५. ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
लेखक — सुनील शास्त्री | संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु (वाक्य शुद्धि) और उपयोजित लेखन (कहानी) — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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लेखक परिचय : प्रस्तुत संस्मरण 'ईमानदारी की प्रतिमूर्ति' में लेखक सुनील शास्त्री जी ने अपने पिता और भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी, सच्चाई और परदुखकातरता को बड़े ही मार्मिक ढंग से उजागर किया है।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
संजाल पूर्ण कीजिए : शास्त्री जी की स्वभावगत विशेषताएँ
१. सुबह साढ़े पाँच-पौने छह बजे दरवाजा खटखटाने का —
लेखक की नींद टूट गई और वे यह सोचकर कि कोई नौकर चाय लाया होगा, झुंझलाते और बड़बड़ाते हुए दरवाजा खोलने गए, पर सामने बाबू जी को देखकर माफी माँगने लगे।
२. साठ पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से पैसे जमा करवाने का —
लेखक और उनके भाई अनिल भैया वहाँ रुक नहीं सके और कमरे में भागकर काफी देर तक फूट-फूटकर रोते रहे।
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भाव : इस वाक्य के माध्यम से लेखक की माँ (शास्त्री जी की पत्नी) यह कहना चाहती हैं कि किसी भी भारतीय नारी के लिए सोने-चाँदी के आभूषण असली गहना नहीं होते। एक स्त्री का असली गहना उसका 'सुहाग' अर्थात् उसके पति का साथ, उनका प्रेम और सम्मान होता है। जब तक पति का साथ और उनकी प्रसन्नता बनी हुई है, तब तक बाहरी आभूषणों के न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। इस वाक्य में उनकी सादगी, पति-परायणता और त्याग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
- किफायत (मितव्ययता) — वे फटे कुरतों को भी फेंकते नहीं थे, बल्कि जाड़े में कोट के नीचे पहन लेते थे या उनके रुमाल बनवा लेते थे।
- श्रम और खादी का सम्मान — उनका मानना था कि खादी के कपड़े बुनने वालों ने बड़ी मेहनत से बनाए हैं, इसलिए इसका एक-एक सूत काम आना चाहिए।
- पाँच ग्राम (सोने के गहने)
- चौदह किलोमीटर (गाड़ी की दूरी) / साठ पैसे (दर)
- पंख : मोर के पर बहुत सुंदर और रंग-बिरंगे होते हैं।
- परंतु / लेकिन : मैं समय पर स्टेशन पहुँचा, पर ट्रेन छूट चुकी थी।
अभिव्यक्ति
'सादा जीवन, उच्च विचार' यह उक्ति भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आदर्श है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति का रहन-सहन साधारण और जरूरत के अनुसार होना चाहिए, लेकिन उसकी सोच, उसके विचार और उसके आदर्श ऊँचे होने चाहिए। जो लोग बाहरी दिखावे और भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हैं, वे कभी भी मानसिक शांति प्राप्त नहीं कर पाते।
भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री, महात्मा गांधी, और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों ने सादगी को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उन्होंने साधारण कपड़े पहने, परंतु अपनी सोच और कर्मों से देश को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज के दिखावे के युग में हमें इस आदर्श को अपनाना चाहिए, क्योंकि सादगी से जीवन में शांति, संतोष और ईमानदारी आती है।
भाषा बिंदु (व्याकरण)
- करामत अली गाय अपनी घर लाई ।
शुद्ध वाक्य : करामत अली गाय अपने घर लाया। - उसने गाय की पीठ पर डंडे बरसाने नहीं चाहिए थी ।
शुद्ध वाक्य : उसे गाय की पीठ पर डंडे नहीं बरसाने चाहिए थे। - करामत अली ने रमजानी पर गाय के देखभाल का जिम्मेदारी सौंपी।
शुद्ध वाक्य : करामत अली ने रमजानी पर गाय की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी। - आचार्य अपनी शिष्यों को मिलना चाहते थे ।
शुद्ध वाक्य : आचार्य अपने शिष्यों से मिलना चाहते थे। - घर में तख्ते के रखे जाने का आवाज आता है।
शुद्ध वाक्य : घर में तख्त रखे जाने की आवाज आती है। - लड़के के तरफ मुखातिब होकर रामस्वरूप ने कोई कहना चाहा ।
शुद्ध वाक्य : लड़के की तरफ मुखातिब होकर रामस्वरूप ने कुछ कहना चाहा। - सिरचन को कोई लड़का-बाला नहीं थे ।
शुद्ध वाक्य : सिरचन के कोई बाल-बच्चे नहीं थे। - लक्ष्मी की एक झूब्बेदार पूँछ था ।
शुद्ध वाक्य : लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी। - कन्हैयालाल मिश्र जी बिड़ला के पुस्तक को पढ़ने लगे ।
शुद्ध वाक्य : कन्हैयालाल मिश्र जी बिड़ला की पुस्तक को पढ़ने लगे। - डॉ. महादेव साहा ने बाजार से नए पुस्तक को खरीदा ।
शुद्ध वाक्य : डॉ. महादेव साहा ने बाजार से नई पुस्तक खरीदी। - लेखक गोवा को गए उनकी साथ साढू साहब भी थे ।
शुद्ध वाक्य : लेखक गोवा गए, उनके साथ साढू साहब भी थे। - टिळक जी ने एक सज्जन के साथ की हुई व्यवहार बराबर थी ।
शुद्ध वाक्य : तिलक जी द्वारा एक सज्जन के साथ किया गया व्यवहार उचित था। - रंगीन फूल की माला बहोत सुंदर लग रही थी ।
शुद्ध वाक्य : रंगीन फूलों की माला बहुत सुंदर लग रही थी। - बूढ़े लोग लड़के और कुछ स्त्रियाँ कुएँ पर पानी भर रहे थे।
शुद्ध वाक्य : बूढ़े लोग, लड़के और कुछ स्त्रियाँ कुएँ पर पानी भर रही थीं। - लड़का, पिता जी और माँ बाजार को गई ।
शुद्ध वाक्य : लड़का, पिता जी और माँ बाजार गए। - बरसों बाद पंडित जी को मित्र का दर्शन हुआ ।
शुद्ध वाक्य : बरसों बाद पंडित जी को मित्र के दर्शन हुए। - गोवा के बीच पर घूमने में बड़ी मजा आई ।
शुद्ध वाक्य : गोवा के बीच पर घूमने में बड़ा मजा आया। - सामने शेर देखकर यात्री का प्राण मानो मुरझा गया ।
शुद्ध वाक्य : सामने शेर देखकर यात्री के प्राण मानो सूख गए। - करामत अली के आँखों में आँसू उतर आई ।
शुद्ध वाक्य : करामत अली की आँखों में आँसू उतर आए। - मैं मेरे देश को प्रेम करता हूँ।
शुद्ध वाक्य : मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ।
उपयोजित लेखन (कहानी)
शीर्षक : लड़कियों की सूझबूझ (या गाँव की होनहार बेटियाँ)
एक छोटे से गाँव में कुछ लड़कियाँ रहती थीं। वे सभी पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार थीं और जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती थीं। परंतु उनके गाँव में पानी का भारी अभाव था। गाँव का कुआँ सूख गया था, जिसके कारण सभी को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर एक नदी पर जाना पड़ता था। घर के कामों में हाथ बँटाने के कारण उन लड़कियों को भी रोज सुबह-शाम मीलों दूर से पानी भरकर लाना पड़ता था।
पानी लाने के इस कठिन काम में उनका बहुत सारा समय और ऊर्जा नष्ट हो जाती थी। इसके कारण उन्हें पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता था। एक दिन सभी लड़कियों ने मिलकर इस गंभीर समस्या पर चर्चा की। उन्होंने तय किया कि रोज-रोज दूर से पानी लाने के बजाय गाँव में ही पानी की समस्या का स्थायी समाधान खोजना होगा। उन्होंने विज्ञान की पुस्तकों में पढ़ा था कि वर्षा के जल का संचयन (Rainwater Harvesting) करके भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने इस उपाय को गाँव के सरपंच और अन्य बुजुर्गों के सामने रखा। शुरुआत में गाँव वालों ने इसे बच्चों की बात मानकर टाल दिया, लेकिन लड़कियों के दृढ़ निश्चय और वैज्ञानिक तर्कों को देखकर वे मान गए। गाँव वालों की सहायता से बरसात शुरू होने से पहले गाँव में बड़े-बड़े गड्ढे (तलाब) खोदे गए और छतों के पानी को कुएँ में उतारने की व्यवस्था की गई।
जब बारिश हुई, तो वह सारा पानी उन गड्ढों और कुओं में जमा हो गया। कुछ ही महीनों में गाँव के कुएँ का जलस्तर वापस आ गया और पानी की समस्या हमेशा के लिए हल हो गई। अब लड़कियों को दूर से पानी लाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्हें पढ़ाई के लिए भरपूर समय मिलने लगा। सभी गाँव वालों ने उन लड़कियों की सूझबूझ और मेहनत की खूब प्रशंसा की।
सीख : एकता, सूझबूझ और दृढ़ निश्चय से किसी भी बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।