९. नीम
कवयित्री लता पंत द्वारा रचित कविता 'नीम' का भावार्थ, रिक्त स्थान की पूर्ति और संपूर्ण प्रश्न-उत्तर। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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कविता का परिचय : यह कविता लता पंत जी द्वारा रचित है। इसमें नीम के पेड़ ने स्वयं अपनी उपयोगिता और गुणों का वर्णन किया है। नीम एक बहुत ही लाभदायक पेड़ है, जो न केवल हमें ठंडी छाया देता है, बल्कि इसकी पत्तियों से कीड़े-मकोड़े भी दूर भागते हैं और यह हवा को शुद्ध करता है।
अभ्यास (स्वाध्याय)
कविता के आधार पर रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है —
- — ने → मैंने
- कप — → कपड़े
- ह — म → हकीम
- अ — ज → अनाज
- — कान → थकान
- — रज → सूरज
- क — नी → कहानी
- — र — → किरणों
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कविता पर आधारित अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर
नीम का पेड़ स्वयं को डॉक्टर, ओझा और वैद्य-हकीम नहीं मानता है। वह कहता है कि वह तो केवल एक पेड़ है।
घनी पत्तियों के कारण नीम की छाया अत्यंत शीतल (ठंडी) होती है। जो भी व्यक्ति उस छाया के नीचे आता है, उसकी गरमी और थकान मिट जाती है।
नीम की सूखी पत्तियों के निम्नलिखित उपयोग हैं —
- इन्हें ऊनी कपड़ों और अनाज में डालने से उनमें कीड़े नहीं लगते और वे सुरक्षित रहते हैं।
- सूखी पत्तियों को जलाने से जो धुआँ निकलता है, उससे मक्खी और मच्छर दूर भाग जाते हैं।
नीम का पेड़ सूरज की किरणों से मिलकर हवा को शुद्ध कर देता है और पर्यावरण को स्वच्छ बनाता है।
नीम ने अपने मन में यह ठानी है कि जब तक इस संसार में सूरज, तारे, धरती और चाँद की कहानी चलेगी (अर्थात जब तक दुनिया रहेगी), वह हमेशा सबको सुख देता रहेगा।
कविता का भावार्थ (सरल अर्थ)
इस कविता में नीम का पेड़ अपना परिचय देते हुए कहता है कि मैं कोई डॉक्टर, ओझा या वैद्य-हकीम नहीं हूँ। मैं तो बस एक साधारण-सा पेड़ हूँ, जिसका नाम नीम है। मेरी पत्तियाँ बहुत घनी हैं, जिसके कारण मेरी छाया बहुत ठंडी होती है। जो भी व्यक्ति थककर मेरी छाया में बैठता है, उसकी गरमी और थकान दूर हो जाती है।
मेरी सूखी पत्तियों को यदि ऊनी कपड़ों और अनाज में रखा जाए, तो वे कीड़ों से बच जाते हैं। मेरी सूखी पत्तियों का धुआँ करने से मक्खी-मच्छर दूर भाग जाते हैं। इसलिए तुम लोग मुझे मत काटना, क्योंकि मैं तुम्हें बहुत सुख देता हूँ। मैं सूरज की किरणों की मदद से हवा को भी शुद्ध करता हूँ। जब तक आसमान में सूरज, चाँद और तारे रहेंगे, तब तक मैंने सबको हमेशा सुख देने का निश्चय किया है।