मेला (पहचानो और बताओ)
प्रवेश पाठ — चित्र-वर्णन, सूचना-फलक, मौखिक प्रश्नोत्तर, शब्द भंडार और नमूना अनुच्छेद. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
‘मेला’ पाठ्यपुस्तक का प्रवेश पाठ है। इसमें एक बड़ा चित्र दिया गया है। चित्र में एक बड़े मैदान में लगा मेला दिखाया गया है। विद्यार्थी चित्र देखकर वस्तुएँ पहचानते हैं और उनके बारे में बोलते हैं।
मुख्य बिंदु
- यह मौखिक कृति है। सूचना है — ‘पहचानो और बताओ’।
- मेले में झूले, दुकानें, फेरीवाले और खेल-तमाशे होते हैं।
- सुरक्षा के लिए सुरक्षा-चौकी, दमकल और सहायता कक्ष होते हैं।
- स्वच्छता के लिए जगह-जगह कूड़ादान रखे जाते हैं।
- फेरीवालों का परिश्रम समझकर उनसे सम्मान से बात करनी चाहिए।
शब्दार्थ
- मेला – बहुत-से लोगों के एकत्र होने का उत्सव-स्थल
- दमकल – आग बुझाने की गाड़ी
- फेरीवाला – घूम-घूमकर सामान बेचनेवाला
- सहायता कक्ष – मदद के लिए बना कक्ष
चित्र का परिचय
चित्र में एक बड़े मैदान में लगा मेला दिखाई देता है। चारों ओर बहुत भीड़ है। बच्चे, माता-पिता और बुजुर्ग उत्साह से घूम रहे हैं। कहीं झूले चल रहे हैं। कहीं खिलौनों और खाने-पीने की दुकानें सजी हैं। मेले में सुरक्षा और सुविधा का भी प्रबंध है।
मेला केवल मनोरंजन का स्थान नहीं है। वहाँ अनेक लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। मेले में हमें स्वच्छता, अनुशासन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए।
चित्र में क्या-क्या दिखाई देता है?
ध्यान दो : यह मौखिक कृति है। ऊपर दी गई सूची पूरी नहीं है। चित्र ध्यान से देखकर और भी नाम बताओ।
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चित्र में दिए गए सूचना-फलक और उनका अर्थ
- सहायता कक्ष — कोई खो जाए या कोई कठिनाई आए, तो यहाँ मदद मिलती है।
- सुरक्षा-चौकी — यहाँ पुलिस के सिपाही रहते हैं। वे भीड़ पर नजर रखते हैं।
- दमकल — आग लगने पर तुरंत आग बुझाने के लिए यह गाड़ी खड़ी रहती है।
- कूड़ादान — कचरा इसी में डालना चाहिए। इससे मेला स्वच्छ रहता है।
- बूँद-बूँद पानी बचाओ । — पानी अनमोल है। उसे व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए।
पहचानो और बताओ — संभावित प्रश्नोत्तर
चित्र में एक बड़े मैदान में लगे हुए मेले का दृश्य दिखाया गया है।
- मैदान के एक कोने में सुरक्षा-चौकी है। वहाँ पुलिस के सिपाही हैं।
- आग से बचाव के लिए दमकल खड़ी है।
- कठिनाई में पड़े लोगों के लिए सहायता कक्ष है।
- रेलगाड़ी के चारों ओर बाड़ लगाई गई है। इससे कोई पटरी के पास नहीं जाता।
मेले में जगह-जगह कूड़ादान रखे गए हैं। इससे लोग कचरा इधर-उधर नहीं फेंकते। ‘बूँद-बूँद पानी बचाओ।’ यह सूचना-फलक भी लगा है। यह पानी बचाने का संदेश देता है।
चित्र में गुब्बारे, चूड़ियाँ, मालाएँ, खिलौने, बर्फ का गोला, पीने का पानी और खेल-सामग्री बिकती हुई दिखाई देती है।
मुझे चित्र में आकाश-पालना (चरखी झूला) सबसे अच्छा लगा। उसमें बैठकर ऊँचाई से पूरा मेला दिखाई देता है। ऊपर पहुँचने पर बहुत मजा आता है।
टीप : यह उत्तर केवल नमूना है। अपनी पसंद के अनुसार अपने शब्दों में उत्तर बताओ।
फेरीवालों के सुख-दुख — बातचीत के मुद्दे
पाठ्यपुस्तक में शिक्षक के लिए सूचना दी गई है। विद्यार्थी परिचित फेरीवाले, सब्जीवाली आदि से बातचीत करें। वे उनके सुख-दुख समझें। बातचीत में ये प्रश्न पूछे जा सकते हैं —
- आप यह काम कितने वर्षों से कर रहे हैं? यह काम आपने क्यों चुना?
- दिन में कितने घंटे काम करना पड़ता है? धूप और बारिश में क्या कठिनाई होती है?
- माल कहाँ से लाते हैं? कितनी दूर से आना पड़ता है?
- त्योहारों और मेलों में बिक्री बढ़ती है या घटती है?
- आपके बच्चे पढ़ने जाते हैं? उन्हें आप क्या बनाना चाहते हैं?
- ग्राहकों से आपको सबसे अधिक खुशी कब मिलती है और सबसे अधिक दुख कब होता है?
सीख : हमें फेरीवालों से सम्मान से बात करनी चाहिए। मोल-भाव करते समय नम्रता रखनी चाहिए। उनके काम को छोटा नहीं समझना चाहिए।
नमूना अनुच्छेद — ‘मैंने देखा हुआ मेला’
पिछले वर्ष हमारे गाँव के मैदान में बड़ा मेला लगा था। मैं पिताजी और छोटी बहन के साथ शाम को वहाँ गया। दूर से ही रंग-बिरंगी रोशनी और लाउडस्पीकर की आवाज सुनाई दे रही थी।
मेले में एक ओर ऊँचा चरखी झूला घूम रहा था। दूसरी ओर छोटी रेलगाड़ी बच्चों को घुमा रही थी। खिलौनों की दुकान से मैंने एक हरी मोटर गाड़ी खरीदी। बहन ने चूड़ियाँ लीं। हमने बर्फ का गोला खाया और छल्ला फेंकने का खेल भी खेला।
मैदान के कोने में सुरक्षा-चौकी और सहायता कक्ष बने थे। जगह-जगह कूड़ादान रखे थे। हमने अपने कागज और छिलके कूड़ादान में ही डाले। घर लौटते समय मन बहुत प्रसन्न था। मेला केवल मनोरंजन ही नहीं देता। वह हमें अनुशासन और स्वच्छता भी सिखाता है।
टीप : ऊपर दिया गया अनुच्छेद केवल नमूना है। तुम अपने देखे हुए मेले का वर्णन अपने शब्दों में करो।
शब्द भंडार
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मेला | जहाँ बहुत-से लोग एकत्र होकर खरीदारी और मनोरंजन करते हैं, ऐसा उत्सव-स्थल |
| सहायता कक्ष | मदद के लिए बनाया गया कक्ष |
| दमकल | आग बुझाने की गाड़ी |
| चौकी | पहरा देने का स्थान |
| कूड़ादान | कचरा डालने का पात्र |
| फेरीवाला | वस्तुएँ लेकर गली-गली घूमकर बेचनेवाला |
| आकाश-पालना | ऊँचा गोल घूमनेवाला चरखी झूला |
| अपव्यय | व्यर्थ में खर्च करना |
| परिसर | आस-पास का क्षेत्र |
कक्षा में करने योग्य कृति
१. चित्र में दिखाई देनेवाली वस्तुओं के नाम एक-एक करके बोलो और श्यामपट्ट पर लिखो।
२. गुटों में बँटकर अपने-अपने मेले का अनुभव सुनाओ।
३. मेले में लगाए जा सकनेवाले चार नए सूचना-फलक तैयार करो — जैसे ‘कतार में खड़े रहें।’, ‘बच्चों का हाथ न छोड़ें।’
४. अपने घर के पास आनेवाले किसी फेरीवाले से बातचीत करके उनकी दिनचर्या कक्षा में सुनाओ।