३. वाह रे ! हमदर्द
लेखक — घनश्याम अग्रवाल | संपूर्ण स्वाध्याय, अभिव्यक्ति, भाषा बिंदु और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
संजाल पूर्ण कीजिए : मरीज से मिलने के लिए आने वाले लोगों की विशेषताएँ
१. प्राइवेट अस्पताल vs सार्वजनिक अस्पताल
| प्राइवेट अस्पताल | सार्वजनिक अस्पताल |
|---|---|
| सुविधाओं से युक्त और साफ-सुथरे होते हैं, परंतु यहाँ का इलाज महँगा होता है। | सुविधाओं का अभाव और बहुत भीड़भाड़ होती है, परंतु इलाज सस्ता या मुफ्त होता है। (लेखक के अनुसार यह एक 'खतरनाक शब्द' है।) |
२. प्राइवेट वार्ड vs जनरल वार्ड
| प्राइवेट वार्ड | जनरल वार्ड |
|---|---|
| यहाँ मिलने वालों के लिए समय का कोई बंधन नहीं होता; जब जी चाहे, जितनी देर चाहें, लोग रुक सकते हैं। | यहाँ मरीज से मिलने का एक निश्चित समय होता है, उसी समय पर आकर मरीज को तकलीफ दे सकते हैं। |
- १. एक बच्चा कुर्सी पर चढ़ा।
- २. दूसरा बच्चा मेज पर चढ़ा।
- ३. सोनाबाई की छोटी लड़की दवा की शीशी लेकर कथकली डांस करने लगी (और शीशी पटक दी)।
- ४. एक लड़का टाँग के साथ लटक रही रेती की थैली पर बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करने लगा।
१. लेखक को अधिक गुस्सा अपनी पत्नी पर आया
कारण : क्योंकि एक अजनबी आदमी (जो गलती से दूसरे मरीज के कमरे में आकर लेखक के सीने पर सिर रखकर रोने लगा था) उसे रोता देख लेखक की पत्नी ने उसे कोई रिश्तेदार या करीबी मित्र समझ लिया और उसकी टैक्सीवाले को पैसे दे दिए थे।
२. लेखक कहते हैं कि मेरी दूसरी टाँग उस जगह तोड़ना जहाँ कोई परिचित न हो
कारण : क्योंकि परिचित लोग हमदर्दी जताने के नाम पर अस्पताल में इतनी भीड़ लगा देते हैं और इतना परेशान करते हैं कि मरीज का आराम हराम हो जाता है। ये हमदर्दी जताने वाले बड़े बेदर्द होते हैं।
- वह स्थान जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी रखे जाते हैं — चिड़ियाघर
- जहाँ मुफ्त में भोजन मिलता है — लंगर (या अन्नछत्र / सदावर्त)
| मूल शब्द | उपसर्ग युक्त शब्द | प्रत्यय युक्त शब्द |
|---|---|---|
| १. दर्द | बेदर्द / हमदर्द | दर्दनाक / दर्दभरी |
| २. निश्चित | अनिश्चित | निश्चितता |
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मरीज से मिलने जाते समय हमें कई बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले अस्पताल द्वारा निर्धारित समय (Visiting Hours) पर ही जाना चाहिए, ताकि मरीज के आराम में कोई खलल न पड़े। अस्पताल में शांति बनाए रखना बहुत जरूरी है, इसलिए जोर-जोर से बातें करने या हँसने से बचना चाहिए।
मरीज के पास जाते समय छोटे बच्चों को साथ नहीं ले जाना चाहिए, क्योंकि वे शोर मचा सकते हैं या उन्हें संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए और उसकी बीमारी की गंभीरता को लेकर डराने वाली बातें नहीं करनी चाहिए। मरीज को आराम की आवश्यकता होती है, इसलिए अधिक देर तक वहाँ नहीं रुकना चाहिए।
भाषा बिंदु (व्याकरण)
- सोनाबाई (व्यक्तिवाचक संज्ञा) अपने चार बच्चों (जातिवाचक संज्ञा) के साथ आई ।
- गाय (जातिवाचक संज्ञा) बहुत दूध (द्रव्यवाचक संज्ञा) देती है।
- मैं रोज ईश्वर (जातिवाचक/व्यक्तिवाचक संज्ञा) से प्रार्थना (भाववाचक संज्ञा) करता हूँ।
- सैनिकों (जातिवाचक संज्ञा) की टुकड़ी (समूहवाचक संज्ञा) आगे बढ़ी ।
- सोना-चाँदी (द्रव्यवाचक संज्ञा) और भी महँगे होते जा रहे हैं।
- गोवा (व्यक्तिवाचक संज्ञा) देख मैं तरंगायित हो उठा ।
- युवकों (जातिवाचक संज्ञा) का दल (समूहवाचक संज्ञा) बचाव कार्य (भाववाचक संज्ञा) में लगा था ।
- आपने विदेश (जातिवाचक संज्ञा) में भ्रमण तो कर लिया है।
- इस कहानी (जातिवाचक संज्ञा) में भारतीय समाज (समूहवाचक संज्ञा) का चित्रण (भाववाचक संज्ञा) मिलता है।
- सागर (जातिवाचक संज्ञा) का जल (द्रव्यवाचक संज्ञा) खारा होता है।
- अस्पताल (जातिवाचक संज्ञा) : मरीज को तुरंत पास के अस्पताल में भरती कराया गया।
- टाँग (जातिवाचक संज्ञा) : दुर्घटना में सुरेश की टाँग टूट गई।
- साइकिल (जातिवाचक संज्ञा) : रमेश रोज सुबह साइकिल चलाता है।
- गुस्सा (भाववाचक संज्ञा) : बच्चों की शरारत देखकर पिताजी को बहुत गुस्सा आया।
- पत्नी (जातिवाचक संज्ञा) : शर्मा जी अपनी पत्नी के साथ बाजार गए हैं।
- आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं।
- तुम बाजार जाओ ।
- वे कारखाने में एक ही विभाग में काम करते थे ।
- इसे लेकर तुम क्या करोगे ?
- हृदय जिसका बड़ा है; वह उदार हो ।
- लोग अपना कमरा स्वच्छ कर रहे हैं।
- वह रिसॉर्ट हमने पहले से बुक कर लिया है।
- इसके बाद हम लोग दिन भर पणजी देखते रहे ।
- मैं इसके पहले उसे मना करता ।
- जो काम करने के लिए कहा है वही करो।
- मैं : मैं आज विद्यालय नहीं जाऊँगा।
- वह : वह एक होशियार छात्र है।
- मुझे : मुझे आम खाना बहुत पसंद है।
- यह : यह मेरी नई किताब है।
- आप : आप कहाँ जा रहे हैं?
उपयोजित लेखन
विद्यालय में शानदार 'स्वतंत्रता दिवस' समारोह संपन्न
पुणे, १६ अगस्त : कल, १५ अगस्त २०२३ को सुबह ८:०० बजे, पुणे के 'आदर्श विद्या मंदिर' के प्रांगण में ७७वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े ही उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
समारोह की शुरुआत ठीक ८ बजे विद्यालय के प्रांगण में हुई। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी और सेवानिवृत्त सैनिक श्री रमेश पाटिल जी उपस्थित थे। उनके कर-कमलों द्वारा ध्वजारोहण किया गया, जिसके बाद सभी ने राष्ट्रगान गाया और तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिनमें समूह गान, नृत्य और एक लघु नाटिका शामिल थी।
अपने भाषण में प्रमुख अतिथि श्री रमेश पाटिल जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद दिलाते हुए छात्रों को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और ईमानदारी से आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने प्रमुख अतिथि का आभार व्यक्त किया। अंततः सुबह १०:३० बजे सभी विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को मिठाई बाँटकर इस भव्य समारोह का सफलतापूर्वक समापन किया गया।