कक्षा १० हिंदी · दूसरी इकाई

१०. बूढ़ी काकी (पूरक पठन)

कथाकार — प्रेमचंद | संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।

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स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)

१सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :- (१) स्वभाव के आधार पर पात्र का नाम
१. क्रोधीरूपा / बुद्धिराम
२. लालचीबुद्धिराम (संपत्ति के लिए) / बूढ़ी काकी (भोजन के लिए)
३. शरारतीबुद्धिराम के लड़के
४. स्नेहिललाड़ली
२कृति पूर्ण कीजिए : बूढ़ी काकी को ललचाने वाले व्यंजन
पूड़ियाँ कचौड़ियाँ मसालेदार तरकारी दही और शक्कर
३बुद्धिराम का काकी के प्रति दुर्व्यवहार दर्शाने वाली चार बातें :
  1. बुद्धिराम ने काकी की सारी संपत्ति अपने नाम लिखवा ली थी, फिर भी उन्हें पेट भर भोजन कठिनाई से मिलता था।
  2. घर के लड़कों द्वारा काकी को सताए जाने पर भी वह कोई ध्यान नहीं देता था।
  3. मेहमानों के बीच काकी के पहुँच जाने पर बुद्धिराम ने उन्हें निर्दयता से घसीटा और अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया।
  4. उत्सव के दिन घरवालों और मेहमानों के भोजन कर लेने के बाद भी काकी को भोजन के लिए किसी ने नहीं पूछा।
४कारण लिखिए :

१. बूढ़ी काकी ने भतीजे के नाम सारी संपत्ति लिख दी
कारण : बूढ़ी काकी के पतिदेव को स्वर्ग सिधारे कालांतर हो चुका था और बेटे तरुण हो-होकर चल बसे थे, अब एक भतीजे बुद्धिराम के सिवाय उनका और कोई न था।

२. लाड़ली ने पूड़ियाँ छिपाकर रखीं
कारण : लाड़ली को बूढ़ी काकी से अत्यंत प्रेम था। वह अपने हिस्से की पूड़ियाँ काकी को खिलाना चाहती थी, इसलिए उसने उन्हें अपनी गुड़ियों की पिटारी में बंद कर रखी थीं।

३. बुद्धिराम ने काकी को अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया
कारण : मेहमानों के भोजन करते समय बूढ़ी काकी रेंगती हुई उनके बीच में जा पहुँची थीं, जिसे देखते ही पंडित बुद्धिराम क्रोध से तिलमिला गए और झपटकर उन्हें अँधेरी कोठरी में पटक दिया।

४. अंग्रेजी पढ़े नवयुवक उदासीन थे
कारण : अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक उस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे, इसलिए वे इन व्यवहारों से उदासीन थे।

५सूचना के अनुसार शब्द में परिवर्तन कीजिए : बच्चा
विलोमबूढ़ा
बहुवचनबच्चे
लिंगबच्ची
पर्यायवाचीबालक / शिशु

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अभिव्यक्ति

★'बुजुर्ग आदर-सम्मान के पात्र होते हैं, दया के नहीं' इस सुवचन पर अपने विचार लिखिए ।

बुजुर्ग हमारे परिवार और समाज की नींव होते हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन, अपनी ऊर्जा और अपना अनुभव परिवार के निर्माण और समाज के विकास में लगाया होता है। बुढ़ापे में उनकी शारीरिक क्षमताएँ भले ही क्षीण हो जाती हैं, परंतु उनका अनुभव और ज्ञान युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक होता है।

अक्सर देखा जाता है कि लोग बुजुर्गों की शारीरिक दुर्बलता देखकर उन पर दया करने लगते हैं या उन्हें बोझ समझने लगते हैं। यह सर्वथा अनुचित है। बुजुर्गों को हमारी दया की नहीं, बल्कि हमारे आदर, सम्मान, समय और प्रेम की आवश्यकता होती है। जब हम उनका सम्मान करते हैं, तो हम उनके जीवन भर के त्याग और तपस्या का सम्मान करते हैं। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जो बुढ़ापा आज उनका है, वह कल हमारा भी होगा। अतः बुजुर्गों को दया का पात्र न मानकर उन्हें परिवार का सबसे सम्मानित सदस्य मानना चाहिए, क्योंकि उनका आशीर्वाद ही हमारी वास्तविक पूँजी है।

भाषा बिंदु

१निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए :
अ.क्र. मूल क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक रूप द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
१.भूलनाभुलानाभुलवाना
२.पीसनापिसानापिसवाना
३.माँगनामँगानामँगवाना
४.तोड़नातुड़ानातुड़वाना
५.बेचनाबिकानाबिकवाना
६.कहनाकहलानाकहलवाना
७.नहानानहलानानहलवाना
८.खेलनाखिलानाखिलवाना
९.खानाखिलानाखिलवाना
१०.फैलनाफैलानाफैलवाना
११.बैठनाबिठानाबिठवाना
१२.लिखनालिखानालिखवाना
१३.जुटनाजुटानाजुटवाना
१४.दौड़नादौड़ानादौड़वाना
१५.देखनादिखानादिखवाना
१६.जीनाजिलानाजिलवाना
२पठित पाठों से किन्हीं दस मूल क्रियाओं का चयन करके उनके प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप निम्न तालिका में लिखिए :
अ.क्र. मूल क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक रूप द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
१.रोनारुलानारुलवाना
२.उठनाउठानाउठवाना
३.देनादिलानादिलवाना
४.समझनासमझानासमझवाना
५.गिरनागिरानागिरवाना
६.सुननासुनानासुनवाना
७.रुकनारुकानारुकवाना
८.डरनाडरानाडरवाना
९.चमकनाचमकानाचमकवाना
१०.जलनाजलानाजलवाना

उपयोजित लेखन

★'मेरा प्रिय वैज्ञानिक' विषय पर निबंध लेखन कीजिए ।

मेरा प्रिय वैज्ञानिक : डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

भारत की पावन धरती ने अनेक महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने ज्ञान और शोध से देश का नाम रोशन किया है। इनमें से मेरे सबसे प्रिय वैज्ञानिक डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम हैं, जिन्हें भारत के 'मिसाइल मैन' के रूप में भी जाना जाता है। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म १५ अक्टूबर १९३१ को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था।

डॉ. कलाम बचपन से ही अत्यंत परिश्रमी और मेधावी छात्र थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, परंतु अपनी लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में ही भारत ने स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) का सफलतापूर्वक निर्माण किया। पृथ्वी और अग्नि जैसी शक्तिशाली मिसाइलों के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है, जिसने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।

सन् १९९८ के पोखरण परमाणु परीक्षण में भी उनकी अहम भूमिका रही। डॉ. कलाम एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ एक अत्यंत सरल, विनम्र और प्रेरणादायक इंसान भी थे। वे बच्चों और युवाओं से बहुत प्यार करते थे और हमेशा उन्हें बड़े सपने देखने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते थे।

वर्ष २००२ में वे भारत के ११वें राष्ट्रपति बने और उन्हें 'जनता का राष्ट्रपति' (People's President) कहा गया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 'भारत रत्न', 'पद्म भूषण' और 'पद्म विभूषण' जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। डॉ. कलाम सादा जीवन और उच्च विचार के जीवंत उदाहरण थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इन्हीं गुणों के कारण डॉ. कलाम मेरे सबसे प्रिय वैज्ञानिक और आदर्श हैं।

अन्य गतिविधियाँ

★श्रवणीय / संभाषणीय / लेखनीय / पठनीय