१. सैर
देखो, समझो और बताओ — चारों चित्रों का वर्णन, सूचना-वाक्य, आवागमन के साधनों का वर्गीकरण, प्रश्नोत्तर व नमूना लेखन. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
‘सैर’ एक चित्र-पाठ है। इसमें चार चित्र दिए गए हैं — बस स्थानक, बंदरगाह, हवाई अड्डा और रेल स्थानक। सूचना है — ‘देखो, समझो और बताओ’। इस पाठ से हम आवागमन के साधनों और सार्वजनिक स्थानों के नियमों के बारे में सीखते हैं।
मुख्य बिंदु
- आवागमन के साधन तीन मार्गों के होते हैं — थल, जल और वायु।
- सार्वजनिक स्थानों पर लगे सूचना-फलक हमें नियम बताते हैं।
- बस, रेल और इमारतें राष्ट्रीय संपत्ति हैं। उनकी रक्षा करनी चाहिए।
- यात्रा में वृद्धों और महिलाओं की सहायता करनी चाहिए।
- सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है।
शब्दार्थ
- आवागमन – आना-जाना, यातायात
- फलाट – प्लेटफॉर्म
- दीपस्तंभ – समुद्र किनारे बना प्रकाशस्तंभ
- लावारिस – जिसका कोई मालिक न हो
- आरक्षण – पहले से स्थान सुरक्षित करा लेना
चित्रों का वर्णन
पहले चित्र में एक व्यस्त बस स्थानक है। वहाँ फलाट क्रमांक १, २ और ३ बने हैं। राज्य परिवहन की लाल बसें खड़ी हैं। यात्री बैग और सूटकेस लेकर बस की ओर जा रहे हैं। एक ओर पीने का पानी है। दूसरी ओर स्वच्छतागृह है।
दूसरे चित्र में समुद्र किनारे का बंदरगाह है। किनारे पर ऊँचा दीपस्तंभ है। पानी में मालवाहक जहाज, यात्री जहाज और नावें हैं। जहाजों पर कंटेनर का माल लदा है। लोग जीवनरक्षक जैकेट पहनकर नाव में बैठ रहे हैं। आकाश में समुद्री पक्षी उड़ रहे हैं।
तीसरे चित्र में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। धावपट्टी पर वायुयान खड़े हैं। एक वायुयान आकाश में उड़ रहा है। पास में ऊँचा नियंत्रण कक्ष है। ईंधन की गाड़ी, दमकल और सामान की गाड़ियाँ काम कर रही हैं। इमारत के सामने बसें और टैक्सियाँ यात्रियों को छोड़ रही हैं।
चौथे चित्र में रेल स्थानक है। फलाट पर रेलगाड़ी खड़ी है। टिकट घर और आरक्षण खिड़की पर लोग कतार में खड़े हैं। सफाई कर्मचारी झाड़ू लगा रहा है। कुली सिर पर सामान ले जा रहा है। टिकट परीक्षक टिकट देख रहा है। यात्री बेंच पर बैठकर गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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चित्रों में दिए गए सूचना-वाक्य और उनका अर्थ
बस स्थानक :
- आपकी यात्रा सुखद हो । — इसमें यात्रियों को शुभकामना दी गई है।
- राष्ट्रीय संपत्ति, हमारी संपत्ति — बस, रेल और इमारतें सबकी संपत्ति हैं। उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।
- पीने का पानी — यहाँ पीने के पानी की व्यवस्था है।
- स्वच्छतागृह — शौचालय इस ओर है।
बंदरगाह :
- स्वच्छ भारत । स्वस्थ भारत । — देश स्वच्छ रहेगा, तो लोग स्वस्थ रहेंगे।
- पानी में कचरा न डालें । — कचरे से पानी प्रदूषित होता है। इससे जलचरों को हानि होती है।
हवाई अड्डा :
- धूम्रपान मना है । — यहाँ बीड़ी-सिगरेट पीना मना है। इससे आग लग सकती है और स्वास्थ्य भी बिगड़ता है।
- लावारिस वस्तुओं को हाथ न लगाएँ । — बिना मालिक की वस्तु खतरनाक हो सकती है। उसकी सूचना सुरक्षा कर्मचारी को दें।
रेल स्थानक :
- अपने सामान का ध्यान रखें । — भीड़ में सामान चोरी हो सकता है। इसलिए उस पर नजर रखें।
इसी प्रकार के अन्य सूचना-वाक्यों का संग्रह
आवागमन के साधनों का वर्गीकरण
- थल मार्ग : बस, रेलगाड़ी, मोटरगाड़ी, ट्रक, टेंपो, रिक्शा, दुपहिया, बैलगाड़ी, साइकिल, मेट्रो
- जल मार्ग : नाव, पालवाली नाव, स्टीमर, मालवाहक जहाज, यात्री जहाज, पनडुब्बी
- वायु मार्ग : वायुयान (हवाई जहाज), हेलिकॉप्टर, गुब्बारा, ग्लाइडर
देखो, समझो और बताओ — संभावित प्रश्नोत्तर
चारों चित्रों में क्रमशः बस स्थानक, बंदरगाह, हवाई अड्डा और रेल स्थानक दिखाए गए हैं।
रात में और कोहरे में जहाज के चालक को किनारा दिखाई नहीं देता। दीपस्तंभ की तेज रोशनी दूर से दिखाई देती है। वह जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिखाती है। इससे जहाज चट्टानों से नहीं टकराते।
- दूर के स्थानों तक कम समय में पहुँच सकते हैं।
- अनाज, सब्जियाँ और दवाइयाँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती हैं।
- विद्यार्थी विद्यालय और लोग कार्यालय समय पर पहुँचते हैं।
- व्यापार बढ़ता है। इससे देश की उन्नति होती है।
- आपत्काल में रोगी को जल्दी अस्पताल पहुँचाया जा सकता है।
- कचरा केवल कूड़ादान में डालें।
- इधर-उधर न थूकें। दीवारों पर कुछ न लिखें।
- उपयोग के बाद पानी का नल बंद करें।
- स्वच्छतागृह का उपयोग करने के बाद पानी अवश्य डालें।
- दूसरों को भी स्वच्छता रखने के लिए प्रेरित करें।
- बस या रेल में अपनी सीट उन्हें दे देना।
- उनका सामान चढ़ाने-उतारने में मदद करना।
- चढ़ते-उतरते समय हाथ का सहारा देना।
- कतार में उन्हें आगे जाने देना।
- उन्हें फलाट या मार्ग की सही जानकारी देना।
मेरी यात्रा का एक प्रसंग — नमूना लेखन
पिछली गर्मी की छुट्टियों में हम मुंबई से कोंकण जाने के लिए निकले। हमें सुबह छह बजे की बस पकड़नी थी। इसलिए हम आधा घंटा पहले ही बस स्थानक पहुँच गए। फलाट क्रमांक २ पर हमारी लाल बस खड़ी थी।
बस चलने के बाद खिड़की से हरे-भरे खेत, नारियल के ऊँचे पेड़ और घुमावदार घाट दिखाई देने लगे। बीच में एक जगह बस रुकी। पिताजी ने पानी की बोतल ली। मैंने खाली बोतल कूड़ादान में डाली।
बस में एक वृद्ध दादीजी चढ़ीं। भीड़ के कारण उन्हें जगह नहीं मिल रही थी। मैंने उठकर अपनी सीट उन्हें दे दी। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। उस दिन मुझे एक बात समझ में आई। रास्ते में किसी के काम आना ही सबसे सुंदर यात्रा है।
टीप : यह लेखन केवल नमूना है। तुम अपनी किसी यात्रा का प्रसंग अपने शब्दों में लिखो या सुनाओ।
शब्द भंडार
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सैर | घूमना-फिरना, भ्रमण |
| आवागमन | आना-जाना, यातायात |
| बस स्थानक | बस डिपो, बस अड्डा |
| फलाट | प्लेटफॉर्म, यात्रियों के खड़े रहने का ऊँचा मंच |
| बंदरगाह | जहाजों के रुकने और माल चढ़ाने-उतारने का स्थान |
| दीपस्तंभ | समुद्र किनारे बना प्रकाशस्तंभ |
| आरक्षण | पहले से स्थान सुरक्षित करा लेना |
| लावारिस | जिसका कोई मालिक न हो |
| धूम्रपान | बीड़ी-सिगरेट पीना |
| स्वच्छतागृह | शौचालय |
| सुखद | सुख देनेवाला, आनंददायक |
| संपत्ति | धन-दौलत, मालमत्ता |
कक्षा में करने योग्य कृति
१. आवागमन के साधनों के चित्र इकट्ठे करके जल, थल और वायु — इन तीन शीर्षकों के अंतर्गत चिपकाओ और उनके नीचे जानकारी लिखो।
२. अपने गाँव या शहर के बस स्थानक/रेल स्थानक पर लगे सूचना-फलक पढ़कर उनकी सूची बनाओ।
३. गुटों में बँटकर ‘टिकट खिड़की पर बातचीत’ का संवाद तैयार करके प्रस्तुत करो।
४. ‘यदि आवागमन के साधन न होते तो...’ इस विषय पर कक्षा में चर्चा करो।