६. हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
कवि — उमाकांत मालवीय | संपूर्ण स्वाध्याय, वर्गीकरण, सही/गलत और कविता का संदेश — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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कवि परिचय : उमाकांत मालवीय जी द्वारा रचित यह कव्वाली भारत माता के शूरवीर ऐतिहासिक और पौराणिक स्त्री-पुरुष पात्रों का वर्णन करती है। इसमें लड़के और लड़कियों के बीच की नोक-झोंक को दर्शाते हुए यह संदेश दिया गया है कि स्त्री और पुरुष दोनों ही भारत माता के रथ के दो पहिये हैं।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
पद्यांश में उल्लिखित चरित्र — ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, सीता, चाँदबीबी, सावित्री, जयमल
| ऐतिहासिक चरित्र | पौराणिक चरित्र |
|---|---|
| लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, चाँदबीबी, जयमल | ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, सीता, सावित्री |
- भारत माता के रथ के दो पहिये — लड़के और लड़कियाँ (स्त्री और पुरुष)
- खूब लड़ने वाली मर्दानी — रजिया सुलताना, दुर्गावती (और लक्ष्मीबाई)
- अपनी लगन का सच्चा — प्रह्लाद
- किसी को कुछ न गिनने वाले — जयमल-पत्ता
१. रानी कर्मवती ने अकबर को राखी भेजी थी।
उत्तर : गलत
सही वाक्य : रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी भेजी थी।
२. भरत शेर के दाँत गिनते थे ।
उत्तर : सही
३. झगड़ने से सब कुछ प्राप्त होता है।
उत्तर : गलत
सही वाक्य : झगड़ने से कुछ हासिल नहीं होगा।
४. ध्रुव आकाश में खेले थे ।
उत्तर : गलत
सही वाक्य : ध्रुव इस धरती की मिट्टी में खेले थे।
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इस कव्वाली के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि स्त्री और पुरुष दोनों ही भारत माता के रथ के दो पहियों के समान हैं। दोनों का अपना-अपना गौरवशाली इतिहास रहा है और राष्ट्र के विकास में दोनों का समान योगदान है।
हमारे देश में जहाँ ध्रुव, प्रह्लाद और भरत जैसे शूरवीर और सच्चे पुरुष हुए हैं, वहीं लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना और दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने भी जन्म लिया है। इसलिए लड़कों और लड़कियों को आपस में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए व्यर्थ में लड़ना-झगड़ना नहीं चाहिए। दोनों को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए मिलकर देश की प्रगति के लिए काम करना चाहिए। यही लैंगिक समानता (Gender Equality) का सच्चा अर्थ है।