६. चंदा मामा की जय
मंगल सक्सेना रचित एकांकी 'चंदा मामा की जय' का संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर और व्याकरण।
शेअर करेंAdvertisement
मैंने समझा : इस एकांकी (Play) के माध्यम से लेखक मंगल सक्सेना जी ने यह संदेश दिया है कि बच्चों को बुरी आदतें छोड़कर अच्छी आदतें अपनानी चाहिए। रातरानी रोने वाले और शरारत करने वाले बच्चों को सजा देना चाहती है, लेकिन चंदा मामा आकर बताते हैं कि इन बच्चों में कई अच्छी आदतें भी हैं, जैसे- ये बड़ों का आदर करते हैं, छोटों से प्यार करते हैं और आपस में नहीं झगड़ते। चंदा मामा कहते हैं कि किसी की बुराई के साथ उसकी अच्छाई भी देखनी चाहिए। अंत में बच्चे अपनी बुरी आदतें छोड़ने की प्रतिज्ञा करते हैं और उन्हें क्षमा कर दिया जाता है।
स्वाध्याय (पाठ के आधार पर)
(क) "हम तुम्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे।"
किसने : रातरानी ने।
किससे : सुनील से।
क्यों : क्योंकि सुनील ने रातरानी को "कहती हैं" की जगह "कहती है" कहकर उनका मजाक उड़ाया था, और वह बड़ों का कहना भी नहीं मानता था।
(ख) "सबको क्षमा किया जाता है।"
किसने : रातरानी ने।
किससे : दरबार में उपस्थित सभी बच्चों से।
क्यों : क्योंकि चंदा मामा के समझाने पर बच्चों ने यह प्रतिज्ञा की थी कि वे अपनी सभी छोटी-बड़ी बुरी आदतें छोड़ देंगे।
यह एक बाल एकांकी है जिसका दृश्य बादलों के देश का है। अर्धरात्रि के समय रातरानी की अदालत लगी है, जहाँ नींदपरी रोने वाले और शरारत करने वाले बच्चों (जैसे अनिल और सुनील) को पेश करती है। रातरानी बच्चों को उनकी बुरी आदतों और बड़ों का आदर न करने के कारण कड़ी सजा देना चाहती है। अनिल और बाकी बच्चे डरकर जोर-जोर से रोने लगते हैं।
तभी चंदा मामा अदालत में आते हैं। वे रातरानी को समझाते हैं कि इन बच्चों में सिर्फ बुराइयाँ ही नहीं, बल्कि कई अच्छाइयाँ भी हैं। ये बच्चे बड़ों का आदर करते हैं, छोटों से प्यार करते हैं और आपस में नहीं लड़ते। यदि किसी में बुराइयों से अधिक अच्छाइयाँ हों, तो उसे क्षमा कर देना चाहिए। यह सुनकर बच्चे अपनी सभी बुरी आदतें छोड़ने की प्रतिज्ञा करते हैं। रातरानी प्रसन्न होकर सबको क्षमा कर देती है और बच्चे खुशी से 'चंदा मामा की जय' बोलते हैं।
इस एकांकी में मेरा पसंदीदा पात्र 'चंदा मामा' हैं। चंदा मामा बहुत ही समझदार, दयालु और न्यायप्रिय हैं। जब रातरानी गुस्से में बच्चों को कड़ी सजा देने वाली होती है, तब चंदा मामा सही समय पर आकर बच्चों का बचाव करते हैं। वे रातरानी को समझाते हैं कि बच्चों की सिर्फ बुराइयाँ ही नहीं, उनकी अच्छाइयाँ भी देखनी चाहिए। चंदा मामा के समझाने के तरीके से बच्चे भी अपनी गलती मान लेते हैं और बुरी आदतें छोड़ने का वादा करते हैं। उनका यह प्रेमपूर्ण व्यवहार मुझे बहुत अच्छा लगा।
पाठ के आधार पर और जीवन में आवश्यक नैतिक मूल्य निम्नलिखित हैं :
- १. बड़ों का आदर और सम्मान करना।
- २. छोटों से प्यार करना।
- ३. शांति-प्रियता (आपस में झगड़ा न करना)।
- ४. अपनी गलतियों को मानना और बुरी आदतें छोड़ना।
- ५. किसी की बुराई के साथ-साथ उसकी अच्छाइयों को भी देखना।
- ६. सच बोलना और ईमानदारी से व्यवहार करना।
Advertisement
भाषा की ओर (व्याकरण)
१. समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction)
जो शब्द दो स्वतंत्र वाक्यों या शब्दों को जोड़ते हैं, वे समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। पाठ्यपुस्तक के वाक्यों में आए मोटे अक्षर वाले शब्द :
१. सर्वेश ने परिश्रम किया और इस परिश्रम ने उसे सफल बना दिया।
२. मैं कर्ज में डूबा था परंतु मुझे असंतोष न था।
३. प्रगति पत्र पर माता जी अथवा पिता जी के हस्ताक्षर लेकर आओ।
४. मैं लगातार चलता तो मंजिल पा लेता।
५. मुझे सौ-सौ के नोट देने पड़े क्योंकि दुकानदार के पास दो हजार के नोट के छुट्टे नहीं थे।
२. विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection)
जिन शब्दों से खुशी, आश्चर्य, दुख, घृणा, प्रशंसा आदि भाव प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। पाठ्यपुस्तक के वाक्यों में आए शब्द :
१. वाह! क्या रंग-बिरंगी छटा है। (खुशी/प्रशंसा)
२. अरे! हम कहाँ आ गए? (आश्चर्य)
३. अरे रे! पेड़ गिर पड़ा। (दुख)
४. छिः! तुम झूठ बोलते हो। (घृणा)
५. शाबाश! इसी तरह साफ-सुथरा आया करो। (प्रशंसा)
अन्य कृतियाँ
| ग्रह का नाम (क्रम से) | सूर्य की परिक्रमा का समय (Revolution Period) | उपग्रहों (Moons) की संख्या |
|---|---|---|
| १. बुध (Mercury) | लगभग ८८ दिन | ० (शून्य) |
| २. शुक्र (Venus) | लगभग २२५ दिन | ० (शून्य) |
| ३. पृथ्वी (Earth) | ३६५ दिन (१ वर्ष) | १ (चन्द्रमा) |
| ४. मंगल (Mars) | लगभग ६८७ दिन | २ |
| ५. बृहस्पति (Jupiter) | लगभग १२ वर्ष | ९५ (ज्ञात) |
| ६. शनि (Saturn) | लगभग २९.५ वर्ष | १४६ (ज्ञात) |
| ७. अरुण (Uranus) | लगभग ८४ वर्ष | २८ |
| ८. वरुण (Neptune) | लगभग १६५ वर्ष | १६ |
नोट : उपग्रहों की संख्या नई खगोलीय खोजों के अनुसार बदलती रहती है। बृहस्पति और शनि के अनेक नए उपग्रह खोजे गए हैं।
माँ और सब्जीवाली के बीच संवाद :
सब्जीवाली : आइए बहन जी! आज एकदम ताजी हरी सब्जियाँ लाई हूँ। बोलिए, क्या दूँ?
माँ : मटर कैसे दिए हैं? दाने तो अच्छे हैं न?
सब्जीवाली : हाँ बहन जी, एकदम मीठी मटर है। साठ रुपये किलो लगा दूँगी।
माँ : साठ रुपये तो बहुत महँगे हैं! पचास रुपये किलो लगाओ, तो एक किलो दे दो।
सब्जीवाली : (मुस्कुराते हुए) ठीक है, आप हमेशा मेरे ही पास आती हैं, इसलिए दे देती हूँ। और क्या दूँ?
माँ : आधा किलो टमाटर और थोड़ी-सी धनिया-मिर्च भी डाल देना।
सब्जीवाली : यह लीजिए आपकी सब्जी। कुल सत्तर रुपये हुए।
माँ : (पैसे देते हुए) यह लो पैसे। सब्जी अच्छी निकली तो कल भी यहीं से लूँगी।
सब्जीवाली : जरूर बहन जी! आपका दिन शुभ हो!
यदि मेरा घर मंगल ग्रह (Mars) पर होता, तो मुझे हमेशा एक विशेष 'स्पेस सूट' पहनकर घर से बाहर निकलना पड़ता, क्योंकि वहाँ साँस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं है। मंगल ग्रह की मिट्टी लाल रंग की है, इसलिए वहाँ सब कुछ लाल दिखाई देता। गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण मैं धरती की तुलना में बहुत ऊँचा उछल सकता था। वहाँ कोई पेड़-पौधे और नदियाँ नहीं हैं, इसलिए मैं पृथ्वी की हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट को बहुत याद करता।