स्वयं अध्ययन – १ / पुनरावर्तन – १
एक से सौ तक की उलटी गिनती, वर्णमाला व विशेष वर्ण, स्नेह सम्मेलन का वर्णन, विज्ञापन, फल-फूलों के नाम, खिलाड़ियों के नाम तथा कृति/उपक्रम. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
यह पृष्ठ पहली इकाई का समापन भाग है। इसमें ‘स्वयं अध्ययन – १’ और ‘पुनरावर्तन – १’ दिए गए हैं। स्वयं अध्ययन में सौ से एक तक उलटी गिनती है। पुनरावर्तन में पूरी इकाई को दोहराने के अभ्यास हैं।
मुख्य बिंदु
- संख्याओं के नाम शुद्ध पढ़ना और लिखना।
- वर्णमाला और विशेष वर्णों (ड़, ढ़, ष, श, ऑ) का शुद्ध उच्चारण।
- स्नेह सम्मेलन का क्रम से वर्णन करना।
- कम शब्दों में आकर्षक विज्ञापन बनाना।
- फल, फूल और प्रसिद्ध खिलाड़ियों के नाम पहचानना।
शब्दार्थ
- पुनरावर्तन – दोहराना
- स्नेह सम्मेलन – विद्यालय का वार्षिक उत्सव
- उपक्रम – गतिविधि
- अनुनासिक – नाक से बोला जानेवाला स्वर (चंद्रबिंदु ँ)
स्वयं अध्ययन – १ : एक से सौ तक की उलटी गिनती
सौ से आरंभ करके एक तक पीछे की ओर गिनती पढ़ो और कॉपी में लिखो —
| १०० — सौ | ९९ — निन्यानवे | ९८ — अठानवे | ९७ — सत्तानवे | ९६ — छियानवे | ९५ — पचानवे | ९४ — चौरानवे | ९३ — तिरानवे | ९२ — बानवे | ९१ — इक्यानवे |
| ९० — नब्बे | ८९ — नवासी | ८८ — अठासी | ८७ — सत्तासी | ८६ — छियासी | ८५ — पचासी | ८४ — चौरासी | ८३ — तिरासी | ८२ — बयासी | ८१ — इक्यासी |
| ८० — अस्सी | ७९ — उन्यासी | ७८ — अठहत्तर | ७७ — सतहत्तर | ७६ — छिहत्तर | ७५ — पचहत्तर | ७४ — चौहत्तर | ७३ — तिहत्तर | ७२ — बहत्तर | ७१ — इकहत्तर |
| ७० — सत्तर | ६९ — उनहत्तर | ६८ — अड़सठ | ६७ — सड़सठ | ६६ — छियासठ | ६५ — पैंसठ | ६४ — चौंसठ | ६३ — तिरसठ | ६२ — बासठ | ६१ — इकसठ |
| ६० — साठ | ५९ — उनसठ | ५८ — अट्ठावन | ५७ — सत्तावन | ५६ — छप्पन | ५५ — पचपन | ५४ — चौवन | ५३ — तिरपन | ५२ — बावन | ५१ — इक्यावन |
| ५० — पचास | ४९ — उनचास | ४८ — अड़तालीस | ४७ — सैंतालीस | ४६ — छियालीस | ४५ — पैंतालीस | ४४ — चवालीस | ४३ — तैंतालीस | ४२ — बयालीस | ४१ — इकतालीस |
| ४० — चालीस | ३९ — उनतालीस | ३८ — अड़तीस | ३७ — सैंतीस | ३६ — छत्तीस | ३५ — पैंतीस | ३४ — चौंतीस | ३३ — तैंतीस | ३२ — बत्तीस | ३१ — इकतीस |
| ३० — तीस | २९ — उनतीस | २८ — अट्ठाईस | २७ — सत्ताईस | २६ — छब्बीस | २५ — पच्चीस | २४ — चौबीस | २३ — तेईस | २२ — बाईस | २१ — इक्कीस |
| २० — बीस | १९ — उन्नीस | १८ — अठारह | १७ — सत्रह | १६ — सोलह | १५ — पंद्रह | १४ — चौदह | १३ — तेरह | १२ — बारह | ११ — ग्यारह |
| १० — दस | ९ — नौ | ८ — आठ | ७ — सात | ६ — छह | ५ — पाँच | ४ — चार | ३ — तीन | २ — दो | १ — एक |
ध्यान दो : उलटी गिनती दस-दस के गुट में लिखो। इससे गलती नहीं होगी। कठिन शब्दों को अलग से दोहराओ — जैसे उन्यासी, अठहत्तर, छिहत्तर, सड़सठ, अड़सठ, अट्ठावन, छप्पन।
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पुनरावर्तन – १
- स्वर : अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
- अनुस्वार, विसर्ग आदि : अं अः अँ ऑ
- व्यंजन : क ख ग घ ङ च छ ज झ ञ ट ठ ड ढ ण त थ द ध न प फ ब भ म
- अंतस्थ व ऊष्म : य र ल व श ष स ह
- संयुक्त व विशेष वर्ण : क्ष त्र ज्ञ श्र ळ ड़ ढ़
विशेष वर्णों के उच्चारण पर ध्यान :
- ड़ और ढ़ — जीभ झटके से ऊपर लगकर लौटती है (लड़का, पढ़ना)। ये शब्द के आरंभ में नहीं आते।
- ष और श — ‘ष’ मूर्धा से बोला जाता है (भाषा, वर्ष)। ‘श’ तालु से बोला जाता है (शाला, शरीर)।
- ळ — यह मराठी का वर्ण है (सकाळ)। हिंदी में इसका प्रयोग बहुत कम होता है।
- ऑ — अंग्रेजी से आए शब्दों में आता है (डॉक्टर, कॉलेज)।
- अं और अँ — ‘अं’ अनुस्वार है (अंगूर)। ‘अँ’ अनुनासिक है (आँख)।
- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र — ये संयुक्त वर्ण हैं : क्+ष, त्+र, ज्+ञ, श्+र।
हमारे विद्यालय का वार्षिक स्नेह सम्मेलन जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुआ। कई दिन पहले से तैयारियाँ शुरू हो गई थीं। मैदान में बड़ा मंच बनाया गया। रंगीन झालरें लगाई गईं।
कार्यक्रम दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से शुरू हुआ। प्रधानाचार्य ने वर्ष भर की उपलब्धियाँ बताईं। फिर समूह नृत्य, नाटक, देशभक्ति गीत और एकपात्री अभिनय हुए। मैंने भी अपने गुट के साथ एक कविता प्रस्तुत की। पहली बार मंच पर जाते समय मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। पर तालियाँ सुनकर हिम्मत आ गई।
अंत में अच्छा कार्य करनेवाले विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। मुझे स्वच्छता अभियान के लिए प्रमाणपत्र मिला। कार्यक्रम राष्ट्रगान से समाप्त हुआ। वह दिन मुझे बहुत दिनों तक याद रहेगा।
टीप : यह वर्णन केवल नमूना है। अपने विद्यालय के स्नेह सम्मेलन का वर्णन अपने शब्दों में लिखो। तैयारी, सजावट, कार्यक्रम, अपना सहभाग, पुरस्कार और अपनी भावना — इस क्रम से लिखो।
★ जल है तो कल है ★
।। बूँद-बूँद से सागर बनता है ।।
क्या आप जानते हैं? एक टपकती टोंटी दिन भर में बहुत पानी बहा देती है!
आज ही करें : टपकती टोंटी ठीक करवाएँ • ब्रश करते समय नल बंद रखें • वर्षा जल इकट्ठा करें
याद रखें : पानी बनाया नहीं जा सकता — केवल बचाया जा सकता है।
— प्रस्तुति : पर्यावरण मंडळ, आपका विद्यालय
विज्ञापन बनाते समय ध्यान रखो : आकर्षक शीर्षक, चौकट, प्रभावी घोषवाक्य, कम शब्दों में मुख्य बात और अंत में प्रस्तुतकर्ता का नाम।
फलों के नाम :
फूलों के नाम :
टीप : इनके अलावा भी अनेक नाम लिखे जा सकते हैं — फल : नारियल, सीताफल, जामुन; फूल : कनेर, पारिजात, बेला।
- इ, ह, ना, सा, ल, वा, ने — साइना नेहवाल (बैडमिंटन)
- ध्या, द, चं, न — ध्यानचंद (हॉकी)
- व, शा, ध, जा, बा, खा — खाशाबा जाधव (कुश्ती)
- ह, ल्खा, सिं, मि — मिल्खा सिंह (दौड़)
- म, री, कॉं, मे — मेरी कॉम (मुक्केबाजी)
- नि, मि, सा, र्जा, या — सानिया मिर्जा (टेनिस)
- न, र, स, ल, डु, तें, क, चि — सचिन तेंडुलकर (क्रिकेट)
जानने योग्य : मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है। उनके जन्मदिन (२९ अगस्त) को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। खाशाबा जाधव महाराष्ट्र के थे। वे ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतनेवाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे।
कृति / उपक्रम
- माता-पिता से अपने बारे में सुनो। — उनसे पूछो कि बचपन में तुम कैसे थे। तुम्हारी कौन-सी आदत उन्हें अच्छी लगती है। सुनी हुई बातें कॉपी में लिखो।
- पिछले वर्ष किए अपने विशेष कार्य बताओ। — कोई प्रतियोगिता, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान या नई कला सीखना याद करो। कक्षा में क्रम से बताओ।
- बाल सभा में प्रतिदिन बोध कथा का वाचन करो। — पंचतंत्र या अकबर-बीरबल की कोई छोटी कथा चुनो। अंत में उसकी सीख बताओ।
- वर्ष भर के खेल-समाचारों का सचित्र संकलन प्रस्तुत करो। — समाचारपत्र से खेल समाचार और चित्र काटकर कॉपी में चिपकाओ। हर कतरन के नीचे तारीख और खेल का नाम लिखो।
पहली इकाई — एक दृष्टि में
- मेला (चित्र-पाठ) — निरीक्षण, स्वच्छता और सुरक्षा
- १. सैर (चित्र-पाठ) — आवागमन के साधन और सार्वजनिक शिष्टाचार
- २. बसंती हवा (कविता) — प्रकृति से प्रेम और दृढ़ता
- ३. उपहार (कहानी) — ईमानदारी और लक्ष्य के प्रति लगन
- ४. जोकर (भाषा-पाठ) — मुहावरे-कहावतें और सदा प्रसन्न रहना
- ५. आयु बताना / महाराष्ट्र की बेटी (कृति-पाठ) — संख्या-खेल और विविधता में एकता
- ६. मेरा अहोभाग्य (संस्मरण) — महान व्यक्तियों की सरलता और विनम्रता
- ७. नदी कंधे पर (कविता) — बाल-कल्पना और प्रकृति के प्रति आदर
- ८. जन्मदिन (कहानी) — पानी और बिजली की बचत
- ९. सोई मेरी छौना रे! (लोरी) — माँ का वात्सल्य