२. बेटी युग
आनंद विश्वास रचित कविता 'बेटी युग' का संपूर्ण स्वाध्याय, भावार्थ व शब्दार्थ। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
शेअर करेंAdvertisement
कविता का भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवि आनंद विश्वास जी ने 'बेटी युग' का महत्त्व बताया है। उनका कहना है कि अब बेटा और बेटी दोनों को समान रूप से शिक्षित होना चाहिए। जब केवल बेटा पढ़ता है, तो शिक्षा आधी रह जाती है, लेकिन जब दोनों पढ़ते हैं, तो शिक्षा पूरी होती है। शिक्षा और ज्ञान से ही देश का विकास होगा। 'बेटी युग' एक सम्मान और पुण्य का पर्व (त्योहार) है। जब हर व्यक्ति का सम्मान होगा, तभी समाज और देश की सच्ची प्रगति होगी।
स्वाध्याय
- (क) बेटी युग में बेटा-बेटी, सभी पढ़ेंगे, सभी बढ़ेंगे।
- (ख) बेटी युग सम्मान पर्व है, पुण्य पर्व है, ज्ञान पर्व है। सब सबका सम्मान करें तो, जन-जन का उत्थान पर्व है।
(च) बेटी पर्व
'बेटी पर्व' का अर्थ है बेटियों का सम्मान करना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना। यह पर्व हमें सिखाता है कि बेटियाँ भी बेटों के समान ही योग्य और प्रतिभावान होती हैं। इसलिए उन्हें भी अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
(छ) शिक्षामय विश्व
'शिक्षामय विश्व' का अर्थ है एक ऐसा समाज और दुनिया जहाँ कोई भी अनपढ़ न हो। सभी के हाथों में पुस्तक हो और ज्ञान की गंगा घर-घर पहुँचे। शिक्षा से ही लोगों का विकास होता है और समाज की बुराइयाँ दूर होती हैं।
Advertisement
भाषा की ओर
दिए गए शब्द : गाँव- , -उधर, घूमना- , धन- , -पहचान, कूड़ा- , -फूल, घर-
युग्म शब्द (Word Pairs) :
गाँव-शहर, इधर-उधर, घूमना-फिरना, धन-दौलत, जान-पहचान, कूड़ा-कचरा, फल-फूल, घर-बार
वाक्यों में उचित शब्दयुग्म का प्रयोग :
| १. अथक परिश्रम से उसने धन-दौलत कमाई। | ५. बाजार से बहुत सारे फल-फूल खरीदकर लाए। |
| २. सेहत के लिए घूमना-फिरना अच्छा होता है। | ६. बच्चों ने मैदान पर फैला कूड़ा-कचरा इकट्ठा किया। |
| ३. दीपावली में घर-घर मिठाइयाँ बनती हैं। (टिप्पणी: यहाँ 'घर-घर' उपयुक्त है।) |
७. समारोह में सभी जान-पहचान वालों को आमंत्रित किया। |
| ४. अंतरजाल की सुविधा गाँव-शहर में उपलब्ध है। | ८. बगीचे में आते ही सभी बच्चे इधर-उधर दौड़ने लगे। |
अन्य कृतियाँ
| किस पर | क्या प्रभाव पड़ता है? |
|---|---|
| १. स्वयं (स्त्री) | स्त्री शिक्षित होने से आत्मनिर्भर बनती है। उसमें आत्मविश्वास आता है और वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है। |
| २. परिवार | एक शिक्षित स्त्री अपने पूरे परिवार को शिक्षित करती है। वह बच्चों का सही मार्गदर्शन करती है और परिवार की आर्थिक उन्नति में भी सहयोग देती है। |
| ३. समाज | स्त्री शिक्षा से समाज में फैली कुप्रथाएँ और अंधविश्वास दूर होते हैं। समाज की सोच बदलती है और महिलाओं को सम्मान मिलता है। |
| ४. देश | जब स्त्रियाँ शिक्षित होकर विभिन्न क्षेत्रों में काम करती हैं, तो देश की प्रगति दोगुनी गति से होती है और देश खुशहाल बनता है। |
यदि मुझे रास्ते में रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए, तो मैं सबसे पहले यह देखूँगा कि आसपास कोई उसे ढूँढ़ तो नहीं रहा है। उसके बाद मैं बटुए के अंदर कोई आईडी कार्ड (ID Card) या संपर्क नंबर ढूँढ़ने की कोशिश करूँगा। यदि मुझे उस व्यक्ति की जानकारी मिल जाती है, तो मैं उसे फोन करके सुरक्षित रूप से उसका बटुआ लौटा दूँगा।
यदि बटुए में कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो मैं उस बटुए को पास के पुलिस स्टेशन में जमा कर दूँगा, ताकि पुलिस उसे उसके असली मालिक तक पहुँचा सके। किसी दूसरे का पैसा अपने पास रखना गलत बात है, इसलिए मैं ईमानदारी का पालन करूँगा।