कक्षा 9 हिंदी · गंगा · निबंध

2. क्या लिखूँ?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का निबंध — सार, बहुविकल्पी प्रश्न, प्रश्न-उत्तर, भाव-विस्तार, समास, उपसर्ग-प्रत्यय व शब्द-संपदा. NCERT हिंदी (गंगा).

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पाठ का परिचय : ‘क्या लिखूँ?’ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का निबंध है। लेखक को नमिता और अमिता के लिए दो आदर्श निबंध लिखने हैं — ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’। इसी बहाने वे निबंध लिखने की प्रक्रिया को रोचक और आत्मपरक शैली में समझाते हैं।

पाठ का सार

★निबंध संक्षेप में

ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। तब विषय की चिंता नहीं रहती, जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे देती है। पर लेखक को लिखने के लिए सोचना और परिश्रम करना पड़ता है।

लेखक ने निबंधशास्त्र के आचार्यों के नियम देखे — निबंध छोटा हो, सामग्री और शैली उसके दो अंग हों, पहले रूपरेखा बने और भाषा में प्रवाह हो। लेखक को ये नियम निभाना कठिन लगा। फिर उन्हें मानटेन की पद्धति अच्छी लगी, जिसमें लेखक अपने देखे, सुने और अनुभव किए को स्वच्छंद रूप से लिखता है।

अमीर खुसरो की तरह लेखक ने दोनों विषयों को एक ही निबंध में जोड़ दिया। दूर के ढोल इसलिए सुहावने लगते हैं, क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती। उसी तरह तरुणों को भविष्य और वृद्धों को अतीत सुखद लगता है। दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। इसी कारण हर युग में सुधारों की आवश्यकता बनी रहती है।

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?

उत्तर : (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना

कारण : लेखक कहते हैं — असली वस्तु हैट है, खूँटी नहीं। यानी मन के भाव ही असली हैं, विषय नहीं।

2मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?

उत्तर : (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

कारण : लेखक कहते हैं — इसी पद्धति का अनुसरण कर मैं भी क्यों न निबंध लिखूँ।

3“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद...” यह तुलना किस पर आधारित है?

उत्तर : (घ) अभिलाषा और अनुभव

कारण : तरुणों के मन में भविष्य की अभिलाषाएँ होती हैं, जबकि वृद्धों के पास बीते जीवन के अनुभव होते हैं।

4निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?

उत्तर : (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए

कारण : खुसरो ने एक ही पद्य में खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल — चारों विषय जोड़ दिए थे।

5निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?

उत्तर : (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

कारण : लेखक कहते हैं कि इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।

मेरी समझ मेरे विचार

1निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय मन में उमंग उठती है और लेख अपने-आप लिखा जाता है। तब विषय का महत्त्व नहीं रहता।

लेखक ने ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं किया। उन्हें लिखने के लिए सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है।

2वृद्ध और तरुण दोनों वर्तमान से असंतुष्ट क्यों रहते हैं?

तरुण : वे भविष्य के सुंदर सपने देखते हैं। उन्हें वर्तमान की व्यवस्था पुरानी लगती है। वे जल्दी बदलाव और क्रांति चाहते हैं।

वृद्ध : उन्हें अपना अतीत सुखद लगता है। नए बदलाव उन्हें परंपरा के विरुद्ध लगते हैं। वे अतीत के गौरव को वर्तमान में देखना चाहते हैं।

3नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

नमिता ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और अमिता ‘समाज-सुधार’ पर निबंध लिखवाना चाहती थी।

  • उन्हें दो घंटों में दो आदर्श निबंध लिखने थे।
  • पास में न पुस्तकालय था, न विश्वकोश। सामग्री अपने ज्ञान से ही जुटानी थी।
  • लिखने से पहले रूपरेखा बनाना उन्हें कठिन लगा।
  • शैली तय करने में उलझन थी — छोटे वाक्य लिखें या विद्वता दिखाने वाले लंबे वाक्य।
  • समाज-सुधार जैसे बड़े विषय को पाँच पेज में समेटना कठिन था।
4निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
  • निबंध छोटा होना चाहिए।
  • निबंध के दो प्रधान अंग हैं — सामग्री और शैली।
  • मनन करके सामग्री एकत्र करनी चाहिए।
  • लिखने से पहले रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
  • भाषा में प्रवाह हो; वाक्य छोटे पर एक-दूसरे से जुड़े हों।
  • अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियों का प्रयोग हो।

मेरी तैयारी : मैं पहले विषय पर सोचता हूँ। पुस्तकों और बड़ों से जानकारी लेता हूँ। मुख्य बिंदुओं की रूपरेखा बनाता हूँ। फिर भूमिका, विस्तार और उपसंहार के क्रम में लिखता हूँ।

5निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

जो हम स्वयं देखते, सुनते और अनुभव करते हैं, उसे हम सच्चे भाव से लिख पाते हैं। इससे निबंध में सजीवता और मौलिकता आती है। पाठक को भी वह अपना-सा लगता है। अनुभव से लिखे निबंध में बनावटीपन नहीं रहता।

निबंध लिखने की कला

★आरेख (प्रेरणा → विषय चयन → सामग्री संग्रह → रूपरेखा निर्माण → शैली निर्धारण → लेखन और समापन) के आधार पर एक निबंध

विषय : मेरे विद्यालय का पुस्तकालय
रूपरेखा : भूमिका — पुस्तकालय का स्वरूप — लाभ — नियम — उपसंहार

पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं। मेरे विद्यालय का पुस्तकालय ऐसे ही मित्रों का घर है।

हमारे पुस्तकालय में कहानियों, कविताओं, विज्ञान, इतिहास और खेल की हजारों पुस्तकें हैं। यहाँ समाचार-पत्र और बाल-पत्रिकाएँ भी आती हैं। पढ़ने के लिए शांत कक्ष और साफ मेज-कुर्सियाँ हैं।

पुस्तकालय से हमारा ज्ञान बढ़ता है। पढ़ने की आदत बनती है। गृहकार्य और परियोजनाओं के लिए सामग्री मिल जाती है।

यहाँ शांति रखनी होती है। पुस्तकें समय पर लौटानी होती हैं और उन्हें फाड़ना या उन पर लिखना मना है।

सच में, पुस्तकालय विद्यालय का हृदय है। हमें इसका भरपूर उपयोग करना चाहिए।

मुझे बेहतर लगने वाला ढंग : विषय चयन → अनुभव और अवलोकन → बिंदु लिखना → लेखन → स्वयं पढ़कर सुधार। अपने अनुभव से शुरू करने पर निबंध सहज और सच्चा बनता है।

भाव-विस्तार

1“जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”

जिन युवाओं ने अभी जीवन की कठिनाइयों का सामना नहीं किया है, उन्हें संसार बहुत सुंदर लगता है। नौकरी, घर और जिम्मेदारियों का बोझ पड़ने पर ही जीवन की असली कठोरता समझ में आती है।

2“मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”

समाज में हर युग में कुछ नई बुराइयाँ पैदा हो जाती हैं। उन्हें दूर करने के लिए सुधारक आते हैं। इसलिए सुधार का काम कभी समाप्त नहीं होता। यही समाज की प्रगति का लक्षण है।

3“आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”

समय बदलता रहता है। आज के युवा कल बूढ़े हो जाएँगे। तब वे भी अपने बीते दिनों को सुनहरा मानेंगे और नई पीढ़ी के बदलावों से असंतुष्ट रहेंगे। यह क्रम हर पीढ़ी में चलता है।

4“निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”

छोटे निबंध में बात कसी हुई और स्पष्ट रहती है। पाठक उसे रुचि से पढ़ता है। बहुत लंबे निबंध में बातें दोहराई जाती हैं और रचना की सुंदरता कम हो जाती है।

मेरा अनुभव

★आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?

नमूना उत्तर : मुझे ‘मेरा प्रिय त्योहार’ और ‘मेरी यात्रा’ जैसे विषयों पर लिखना सरल लगा, क्योंकि इनका मुझे सीधा अनुभव था। ‘विज्ञान : वरदान या अभिशाप’ जैसे विषय कठिन लगे, क्योंकि उनके लिए जानकारी और तर्क जुटाने पड़ते हैं।

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खोजबीन और लेखन

1निबंध में आए महान व्यक्तियों ने समाज के लिए क्या कार्य किए?
महापुरुषमुख्य कार्य
बुद्धदेवअहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश; बौद्ध धर्म की स्थापना
महावीर स्वामीअहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का संदेश; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर
नागार्जुनबौद्ध दार्शनिक; माध्यमिक (शून्यवाद) दर्शन दिया
शंकराचार्यअद्वैत वेदांत का प्रचार; देश के चार कोनों में चार मठ स्थापित किए
कबीरजाति-पाँति, पाखंड और आडंबर का विरोध; सरल भाषा में दोहे
गुरु नानकएक ईश्वर, समानता और सेवा का संदेश; सिख धर्म के प्रथम गुरु
राजा राममोहन रायसती प्रथा का विरोध; ब्रह्म समाज की स्थापना; आधुनिक शिक्षा का समर्थन
स्वामी दयानंदआर्य समाज की स्थापना; अंधविश्वास का विरोध; ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा
महात्मा गांधीसत्य और अहिंसा से स्वतंत्रता आंदोलन; छुआछूत का विरोध; स्वदेशी और स्वच्छता
2समाज के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्थाएँ
  • स्त्री-शिक्षा : सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों के लिए पहला विद्यालय खोला।
  • पर्यावरण : सुंदरलाल बहुगुणा का चिपको आंदोलन; ‘वृक्षमाता’ सालूमरदा तिमक्का ने हजारों पेड़ लगाए।
  • दिव्यांगजन : बाबा आमटे ने आनंदवन में कुष्ठ रोगियों और दिव्यांगों की सेवा की।
  • असमानता : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने समानता और अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

अपने आस-पास की ऐसी संस्थाओं की जानकारी भी जोड़ें।

3आपको समाज-सुधार का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे?
  • हर बच्चे, विशेषकर लड़कियों की पढ़ाई — घर-घर जाकर माता-पिता को समझाऊँगा।
  • स्वच्छता — मोहल्ले में सफाई अभियान चलाऊँगा।
  • नशामुक्ति — नुक्कड़ नाटकों से लोगों को जागरूक करूँगा।
  • पर्यावरण — पेड़ लगाऊँगा और प्लास्टिक का उपयोग कम करवाऊँगा।
5‘आम के आम गुठलियों के दाम’ और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ — संक्षिप्त लेख

हमारे विद्यालय में एक ‘हरित दल’ बना है। हमने कैंटीन और घरों से सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते और बचा हुआ भोजन इकट्ठा किया। इन्हें एक गड्ढे में डालकर ऊपर से मिट्टी डाली।

दो महीने में यह कचरा अच्छी जैविक खाद बन गया। इस खाद से हमने विद्यालय के बगीचे में सब्जियाँ उगाईं। बची हुई खाद हमने गाँव के किसानों को बेच दी।

इस तरह विद्यालय का कचरा भी साफ हुआ, बगीचा भी हरा-भरा हुआ और कुछ पैसे भी मिले। सच में, यह ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ जैसा हुआ।

6डायरी — जब दूर का अनुमान और निकट का अनुभव अलग रहा

15 अक्तूबर

आज हम पहाड़ी पर बने पुराने किले को देखने गए। दूर से किला बहुत सुंदर और भव्य दिखाई देता था। मैंने सोचा था कि अंदर सब कुछ चमचमाता होगा।

पास जाकर देखा तो दीवारें टूटी हुई थीं। जगह-जगह कचरा पड़ा था और लोगों ने दीवारों पर नाम लिख दिए थे। मुझे बहुत दुख हुआ। आज समझ आया कि ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’। साथ ही मन में संकल्प लिया कि अपनी धरोहर को साफ रखने में मैं भी मदद करूँगा।

व्याकरण की बात — समास

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष
पुस्तकालयपुस्तकों का आलयतत्पुरुष
विवाहोत्सवविवाह का उत्सवतत्पुरुष
विश्वकोशविश्व (के ज्ञान) का कोशतत्पुरुष
नव-वधूनई है जो वधूकर्मधारय
जीवन-संग्रामजीवन रूपी संग्रामकर्मधारय
दस-पाँचदस या पाँचद्वंद्व
भली-भाँतिभली प्रकार सेअव्ययीभाव
नगर-नगरप्रत्येक नगरअव्ययीभाव

उपसर्ग एवं प्रत्यय

1निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द

उपसर्ग वाले शब्द : अनादि (अन्), दुर्बोध (दुर्), अस्पष्टता (अ), असंतोष (अ), अनुसंधान (अनु), प्रगतिशील (प्र), समावेश (सम्), अनुसरण (अनु)

प्रत्यय वाले शब्द : सुधारक (क), कठिनाई (आई), विद्वता (ता), मधुरता (ता), कर्कशता (ता), सामाजिक (इक), साहित्यिक (इक), मनमोहक (क)

2उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर वाक्य पूरे कीजिए
  • निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
  • वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।
  • वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।
3उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द
मूल शब्दनए शब्द
मधुरमधुरता, मधुरिमा, सुमधुर
सुधारसुधारक, सुधारवादी, सुधारना
सुंदरसुंदरता, असुंदर, सुंदरतम
गतिप्रगति, दुर्गति, सद्गति, गतिशील
समाजसामाजिक, असामाजिक, समाजवाद

भाव एक शब्द अनेक

मिलते-जुलते शब्दवाक्य प्रयोग
उमंग, स्फूर्ति, आवेगछुट्टियों की खबर सुनकर बच्चों में उमंग भर गई।
विज्ञ, विद्वान, आचार्यसभा में अनेक विद्वान उपस्थित थे।
कोलाहल, शोर, हल्लाबाजार के कोलाहल में कुछ सुनाई नहीं देता।
मधुर, सुहावने, मनमोहकबाँसुरी की मधुर ध्वनि सबको अच्छी लगी।
कर्कश, कटुउसकी कटु बातों से सबका मन दुखी हुआ।
सम्मति, राय, मतमैंने पिताजी की सम्मति लेकर निर्णय लिया।

समूह गतिविधियाँ

1अमीर खुसरो की अन्य पहेलियाँ और मुकरियाँ (संकलन)

एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।। — आकाश

बीसों का सिर काट लिया, ना मारा ना खून किया।। — नाखून

वो आवे तब शादी होय, उस बिन दूजा और न कोय।
मीठे लागें वाके बोल, ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल।। — मुकरी

पढ़ने के लिए : पाठ के अंत में अज्ञेय का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ दिया गया है। अज्ञेय कहते हैं कि लेखक अपनी भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखता है। कभी-कभी संपादक, प्रकाशक या आर्थिक आवश्यकता जैसे बाहरी दबाव भी लिखवाते हैं, पर सच्चा कृतिकार भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव का भेद ईमानदारी से बनाए रखता है।

शब्द-संपदा

शब्दअर्थ
स्फूर्तिफुरती, उत्तेजना
आवेगमन की तेज झोंक, उतावली
यथार्थतासच्चाई
उत्थितउठा हुआ, उत्पन्न
रहस्यगुप्त भेद, मर्म
विज्ञजानकार, विद्वान
सम्मतिराय, सहमति
अनुसंधानखोज, जाँच-पड़ताल
विश्वकोशसभी विषयों की जानकारी वाला ग्रंथ
दुर्बोधजो जल्दी समझ में न आए
गांभीर्यगंभीरता, गहराई
गुत्थीउलझन, गाँठ
अज्ञनासमझ
पद्धतिप्रणाली, तरीका
पाश्चात्यपश्चिम का
आख्यायिकाकहानी, कथा
उदात्तऊँचा, महान, श्रेष्ठ
अनुसरणपीछे चलना, अनुकरण
समावेशशामिल होना
अंकितलिखा हुआ, चित्रित
कोलाहलशोर, हल्ला
विषादउदासी
कलरवमधुर ध्वनि