कक्षा ५ हिंदी · दूसरी इकाई

१५. ज्ञानी

हिंदी और मराठी में समोच्चारित भिन्नार्थी शब्द तथा शब्द युग्म का ज्ञान. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).

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पाठ का परिचय : 'ज्ञानी' पाठ में यह दर्शाया गया है कि बंडूभाऊ और सुदामा के परिवार अलग-अलग भाषाएँ (मराठी और हिंदी) बोलते हैं। एक ही शब्द के दोनों भाषाओं में अलग-अलग अर्थ होने के कारण उनके बीच मनोरंजक स्थिति बन जाती है। इस पाठ से यह सीख मिलती है कि जो जितनी अधिक भाषाएँ सीखता है, उसका ज्ञान उतना ही बढ़ता है।

स्वाध्याय

१पढ़ो, समझो और लिखो (समोच्चारित शब्द)।

हिंदी और मराठी भाषाओं में कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका उच्चारण तो समान होता है, लेकिन उनके अर्थ अलग-अलग होते हैं। पाठ में आए ऐसे शब्द नीचे दिए गए हैं:

हिंदी अर्थसमोच्चारित शब्दमराठी अर्थ
पढ़ाईशिक्षादंड (सज़ा)
वानर (बंदर)बंदरबंदरगाह (समुद्र का किनारा जहाँ जहाज रुकते हैं)
भेड़-बकरियों के बाल (wool)ऊनधूप
पत्र (चिट्ठी)खतखाद (उर्वरक)
घास (हरा चारा)घासनिवाला (कौर)
ठंडी (सर्दी)जाड़ामोटा
२पाठ में आए 'आमने-सामने' जैसे शब्द युग्म ढूँढ़कर लिखो।

पाठ में प्रयुक्त शब्द युग्म (Pair words) निम्नलिखित हैं:

आमने-सामने साथ-साथ हँसते-खेलते सुख-दुख एक-दूसरे अलग-अलग

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३बंडूभाऊ और सुदामा के बीच संवाद में भ्रम (confusion) क्यों पैदा हुआ?

बंडूभाऊ मराठी भाषा बोलते हैं और सुदामा हिंदी भाषा बोलते हैं। दोनों भाषाओं में कुछ शब्द समान होते हैं, परंतु उनके अर्थ अलग-अलग होते हैं। इसी कारण उनके संवाद में मनोरंजक भ्रम पैदा हुआ:

  • शिक्षा : बंडूभाऊ का आशय 'दंड' (मराठी अर्थ) से था, जबकि सुदामा उसे 'पढ़ाई' (हिंदी अर्थ) समझ रहे थे।
  • बंदर : सुदामा का अर्थ 'वानर' (हिंदी अर्थ) था, लेकिन बंडूभाऊ ने उसे 'बंदरगाह' (मराठी अर्थ) समझा।
  • ऊन : सुदामा 'ऊन के स्वेटर' (हिंदी अर्थ) की बात कर रहे थे, परंतु बंडूभाऊ को लगा कि वे 'धूप' (मराठी अर्थ) की बात कर रहे हैं।
  • खत : सुदामा ने 'पत्र' (हिंदी अर्थ) भेजने की बात कही, जबकि बंडूभाऊ ने इसका अर्थ 'खाद' (मराठी अर्थ) समझा, जो खेतों में डाली जाती है।
४अधिक भाषाएँ सीखने का क्या महत्त्व है?

पाठ के अनुसार, जो व्यक्ति जितनी अधिक भाषाएँ सीखता है, उसका ज्ञान उतना ही बढ़ता है। अधिक भाषाएँ जानने से हम दूसरों के विचारों और भावनाओं को सही ढंग से समझ सकते हैं, जिससे बंडूभाऊ और सुदामा जैसी गलतफहमी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं और वैचारिक दृष्टिकोण विस्तृत होता है।