३. भाई-भाई का प्रेम
कहानी का सारांश, प्रश्न-उत्तर और व्याकरण (उपसर्ग एवं प्रत्यय) पर आधारित संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : यह पाठ 'भाई-भाई का प्रेम' दो किसान भाइयों की कहानी है, जो एक-दूसरे की भलाई के लिए चुपचाप अपने हिस्से का अनाज दूसरे को दे आते हैं। यह कहानी हमें त्याग, प्रेम, सहानुभूति और दूसरों की सहायता करने की शिक्षा देती है ।
कहानी का सारांश
मनोहरपुर नामक सुंदर गाँव में दो किसान भाई रहते थे। दोनों के घर अलग थे, लेकिन उनमें बहुत प्रेम था। एक रात, फसल की कटाई के बाद बड़े भाई ने सोचा कि उसके तो बाल-बच्चे हैं जो खेती में मदद करते हैं, लेकिन छोटे भाई को अकेले सारा काम करना पड़ता है, इसलिए उसे अनाज की अधिक आवश्यकता है। यह सोचकर उसने अपने ढेर से दस गठरी अनाज निकालकर छोटे भाई के ढेर में रख दी ।
उसी समय छोटे भाई ने भी सोचा कि वह तो जवान है और कहीं भी काम कर सकता है, लेकिन बड़े भैया का परिवार बड़ा है और उनके खर्च अधिक हैं। इसलिए उसने भी अपने ढेर से दस गठरी अनाज बड़े भाई के ढेर की ओर ले जाने का फैसला किया ।
अँधेरी रात में दोनों भाई अनाज की गठरियाँ सिर पर रखे एक-दूसरे से टकरा गए। जब उन्हें सच्चाई पता चली, तो दोनों एक-दूसरे का निस्वार्थ प्रेम देखकर भावुक हो गए और गले लगकर रोने लगे ।
प्रश्न-उत्तर (स्वाध्याय)
मनोहरपुर नामक एक सुंदर गाँव था। उस गाँव की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी, अतः गाँव के अधिकांश लोग खेती किया करते थे ।
बड़े भाई ने सोचा कि उसके दो बच्चे हैं जो गृहस्थी में उसकी मदद करते हैं, लेकिन छोटे भाई के बाल-बच्चे नहीं हैं और उसे सारा काम अकेले ही सँभालना पड़ता है। इसलिए उसे अपने छोटे भाई की सहायता करनी चाहिए ।
छोटे भाई ने सोचा कि वह जवान है और कहीं भी काम कर सकता है, उसका खर्च कम है। लेकिन उसके बड़े भैया बाल-बच्चेवाले हैं और उनके घर-गृहस्थी के खर्च अधिक हैं, इसलिए उसे अपने बड़े भैया की सहायता करनी चाहिए ।
अँधेरी रात में जब दोनों भाई सिर पर अनाज की गठरियाँ लिए एक-दूसरे से टकराए, तो वे सब समझ गए। दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को अपनी भावनाएँ बताईं। यह सुनकर दोनों की आँखें भर आईं और वे रोते हुए एक-दूसरे के गले लग गए ।
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पढ़ो और समझो (व्याकरण : उपसर्ग और प्रत्यय)
जब किसी मूल शब्द के पहले कोई शब्दांश जुड़कर नया शब्द बनता है, तो उसे उपसर्ग (Prefix) कहते हैं। जब शब्द के अंत में कोई शब्दांश जुड़ता है, तो उसे प्रत्यय (Suffix) कहते हैं।
| मूल शब्द | उपसर्ग लगाकर नया शब्द (मूल शब्द के पहले) |
प्रत्यय लगाकर नया शब्द (मूल शब्द के अंत में) |
|---|---|---|
| प्रेम | स + प्रेम = सप्रेम | प्रेम + भरा = प्रेमभरा |
| दिन | प्रति + दिन = प्रतिदिन | दिन + इक = दैनिक |
| ज्ञान | वि + ज्ञान = विज्ञान | ज्ञान + ई = ज्ञानी |
| दृश्य | अ + दृश्य = अदृश्य | दृश्य + मान = दृश्यमान |
| मूल शब्द | उपसर्गयुक्त शब्द | प्रत्यययुक्त शब्द |
|---|---|---|
| बल | निर्बल (निर् + बल) | बलवान (बल + वान) |
| गुण | अवगुण (अव + गुण) | गुणवती (गुण + वती) |
| धर्म | अधर्म (अ + धर्म) | धार्मइक (धर्म + इक) |