१२. सपूत
श्रीकृष्ण द्वारा रचित बोधप्रद कहानी का सारांश और संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : ‘सपूत’ श्रीकृष्ण जी द्वारा रचित एक बोधप्रद कहानी है। इसमें तीन माताओं और उनके बेटों के प्रसंग से यह संदेश दिया गया है कि केवल किताबी ज्ञान और शारीरिक बल ही मनुष्य को महान नहीं बनाते; बल्कि माता-पिता की सेवा और कर्तव्यपालन ही उसे सच्चा 'सपूत' (सुपुत्र) बनाते हैं ।
कहानी का सारांश
फुलेरा नामक एक स्वच्छ और आदर्श गाँव में पनघट पर तीन स्त्रियाँ पानी भर रही थीं। पहली स्त्री ने अपने बेटे की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसका बेटा बहुत बड़ा विद्वान है जो बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लेता है। दूसरी स्त्री ने गर्व से कहा कि उसका बेटा बहुत बलवान पहलवान है और रोज़ पाँच सौ दंड-बैठक लगाता है। तीसरी स्त्री ने केवल इतना कहा कि उसका बेटा एक सीधा-सादा किसान है जो दिन भर खेत में काम करता है ।
जब वे तीनों पानी का घड़ा सिर पर रखकर लौट रही थीं, तो सबसे पहले विद्वान बेटा मिला, पर वह अपनी माँ को अनदेखा कर भाषण देने चला गया। फिर पहलवान बेटा मिला, उसने भी माँ की मदद नहीं की और खाना माँगते हुए घर चला गया। अंत में तीसरी स्त्री का सीधा-सादा किसान बेटा आया। उसने आते ही माँ के सिर से भारी घड़ा अपने सिर पर रख लिया और उत्साह से घर की ओर चल पड़ा ।
यह देखकर पहली दोनों स्त्रियों का सिर शर्म (संकोच) से झुक गया। वे समझ गईं कि कर्तव्य और सेवा के बिना ज्ञान और बल अधूरे हैं, और तीसरी स्त्री का बेटा ही सच्चा सपूत है ।
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स्वाध्याय : प्रश्न-उत्तर
- पहली स्त्री ने बताया : उसका सपूत बड़ा विद्वान है। जब से वह शहर से पढ़कर आया है, चारों ओर उसकी धूम मची है। वह बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लेता है और आकाश के तारों को देखकर उनके नाम बता देता है ।
- दूसरी स्त्री ने बताया : उसका लाल बहुत बलवान (पहलवान) है। उसके जैसा बली दस-पाँच गाँवों में भी नहीं मिलेगा। वह रोज़ सुबह पाँच सौ दंड-बैठक लगाता है और बड़े-बड़े पहलवान उसका मुकाबला करने से घबराते हैं ।
- तीसरी स्त्री ने बताया : उसका लाल सीधे-सादे स्वभाव का एक साधारण किसान है, जो दिन भर खेत में जुता रहता है और शाम को घर का काम करता है ।
एक अच्छे लड़के या अच्छी लड़की में निम्नलिखित गुण होने चाहिए :
- वे हमेशा अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का आदर करें तथा उनकी सेवा करें।
- उनमें कर्तव्यपालन की भावना हो और वे अपनी क्षमता के अनुसार घर के कामों में हाथ बँटाएँ।
- वे अपने ज्ञान, रूप या बल पर घमंड न करें, बल्कि स्वभाव से विनम्र और सीधे-सादे हों।
- वे अपनी विद्या और बल का उपयोग केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई और सहायता के लिए करें।
- उनमें ईमानदारी, परोपकार और सच्चाई जैसे नैतिक गुण होने चाहिए।
अतिरिक्त अभ्यास (Extra Questions)
- १. गाँव का नाम क्या था?
आदर्श गाँव का नाम फुलेरा था । - २. पनघट पर कितनी स्त्रियाँ पानी भर रही थीं?
पनघट पर तीन स्त्रियाँ पानी भर रही थीं । - ३. दूसरी स्त्री का बेटा रोज़ कितनी दंड-बैठक लगाता था?
दूसरी स्त्री का बेटा रोज़ पाँच सौ दंड-बैठक लगाता था । - ४. अन्य दोनों स्त्रियों का सिर संकोच से क्यों झुक गया?
तीसरी स्त्री के बेटे का अपनी माँ के प्रति प्रेम और सेवाभाव देखकर अन्य दोनों स्त्रियों का सिर संकोच से झुक गया । - ५. इस कहानी से हमें क्या सीख (बोध) मिलती है?
इस कहानी से हमें यह बोध मिलता है कि कर्तव्य और सेवा के बिना ज्ञान एवं बल अधूरे हैं ।