
आपकी रचनाएँ
आकाश में काले बादल छाए थे। रिमझिम बूँदें गिरने लगीं। तभी वन में एक मोर ने अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाए और झूम-झूमकर नाचने लगा। पास के तालाब से मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई दे रही थी, मानो वे मोर के नृत्य के लिए संगीत बजा रहे हों। सारा वन आनंद से भर गया।
एक गाँव में कई महीनों से वर्षा नहीं हुई थी। तालाब सूख गए थे, किसान उदास थे। गाँव वालों ने मिलकर पेड़ लगाए और पुराने तालाब की सफाई की। कुछ दिनों बाद आकाश में घनघोर बादल छा गए। बिजली चमकी और झमाझम वर्षा होने लगी। तालाब भर गया, मोर नाचने लगे और किसान खुशी से गीत गाने लगे। सबने समझ लिया कि प्रकृति की रक्षा करने से ही वर्षा-बहार आती है।
(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए और बताइए कि उसमें क्या-क्या बनाया है।
शब्द से जुड़े शब्द
‘वर्षा’ से जुड़े शब्द :
कविता की रचना
- हर दो पंक्तियों के अंतिम शब्द तुकांत हैं, जैसे — रही है/रही है, सारे/प्यारे।
- कविता में वर्षा के दृश्यों का चित्र-जैसा वर्णन है।
- ‘देखो’, ‘लखो’ जैसे शब्दों से पाठक से बात की गई है।
- पशु-पक्षियों को मनुष्यों की तरह गाते और नाचते दिखाया गया है।
- कई ध्वनियाँ (गरजना, गीत, टर्राना) अनुभव होती हैं।
कविता का सौंदर्य
- वर्षा के स्थान पर — बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि। लय में बरखा सबसे अच्छा जँचता है।
- नभ के स्थान पर — आकाश, गगन, अंबर, व्योम, सभी जँचते हैं।
- बादल के स्थान पर — मेघ, जलधर, घन, जलद, सभी जँचते हैं।
- पानी के स्थान पर — जल, नीर, सलिल, तोय, सभी जँचते हैं।
(ख) कौन-से शब्द सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं, इस पर समूह में चर्चा कीजिए।
विशेषण
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है | अनूठी | छटा |
| 2. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | सुंदर | कतार |
| 3. मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे | प्यारे | सुगीत |
| 4. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | ठंडी, सब | हवा, डालियाँ |
| विशेष्य | विशेषण |
|---|---|
| वर्षा | सुहानी, झमाझम |
| पानी | ठंडा, साफ |
| बादल | काले, घने |
| डालियाँ | हरी, लचीली |
| गुलाब | लाल, सुगंधित |
ऋतु और शब्द
| ऋतु | शब्द |
|---|---|
| वसंत ऋतु (मार्च–अप्रैल) | बयार, बहार |
| ग्रीष्म ऋतु (मई–जून) | धूप, लू, ताप, आँधी, तपन, जेठ |
| वर्षा ऋतु (जुलाई–अगस्त) | वृष्टि, झड़ी, उमस, हरियाली, सावन, रिमझिम, बादल फटना |
| शरद ऋतु (सितंबर–अक्तूबर) | शीतलता, ओस |
| हेमंत ऋतु (नवंबर–दिसंबर) | जाड़ा, ठंडक, कोहरा |
| शिशिर ऋतु (जनवरी–फरवरी) | हिमपात, पाला, ठिठुरन, धुंध, कड़ाके की ठंड |
पाठ से आगे — आपकी बात
चारों ओर हरियाली छा जाती है। नदी-नाले भर जाते हैं। गर्मी कम हो जाती है। कहीं-कहीं सड़कों पर पानी भर जाता है और कीचड़ हो जाता है।
एक दिन अचानक तेज बारिश आ गई। मेरे पास छाता नहीं था। मित्र ने अपना छाता मेरे साथ बाँटा। हम दोनों आधे-आधे भीगते हुए हँसते-खेलते घर पहुँचे।
मुझे बारिश में भीगना, कागज की नाव चलाना और गरम पकौड़े खाना अच्छा लगता है। पर मैदान में खेल नहीं पाते और कपड़े जल्दी नहीं सूखते।
पक्षी पेड़ों की घनी डालियों और घोंसलों में छिप जाते हैं। पशु छप्पर या पेड़ के नीचे खड़े हो जाते हैं। उन्हें भोजन ढूँढ़ने में कठिनाई होती है। कई बार घोंसले उजड़ जाते हैं।
भीगे आँगन, भीगी गलियाँ।
छत पर बजती टप-टप बूँदें,
खिल उठीं बगिया की कलियाँ।
कागज की नावें तैराएँ,
आओ मिलकर गीत सुनाएँ।
साक्षात्कार
- आपका नाम क्या है और आप कहाँ रहते हैं?
- आप कौन-कौन सी फसलें उगाते हैं?
- वर्षा आने पर आपको कैसा लगता है?
- आप काम करते समय गीत क्यों गाते हैं?
- आप कौन-सा गीत सबसे अधिक गाते हैं?
- वर्षा कम होने पर आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
(ख) समूह में इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
वर्षा के दृश्य
बिजली पहले दिखाई देती है और उसकी कड़क बाद में सुनाई देती है। इसका कारण यह है कि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक होती है।
वर्षा से पहले पत्तियों पर धूल जमी थी और वे मुरझाई-सी थीं। वर्षा के बाद पत्तियाँ धुलकर चमकदार हरी हो गईं, नई कोंपलें निकल आईं और पेड़ ताजा दिखने लगा।
चींटियों को, आकाश में उड़ते बगुलों को, विद्यालय की प्रार्थना सभा में बच्चों को, सड़क पर गाड़ियों को और रेलगाड़ी के डिब्बों को।
वर्षा में ध्वनियाँ
जब मन खुश होता है, तब बेसुरी ध्वनियाँ भी अच्छी लगती हैं। जैसे वर्षा की खुशी में मेंढकों की टर्र-टर्र, छोटे बच्चे की तोतली बोली या त्योहार में बजते ढोल-नगाड़े।
सृजन
बारिश के बाद उपवन में सैर
बारिश रुकते ही मैं उपवन में घूमने गया। घास पर पानी की बूँदें मोतियों-सी चमक रही थीं। पेड़ धुलकर हरे-भरे दिख रहे थे। हवा में मिट्टी की सौंधी सुगंध थी। पक्षी चहचहा रहे थे और आकाश में इंद्रधनुष निकल आया था। मन आनंद से भर गया।
मित्रों संग खेलना
शाम को हम सब मित्र मैदान में इकट्ठा हुए। किसी ने गेंद फेंकी, कोई दौड़ा, कोई हँसते-हँसते गिर पड़ा। हार-जीत की चिंता किसी को नहीं थी। खेल खत्म हुआ तो सब थक चुके थे, पर चेहरों पर मुस्कान थी।
बाकी दृश्यों (प्रिय व्यक्ति से मिलना, प्रिय पुस्तक पढ़ना, सफल प्रदर्शन, पहला हिमपात, समुद्र किनारे सवेरा, कोई उत्सव) पर भी इसी प्रकार अनुच्छेद लिखिए।
वर्षा से जुड़े गीत
अपने समूह के साथ वर्षा से जुड़े गीत और लोकगीत (जैसे कजरी, सावन के झूले के गीत) ढूँढ़कर लिखिए और वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका तैयार कीजिए।
आज की पहेली
| पहेली | उत्तर |
|---|---|
| जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया... | ग्रीष्म ऋतु |
| पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरसे... | वर्षा ऋतु |
| हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी सबको भाए... | शरद ऋतु |
| फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए... | वसंत ऋतु |
| बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए... | शीत ऋतु |
| पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए... | पतझड़ |
झरोखे से — ग्रीष्म
दोनों कविताएँ मुकुटधर पांडेय की हैं और दोनों में ऋतु का वर्णन है। ‘वर्षा-बहार’ में चारों ओर आनंद, हरियाली और गीत हैं। ‘ग्रीष्म’ में सूरज की तपन से धरती जल रही है, नदी-तालाब सूख गए हैं और सब जीव बेहाल हैं। एक कविता सुख का भाव जगाती है, दूसरी कष्ट का। दोनों से पता चलता है कि प्रकृति का हमारे जीवन पर कितना गहरा प्रभाव है।