९. जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
अमृतलाल नागर जी से विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी की बातचीत — संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु तथा उपयोजित लेखन। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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स्वाध्याय
कृति पूर्ण कीजिए : अमृतलाल नागर जी के साहित्य सृजन में सहायक
| सहायक का प्रकार | नाम |
|---|---|
| लेखक | १. प्रेमचंद २. शरतचंद्र |
| पत्रिकाएँ | १. सरस्वती २. गृहलक्ष्मी |
- नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित करने वाला अनुभव : साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय हुए लाठीचार्ज का अनुभव।
- नागर जी अपने पिता जी के इस गुण से प्रभावित थे : किसी के दुख-दर्द में तुरंत पहुँचने का अद्भुत गुण।
[कब लौं कहौं लाठी खाय, खंजन नयन, अपशकुन, नाच्यो बहुत गोपाल, महाकाल, प्रायश्चित, गदर के फूल]
| विधा | कृतियों के नाम |
|---|---|
| कहानी | अपशकुन, प्रायश्चित |
| उपन्यास | महाकाल, खंजन नयन, नाच्यो बहुत गोपाल |
| कविता | कब लौं कहौं लाठी खाय |
| अन्य | गदर के फूल |
टिप्पणी : पाठ में माधव शुक्ल और लक्ष्मीधर वाजपेयी के नाम भी आए हैं, आप उन्हें भी लिख सकते हैं।
- नागर जी के प्रिय विदेशी लेखक : टॉल्स्टॉय और चेखव
- नागर जी के प्रिय आलोचक : रामविलास शर्मा
- नागर जी के प्रिय लेखक - रामविलास शर्मा
- नागर जी के प्रिय आलोचक - रामविलास शर्मा
- अपनी इस रचना के लिए नागर जी को बहुत लोगों से मिलना पड़ा - गदर के फूल
- नागर जी का पहला उपन्यास - महाकाल
(अ) तद्धित शब्दों का मूल शब्द :
- १. साहित्यिक = साहित्य (साहित्य + इक)
- २. विलायती = विलायत (विलायत + ई)
(ब) कृदंत शब्दों का मूल शब्द :
- १. खिंचाव = खींचना (खींच)
- २. लिखावट = लिखना (लिख)
| 'अ' रचना | 'ब' रचनाकार (सही जोड़ी) |
|---|---|
| १. देसी और विलायती | प्रभात कुमार मुखोपाध्याय |
| २. अपशकुन | अमृतलाल नागर |
| ३. आनंद मठ | बंकिमचंद्र चटर्जी |
| ४. रामचरितमानस | तुलसीदास |
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अभिव्यक्ति
मनुष्य के जीवन में वाचन (पढ़ना) एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और लाभकारी आदत है। अच्छी पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। वाचन केवल समय बिताने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे ज्ञान और आनंद प्राप्ति का सबसे सशक्त माध्यम है।
जब हम अलग-अलग विषयों की पुस्तकें, पत्रिकाएँ या लेख पढ़ते हैं, तो हमें नए-नए विचार और जानकारियाँ मिलती हैं। इससे हमारी सोच का दायरा बढ़ता है और दृष्टिकोण व्यापक होता है। साहित्य, इतिहास, विज्ञान या महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ने से हमें उनके जीवन-संघर्षों और अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, जो हमारे जीवन को सही दिशा दिखाता है।
दूसरी ओर, वाचन से अद्भुत आनंद भी प्राप्त होता है। जब हम कोई रोचक कहानी, कविता या उपन्यास पढ़ते हैं, तो हम एक नई दुनिया में खो जाते हैं। यह हमें मानसिक शांति देता है और तनाव से मुक्त करता है। वाचन से कल्पना शक्ति का विकास होता है और भाषा-शैली में निखार आता है। अतः यह कहना पूर्णतः सत्य है कि वाचन न केवल हमारे ज्ञान के भंडार को भरता है, बल्कि हमारी आत्मा को भी आनंदित करता है।
भाषा बिंदु
| अ.क्र. | वाक्य | मुख्य क्रिया | सहायक क्रिया |
|---|---|---|---|
| १. | उनके रीति-रिवाजों का अध्ययन करना पड़ा । | करना | पड़ा |
| २. | माता-पिता का यह रंग देखकर तो वे बूढ़ी काकी को और सताने लगे । | सताने | लगे |
| ३. | उसकी ननद रूठ गई । | रूठ | गई |
| ४. | वे हड़बड़ा उठे । | हड़बड़ा | उठे |
| ५. | वे पुस्तक पकड़े न रख सके । | रख | सके |
| ६. | उन्होंने पुस्तक लौटा दी । | लौटा | दी |
| ७. | समुद्र स्याह और भयावह दीखने लगा । | दीखने | लगा |
| ८. | मैं गोवा को पूरी तरह नहीं समझ पाया । | समझ | पाया |
| ९. | काकी घटनास्थल पर आ पहुँची । | आ | पहुँची |
| १०. | अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए । | चले | गए |
यह छात्र-स्वयं अध्ययन गतिविधि है। छात्र अपनी पाठ्यपुस्तक के किन्हीं भी पाठों से सहायक क्रिया वाले १० वाक्य छाँटकर इसी प्रकार तालिका बना सकते हैं।
| अ.क्र. | वाक्य | कारक चिह्न | कारक का नाम |
|---|---|---|---|
| १. | चाची अपने कमरे से निकल रही थी | से | अपादान कारक |
| २. | मैं बंडल को खोलकर देखने लगा | को | कर्म कारक |
| ३. | आवाज ने मेरा ध्यान बँटाया | ने | कर्ता कारक |
| ४. | हमारे शहर में एक कवि हैं | में | अधिकरण कारक |
| ५. | कितने दिनों की छुट्टियाँ हैं ? | की | संबंध कारक |
| ६. | मानू रेल से ससुराल चली गई | से | करण कारक |
| ७. | उन्हें पुस्तक ले आने को कहा । | को | कर्म कारक |
| ८. | पर्यटन से बहुत ही आनंद मिला | से | करण कारक |
| ९. | शरीर को कुछ समय के लिए विश्राम मिल जाता है | के लिए | संप्रदान कारक |
| १०. | बस से गोवा घूमने की योजना बनाई | से | करण कारक |
| ११. | बुद्धिराम स्वभाव से सज्जन थे | से | करण कारक |
| १२. | रूपा घटना स्थल पर आ पहुँची | पर | अधिकरण कारक |
| १३. | अरे! यह बुढ़िया कौन है ? | अरे! | संबोधन कारक |
यह छात्र-स्वयं अध्ययन गतिविधि है। छात्र प्रस्तुत पाठ से वाक्यों को खोजकर उनके कारक चिह्न और कारक का नाम लिख सकते हैं।
उपयोजित लेखन
पाँच प्रश्न निम्नलिखित हैं :
- विख्यात गणितज्ञ सी.वी. रमण ने किस अवस्था में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा लिया था?
- रमण का साथी छात्र किस विषय के संबंध में प्रयोग कर रहा था?
- छात्र का संदेह निवारण करने में कौन असफल रहा?
- ध्वनि संबंधी समस्या को हल करने के लिए रमण ने किसके निबंध पढ़े?
- अध्यापक जोन्स ने प्रसन्न होकर रमण से क्या करने को कहा?
ध्यान रखें : परिच्छेद पढ़कर केवल प्रश्न तैयार करने हैं, उनके उत्तर नहीं लिखने हैं। प्रश्न सूचक और स्पष्ट होने चाहिए।
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क्या है मेक इन इंडिया?
यह भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य देश को एक वैश्विक विनिर्माण हब (Manufacturing Hub) बनाना है।
प्रमुख क्षेत्र :
ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, पर्यटन, और नवीकरणीय ऊर्जा सहित २५ महत्त्वपूर्ण क्षेत्र।
राज्य/स्थान :
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उद्योग-धंधे :
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