कक्षा ५ हिंदी · पहली इकाई

१०. गड़ा धन

पाठ १० 'गड़ा धन' कहानी का सारांश, सीख और अभ्यास (स्वाध्याय) के संपूर्ण प्रश्न-उत्तर। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।

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पाठ का परिचय : ‘गड़ा धन’ एक बोधप्रद कहानी है। इसमें रामदीन नामक एक परिश्रमी किसान और उसके चार आलसी बेटों का वर्णन है। रामदीन अपने बेटों को परिश्रम (मेहनत) का महत्त्व समझाने के लिए खेत में ‘गड़े धन’ का बहाना बनाता है। अंततः बेटे खेत खोदकर फसल उगाते हैं और उन्हें समझ आ जाता है कि परिश्रम ही सच्चा धन है।

सुनो, समझो और उत्तर लिखो :

करामदीन परेशान क्यों था ?

रामदीन के चारों बेटे बड़े आलसी थे। वे हर समय इधर-उधर बैठकर गप्पें मारा करते थे। रामदीन को हमेशा उनके भविष्य की चिंता सताया करती थी कि वे अपना पेट कैसे पालेंगे, इसी कारण वह परेशान था।

खतीर्थयात्रा पर निकलने के समय रामदीन ने बेटों से क्या कहा ?

तीर्थयात्रा पर निकलने के समय रामदीन ने बेटों से कहा, "मैं और तुम्हारी माँ अब बूढ़े हो गए हैं। हम दूर तीर्थयात्रा पर जा रहे हैं। मैंने खेत में धन गाड़कर छिपा रखा है। यदि कोई जरूरत पड़े तो उसे निकालकर उपयोग कर लेना।"

गचारों भाइयों को पिता जी की कौन-सी बात याद आई ?

पास का धन और घर का धान्य समाप्त होने के बाद जब चारों भाइयों को चिंता हुई, तब उन्हें पिता जी की यह बात याद आई कि "जरूरत पड़ने पर खेत में गड़ा धन निकाल लेना।"

घचारों भाइयों के मन में उत्साह कब जागा ?

जब हरिनाथ की सलाह मानकर चारों भाइयों ने खोदे हुए खेत में बीज बो दिए और कुछ समय बाद खेत में नन्हे-नन्हे अंकुर निकल आए, तब उन अंकुरों को देखकर चारों भाइयों के मन में उत्साह जाग गया।

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कहानी की सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में परिश्रम के बिना कुछ भी संभव नहीं है। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। खेत में वास्तव में कोई सोने-चाँदी का गड़ा धन नहीं था, बल्कि परिश्रम से उगाई गई फसल ही सच्चा धन थी। अतः परिश्रम (मेहनत) से ही धन कमाया जा सकता है और जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है।

कक्षा में करने योग्य कृति / व्याकरण