१३. राष्ट्रीय त्योहार
संवाद का सारांश, उचित जोड़ियाँ मिलाओ और अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर। स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस के महत्त्व पर आधारित संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : यह पाठ एक संवाद है जिसमें कक्षा के विद्यार्थी ज्ञान, आकांक्षा, त्र्यंबक और क्षितिज हमारे राष्ट्रीय त्योहारों — स्वतंत्रता दिवस (१५ अगस्त) और गणतंत्र दिवस (२६ जनवरी) — के बारे में चर्चा कर रहे हैं। इस पाठ से हमें आज़ादी के संघर्ष, संविधान और तिरंगे के सम्मान का महत्त्व पता चलता है।
पाठ का सारांश
स्वतंत्रता दिवस (१५ अगस्त) और गणतंत्र दिवस (२६ जनवरी) हमारे प्रमुख राष्ट्रीय त्योहार हैं। अमर सपूतों और स्वतंत्रता सेनानियों के अथक प्रयासों व संघर्षों के बाद १५ अगस्त १९४७ को हमारा देश आज़ाद हुआ, इसलिए इस दिन को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं।
आज़ादी मिलने के बाद बड़ी लगन से देश का संविधान बनाया गया और उसे २६ जनवरी १९५० को पूरे देश में लागू किया गया, इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन राष्ट्रीय त्योहारों पर जगह-जगह राष्ट्रध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रगीत गाया जाता है और प्रभात फेरियाँ निकाली जाती हैं।
हमें अपने तिरंगे का सम्मान करना चाहिए और झंडावंदन के समय उपस्थित रहकर राष्ट्रगीत के दौरान सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए।
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स्वाध्याय : उचित जोड़ियाँ मिलाओ
| समूह 'अ' | समूह 'ब' (सही उत्तर) |
|---|---|
| १. स्वतंत्रता दिवस | ४. १५ अगस्त |
| २. २६ जनवरी | ३. गणतंत्र दिवस |
| ३. राष्ट्रगीत के समय | १. सदैव सावधान की मुद्रा में खड़े रहें । |
| ४. झंडा वंदन के लिए | २. समय पर उपस्थित होना आवश्यक है। |
अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर (Extra Questions)
- (१) हमारा देश कब स्वतंत्र हुआ?
हमारा देश १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्र हुआ। - (२) देश का संविधान कब लागू किया गया?
देश का संविधान २६ जनवरी १९५० को लागू किया गया। - (३) हमारे राष्ट्रीय त्योहार कौन-से हैं?
स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस हमारे राष्ट्रीय त्योहार हैं। - (४) राष्ट्रीय त्योहारों के दिन हम क्या-क्या करते हैं?
राष्ट्रीय त्योहारों के दिन हम राष्ट्रध्वज फहराते हैं, राष्ट्रगीत गाते हैं, प्रभात फेरियाँ निकालते हैं तथा सजावट और रोशनी करते हैं। - (५) आज़ादी को सुरक्षित रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
हमें आज़ादी की रक्षा करनी चाहिए और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सदैव याद रखना चाहिए।