१. नंदनवन
पाठ १ 'नंदनवन' और 'हरियाली में खुशहाली' पर आधारित चित्र वर्णन, प्राणियों के संदेश और पर्यावरण का महत्त्व। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : यह एक चित्र-वाचन पाठ है। इसमें दो चित्र दिए गए हैं — पहला ‘नंदनवन’ और दूसरा ‘हरियाली में खुशहाली’। इन चित्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राणियों के नाम, उनके हाव-भाव और पर्यावरण संतुलन का महत्त्व समझाया गया है।
नंदनवन (पृष्ठ १)
नंदनवन के चित्र में प्राणी हमें निम्नलिखित संदेश दे रहे हैं —
| प्राणी का नाम | संदेश / वाक्य |
|---|---|
| चिड़िया | नमस्ते ! |
| तितली | स्वागत है। |
| खरगोश | नाचो-गाओ । |
| लोमड़ी | हम सब साथ हैं। |
| हाथी | कतार में चलो । |
सुविचार : चित्र में सबसे ऊपर एक महत्त्वपूर्ण सुविचार लिखा है — 'पौधे लगाओ, पेड़ बचाओ ।'
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हरियाली में खुशहाली (पृष्ठ २)
इस चित्र में जल और जंगल के प्राणी अपना संदेश इस प्रकार दे रहे हैं —
| प्राणी का नाम | संदेश / वाक्य |
|---|---|
| चिड़िया | प्रणाम ! |
| मछली | जल ही जीवन है। |
| बगुला | नमस्कार ! |
| मेंढक | आओ खेलें। |
इस चित्र में बाघ, भालू, हिरन और मगरमच्छ जैसे अन्य प्राणी भी दिखाई दे रहे हैं, जो जंगल के शांत वातावरण में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं।
नंदनवन और हरियाली में खुशहाली के चित्रों से हमें यह सीख मिलती है कि पर्यावरण में पेड़-पौधे और प्राणी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। 'पौधे लगाओ, पेड़ बचाओ' संदेश से स्पष्ट है कि पेड़ों के बिना प्राणियों का जीवन असंभव है।
'जल ही जीवन है' यह वाक्य बताता है कि पानी के बिना मछली, मगरमच्छ या अन्य किसी भी जीव का अस्तित्व नहीं रह सकता। सभी प्राणी जंगल में एक साथ मिलकर शांति से रहते हैं ('हम सब साथ हैं'), जो हमें भी मिलजुलकर रहने और अनुशासन ('कतार में चलो') की प्रेरणा देता है। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए जंगल, नदियाँ और प्राणी सभी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
कक्षा में करने योग्य कृति
१. चित्र के प्राणियों की कृतियों पर कक्षा में चर्चा करें।
२. विद्यार्थियों से अन्य परिचित प्राणियों के नाम पूछें और उनकी बोलियाँ बुलवाएँ।
३. प्रणाम, स्वागत आदि की सामूहिक और एकल रूप में कृतियाँ करवाएँ।