७. जहाँ चाह, वहाँ राह
अनुराधा मोहिनी रचित पाठ 'जहाँ चाह, वहाँ राह' का संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर और व्याकरण।
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मैंने समझा : इस कहानी के माध्यम से लेखिका अनुराधा मोहिनी जी ने यह संदेश दिया है कि दृढ़ संकल्पशक्ति, सकारात्मक विचार और संगठित प्रयास (एकता) से किसी भी असंभव कार्य को संभव किया जा सकता है। येसंबा गाँव के विद्यार्थियों ने बारिश के कारण अपनी पढ़ाई का नुकसान रोकने के लिए स्वयं विचार किया, पैसे इकट्ठे किए और गाँव वालों के साथ मिलकर नाले पर पुल बना दिया। इससे यह सिद्ध होता है कि 'जहाँ चाह होती है, वहाँ राह (रास्ता) स्वयं निकल आती है'।
स्वाध्याय (पाठ के आधार पर)
- (क) "आज इतने विद्यार्थियों के अनुपस्थित रहने का कारण क्या है ?"
→ गुरु जी ने विद्यार्थियों से कहा। - (ख) "जब कभी शहर गए हैं, बड़े-बड़े पुल देखे भी हैं।"
→ आशीष ने अपने मित्रों से कहा।
पाठ का शीर्षक 'जहाँ चाह, वहाँ राह' एकदम सार्थक और सटीक है। येसंबा गाँव के बच्चों को बरसात के दिनों में नाला पार करके पाठशाला जाने में भारी समस्या होती थी। परंतु बच्चों के मन में पढ़ने की प्रबल इच्छा (चाह) थी। अपनी इस इच्छा के कारण उन्होंने केवल समस्या का रोना नहीं रोया, बल्कि समस्या के हल (राह) के बारे में सोचा। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और एकता के कारण गाँव वालों की मदद से नाले पर पुल बन गया और असंभव काम भी संभव हो गया। इसलिए यह शीर्षक बिलकुल उचित है।
पिछले महीने मैं अपने माता-पिता के साथ कार से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से जा रहा था। अचानक हमारे आगे चल रही एक बस का टायर फट गया और बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई।
हादसा इतना भयंकर था कि बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। अंदर बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। मेरे पिताजी ने तुरंत कार रोकी। आसपास की कुछ और गाड़ियाँ भी रुकीं। सबने मिलकर बस के दरवाजे और खिड़कियाँ तोड़कर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। कुछ युवाओं ने घायलों को पानी पिलाया और तुरंत एंबुलेंस तथा पुलिस को फोन किया। केवल १५-२० मिनट में बचाव दल वहाँ पहुँच गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित अस्पताल पहुँचा दिया गया। संकट के समय लोगों की यह निस्वार्थ सहायता और इंसानियत देखकर मुझे बहुत प्रेरणा मिली।
शिक्षक संकेत : विद्यार्थी अपनी किसी भी देखी हुई घटना (जैसे- कोई दुर्घटना, बाढ़, आग लगना, कोई उत्सव या खेल-कूद का रोमांचक मैच) का वर्णन अपने शब्दों में कर सकते हैं।
येसंबा गाँव के बीच से एक नाला बहता था, जिसके एक तरफ गाँव की बस्ती थी और दूसरी तरफ पाठशाला तथा खेत थे। बरसात में नाले में बहुत पानी भर जाता था, जिससे विद्यार्थी पाठशाला नहीं जा पाते थे और उनकी पढ़ाई का नुकसान होता था। एक दिन भारी बारिश के कारण अनुपस्थित रहने पर बच्चे चौपाल में बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर इस समस्या पर चर्चा कर रहे थे।
तभी आशीष ने सुझाव दिया कि वे नाले पर पुल बनाएँगे। दामिनी ने भी आत्मविश्वास बढ़ाते हुए कहा कि हर समस्या का हल होता है। विद्यार्थियों ने छोटे-छोटे समूह बनाकर काम शुरू किया, अपनी जेब खर्च से बीस-बीस रुपये जमा किए और सामग्री की सूची बनाई। उनका उत्साह देखकर शिक्षक और गाँव के बड़े-बुजुर्ग भी सहायता के लिए आगे आए। सबके सामूहिक श्रमदान और एकता से केवल पंद्रह दिनों में पुल बनकर तैयार हो गया। इस प्रकार बच्चों ने साबित कर दिया कि जहाँ चाह होती है, वहाँ राह निकल ही आती है।
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भाषा की ओर (व्याकरण)
| वाक्य | उद्देश्य (Subject) | विधेय (Predicate) |
|---|---|---|
| १. हिमालय देश का गौरव है। | हिमालय | देश का गौरव है। |
| २. महासागर अपने देश के चरण पखारता है। | महासागर | अपने देश के चरण पखारता है। |
| ३. निखिल कश्मीर घूमने गया था। | निखिल | कश्मीर घूमने गया था। |
| ४. मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। | मुंबई | देश की आर्थिक राजधानी है। |
| ५. परिश्रम सफलता की कुंजी है। | परिश्रम | सफलता की कुंजी है। |
व्याकरण नियम : वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा या बताया जाता है, वह 'उद्देश्य' (Subject) होता है। उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाता है, वह 'विधेय' (Predicate) कहलाता है।
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