१०. बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
कथाकार — प्रेमचंद | संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
| १. क्रोधी | रूपा / बुद्धिराम |
| २. लालची | बुद्धिराम (संपत्ति के लिए) / बूढ़ी काकी (भोजन के लिए) |
| ३. शरारती | बुद्धिराम के लड़के |
| ४. स्नेहिल | लाड़ली |
- बुद्धिराम ने काकी की सारी संपत्ति अपने नाम लिखवा ली थी, फिर भी उन्हें पेट भर भोजन कठिनाई से मिलता था।
- घर के लड़कों द्वारा काकी को सताए जाने पर भी वह कोई ध्यान नहीं देता था।
- मेहमानों के बीच काकी के पहुँच जाने पर बुद्धिराम ने उन्हें निर्दयता से घसीटा और अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया।
- उत्सव के दिन घरवालों और मेहमानों के भोजन कर लेने के बाद भी काकी को भोजन के लिए किसी ने नहीं पूछा।
१. बूढ़ी काकी ने भतीजे के नाम सारी संपत्ति लिख दी
कारण : बूढ़ी काकी के पतिदेव को स्वर्ग सिधारे कालांतर हो चुका था और बेटे तरुण हो-होकर चल बसे थे, अब एक भतीजे बुद्धिराम के सिवाय उनका और कोई न था।
२. लाड़ली ने पूड़ियाँ छिपाकर रखीं
कारण : लाड़ली को बूढ़ी काकी से अत्यंत प्रेम था। वह अपने हिस्से की पूड़ियाँ काकी को खिलाना चाहती थी, इसलिए उसने उन्हें अपनी गुड़ियों की पिटारी में बंद कर रखी थीं।
३. बुद्धिराम ने काकी को अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया
कारण : मेहमानों के भोजन करते समय बूढ़ी काकी रेंगती हुई उनके बीच में जा पहुँची थीं, जिसे देखते ही पंडित बुद्धिराम क्रोध से तिलमिला गए और झपटकर उन्हें अँधेरी कोठरी में पटक दिया।
४. अंग्रेजी पढ़े नवयुवक उदासीन थे
कारण : अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक उस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे, इसलिए वे इन व्यवहारों से उदासीन थे।
| विलोम | बूढ़ा |
| बहुवचन | बच्चे |
| लिंग | बच्ची |
| पर्यायवाची | बालक / शिशु |
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अभिव्यक्ति
बुजुर्ग हमारे परिवार और समाज की नींव होते हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन, अपनी ऊर्जा और अपना अनुभव परिवार के निर्माण और समाज के विकास में लगाया होता है। बुढ़ापे में उनकी शारीरिक क्षमताएँ भले ही क्षीण हो जाती हैं, परंतु उनका अनुभव और ज्ञान युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक होता है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग बुजुर्गों की शारीरिक दुर्बलता देखकर उन पर दया करने लगते हैं या उन्हें बोझ समझने लगते हैं। यह सर्वथा अनुचित है। बुजुर्गों को हमारी दया की नहीं, बल्कि हमारे आदर, सम्मान, समय और प्रेम की आवश्यकता होती है। जब हम उनका सम्मान करते हैं, तो हम उनके जीवन भर के त्याग और तपस्या का सम्मान करते हैं। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जो बुढ़ापा आज उनका है, वह कल हमारा भी होगा। अतः बुजुर्गों को दया का पात्र न मानकर उन्हें परिवार का सबसे सम्मानित सदस्य मानना चाहिए, क्योंकि उनका आशीर्वाद ही हमारी वास्तविक पूँजी है।
भाषा बिंदु
| अ.क्र. | मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक रूप | द्वितीय प्रेरणार्थक रूप |
|---|---|---|---|
| १. | भूलना | भुलाना | भुलवाना |
| २. | पीसना | पिसाना | पिसवाना |
| ३. | माँगना | मँगाना | मँगवाना |
| ४. | तोड़ना | तुड़ाना | तुड़वाना |
| ५. | बेचना | बिकाना | बिकवाना |
| ६. | कहना | कहलाना | कहलवाना |
| ७. | नहाना | नहलाना | नहलवाना |
| ८. | खेलना | खिलाना | खिलवाना |
| ९. | खाना | खिलाना | खिलवाना |
| १०. | फैलना | फैलाना | फैलवाना |
| ११. | बैठना | बिठाना | बिठवाना |
| १२. | लिखना | लिखाना | लिखवाना |
| १३. | जुटना | जुटाना | जुटवाना |
| १४. | दौड़ना | दौड़ाना | दौड़वाना |
| १५. | देखना | दिखाना | दिखवाना |
| १६. | जीना | जिलाना | जिलवाना |
| अ.क्र. | मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक रूप | द्वितीय प्रेरणार्थक रूप |
|---|---|---|---|
| १. | रोना | रुलाना | रुलवाना |
| २. | उठना | उठाना | उठवाना |
| ३. | देना | दिलाना | दिलवाना |
| ४. | समझना | समझाना | समझवाना |
| ५. | गिरना | गिराना | गिरवाना |
| ६. | सुनना | सुनाना | सुनवाना |
| ७. | रुकना | रुकाना | रुकवाना |
| ८. | डरना | डराना | डरवाना |
| ९. | चमकना | चमकाना | चमकवाना |
| १०. | जलना | जलाना | जलवाना |
उपयोजित लेखन
मेरा प्रिय वैज्ञानिक : डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
भारत की पावन धरती ने अनेक महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने ज्ञान और शोध से देश का नाम रोशन किया है। इनमें से मेरे सबसे प्रिय वैज्ञानिक डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम हैं, जिन्हें भारत के 'मिसाइल मैन' के रूप में भी जाना जाता है। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म १५ अक्टूबर १९३१ को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था।
डॉ. कलाम बचपन से ही अत्यंत परिश्रमी और मेधावी छात्र थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, परंतु अपनी लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में ही भारत ने स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) का सफलतापूर्वक निर्माण किया। पृथ्वी और अग्नि जैसी शक्तिशाली मिसाइलों के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है, जिसने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।
सन् १९९८ के पोखरण परमाणु परीक्षण में भी उनकी अहम भूमिका रही। डॉ. कलाम एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ एक अत्यंत सरल, विनम्र और प्रेरणादायक इंसान भी थे। वे बच्चों और युवाओं से बहुत प्यार करते थे और हमेशा उन्हें बड़े सपने देखने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते थे।
वर्ष २००२ में वे भारत के ११वें राष्ट्रपति बने और उन्हें 'जनता का राष्ट्रपति' (People's President) कहा गया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 'भारत रत्न', 'पद्म भूषण' और 'पद्म विभूषण' जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। डॉ. कलाम सादा जीवन और उच्च विचार के जीवंत उदाहरण थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इन्हीं गुणों के कारण डॉ. कलाम मेरे सबसे प्रिय वैज्ञानिक और आदर्श हैं।
अन्य गतिविधियाँ
श्रवणीय : बड़ों से ऐसी कहानी सुनिए जिसके आखिरी हिस्से में कठिन परिस्थितियों से जीतने का संदेश मिल रहा हो। (छात्र अपने दादा-दादी या माता-पिता से प्रेरक कहानियाँ सुनें।)
संभाषणीय : 'वृद्धाश्रम' के बारे में जानकारी इकट्ठा करके चर्चा कीजिए। (छात्र वृद्धाश्रम की आवश्यकता, वहाँ के जीवन और समाज में बुजुर्गों की स्थिति पर कक्षा में चर्चा करें।)
लेखनीय : 'भारतीय कुटुंब व्यवस्था' पर भाषण के मुद्दे लिखिए। (जैसे - संयुक्त परिवार का महत्त्व, आपसी सहयोग, संस्कारों का आदान-प्रदान, बुजुर्गों का सम्मान आदि।)
पठनीय : 'चलती-फिरती पाठशाला' उपक्रम के बारे में जानकारी इकट्ठा करके पढ़िए और सुनाइए। (छात्र इंटरनेट या पुस्तकालय से इस उपक्रम के बारे में पढ़ें और कक्षा में साझा करें।)