कक्षा 8 हिंदी · मल्हार · एकांकी

8. नए मेहमान

उदयशंकर भट्ट की एकांकी — सार, मेरी समझ से, मिलान, सोच-विचार, अनुमान और कल्पना, एकांकी की रचना, मुहावरे, बात पर बल देना और पाठ से आगे के उत्तर।

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पाठ का परिचय : ‘नए मेहमान’ उदयशंकर भट्ट की एकांकी है। भीषण गरमी में एक छोटे किराये के मकान में रहने वाले परिवार के घर रात को दो अनजान मेहमान आ जाते हैं। संकोच के कारण परिवार उनकी खातिरदारी करता है। अंत में पता चलता है कि वे किसी और के मेहमान थे।

एकांकी का सार

★एकांकी संक्षेप में

गरमी की रात है। विश्वनाथ और उनकी पत्नी रेवती छोटे, बंद मकान में गरमी से परेशान हैं। रेवती के सिर में पंद्रह दिन से दर्द है। पड़ोसी अपनी छत पर बच्चों को सोने भी नहीं देते। रेवती चाहती है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए।

तभी नन्हेमल और बाबूलाल नाम के दो अनजान व्यक्ति सामान लेकर आ जाते हैं। वे खूब पानी पीते हैं, नहाने और खाने की माँग करते हैं। वे पड़ोसी की छत पर हाथ धोकर झगड़ा भी करवा देते हैं। विश्वनाथ उनसे बार-बार परिचय पूछते हैं, पर वे ठीक उत्तर नहीं देते।

अंत में पता चलता है कि वे पिछली गली के कविराज रामलाल वैद्य के मेहमान हैं। वे चले जाते हैं। तभी रेवती का भाई आ जाता है। अपने भाई के लिए रेवती सिरदर्द भूलकर खुशी से खाना बनाने लगती है।

मेरी समझ से

1आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?

उत्तर : अतिथियों की सेवा करने के कारणकिसी तरह का प्रश्न न करने के कारण

2“एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी...” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?

उत्तर : उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैंपड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं

3“ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?

उत्तर : मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारणरेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण

4“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

उत्तर : मेहमानों के आने की

5इस एकांकी के आधार पर बताइए कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

उत्तर : संवाद

पंक्तियों पर चर्चा

1“पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

गरमी इतनी अधिक है कि बहुत पानी पीने पर भी प्यास नहीं बुझती। पेट भर जाता है, पर गला सूखा ही रहता है।

2“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

गरमी इतनी तेज है कि ऐसा लगता है मानो पूरे शहर पर आसमान से आग बरस रही हो।

3“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

जैसे भाड़ की गरम रेत में चने भुनते हैं, वैसे ही ये लोग छोटे बंद मकान में गरमी से तपते रहते हैं। रेवती अपने कठिन जीवन पर दुख प्रकट करती है।

4“आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

ठंडा पानी पीकर नन्हेमल को बड़ी राहत मिली। गरमी में पानी ही जीवन देता है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1स्तंभ 2
1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए।बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है।
2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।
3. माल-मसाला तो अंटी में है न?धनराशि सुरक्षित तो है न!
4. खाने में क्या देर-दार है?भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी?
5. पहले आत्मा फिर परमात्मापहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम

सोच-विचार के लिए

क“शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?

नन्हेमल का आशय है कि शहर में मकान छोटे, तंग और बंद होते हैं। उनमें आगे कमरा, पीछे छोटा आँगन और ऊपर छत होती है। उनमें हवा कम आती है।

खपड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित?

पड़ोसी की शिकायत है कि विश्वनाथ के मेहमान उसकी छत पर गंदा पानी फैलाते हैं और उसकी खाट पर लेट जाते हैं।

उसकी शिकायत कुछ हद तक उचित है, क्योंकि किसी की छत गंदी करना ठीक नहीं। पर उसका व्यवहार अनुचित है। विश्वनाथ ने क्षमा माँगी और सफाई करवाने का वचन दिया, फिर भी वह ताने देता रहा। पड़ोसी को सहयोगी और सहनशील होना चाहिए।

गविश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता, फिर भी उन्हें घर में आने देता है। क्यों?

विश्वनाथ सज्जन और संकोची स्वभाव के हैं। भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा है। रात का समय था और मेहमान थके हुए थे। विश्वनाथ को लगा कि शायद कोई परिचित इन्हें भेजा हो। इसलिए संकोचवश उन्होंने उन्हें घर में आने दिया।

घउन संवादों को लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं।
  • विश्वनाथ — “क्षमा कीजिएगा, आप कहाँ से पधारे हैं?”
  • विश्वनाथ — “मैं संपतराम को नहीं जानता।”
  • रेवती — “ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।”
  • विश्वनाथ — “क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।”
  • विश्वनाथ — “तो आप कोई चिट्ठी-विट्ठी लाए हैं?”
  • विश्वनाथ — “लेकिन मैं कविराज तो नहीं हूँ?” / “पर मैं तो वैद्य नहीं हूँ।”
ङएकांकी के उन वाक्यों को लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
  • “ओफ, बड़ी गरमी है! ... मकान है कि भट्टी!”
  • “पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी।”
  • “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
  • “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
  • “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”
  • “कपड़े तो ऐसे हो गए कि निचोड़ लो।”

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अनुमान और कल्पना से

कविश्वनाथ ने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?

उस समय समाज में यह माना जाता था कि खाना बनाना केवल स्त्रियों का काम है। विश्वनाथ को शायद खाना बनाना आता भी नहीं था। इसलिए उन्होंने स्वयं खाना बनाने के बारे में नहीं सोचा। आज के समय में घर के कामों में पुरुषों को भी बराबर हाथ बँटाना चाहिए।

खप्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?

प्रमोद घर का बड़ा बेटा है। माँ अस्वस्थ थीं और पिताजी मेहमानों के साथ थे। इसलिए उसे पानी और बर्फ लाने तथा छोटी बहन को सँभालने का काम दिया गया। इससे वह जिम्मेदार भी बनता है।

गभीषण गरमी और सिरदर्द के बावजूद रेवती भोजन बनाने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?

आने वाला व्यक्ति रेवती का सगा भाई था। भाई के प्रति प्रेम के कारण वह अपना दर्द भूल गई। वह अपने भाई को भूखा नहीं सुला सकती थी।

घसर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप क्या-क्या वाक्य प्रयोग करेंगे?
गरमी की भीषणतासर्दी की भीषणतावर्षा की भीषणता
यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में जम गया।यह वर्षा में भीग रहा है।
पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।पर अलाव भी कोई कहाँ तक तापे।पर छाता भी कोई कहाँ तक ताने।
सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।सारे शहर में जैसे बर्फ जम गई हो।सारे शहर में जैसे बादल फट पड़े हों।
प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।ठिठुरन है कि जाने का नाम नहीं लेती।बारिश है कि रुकने का नाम नहीं लेती।
चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।चारों तरफ दीवारें ठंडी पड़ी हैं।चारों तरफ दीवारें सीली हो गई हैं।
ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।गरम-गरम चाय पिलाओ दोस्त, हाथ-पैर सुन्न हो रहे हैं।सूखा तौलिया दो दोस्त, सब कपड़े तर हो गए हैं।
सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।सचमुच सर्दी में धूप ही तो जान है।सचमुच वर्षा में छत ही तो जान है।
चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।बर्फ की तरह ठिठुरते रहते हैं।मछली की तरह पानी में तैरते रहते हैं।
फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।फिर भी ठंड से काँप रहा हूँ।फिर भी सिर से पैर तक भीग गया हूँ।

एकांकी की रचना

कइस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
  • आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिया गया है।
  • रंगमंच-निर्देश कोष्ठक में दिए गए हैं।
  • पात्रों की वेशभूषा, आयु और रूप का वर्णन है।
  • कहानी संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।
  • पूरी घटना एक ही रात और एक ही घर में घटती है।
  • ‘नेपथ्य में’ से पीछे की आवाजों का संकेत दिया गया है।
  • अंत में ‘यवनिका’ (पर्दा गिरना) लिखा है।
खसही वाक्यों के सामने ‘हाँ’ और गलत के सामने ‘नहीं’ लिखिए।
वाक्यहाँ / नहीं
1. पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँ
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहीं
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँ
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहीं
5. घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहीं
6. कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँ
7. पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ

अभिनय की बारी

क‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?
  • पात्रों का चयन करके संवाद याद करवाऊँगा।
  • मंच पर मेज, दो कुर्सियाँ, पलंग, पुराना पंखा और हाथ का पंखा रखूँगा।
  • विश्वनाथ के लिए कुरता-धोती, मेहमानों के लिए काली बंडी, सफेद पगड़ी और मैली धोती रखूँगा।
  • गरमी दिखाने के लिए पात्र बार-बार पसीना पोंछेंगे और पंखा झलेंगे।
  • रोचकता के लिए पड़ोसी की पत्नी का एक छोटा पात्र जोड़ सकता हूँ।

भाषा की बात

★एकांकी में विशेष प्रभाव उत्पन्न करने वाले अन्य प्रयोग छाँटकर लिखिए।
  • “मकान है कि भट्टी!”
  • “पत्ता तक नहीं हिल रहा है।”
  • “जाने कब तक इस जेलखाने में सड़ना होगा।”
  • “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”
  • “कपड़े तो ऐसे हो गए कि निचोड़ लो।”
  • “एक लोटे से कम पसीना नहीं निकलेगा।”
  • “प्राण सूखे जा रहे हैं।”

मुहावरे

★एकांकी में आए अन्य मुहावरों को पहचानकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
  • सिर फटना (बहुत तेज सिरदर्द होना) — तेज धूप में घूमने से मेरा सिर फटा जा रहा है।
  • जान में जान आना (राहत मिलना) — बच्चे के सकुशल घर लौटने पर माँ की जान में जान आई।
  • गला तर करना (पानी पीकर प्यास बुझाना) — लंबी दौड़ के बाद खिलाड़ियों ने गला तर किया।
  • प्राण सूखना (बहुत डर या कष्ट होना) — परीक्षा का परिणाम सुनते समय मेरे प्राण सूख गए।
  • धुन सवार होना (किसी काम की लगन लगना) — उस पर चित्र बनाने की धुन सवार है।
  • अपनी ही हाँकना (केवल अपनी बात कहते रहना) — वह किसी की नहीं सुनता, बस अपनी ही हाँकता है।
  • चौपट होना (पूरी तरह नष्ट होना) — ओले गिरने से किसानों की फसल चौपट हो गई।

बात पर बल देना

कवाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था?

‘मैं भी ढूँढ़कर ही रहा’ — ‘ही’ से यह बल मिलता है कि वक्ता ने हार नहीं मानी और घर ढूँढ़कर ही दम लिया। ‘ही’ हटाने से यह दृढ़ता और जोर खत्म हो जाता है।

खउचित स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए।
  1. विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे। (और किसी के अतिथि नहीं)
  2. विश्वनाथ के अतिथि यहीं (यहाँ ही) रुकेंगे। (यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं)
  3. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही। (यहाँ रुकना निश्चित है)
★‘तो’ का स्थान बदलने से अर्थ में परिवर्तन
  • “तुम नहाने तो जाओ।” — पहले नहाने जाओ, बाकी बातें बाद में।
  • “तुम तो नहाने जाओ।” — दूसरे जाएँ या न जाएँ, कम से कम तुम जाओ।
  • “तुम नहाने जाओ तो।” — जाने के लिए आग्रह या चुनौती।

अन्य वाक्य — मैं ही कल बाजार जाऊँगा। मैं कल बाजार ही जाऊँगा। तुम पढ़ो तो सही। तुम तो बहुत होशियार हो।

पाठ से आगे

कक्या आपके सामने कभी कोई दुविधापूर्ण स्थिति आई है?

एक बार मेरे दो मित्रों का झगड़ा हो गया। दोनों चाहते थे कि मैं उनका साथ दूँ। मुझे समझ नहीं आया कि किसका पक्ष लूँ। फिर मैंने दोनों की बात सुनी और उनकी सुलह करवा दी।

खआपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?

राहुल और सना मेरे अच्छे मित्र हैं। वे पढ़ाई में मेरी मदद करते हैं, सच बोलते हैं और मुश्किल समय में मेरा साथ देते हैं। इसलिए वे मुझे प्रिय हैं।

गआप किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
  • पहले फोन करके उन्हें सूचना देता हूँ।
  • उनका सही पता और रास्ता पूछ लेता हूँ।
  • अपना जरूरी सामान और उपहार साथ रखता हूँ।
  • उनकी सुविधा का समय देखकर जाता हूँ।
घआप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार सहयोग करते हैं?

हम पड़ोसियों के घर बीमारी या मुसीबत में मदद करते हैं। उनके बाहर जाने पर उनके घर का ध्यान रखते हैं। त्योहारों पर मिठाई बाँटते हैं। जरूरत पड़ने पर सामान भी देते हैं।

ङआपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
  • आने से पहले सूचना देनी चाहिए।
  • अपना पूरा परिचय देना चाहिए।
  • मेजबान की सुविधा और परेशानी का ध्यान रखना चाहिए।
  • अधिक माँगें नहीं करनी चाहिए।
  • घर और पड़ोस के नियमों का पालन करना चाहिए।

सावधानी और सुरक्षा

कविश्वनाथ के स्थान पर होते तो आप क्या करते?

मैं उन्हें घर में लाने से पहले उनका नाम, पता और किसके यहाँ आए हैं — यह ठीक से पूछता। पहचान पक्की होने पर ही उन्हें घर में आने देता। नहीं तो उन्हें सही पते तक पहुँचाने में मदद करता।

खमाता-पिता की अनुपस्थिति में कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
  • दरवाजा नहीं खोलूँगा, जाली या खिड़की से बात करूँगा।
  • यह नहीं बताऊँगा कि घर में बड़े नहीं हैं।
  • तुरंत माता-पिता को फोन करूँगा।
  • जरूरत पड़ने पर पड़ोसियों को बुलाऊँगा या 112 पर फोन करूँगा।
  • उससे कोई खाने-पीने की चीज नहीं लूँगा।

सृजन

★एकांकी की कहानी अपने शब्दों में लिखिए।

एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए। गरमी की रात थी और माँ के सिर में दर्द था। दरवाजा खटखटाया तो दो अनजान आदमी सामान लिए खड़े थे। उन्होंने कहा कि वे बिजनौर से आए हैं और पिताजी को जानते हैं। पिताजी उन्हें नहीं पहचानते थे, फिर भी संकोचवश अंदर बुला लिया। मेहमानों ने खूब पानी पिया, नहाने और खाने की माँग की और पड़ोसी की छत भी गंदी कर दी। बहुत पूछताछ के बाद पता चला कि वे पिछली गली के कविराज वैद्य जी के मेहमान थे। वे चले गए तो हमने चैन की साँस ली। तभी मामा जी आ गए। माँ सिरदर्द भूलकर खुशी से उनके लिए खाना बनाने लगीं।

गरमी का प्रकोप

★गरमी के प्रकोप से बचने के लिए आप क्या-क्या सावधानी बरतेंगे?
  • दिन में बार-बार पानी पिऊँगा।
  • दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप में बाहर नहीं निकलूँगा।
  • हल्के रंग के सूती कपड़े पहनूँगा।
  • बाहर जाते समय सिर ढकूँगा और छाता रखूँगा।
  • नींबू पानी, छाछ, आम पना जैसे पेय लूँगा।
  • बासी और तला-भुना भोजन नहीं खाऊँगा।

तार से संदेश

कतार भेजने के आधार पर अनुमान लगाइए कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?

यह एकांकी लगभग 70–80 वर्ष पहले लिखी गई होगी। उस समय तार से संदेश भेजे जाते थे और ‘आना’ मुद्रा चलती थी। ‘आना’ 1957 में दशमलव मुद्रा आने के बाद बंद हो गया।

खआजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
मोबाइल फोनएसएमएसईमेलव्हाट्सऐपवीडियो कॉलस्पीड पोस्टकूरियर
गआप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सबसे अधिक उपयोग करते हैं?

मैं संदेश भेजने के लिए सबसे अधिक माता-पिता के मोबाइल फोन से कॉल और लिखित संदेश का उपयोग करता हूँ।

नाप, तौल और मुद्राएँ

★प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
  1. एक रुपये में 16 आने होते थे।
  2. चार आने में पुरानी प्रणाली के 16 पैसे होते थे। आज के हिसाब से चार आने यानी 25 पैसे (चवन्नी)।
  3. ‘गज’ शब्द का प्रयोग कपड़ा नापने और जमीन (वर्ग गज) नापने में किया जाता है।
  4. एक गज में 3 फीट (36 इंच) होते हैं।

झरोखे से — साझी समझ

★घर आए अतिथियों का अभिवादन आप कैसे करते हैं? आप उन्हें कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहेंगे?

हम अतिथियों का स्वागत हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ कहकर करते हैं। बड़ों के पैर छूते हैं। पहले उन्हें पानी देते हैं, फिर चाय-नाश्ता। मैं अतिथियों को महाराष्ट्र की पूरनपोली और आमरस खिलाना चाहूँगा।