७. रहस्य
डॉ. हरिकृष्ण देवसरे रचित कहानी 'रहस्य' का संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर, संवाद और व्याकरण (कारक)।
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मैंने समझा : इस कहानी के माध्यम से लेखक डॉ. हरिकृष्ण देवसरे जी ने यह संदेश दिया है कि भूत-प्रेत जैसी कोई चीज़ नहीं होती, यह केवल कपोल कल्पना (अंधविश्वास) है। आर्यन और कनिष्का ने अपनी बहादुरी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हवेली के 'भूतों' का पर्दाफाश किया, जो असल में खतरनाक डाकू थे। हमें अंधविश्वासों से दूर रहकर हर घटना के पीछे का सच और वैज्ञानिक कारण ढूँढ़ना चाहिए।
स्वाध्याय (पाठ के आधार पर)
| (अ) गट | (ब) गट (सही उत्तर) |
|---|---|
| (क) फोटो की दुकान | नारायणपुर |
| (ख) भूत-वूत | कपोल कल्पना |
| (ग) हवेली | कहकहों की आवाज |
हवेली मामा जी के घर से कुछ दूरी पर स्थित थी। वह एक पुरानी और सूनी हवेली थी, जिसमें पिछले पंद्रह सालों से कोई नहीं रहता था। लोगों में यह अफवाह थी कि वह हवेली भूतों का डेरा है। आधी रात के बाद हवेली में उजाला दिखाई देता था और अंदर से हँसी व कहकहों की आवाजें आती थीं।
जब आर्यन और कनिष्का ने हवेली के अंदर झाँककर देखा, तो बीचोबीच एक बड़े कमरे में हट्टे-कट्टे, मोटे-तगड़े और बड़ी-बड़ी मूँछों वाले लोग पगड़ी बाँधे बैठे थे। उनकी आँखें लाल-लाल और चेहरे डरावने थे। उनके गले में कारतूसों की पेटी लटक रही थी और बंदूकें तथा तलवारें भी रखी हुई थीं। कुछ लोग रोटियाँ और हड्डी चबा रहे थे और कुछ लुढ़के हुए पड़े थे।
आर्यन और कनिष्का ने अफवाहों और अंधविश्वास से डरे बिना आधी रात को हवेली में जाने का साहस दिखाया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना हवेली में भूतों के रूप में छिपे हुए खतरनाक डाकुओं के फोटो कैमरे में कैद कर लिए। उन्होंने ये फोटो पुलिस को दिए और डाकुओं का ठिकाना भी बताया। उनकी इसी बहादुरी और सूझबूझ के कारण पुलिस उस खूँखार गिरोह को पकड़ पाई और गाँव वाले डाकुओं के आतंक से मुक्त हुए। इसीलिए आर्यन और कनिष्का को 'वीरता पुरस्कार' से सम्मानित करने की घोषणा की गई।
थानेदार और आर्यन के बीच संवाद (हवेली का सच बताने के समय) :
आर्यन :(थानेदार को फोटो दिखाते हुए) सर, यह देखिए! क्या भूत इंसानों जैसे होते हैं?
थानेदार :(हैरानी से फोटो देखते हुए) अरे बाप रे! ये भूत नहीं, ये तो खूँखार डाकुओं का गिरोह है।
कनिष्का :हाँ सर, ये हवेली में भूतों के भेष में छिपे हुए हैं। इन्होंने ही गाँव में भूत होने की अफवाह फैलाई है।
थानेदार :इन डाकुओं ने कई वर्षों से बहुत उत्पात मचा रखा है। डकैती और राहजनी इनका पेशा है। पुलिस बहुत दिनों से इनकी तलाश कर रही है।
आर्यन :मुझे पहले से ही यह मामला बहुत गड़बड़ लग रहा था।
थानेदार :शाबाश! तुम दोनों ने बहुत ही बहादुरी का काम किया है। जल्दी बताओ, कहाँ हैं ये?
आर्यन :आप पुलिस की टीम तैयार कीजिए, ठिकाना मैं बताता हूँ।
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भाषा की ओर (कारक - Case)
हिंदी व्याकरण में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों (विशेषकर क्रिया) से जाना जाता है, उसे कारक (Case) कहते हैं। हिंदी में कुल ८ कारक होते हैं। दिए गए चित्र के आधार पर वाक्य निम्नलिखित हैं :
| क्र. | कारक का नाम | विभक्ति चिह्न (परसर्ग) | चित्र पर आधारित वाक्य |
|---|---|---|---|
| १. | कर्ता कारक | ने / शून्य | मछुआरे ने जाल फेंका। |
| २. | कर्म कारक | को / शून्य | लड़की मछलियों को दाना खिला रही है। |
| ३. | करण कारक | से / के द्वारा | आदमी रस्सी से नारियल के पेड़ पर चढ़ रहा है। |
| ४. | संप्रदान कारक | के लिए / को | औरत नारियल रखने के लिए टोकरी लाई है। |
| ५. | अपादान कारक | से (अलग होना) | पेड़ से नारियल नीचे गिर रहे हैं। |
| ६. | संबंध कारक | का / की / के / रा / री | नारियल के पेड़ बहुत ऊँचे हैं। |
| ७. | अधिकरण कारक | में / पर | नदी में मछलियाँ तैर रही हैं। (या) नाव पानी पर तैर रही है। |
| ८. | संबोधन कारक | हे! / अरे! | अरे! मछुआरे ने कितनी सारी मछलियाँ पकड़ी हैं। |
अन्य कृतियाँ
| हिंदी कहावत / मुहावरा | मराठी समानार्थी कहावत / वाक्प्रचार |
|---|---|
| अधजल गगरी छलकत जाए। | उथळ पाण्याला खळखळाट फार। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा। | नाचता येईना अंगण वाकडे। |
| एक पंथ दो काज। | एका दगडात दोन पक्षी। |
| जैसी करनी वैसी भरनी। | करावे तसे भरावे। |
| दूर के ढोल सुहावने। | लांबून डोंगर साजरे। |
| जिसकी लाठी उसकी भैंस। | बळी तो कान पिळी। |
| ऊँट के मुँह में जीरा। | तहानलेल्याला पाण्याचा थेंब। (किंवा) हत्तीच्या दाढेत जिरे। |
- घर में : जब मेरी दादी ने बिल्ली के रास्ता काटने पर गाड़ी रोकने को कहा, तो मैंने उन्हें प्यार से समझाया कि यह केवल एक अंधविश्वास है, बिल्ली का रास्ता काटने से कोई काम नहीं बिगड़ता।
- विद्यालय में : मैंने अपने मित्रों को समझाया कि परीक्षा में अच्छे अंक नींबू-मिर्ची टाँगने से नहीं, बल्कि मेहनत और पढ़ाई करने से आते हैं।
- परिवेश (आसपास) में : हमारे मोहल्ले में ग्रहण के समय लोग बाहर नहीं निकल रहे थे। मैंने विज्ञान की पुस्तक से उन्हें सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक कारण समझाया।