कक्षा 9 हिंदी · गंगा · कहानी

1. दो बैलों की कथा

प्रेमचंद की कहानी — सार, बहुविकल्पी प्रश्न, प्रश्न-उत्तर, कहानी का सौंदर्य, स्वतंत्रता आंदोलन से मिलान, मुहावरे व शब्द-संपदा. NCERT हिंदी (गंगा).

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पाठ का परिचय : ‘दो बैलों की कथा’ प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। इसमें झूरी के दो बैलों — हीरा और मोती — की मित्रता, स्वाभिमान और आजादी के लिए संघर्ष की कथा है। परोक्ष रूप से यह कहानी स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है।

पाठ का सार

★कहानी संक्षेप में

झूरी के पास पछाईं जाति के दो सुंदर बैल थे — हीरा और मोती। दोनों में गहरा भाईचारा था। एक बार झूरी ने उन्हें अपने साले गया के घर भेज दिया। बैलों ने समझा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है। वे रात में पगहे तुड़ाकर घर लौट आए।

गया उन्हें फिर ले गया। वहाँ उन्हें मार और सूखा भूसा मिला। गया की छोटी लड़की, जिसकी माँ मर चुकी थी, उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाती थी। एक रात उसी ने उनकी रस्सी खोल दी। दोनों भागे और रास्ता भूल गए।

रास्ते में उन्होंने मिलकर एक साँड़ को हराया। फिर मटर के खेत में चरते हुए पकड़े गए और काँजीहौस में बंद कर दिए गए। वहाँ भूखे जानवरों को बचाने के लिए उन्होंने दीवार तोड़ दी। हीरा बँधा था, इसलिए मोती भी मित्र को छोड़कर नहीं भागा।

बाद में उन्हें नीलाम किया गया। एक दढ़ियल कसाई ने उन्हें खरीदा। रास्ते में परिचित राह देखकर दोनों भागकर झूरी के घर पहुँच गए। मोती ने दढ़ियल को खदेड़ दिया। झूरी ने उन्हें गले लगाया और मालकिन ने भी उनके माथे चूम लिए।

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

उत्तर : (ख) एकता और सहयोग

कारण : दोनों साथ खाते, साथ काम करते और हर संकट में एक-दूसरे का साथ देते थे।

2हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

उत्तर : (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

कारण : बैलों ने समझा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। इसलिए उनका दिल भारी हो गया और उन्होंने नाँद में मुँह तक नहीं डाला।

3बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर : (घ) अपनापन पाने के लिए

कारण : जिसे वे अपना घर समझते थे, वह छूट गया था। नया घर और नए लोग उन्हें बेगाने लगते थे। इसलिए वे अपनेपन की खोज में झूरी के पास लौट आए।

4गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

उत्तर : (क) स्वाभिमान

कारण : झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था। गया की मार से उनके सम्मान को चोट लगी।

5कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

उत्तर : (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

कारण : मूक-भाषा में बैल मनुष्य की तरह सोचते, सलाह करते और अच्छे-बुरे का विचार करते दिखाए गए हैं।

6‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

उत्तर : (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

कारण : जैसे बैल बार-बार बंधन तोड़ते रहे, वैसे ही भारतीय जनता अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बार-बार संघर्ष करती रही।

मेरी समझ मेरे विचार

1जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

गया ने उन्हें मोटी रस्सियों से बाँधा, डंडों से मारा और सूखा भूसा खाने को दिया। झूरी उन्हें बहुत प्यार से रखता था। यहाँ उनके सम्मान को चोट लगी। वे इस अपमान और अन्याय का विरोध करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने हल में जुतने पर पाँव तक नहीं उठाया।

2बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

बैल बहुत दूर से, रात में, मजबूत पगहे तोड़कर अपने-आप घर लौट आए थे। इससे पता चलता है कि उन्हें अपने घर और मालिक से कितना प्रेम था। झूरी का मन स्नेह से गद्गद हो गया। गाँव के बच्चों ने उनका स्वागत किया और उन्हें ‘पशु-वीर’ माना।

वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है। कई पालतू पशु बिछड़ने के बाद भी अपने घर का रास्ता ढूँढ़कर लौट आते हैं।

3‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ — इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
  • गया के घर अत्याचार होने पर बैलों ने काम करने से मना किया और अंत में भाग निकले।
  • साँड़ से बचने का कोई और उपाय न था, इसलिए दोनों ने मिलकर उसका सामना किया और उसे हराया।
  • काँजीहौस में भूख से मरने के बजाय हीरा ने दीवार तोड़नी शुरू की। इससे नौ-दस प्राणियों की जान बची।
  • अंत में मोती ने दढ़ियल को खदेड़ा और अपने घर पर अपना अधिकार बचाया।
4हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

मेरे विचार से वे अपनेपन से अधिक प्रेरित थे। वे हर बार भागकर झूरी के घर ही लौटे। जहाँ उन्हें प्रेम मिला, वहाँ वे रुक गए। गया के घर भी छोटी लड़की के प्रेम के कारण वे उसे संकट में नहीं डालना चाहते थे। फिर भी अपनापन पाने के लिए उन्हें बंधनों से आजाद होना पड़ा। इसलिए दोनों भावनाएँ साथ-साथ चलती हैं।

5‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’ — क्या आप इस कथन से सहमत हैं? कारण बताइए।

हाँ, मैं सहमत हूँ। जो चुपचाप अत्याचार सहता है, वह अत्याचारी को और अत्याचार करने का साहस देता है। हीरा-मोती ने अन्याय का विरोध किया, इसलिए वे आजाद हुए। काँजीहौस के गधे डर के कारण चुप रहे और बंधन में पड़े रहे। इसलिए अन्याय का शांत और उचित ढंग से विरोध करना आवश्यक है।

6हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? (कम से कम तीन बिंदु)
  • दोनों साथ नाँद में मुँह डालते, साथ हटाते और एक-दूसरे को चाटकर थकान मिटाते थे।
  • मोती खेत में फँस गया, तो हीरा बचकर भी लौट आया — ‘फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे।’
  • साँड़ से दोनों ने मिलकर लड़ाई की।
  • काँजीहौस में हीरा बँधा था, तो मोती उसे छोड़कर नहीं भागा।
7कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

झूरी की पत्नी (मालकिन) ने पहले बैलों को ‘नमकहराम’ कहा और उन्हें सूखा भूसा देने का आदेश दिया। पर अंत में उनकी वीरता देखकर उसने भी उनके माथे चूम लिए।

गया की छोटी लड़की शुरू से ही दयालु थी। वह स्वयं दुखी थी, फिर भी बैलों को चुपके से रोटियाँ खिलाती थी। उसी ने उनकी रस्सी खोलकर उन्हें आजाद किया। इस प्रकार लड़की का प्रेम निःस्वार्थ था, जबकि मालकिन का व्यवहार बाद में बदला।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

मैं बैलों को रोज भरपेट खाना-पानी देता। घर के बड़ों को समझाता कि बैलों को मारना ठीक नहीं है। मैं झूरी को संदेश भिजवाता कि उसके बैल यहाँ दुखी हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित रास्ते से घर भेजने में मदद करता।

2भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप सहमत हैं? उदाहरण सहित लिखिए।

हाँ, मैं सहमत हूँ। काँजीहौस की दीवार टूटने पर भी गधे डर के कारण नहीं भागे। वे सोचते रहे कि फिर पकड़े गए तो क्या होगा।

हमारे जीवन में भी ऐसा होता है। कई विद्यार्थी उत्तर जानते हुए भी डर के कारण कक्षा में नहीं बोलते। कोई मंच पर बोलने का अवसर छोड़ देता है। भय छोड़ने पर ही हम अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है...” क्या आप इस बात से सहमत हैं?

हाँ, मैं सहमत हूँ। पक्के दोस्त हँसी-मजाक करते हैं, एक-दूसरे को छेड़ते हैं, पर बुरा नहीं मानते। इससे उनकी दोस्ती और गहरी होती है। जिस दोस्ती में ऐसा अपनापन नहीं होता, वह औपचारिक-सी लगती है। पर धौल-धप्पा इतना ही हो कि किसी को चोट या दुख न पहुँचे।

2गिरे हुए बैरी पर सींग चलाने के बारे में आप हीरा के साथ हैं या मोती के? क्यों?

मैं हीरा के साथ हूँ। गिरा हुआ शत्रु हार मान चुका होता है। उस पर वार करना कायरता और अन्याय है। क्षमा करना वीरता का गुण है। हाँ, मोती की यह बात भी समझ में आती है कि शत्रु से सावधान रहना चाहिए।

3क्या आपने कभी किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? बताइए।

नमूना उत्तर : एक बार विद्यालय से लौटते समय तेज बारिश हुई और सड़क पर पानी भर गया। मेरा मित्र फिसलकर गिर पड़ा और उसके पैर में मोच आ गई। मैंने उसका बस्ता उठाया और उसे सहारा देकर पास की दुकान तक ले गया। वहाँ से उसके घर फोन किया। उस दिन हमने साथ मिलकर कठिनाई का सामना किया।

कहानी की पड़ताल

मुख्य बिंदुदो बैलों की कथा
शीर्षक और लेखकदो बैलों की कथा — प्रेमचंद
विषयपशुओं की मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष
क्रिया/कार्यबैलों का बार-बार भागना, साँड़ से लड़ना, काँजीहौस की दीवार तोड़ना और घर लौटना
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचारअंग्रेजी शासन के समय का ग्रामीण भारत; स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है
चरित्र/पात्रहीरा, मोती, झूरी, झूरी की पत्नी, गया, गया की छोटी लड़की, दढ़ियल, काँजीहौस का चौकीदार
परिणामबैल अपने संघर्ष से आजाद होकर झूरी के घर लौट आते हैं और सबका प्रेम पाते हैं

कहानी का सौंदर्य

★तालिका में दी गई विशेषताओं के लिए कहानी से एक-एक नया उदाहरण
विशेषताकहानी से उदाहरण
चित्रात्मक भाषादोनों उन्मत्त होकर बछड़ों की भाँति कुलेलें करते हुए घर की ओर दौड़े।
संवादात्मकता“भाग क्यों न चलें?” “भागना कायरता है।”
विरोधाभासगया ने अपने बैलों को खली, चूनी सब कुछ दी, पर हीरा-मोती को सूखा भूसा डाल दिया।
व्यंग्यकदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।
संघर्षहीरा ने काँजीहौस की कच्ची दीवार में सींग गड़ा दिए और दौड़-दौड़कर चोटें कीं।
अतिशयोक्तिसाँड़ पूरा हाथी है।
संदेह/उलझनदोनों गधे अभी तक खड़े सोच रहे थे कि भागें या न भागें।

कहानी की रचना

★कहानी के प्रारंभ में मिलने वाले संकेत
  • शुरुआत में गधे और बैल के सीधेपन की चर्चा है। इससे संकेत मिलता है कि कहानी पशुओं पर है।
  • मुख्य पात्र — झूरी और उसके बैल हीरा-मोती — का परिचय शुरू में ही मिल जाता है।
  • भारतवासियों की अफ्रीका में दुर्दशा और जापान की विजय की चर्चा से कहानी का समय (अंग्रेजी शासन का काल) पता चलता है।
  • ‘मूक-भाषा’ में विचार-विनिमय से पता चलता है कि बैल मनुष्यों की तरह बातें करेंगे।
  • भाषा सरल, व्यंग्यपूर्ण और मुहावरेदार है, जैसे — ‘बछिया के ताऊ’, ‘ईंट का जवाब पत्थर से देना’।

कहानी का समय और समाज — मिलान

कहानी में से वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई।1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
6. साँड़ पूरा हाथी है... पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।

पशुओं के लिए कानून

1बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

न्याय : बैलों ने दूसरे के खेत की मटर चरी थी। किसान की फसल की रक्षा के लिए ऐसे पशुओं को बंद करना नियम के अनुसार था।

अन्याय : काँजीहौस में जानवरों को कई दिन तक चारा नहीं दिया गया। उन्हें मारा गया। उनके मालिक को खबर दिए बिना उन्हें नीलाम कर दिया गया।

2यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
  • भरपेट चारा, दाना और स्वच्छ पानी पाने का अधिकार।
  • मार-पीट और क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार।
  • बीमार या घायल होने पर इलाज का अधिकार।
  • शक्ति से अधिक बोझ न ढोने और आराम पाने का अधिकार।
  • नीलाम करने से पहले मालिक को सूचना देने का नियम।
3हीरा-मोती की ओर से थानाध्यक्ष को शिकायत-पत्र लिखिए।

सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
पुलिस थाना, ...... गाँव

विषय : हमारे साथ हुए अन्याय के संबंध में।

थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी के बैल हैं। हमें कुछ दिन पहले काँजीहाउस में बंद किया गया था। वहाँ एक सप्ताह तक हमें चारे का एक तिनका भी नहीं दिया गया। हमें डंडों से पीटा गया और मोटी रस्सियों से बाँध दिया गया। हमारे मालिक को खबर दिए बिना हमें एक दढ़ियल आदमी के हाथ नीलाम कर दिया गया।

आपसे प्रार्थना है कि काँजीहाउस के कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई करें, ताकि दूसरे पशुओं के साथ ऐसा अन्याय न हो।

आपके प्रार्थी,
हीरा और मोती
झूरी का थान, ...... गाँव

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हमारी धरोहर और संस्कृति

1हीरा और मोती कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
  • गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करते थे।
  • स्त्री पर सींग नहीं चलाते थे।
  • जो उनका भला करता, उसका बुरा नहीं करते थे (छोटी लड़की को संकट में नहीं डाला)।
  • संकट में अपने मित्र को छोड़कर नहीं भागते थे।
  • दाने-चारे की शिकायत नहीं करते थे और काम से जी नहीं चुराते थे।
2हीरा के कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

हीरा के कथन क्षमा, दया, स्त्री-सम्मान और युद्ध में भी धर्म (नैतिकता) का पालन करने जैसे भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं।

3(क) कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरण तथा उनके उपयोग
उपकरणउपयोग
हल, कुदाल, फावड़ाखेत की जुताई और खुदाई (पारंपरिक)
खुरपीनिराई — खरपतवार निकालना (पारंपरिक)
हँसियाफसल काटना (पारंपरिक)
रहट, पुर (मोट)कुएँ से सिंचाई के लिए पानी निकालना (पारंपरिक)
ट्रैक्टरजुताई, बुआई और माल ढोना (आधुनिक)
थ्रेशर, हार्वेस्टरफसल काटना और दाने अलग करना (आधुनिक)
पंप सेट, ड्रिप व स्प्रिंकलरकम पानी में सिंचाई (आधुनिक)
•(ख) भारतीय गाँवों एवं शहरों में बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
  • खेत जोतने और बुआई में।
  • बैलगाड़ी से अनाज, लकड़ी और माल ढोने में।
  • कुएँ से पानी निकालने (पुर/रहट चलाने) में।
  • कोल्हू चलाकर तेल और गन्ने का रस निकालने में।
  • फसल की दँवाई (दाने अलग करना) में।
  • बैल-पोला जैसे त्योहारों और मेलों में।

अलग-अलग और साथ-साथ

1कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

हीरा : धैर्यवान, शांत, सहनशील, समझदार, नैतिक नियमों को माननेवाला और मेहनती।

मोती : गुस्सैल, उग्र, साहसी, जल्दबाज, सच्चा मित्र और मेहनती।

2हीरा और मोती की भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

मोती गुस्से में जल्दबाजी करता, तो हीरा उसे धैर्य से रोक लेता। मोती ने गाड़ी को खाई में गिराना चाहा, तो हीरा ने सँभाल लिया। जब हीरा काँजीहौस में थककर बँध गया, तब मोती के साहस ने दीवार तोड़कर सबको बचाया। अंत में मोती की उग्रता ने ही दढ़ियल को भगाया। इस तरह एक का गुण दूसरे की कमी पूरी करता था।

3आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से कैसा व्यवहार चाहते हैं?

मैं चाहता हूँ कि सहपाठी मेरी बात ध्यान से सुनें, मेरा मजाक न उड़ाएँ और कठिन विषय में मदद करें। मैं भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करूँगा। खेल में सबको बारी दूँगा। किसी को उसकी कमी के कारण अलग नहीं करूँगा।

4हीरा और मोती आपस में किस प्रकार बातें किया करते होंगे?

वे आँखों के इशारों से, सिर हिलाकर, एक-दूसरे को चाटकर, सूँघकर, सींग मिलाकर और धीमी हुंकार से बातें करते होंगे। कनखियों से देखना भी उनकी बातचीत का एक तरीका था।

5आप बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद कब-कब, कहाँ-कहाँ करते हैं?
  • कक्षा में शिक्षक के प्रश्न का उत्तर जानने पर हाथ उठाकर।
  • ‘हाँ’ या ‘ना’ के लिए सिर हिलाकर।
  • पुस्तकालय या परीक्षा भवन में इशारों से।
  • दूर खड़े मित्र को हाथ हिलाकर बुलाने में।
  • मुस्कुराकर धन्यवाद देने या ताली बजाकर प्रशंसा करने में।

मार्ग खोजेंगे कैसे?

1क्या कभी आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने मार्ग का पता कैसे लगाया?

नमूना उत्तर : एक बार मेले में मैं परिवार से बिछड़ गया। मैं घबराया नहीं। मैं पास खड़े पुलिसकर्मी के पास गया और अपने पिताजी का नाम व फोन नंबर बताया। उद्घोषणा होने पर पिताजी मुझे लेने आ गए।

2यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए?
  • घबराए नहीं, शांत रहकर सोचे।
  • मोबाइल के ऑनलाइन मानचित्र की मदद ले।
  • पुलिस, डाकघर, स्कूल या सरकारी भवन में जाकर सहायता माँगे।
  • सड़क पर लगे सूचना-पट और दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते पढ़े।
  • अनजान व्यक्ति के साथ अकेले न जाए।
  • घर का पता और फोन नंबर हमेशा याद रखे।

लेखन

1हीरा या मोती की नजर से काँजीहाउस के दिन की डायरी

हीरा की डायरी

आज का दिन हमारे जीवन का सबसे कठिन दिन था। सुबह-सुबह हमें काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। सारा दिन बीत गया, पर किसी ने एक तिनका भी नहीं डाला। भूख से पेट जल रहा है। यहाँ और भी कई भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे पड़े हैं। सबकी हालत बहुत खराब है।

हमने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटी, पर उससे क्या होता? मन में गुस्सा भी है और दुख भी। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी है। मुझे विश्वास है कि हम यहाँ से निकलेंगे और एक दिन झूरी के पास अवश्य पहुँचेंगे।

2बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार

दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ

हमारे संवाददाता द्वारा — कल रात गाँव के काँजीहाउस में एक अनोखी घटना हुई। हीरा और मोती नाम के दो बैलों ने सींगों से कच्ची दीवार तोड़ दी। दीवार गिरते ही वहाँ बंद घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें भाग निकलीं। कई दिनों से भूखे इन पशुओं की जान बच गई।

सुबह कर्मचारियों में खलबली मच गई। बैलों को फिर से रस्सी से बाँध दिया गया है। गाँव के लोग बैलों के साहस की प्रशंसा कर रहे हैं। कुछ लोगों ने काँजीहाउस में पशुओं को भूखा रखने का विरोध भी किया है।

3कहानी का नया अंत (यदि बैल वापस न लौटते)

दढ़ियल बैलों को लेकर आगे बढ़ा ही था कि रास्ते में एक बूढ़ा किसान मिला। बैलों की दशा देखकर उसका मन पसीज गया। उसने दढ़ियल को अधिक दाम देकर बैल खरीद लिए। अब हीरा और मोती उस बूढ़े किसान के घर शांति से रहते हैं। उन्हें भरपेट चारा मिलता है।

उधर झूरी अपने बैलों की याद में उदास रहता है। एक दिन उसे खबर मिलती है कि उसके बैल पास के गाँव में सुरक्षित हैं। वह उनसे मिलने जाता है। बैल उसे देखते ही उसका हाथ चाटने लगते हैं।

व्याकरण की बात — भाषा गढ़ते मुहावरे

मुहावराअर्थनया वाक्य
दाँतों पसीना आनाबहुत कठिनाई होनाभारी बोरा उठाने में मजदूर को दाँतों पसीना आ गया।
दिल काँप उठनाबहुत डर जानाशेर की दहाड़ सुनकर सबके दिल काँप उठे।
जल उठनाबहुत क्रोधित होनाअपनी बुराई सुनकर वह जल उठा।
दिल में ऐंठकर रह जानामन का क्रोध मन में ही दबा लेनाबड़ों के सामने वह कुछ न कह सका और दिल में ऐंठकर रह गया।
खबर लेनासजा देना, अच्छी तरह निपटनाशरारत करने पर माँ ने उसकी खूब खबर ली।
जी तोड़कर काम करनाबहुत मेहनत करनाकिसान खेत में जी तोड़कर काम करते हैं।
गम खा जानादुख या अपमान चुपचाप सह लेनाकड़वी बात सुनकर भी दादी गम खा गईं।
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकड़ा जवाब देनाहमारे सैनिकों ने शत्रु को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
नौ-दो ग्यारह होनाभाग जानापुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
मन फीका होनाउदास होना, निराश होनामैच रद्द होने से बच्चों का मन फीका हो गया।

समूह गतिविधियाँ

1(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र

अभिनंदन-पत्र

प्रिय पशु-वीर हीरा और मोती,
तुमने मजबूत रस्सियाँ तोड़कर और लंबी दूरी पार करके अपने घर का प्रेम दिखाया है। तुमने साँड़ जैसे बलवान शत्रु का डटकर सामना किया। काँजीहौस की दीवार तोड़कर तुमने भूखे प्राणियों की जान बचाई। तुम्हारी मित्रता, साहस और स्वाभिमान हम सबके लिए प्रेरणा है।

गाँव की बाल-सभा तुम्हारा हार्दिक अभिनंदन करती है।
— बाल-सभा, झूरी का गाँव

2बाल-सभा में भाषण — ‘पशुओं के अधिकार’ (मुख्य बिंदु)
  • पशु भी जीव हैं। उन्हें भी भूख, दर्द और प्रेम का अनुभव होता है।
  • उन्हें भरपेट भोजन, पानी और रहने की साफ जगह मिलनी चाहिए।
  • उनसे शक्ति से अधिक काम न लिया जाए और उन्हें मारा न जाए।
  • बीमार पशु का इलाज करवाना हमारा कर्तव्य है।
  • भारत में पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए कानून भी है।
  • हीरा-मोती ने हमें सिखाया कि पशुओं में भी स्वाभिमान होता है।
3कहानी के पाँच भागों के शीर्षक
  1. घर की याद
  2. गया के घर में अपमान
  3. आजादी और साँड़ से मुकाबला
  4. काँजीहौस में विद्रोह
  5. नीलामी और घर-वापसी
★मेरी पहेली (नमूना)
  • हीरा जिसका भाई-सा साथी, गुस्सा जिसकी पहचान, सींग चलाकर दढ़ियल भगाया, बोलो उसका नाम। — मोती
  • छोटे-छोटे दाने हरे, फली में रहते भरे-भरे, बैलों ने खेत में चरे। — मटर
  • बँटकर बनी, बाँधे पशु को, बैल चबाएँ तोड़ें जिसको। — रस्सी
  • गोल-गोल तवे पर सिकती, भूखे बैलों के मुँह में खिलती। — रोटी

शब्द-संपदा

शब्दअर्थ
निरापदआपत्ति से रहित, सुरक्षित
सहिष्णुतासहनशीलता
विषादउदासी
पराकाष्ठाअंतिम सीमा, चरम
कदाचित्कभी, शायद
पछाईंपश्चिमी प्रदेश का
चौकससावधान, चौकन्ना
डीलशरीर की ऊँचाई-चौड़ाई, कद
विग्रहलड़ाई, फूट
विनोदमनोरंजन, हँसी-मजाक
आत्मीयताअपनापन
नाँदपशुओं को चारा-पानी देने का मिट्टी का बड़ा बर्तन
गोईंबैलों की जोड़ी
पगहियापशु बाँधने की रस्सी
कनखियोंतिरछी नजर
गराँवबैल के गले में डाली जाने वाली फंदेदार रस्सी
प्रतिवादविरोध
ताकीदबार-बार चेताना
टिटकारटिक-टिक करके पशु को चलने के लिए प्रेरित करना
तेवरक्रोध भरी दृष्टि
थानपशु बाँधने की जगह
बरकतवृद्धि, लाभ
बेतहाशाबहुत तेजी से, बिना सोचे
रगेदनाखदेड़ना, भगाना
तजुरबाअनुभव
मल्लयुद्धकुश्ती
काँजीहौसआवारा पशुओं को बंद करने का बाड़ा
साबिकावास्ता, सामना
उजड्डपनअशिष्टता
बूताबल, सामर्थ्य
डुग्गीछोटा बाजा, डुगडुगी
उन्मत्तमतवाला
अख्तियारअधिकार