१६. बचाव
भूकंप, बाढ़ और त्सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण और उनसे बचाव के उपाय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : ‘बचाव’ पाठ में प्राकृतिक विपदाओं (आपदाओं) जैसे भूकंप, बाढ़ और त्सुनामी के कारण तथा उनसे बचने के उपायों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
स्वाध्याय एवं प्रश्न-उत्तर
पाठ में मुख्य रूप से तीन प्राकृतिक विपदाओं के बारे में बताया गया है:
- १. भूकंप (Earthquake)
- २. बाढ़ (Flood)
- ३. त्सुनामी (Tsunami)
अन्य प्राकृतिक विपदाएँ सूखा, चक्रवात (तूफान), और भूस्खलन (Landslide) आदि भी हो सकती हैं।
पृथ्वी के भीतर चट्टानों की परतों के आगे-पीछे खिसकने से धरती हिलने लगती है, जिसे भूकंप कहते हैं। इसके कारण छत, दीवारें आदि गिरने लगती हैं।
बचाव के उपाय:
- भूकंप आने पर हमें तुरंत घर के बाहर खुली जगह में आ जाना चाहिए।
- यदि बाहर निकलना संभव न हो, तो मेज, लकड़ी के तख्त के नीचे या दरवाजे के पीछे छिप जाना चाहिए।
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लगातार अधिक बारिश होने पर नदी-नाले पानी से भरकर बहने लगते हैं। जब नदी के आस-पास के गाँवों, बस्तियों और इमारतों आदि में पानी भरने लगता है तथा फसलें नष्ट हो जाती हैं, तो उसे बाढ़ कहते हैं।
बचाव के उपाय: पानी के बढ़ने की सूचना प्राप्त होते ही हमें तुरंत सुरक्षित स्थान (जैसे ऊँचे स्थानों) पर पहुँच जाना चाहिए।
समुद्र के तल (bottom) में भूकंप आने पर पानी में ऊँची-ऊँची लहरें उत्पन्न होती हैं, जिसे त्सुनामी कहते हैं।
बचाव के उपाय:
- त्सुनामी की सूचना मिलते ही तटवर्ती प्रदेश (समुद्र के किनारे) में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।
- हमें समुद्र तट को पाटकर बस्तियाँ नहीं बनानी चाहिए।
आजकल त्सुनामी की पूर्व सूचना (Early warning) देने वाले यंत्र विकसित हो रहे हैं, जिनसे समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है।
भूकंप (Earthquake)
- पृथ्वी के भीतर चट्टानों की परतों के खिसकने से धरती अचानक हिलने लगती है, जिसे भूकंप कहते हैं।
- यह एक भयानक प्राकृतिक आपदा है जो बिना किसी चेतावनी के आती है।
- भूकंप के कारण मकान, छत, दीवारें और बड़ी-बड़ी इमारतें गिरने लगती हैं।
- इससे जान और माल दोनों का भारी नुकसान होता है।
- भूकंप महसूस होते ही हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत घर से बाहर खुली जगह में आ जाना चाहिए।
- यदि बाहर भागना संभव न हो, तो मजबूत मेज या लकड़ी के तख्त के नीचे छिप जाना चाहिए।
- दरवाजे के पीछे भी आश्रय लिया जा सकता है, जिससे गिरती हुई वस्तुओं से बचाव हो सके।
- भूकंप के समय लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए, केवल सीढ़ियों से उतरना चाहिए।
- हमें बिजली के खंभों, तारों और ऊँची इमारतों से दूर खड़े रहना चाहिए।
- भूकंप के बाद रेडियो या टीवी पर प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।