१५. ज्ञानी
हिंदी और मराठी में समोच्चारित भिन्नार्थी शब्द तथा शब्द युग्म का ज्ञान. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ का परिचय : 'ज्ञानी' पाठ में यह दर्शाया गया है कि बंडूभाऊ और सुदामा के परिवार अलग-अलग भाषाएँ (मराठी और हिंदी) बोलते हैं। एक ही शब्द के दोनों भाषाओं में अलग-अलग अर्थ होने के कारण उनके बीच मनोरंजक स्थिति बन जाती है। इस पाठ से यह सीख मिलती है कि जो जितनी अधिक भाषाएँ सीखता है, उसका ज्ञान उतना ही बढ़ता है।
स्वाध्याय
हिंदी और मराठी भाषाओं में कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका उच्चारण तो समान होता है, लेकिन उनके अर्थ अलग-अलग होते हैं। पाठ में आए ऐसे शब्द नीचे दिए गए हैं:
| हिंदी अर्थ | समोच्चारित शब्द | मराठी अर्थ |
|---|---|---|
| पढ़ाई | शिक्षा | दंड (सज़ा) |
| वानर (बंदर) | बंदर | बंदरगाह (समुद्र का किनारा जहाँ जहाज रुकते हैं) |
| भेड़-बकरियों के बाल (wool) | ऊन | धूप |
| पत्र (चिट्ठी) | खत | खाद (उर्वरक) |
| घास (हरा चारा) | घास | निवाला (कौर) |
| ठंडी (सर्दी) | जाड़ा | मोटा |
पाठ में प्रयुक्त शब्द युग्म (Pair words) निम्नलिखित हैं:
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बंडूभाऊ मराठी भाषा बोलते हैं और सुदामा हिंदी भाषा बोलते हैं। दोनों भाषाओं में कुछ शब्द समान होते हैं, परंतु उनके अर्थ अलग-अलग होते हैं। इसी कारण उनके संवाद में मनोरंजक भ्रम पैदा हुआ:
- शिक्षा : बंडूभाऊ का आशय 'दंड' (मराठी अर्थ) से था, जबकि सुदामा उसे 'पढ़ाई' (हिंदी अर्थ) समझ रहे थे।
- बंदर : सुदामा का अर्थ 'वानर' (हिंदी अर्थ) था, लेकिन बंडूभाऊ ने उसे 'बंदरगाह' (मराठी अर्थ) समझा।
- ऊन : सुदामा 'ऊन के स्वेटर' (हिंदी अर्थ) की बात कर रहे थे, परंतु बंडूभाऊ को लगा कि वे 'धूप' (मराठी अर्थ) की बात कर रहे हैं।
- खत : सुदामा ने 'पत्र' (हिंदी अर्थ) भेजने की बात कही, जबकि बंडूभाऊ ने इसका अर्थ 'खाद' (मराठी अर्थ) समझा, जो खेतों में डाली जाती है।
पाठ के अनुसार, जो व्यक्ति जितनी अधिक भाषाएँ सीखता है, उसका ज्ञान उतना ही बढ़ता है। अधिक भाषाएँ जानने से हम दूसरों के विचारों और भावनाओं को सही ढंग से समझ सकते हैं, जिससे बंडूभाऊ और सुदामा जैसी गलतफहमी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं और वैचारिक दृष्टिकोण विस्तृत होता है।