४. बालिका दिवस
संवाद आधारित पाठ का सारांश, प्रश्न-उत्तर और शिक्षा का महत्त्व। सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर आधारित संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : प्रस्तुत पाठ संवाद (बातचीत) के रूप में है। इसमें बच्चे सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले 'बालिका दिवस' (३ जनवरी) के विषय में चर्चा कर रहे हैं। सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम शिक्षिका थीं, जिन्होंने स्त्री-शिक्षा के लिए महान कार्य किया।
स्वाध्याय : प्रश्न-उत्तर
- (१) बालिका दिवस कब मनाया जाता है?
बालिका दिवस ३ जनवरी को मनाया जाता है। - (२) बालिका दिवस क्यों मनाया जाता है?
भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन को 'बालिका दिवस' के रूप में मनाया जाता है। - (३) भारत की प्रथम शिक्षिका किसे माना जाता है?
सावित्रीबाई फुले को भारत की प्रथम शिक्षिका माना जाता है। - (४) लड़कियों के लिए पहली पाठशाला कहाँ और किसने शुरू की?
लड़कियों के लिए पहली पाठशाला पुणे में सावित्रीबाई फुले और उनके पति महात्मा जोतीबा फुले ने शुरू की। - (५) शिक्षा हमें कैसा बनाती है?
शिक्षा हमें स्वावलंबी (आत्मनिर्भर) और सजग (जागरूक) बनाती है।
- (१) "सृष्टि, आज तो तुम बहुत बन-ठनकर आई हो।"
यह वाक्य दूर्वा ने सृष्टि से कहा। - (२) "आज तीन जनवरी बालिका दिवस है ना!"
यह वाक्य सृष्टि ने दूर्वा से कहा। - (३) "कहा जाता है, एक लड़की शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।"
यह वाक्य प्राची ने सभी से कहा।
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- (१) सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन 'बालिका दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
- (२) आजकल तो लगभग सभी लड़कियाँ पाठशाला जाती हैं।
- (३) शिक्षा हमें स्वावलंबी और सजग बनाती है।
- (४) एक लड़की शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।
शिक्षा हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण है। शिक्षा प्राप्त करने से व्यक्ति स्वावलंबी (आत्मनिर्भर) और सजग बनता है। यह भी कहा जाता है कि यदि एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह अपने पूरे परिवार को शिक्षित और संस्कारी बनाती है।
शिक्षा के बल पर ही आज लड़कियाँ समाजसेवा, विज्ञान, संगीत, प्रशासन (Administration), शोधकार्य (Research) और खेलकूद आदि हर क्षेत्र में लड़कों के कंधे-से-कंधा मिलाकर खूब आगे बढ़ रही हैं और देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसलिए हम सभी को खूब मन लगाकर पढ़ना चाहिए।